कान छिदवाने के बाद कैसे करें उसकी देखभाल

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छिदवाने के बाद देखभाल के अभाव में संक्रमण फैलने का खतरा बहुत ज्‍यादा बढ़ जाता है। और कानों के छेद के पक जाने पर तो इसे लंबे समय तक ठीक नहीं किया जा सकता। इसलिए कान छिदवाने के बाद उसकी देखभाल कैसे के उपायों के बारे में जानकारी होनी चाहिए। Tips For Ear Piercing

भारत में लड़की जैसे ही थोड़ी सी बड़ी होती है, उसके कान छिदवाने पड़ते हैं। आज कल तो कान छिदवाने का मानो जैसे फैशन सा ही बन गया हो। लड़कियां क्‍या आज कल तो लड़के भी कान छिदवाने लग गए हैं। कई लड़कियां कान पर एक नहीं बल्‍कि 2 से 3 छेद करवाती हैं। इससे पहले की आप कानों में गोल्‍ड या फैंसी इयररिंग पहने, उससे पहले यह जरुरी है कि कानों के छेद को ठीक कर लिया जाए। खूबसूरती बढ़ाने के लिए शरीर छिदवाने का शौक कहीं महंगा न पड़ जाए अगर छिदवाए गए कानों की ठीक से देखभाल नहीं की गई तो कानों में संक्रमण फैलने का खतरा ज्‍यादा बढ़ जाता है। कान अगर पक गए तो लंबे समय तक ठीक नहीं होते। आइये जानते हैं कि कान छिदवाने के बाद उसकी देखभाल कैसे की जा सकती है।

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कान छिदवाने के बाद देखभाल

आजकल कान छिदवाना एक फैशन बन गया है। लड़कियां क्‍या अब लड़के भी कान छिदवाने लग गये हैं। लेकिन कहीं खूबसूरती बढ़ाने के लिए शरीर छिदवाने का शौक आपको महंगा न पड़ जाये, क्‍योंकि छिदवाने के बाद देखभाल के अभाव में संक्रमण फैलने का खतरा बहुत ज्‍यादा बढ़ जाता है। और कानों के छेद के पक जाने पर तो इसे लंबे समय तक ठीक नहीं किया जा सकता। इसलिए इससे पहले की अपने कानों छेद कराने के बाद आप उसमें फैंसी इयररिंग पहनें, आइए जानें कि कान छिदवाने के बाद उसकी देखभाल कैसे की जा सकती है।

Tips For Ear Piercing

बार-बार छूने से बचें

कान छिदवाने के बाद अगर आपने कान में कुछ पहना है जैसे टॉप्‍स या बाली तो उसे बार बार छूना, उससे खेलना या उसे खींचना नहीं चाहिये। इससे आपका कान में खिंचाव आ सकता है। अपने कानों को बार बार हाथों से ना छुएं। केवल जब कानों को साफ करना हो तभी उसको हाथ लगाएं नहीं तो संक्रमण फैलने का डर रहता है।

भारी ज्‍वैलरी पहनने से बचें

जब तक कान के छेद पूरी तरह से ठीक ना हो जाएं तब तक कानों में बहुत बड़े टॉप्‍स या बड़ी बाली जैसी भारी ज्‍वैलरी पहनने से बचें। क्योंकि इससे उसमें खिंचाव आ सकता है या वे कपड़ों में फंस सकता हैं। इससे आपको चोट भी लग सकती हैं।

एंटीबैक्‍टीरियल प्रोडक्‍ट लगाये

अपने कानों के छेद को दिन में दो बार धोएं। कानों के नए छेद को हमेशा गीला रखें। और इसमें एंटीबैक्‍टीरियल प्रोडक्‍ट लगाएं। या आप इसपर लगाने के लिए घरेलू उपायों को भी अपना सकती हैं। इसके लिए आप एक चम्‍मच तेल में थोड़ी सी हल्‍दी मिलाकर हल्‍का गर्म करके कानों पर लगा सकते हैं। हल्‍दी में एंटीबैक्‍टीरियल तत्‍व होने के कारण यह संक्रमण से बचाती है और किसी भी तरह के घाव को जल्‍दी भरती है।

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छूने से पहले हाथों को धोये

अपने कानों को छूने से पहले हमेशा हाथों को धोएं। कुछ दिनों तक हर कुछ देर में कानों की बॉली को कानों में घुमाएं ताकि त्वचा मुक्त रहें। साथ ही ऐसा करने से छिदी हुये स्‍थान के चारों ओर मैल जमने की भी रोकथाम होती है।

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स्‍विमिंग न करें

अगर आपको स्‍विमिंग करने का शौक हैं तो कुछ दिनों तक इस शौक से दूर रहें। कान छिदवाने के 6 हफ्तों के बाद ही स्‍विमिंग करें। क्‍योंकि स्विमिंग करने से पूल का पानी आपके छेद वाले स्‍थान पर लगने से संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है।

कुछ दिनों तक बॉली को नहीं बदले

पहले कुछ महीनों में कानों की बॉली को नही बदलना चाहिए, क्योंकि बाली अभी भी स्वास्थ्य लाभ कर रही होती है। और अलग-अलग धातुओं को डालने से संक्रमण या एलर्जी के कारण स्वास्थ्य लाभ में देरी हो सकती है।

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नहाते समय ए‍हतियात बरतें

नहाते या कपड़े बदलते समय विशेष एहतियातें बरतें। कहीं कान का पिछला भाग उसके कपड़े या तौलिये में न फंस जाये। साथ ही इस जगह को सूखा और साफ रखें। इसके अलावा इस बात को भी सुनिश्चित करें कि आपकी चादर, तकिया और कंबल साफ-सुथरा है और उसको अक्सर बदला जाता रहे ताकी छिदे हुए कान तक रोगाणुओं के पहुंचने की हर संभावना को कम किया जा सके।

संक्रमण के संकेतों पर नजर रखें

कान की बाली त्वचा से चिपक गई है, या सूजन, लालिमा, बुखार, छिदी हुई जगह से बदबूदार द्रव या मवाद का निकलना और त्वचा पर कोई ददोरा होने पर अगर आपको संक्रमण का संदेह हो रहा है तो तुरंत अपने डाक्टर से संपर्क करें।

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