घर पर खमीर (Yeast) बनाने की विधि, यीस्ट के प्रकार और टेस्ट

यीस्ट (Yeast) को हिंदी में खमीर कहते है। मैदा के आटे में यीस्ट मिलाकर रखने से फर्मेंटेशन होता है और आटा फूल जाता है। यीस्ट या खमीर की यह प्रक्रिया खाने को स्वादिष्ट , लजीज और फायदेमंद बनाती है। Homemade Yeast Recipe

इडली , डोसा या दाल का ढ़ोकला बनाने के लिए घोल में दही मिलाकर कुछ घंटे रखा जाता है जिससे घोल में खमीर उठता है। यह यीस्ट बनने के कारण ही होता है। इसे बोरा उठना भी कहते हैं । इसी प्रकार जलेबी बनाने की प्रक्रिया में मैदा के घोल में खमीर उठाया जाता है फिर जलेबी बनाई जाती है।

खमीर उठाने के लिये ताजा खमीर या सूखा खमीर उपयोग करते है. यदि ताजा खमीर ,सूखा खमीर नहीं हो तो आप घर में किचन की सामग्रियों से ताजा खमीर बना सकती हैं. भारत में परम्परगत रूप से इन्ही सामग्रियों से खमीर बनाया जाता रहा है. खमीर का इस्तेमाल हम शीरमाल, खमीरी रोटी, जलेबी आदि में बहुत पहले से करते आ रहे है. पहले खमीर जौ के दानों को भिगो कर अंकुरित करके बनाई जाती थी. खमीर से बना खाने का टेस्ट और खुश्बू सामान्य खाने से बहतर होती है. भटूरे या ब्रेड बनाने के लिए यीस्ट यानी खमीर की जरूरत होती है. इसके इस्तेमाल से ब्रेड या भटूरे में आसानी से फूलापन आ जाता है. आइए जानते हैं खमीर बनाने की विधि .

आवश्यक सामग्री :

  • मैदा (All purpose flour) – एक कप
  • दही ( Curd ) – 2 टेबल स्पून
  • चीनी (Sugar) – 2 टेबल स्पून
  • शहद (Honey) – 1 टेबल स्पून

बनाने की विधि :

  • एक कप पानी गुनगुना गर्म करके इसमें शक्कर और शहद मिला दें।
  • एक काँच या प्लास्टिक के कंटेनर में मैदा लें।
  • इसमें ऊपर तैयार किया हुआ पानी मिलाकर घोल बना लें।
  • अब इसमें दही मिलाकर मिक्स कर दें।
  • इसे ढ़ककर किसी गर्म जगह जैसे फ्रिज के ऊपर या ओवन के अंदर रख दें। जिस प्रकार जमने के लिए दही रखा जाता है। लगभग 18 से 20 घंटे बाद इसमें बुलबुले दिखाई देंगे। इसका अर्थ है कि Yeast बनकर तैयार है।
  • एक कप आटा गूंथकर फर्मेंट करने के लिए इस यीस्ट में से तीन चम्मच लेकर आटे में मिला दें।

घर पर यीस्ट बनाने के टिप्स –

  • -इसे बनने के लिए 26 से 33 डिग्री सेल्सियस का तापमान अनुकूल होता है।
  • -पानी बहुत ज्यादा गर्म नहीं होना चाहिए।
  • -सर्दी के मौसम में धूप में रखें। गर्मी के मौसम में घर में कही भी रख दें।
  • -Yeast बनने के बाद फ्रिज में रखकर तीन चार दिन तक काम में लिया जा सकता है , इसके बाद ख़राब हो सकता है अतः काम ना लें।
  • -यदि आप बाजार से Yeast खरीद रहे हैं तो अच्छी गुणवत्ता का यीस्ट ही खरीदें जहाँ यह सही तरीके से रखा गया हो। आप भी घर लाने के बाद यीस्ट को सही तरीके से रखें अन्यथा यीस्ट मिलाकर बड़ी मेहनत से बनाई गई डिश ख़राब हो सकती है। ऐसे में समझ नहीं आता कहाँ त्रुटि रह गई , जबकि कारण Yeast होता है।

यीस्ट टेस्ट करने का तरीका –

कई बार बाजार से लाया हुआ dry Yeast एक्टिव नहीं होता या घर में पुराना रखा हुआ ड्राई यीस्ट ख़राब हो चुका होता है। ऐसे में यह सही काम नहीं कर पाता। प्रूफिंग Proofing टेस्ट करके मालूम किया जा सकता है कि यीस्ट ठीक है या नहीं।

प्रूफिंग टेस्ट –

Yeast को टेस्ट करने का तरीका इस प्रकार है –

  • -एक कांच के प्याले में एक चम्मच dry Yeast डालें। इसमें एक कप गुनगुना पानी डालकर इसे चम्मच से हिला दें। 15 मिनट बाद देखें।
  • -यदि घोल के ऊपर झाग बने हुए नजर आयें तो इसका अर्थ है कि Yeast अच्छा है। इसे बेझिझक काम लिया जा सकता है।
  • -यदि घोल पर झाग नहीं बनते हैं तो Yeast ख़राब हो चुका है। इसे काम नहीं लेना चाहिए।

यीस्ट कितने प्रकार के –

बाजार में Frest Yeast , Active Dry Yeast तथा इंस्टेंट एक्टिव ड्राई यीस्ट Instant Active Dry Yeast उपलब्ध हैं। आइये जानते हैं इनमे क्या फर्क है और कौनसा Yeast काम में लेना चाहिए –

ड्राई यीस्ट –

अधिकतर आपको बाजार में ड्राई Yeast का पैकेट मिलता है जिसमे पीली सरसों जैसे दाने होते हैं। इसे एक्टिवेट करना पड़ता है। ड्राई यीस्ट को एक्टिवेट करने की विधि इस प्रकार है –

ड्राई यीस्ट को एक्टिव करने का तरीका

  • एक कप गुनगना पानी लें इसमें एक छोटा चम्मच शक्कर मिला दें। अब इसमें dry Yeast मिलाकर अच्छे से हिला दें। दस मिनट के लिए इसे ढ़ककर रख दें। फ़्रिज मे ना रखें।
  • दस मिनट बाद आप देखेंगे की उसमे झाग से बन जाते हैं। इसका मतलब है कि Yeast को काम लिया जा सकता है। इस यीस्ट से कभी कभी अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाते। यदि ऐसा हो तो इंस्टेंट या फ्रेश Yeast काम में लेना चाहिए।

इंस्टेंट एक्टिव ड्राई यीस्ट –

इसे एक्टिव करने के जरुरत नहीं पड़ती। उसे सीधा ही आटे में मिलाया जा सकता है। यह बारीक़ सफ़ेद खसखस के दाने जैसा होता है।

इंस्टेंट एक्टिव ड्राई Yeast की मात्रा अपेक्षाकृत कम लगती है क्योकि यह अधिक कंसंट्रेट होता है। इसके परिणाम अपेक्षाकृत अच्छे होते हैं। इसे पैकेट खोलने के बाद फ्रिज में रखना चाहिए। यह फ्रिज में कुछ महीनो तक रखा जा सकता है।

फ्रेश यीस्ट –

यह ताजा बना हुआ Yeast होता है। बाजार में अधिकतर बेकरी वाले इसी तरह का Yeast काम में लेते हैं। इसके परिणाम भी अच्छे होते हैं लेकिन इसके जल्दी ख़राब होने की संभावना होती है। इसे तीन चार दिन में काम ले लेना चाहिये। फ्रेश Yeast घर पर भी बनाया जा सकता है।

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Lovely

Content Writer in Aakrati.in

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