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इस सर्दियां गाजर नहीं ट्राई करें मटर का हलवा, ये है आसान विधि

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Hare Matar ka Halwa Recipe in hindi
Hare Matar ka Halwa Recipe in hindi

Hare Matar ka Halwa Recipe in hindi : आज मैं आपको बताने वाली हूँ की मटर का हलवा कैसे बनाया जाता है और इसे बनाना कितना आसान है. मटर के हलवे को आप अपने बच्चे या बूढ़े को भी दे सकते है | ये सबके लिए बहुत ही फायदेमंद डिश है | आप सभी ने आमतौर पर सूजी, आटा, बेसन, गाजर आदि का हलवा खूब खाया होगा। मगर क्या आपने कभी इसका हलका चखा है।

जी हां, आप मटर से सब्जी, पुलाव व अन्य चीजों के साथ हलवा भी बनाकर खा सकते हैं। ऐसे में आज हम आपके लिए खास मटर के हलवा की रेसिपी लेकर आए हैं। इसे आप सर्दियों में कभी भी शुगर क्रेविंग होने पर खा सकते हैं। चलिए जानते हैं इस बनाने का तरीका…

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आवश्यक सामग्री :

  • हरी मटर- 1 कप
  • खोया- 2 बड़े चम्मच
  • चीनी- 1/2 कप
  • सूखे मेवे- 1 छोटी कटोरी (कटे हुए)
  • इलायची पाउडर-1/2 छोटा चम्मच
  • देसी घी- 4 बड़े चम्मच
  • बादाम- गार्निश के लिए (कटे हुए)
Hare Matar ka Halwa Recipe
Hare Matar ka Halwa Recipe

बनाने की वि​धि :

  • सबसे पहले मटर को हल्का स्टीम करके उसका मोटा पेस्ट बनाएं।
  • पैन में घी गर्म करके काजू, बादाम हल्का भूनकर अलग निकाल लें।
  • अब पैन में मटर का पेस्ट डालकर पकाएं।
  • मटर का रंग हल्का होने पर इसमें चीनी मिलाएं।
  • चीनी घुलने पर इसमें खोया और इलायची पाउडर डालकर अच्छे से मिलाएं।
  • मिश्रण के अच्छे से मिक्स होने पर इसमें ड्राई फ्रूट्स डालकर 2-3 मिनट तक लगातार चलाते हुए पकाएं।
  • लीजिए आपका मटर का हलवा बनकर तैयार है।
  • इसे सर्विंग डिश में निकालकर बादाम से गार्निश करके गर्मागर्म सर्व करें।

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इस राज्य ने घोषित की स्कूलों में तीन महीने की छुट्टियां, बच्चों में ख़ुशी की लहर

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Govt announces winter vacations
Govt announces winter vacations

Govt announces winter vacations : जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार को कश्मीर और जम्मू के वींटर जोन्स के स्कूलों के लिए शीतकालीन अवकाश (Winter Vacations) की घोषणा कर दी है. कक्षा 1 से 12वीं तक के स्कूलों में दिसंबर 2022 से फरवरी 2023 तक लगभग तीन महीने की छुट्टियां रहेंगी. प्रशासन ने छोटे और बड़े बच्चों के लिए छुट्टियों का अलग-अलग शेड्यूल जारी किया है.

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जम्मू और कश्मीर में बढ़ती ठंड को देखते हुए स्कूलों में सर्दियों की छुट्टियां घोषित की हैं. पिछले कुछ दिनों में हुई बारिश और बर्फबारी के बाद मौसम ने करवट ली जिसके चलते ठंड बढ़ गई है.

घाटी में बर्फबारी शुरू हो चुकी है. प्रशासन द्वारा निर्धारित तिथियों के अनुसार प्राइवेट एवं सरकारी दोनों विद्यालय बंद रहेंगे. जम्मू और कश्मीर के स्कूलों की छुट्टियां 1 दिसंबर से शुरू होंगी और तीन महीने यानी 28 फरवरी, 2023 तक जारी रहेंगी.

प्रशासन द्वारा जारी जम्मू-कश्मीर शीतकालीन अवकाश की तारीखों के अनुसार, 5वीं कक्षा तक की कक्षाएं 1 दिसंबर से, 6वीं से 8वीं कक्षा तक की कक्षाएं 12 दिसंबर तक और कक्षा 9वीं से 12वीं कक्षा 19 दिसंबर तक बंद रहेंगी. सभी कक्षाओं के लिए स्कूल 28 फरवरी 2023 से फिर से खुलेंगे.

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विवाह पंचमी 2022 के दिन करें ये खास उपाय, जानिये इस दिन क्यों नहीं होते हैं विवाह

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Vivah Panchami Katha
Vivah Panchami Katha

दोस्तों भारतीय धर्म ग्रंथों के अनुसार त्रेता युग में मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को भगवान श्रीराम तथा जनकपुत्री माँ जानकी (सीता) का विवाह संपन्न हुआ था। तभी से इस पंचमी को विवाह पंचमी (Vivah Panchami Katha 2022) पर्व से जाना जाता है। जिस वजह से लोग इस दिन घरों और मंदिरों में माता सीता और भगवान राम का विवाह संपन्न करवाते हैं। साथ ही रामायण के बाल कांड का पाठ करने की भी परंपरा है। इस उत्सव को खासतौर से नेपाल और मिथिलांचल में काफी धूमधाम से मनाया जाता है।। इस बार विवाह पंचमी (Vivah Panchami 2022) 28 नंवबर 2022 दिन सोमवार को मनाई जाएगी।

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इस दिन यदि कोई भी जातक भगवन राम और सीता माँ के दर्शन के लिए जनकपुर जाता है तो उसकी सभी मनोकामना पूर्ण हो कर अपने दाम्पत्य जीवन को सुख-समृद्धि से व्यतीत करता है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम-सीता के शुभ विवाह के कारण ही यह दिन (विवाह पंचमी) अत्यंत पवित्र माना जाता है।

जिस प्रकार प्रभु श्रीराम ने सदा मर्यादा पालन करके पुरुषोत्तम का पद पाया, उसी तरह माता सीता ने सारे संसार के समक्ष पतिव्रता स्त्री होने का सर्वोपरि स्थान प्राप्त किया। इस दिन अगर कुंवारे भगवान राम और जानकीजी की पूजा करते हैं तो उन्हें सुयोग्य और मनोवांछित जीवनसाथी की प्राप्ति होती है और अगर विवाहित जोड़ा विधि-विधान से पूजा करे तो उनके विवाहित जीवन की सभी परेशानी समाप्त हो जाती है

Vivah Panchami Katha
Vivah Panchami Katha

नेपाल में धूमधाम से मनाते हैं त्यौहार :

विवाह पंचमी का उत्सव भारत वर्ष में ही नहीं अपितु भारत के पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में भी सदियों से यह पर्व बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। नेपाल में इस त्यौहार को मनाने का एक कारण यह भी है की माता सीता नेपाल के जनकपुर के राजा जनक की पुत्री थीं। इसलिए वहां की जनता भी विवाह पंचमी को जश्न के साथ मनाते हैं। सांस्कृतिक दृष्टि से देखा जाय तो जिन कन्या-परुष का विवाह नहीं होता है तो कुंडली में बने दोष को दूर करने के लिए इस दिन वह जातक तुलसी के वृक्ष से विवाह कर कुंडली में बन रहे दोष को दूर करते हैं। इसके अलावा माना जाता है कि तुलसी दास जी के द्वारा रामिचरितमानस भी इसी दिन पूरी की गई थी।

विवाह पंचमी शुभ मुहूर्त

Vivah Panchami Muhurat

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की विवाह पंचमी 27 नवंबर 2022 को शाम 04 बजकर 25 मिनट से प्रारंभ होगी और 28 नवंबर 2022 को दोपहर 01 बजकर 35 मिनट पर इसका समापन होगा. उदयातिथि के अनुसार विवाह पंचमी 28 नवंबर को मनाई जाएगी.

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विवाह पंचमी शुभ योग

Vivah Panchami Shubh Yog

विवाह पंचमी का अभिजित मुहूर्त 28 नवंबर को सुबह 11 बजकर 53 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक रहेगा. अमृत काल शाम 05 बजकर 21 मिनट से लेकर शाम 05 बजकर 49 मिनट तक रहेगा. इस दिन सर्वार्थि सिद्धि योग सुबह 10 बजकर 29 मिनट से लेकर अगले दिन सुबह 06 बजकर 55 मिनट तक रहेगा. रवि योग सुबह 10 बजकर 29 मिनट से लेकर अगले दिन सुबह 06 बजकर 55 मिनट तक.

विवाह पंचमी पूजन विधि

Vivah Panchami Poojan Vidhi

  • विवाह पंचमी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ़ वस्त्र धारण करें
  • इसके बाद राम विवाह का संकल्प लें और भगवान श्री राम और माता सीताजी की मूर्ति या प्रतिमा स्थापित करें
  • मूर्ति स्थापना के बाद भगवान राम को पीले वस्त्र और माता सीता को लाल वस्त्र अर्पित करें
  • इसके बाद रामायण के बाल कांड का पाठ करते हुए विवाह प्रसंग का पाठ करें।
  • अब “ॐ जानकीवल्लभाय नमः” इस मंत्र का 108 बार जाप करें और भगवान राम और सीता का गठबंधन करें
  • इसके बाद भगवान राम और सीताजी की आरती उतारें
  • अब भगवान को भोग लगाएं और पूरे घऱ में प्रसाद बाट दें और स्वयं भी ग्रहण करें।
Vivah Panchami Katha
Vivah Panchami Katha

विवाह पंचमी के दिन क्यों नहीं होते विवाह :

हिंदू धर्म में विवाह पंचमी का काफी महत्व है। माता सीता और भगवान राम आज ही के दिन शादी के बंधन में बंधे थे। लेकिन इस दिन कई जगह विवाह नहीं कराए जाते हैं। खासतौर पर मिथिलांचल और नेपाल में विवाह पंचमी के दिन विवाह नहीं कराए जाते हैं। चूंकि माता सीता का वैवाहिक जीवन बहुत ही दुखद रहा इसलिए लोग इस दिन विवाह नहीं करते हैं। इसके पीछे मान्यता है कि, माता सीता को कभी महारानी का सुख नहीं मिला और 14 साल के वनवास के बाद भी भगवान राम ने माता सीता का त्याग कर दिया था। जिस वजह से लोग इस दिन अपनी बेटियों का विवाह करना उचित नहीं समझते हैं।

लोगों का मानना है कि, जिस तरह से माता सीता ने अपने वैवाहिक जीवन में अत्यधिक कष्ट झेला, उसी तरह इस दिन शादी करने से उनकी बेटियां भी अपने वैवाहिक जीवन में सुख नहीं भोग पाएंगी। साथ ही इस दिन रामकथा का अंत राम और सीता के विवाह पर ही कर दिया जाता है। क्योंकि दोनों के जीवन के आगे की कथा दुख और कष्टों से भरी है, इसलिए शुभ अंत के साथ ही कथा का समापन कर दिया जाता है।

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विवाह पंचमी कथा

Vivah Panchami Katha

अयोध्या के राजा दशरथ के तीन रानियां थी. कौशल्या केकई और सुमित्रा. कौशल्या के पुत्र राम, केकई के पुत्र भरत और सुमित्रा के लक्ष्मण और शत्रुघ्न थे. चारों राजकुमार अपनी शिक्षा प्राप्त करने के लिए राज गुरु विश्वामित्र के आश्रम में गए. शिक्षा समाप्त करने के पश्चात वह अपने राज्य अयोध्या वापस आए. त्रेता युग में पृथ्वी पर राक्षसों का अत्याचार चारों तरफ अत्यधिक रूप से बढ़ गया. विश्वामित्र राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को मांग कर ले गए यह कहकर कि धरती पर राक्षसों ने अत्याचार बढ़ा रखा है, अतः उनका नाश करने के लिए मुझे राम की आवश्यकता है. दोनों राजकुमार विश्वामित्र के साथ खुशी-खुशी चल पड़े तथा राक्षसों का नाश करते हुए मिथिला नगरी पहुंचे.

वहां पर राजकुमारी देवी सीता के स्वयंवर की तैयारियां चल रही थी. राजा जनक ने यह शर्त रख रखी थी, कि जो भगवान शिव के धनुष पिनाक पर प्रत्यंचा चढ़ा देगा उसका विवाह उनकी पुत्री सीता के साथ संपन्न हो जाएगा. राजा जनक ने यह शर्त इस वजह से रखी थी क्योंकि सीताजी एक असाधारण कन्या थी वह भगवान शिव का धनुष पिनाक जो कि कोई हिला तक नहीं सकता था उस धनुष को राजकुमारी सीता आसानी से उठा लेती थी.

Vivah Panchami Katha
Vivah Panchami Katha

यह स्वयंवर देखने के लिए विश्वामित्र दोनों राजकुमारों को लेकर राज महल पहुंचे. उन्होंने देखा कि वहां पर कोई भी राजा और राजकुमार धनुष को हिला तक नहीं पा रहा था, प्रत्यंचा चढ़ाना तो दूर की बात थी. विश्वामित्र के कहने पर भगवान राम धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने के लिए आगे बढ़े उन्होंने धनुष को आसानी से उठा लिया और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने लगे परंतु प्रत्यंचा चढ़ाते वक्त भयंकर ध्वनि के साथ धनुष टूट गया.

स्वयंवर की यह शर्त पूरी होते ही माता सीता पुष्पों की जयमाला हाथ में लेकर श्रीराम के निकट आई और श्रीराम के गले में जयमाला पहना दी. यह मनोरम दृश्य अत्यंत सुंदर और संपूर्ण ब्रह्मांड को मोहने वाला था. देवताओं ने फूलों की वर्षा करी और चारों तरफ गाजे-बाजे की ध्वनि गूंजने लगी. मां सीता और भगवान राम की जोड़ी इस प्रकार सुशोभित हो रही थी जैसे श्रृंगार और सुंदरता एक में लिप्त हो गए हो और इस प्रकार भगवान राम का विवाह मां सीता के साथ संपन्न हो गया. भगवान राम और माता सीता की कुंडली के 36 गुण मिले थे .

परंतु श्री राम को परशुराम के क्रोध का निशाना बनना पड़ा शिव जी का यह धनुष परशुराम राजा जनक के पास छोड़कर गए हुए थे परंतु परशुराम ने जब राम को देखा तो उन्हें एहसास हुआ कि वह कोई साधारण मानव नहीं है और उन्होंने यह यह स्वीकार कर लिया कि वह विष्णु के अवतार हैं इस प्रकार भगवान राम और सीता का विवाह संपन्न हुआ.

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इस दिन करें ये उपाय

Vivah Panchami Upay

  • भगवान राम और माता सीता जी की पूजा करने से विवाह में जो बाधाएं आ रही हैं वह समाप्त हो जाती हैं.
  • परिवार में कलह रहती है सास- बहू में बिल्कुल भी नहीं बनती तो आप शनिवार के दिन आटा खरीदें, 100 ग्राम काले पिसे हुए चने भी खरीदें और उसे आटे में मिला दे ऐसा करने से आपके परिवार में शांति बनी रहेगी.
  • विवाह पंचमी के दिन बालकाण्ड में भगवान राम और सीता जी के विवाह प्रसंग का पाठ करना शुभ होता है.
  • शादी में बाधाएं आ रही है बात बनते-बनते बिगड़ जाती है. कहीं भी शादी पक्की नहीं हो पा रही है तो आप रोज चींटियों को आटा डालें और पक्षियों को सात अनाज डालें
  • सम्पूर्ण रामचरित-मानस का पाठ करने से भी पारिवारिक जीवन सुखमय होता है.
  • किसी वजह से टूट गई अगली बार ऐसा ना हो इसके लिए आप शनिवार को हनुमानजी के मंदिर में जाकर सवा किलो मोतीचूर के लड्डुओं का भोग लगाएं, घी का दीपक जलाएं
  • आपकी पुत्री विवाह के लिए रिश्ता देखने जा रहे हैं तो जब आप घर से निकले तो किसी गाय को आटा गुड़ खिलाकर जाएं ऐसा करने से आपको सफलता मिलेगी.
  • विवाह में बाधा आ रही है इसके लिए भगवान राम और माता सीता पर चढ़े केसर से प्रतिदिन तिलक करें ऐसा करने से समस्या का समाधान होगा.
  • अगर आपको जीवन साथी सुंदर पाने की चाह है तो इसके लिए राम सीता पर लगातार 13 दिन तक आलता चढ़ाएं.
  • भगवान राम सीता पर चढ़ी साबुत हल्दी पीले कपड़े में बांधकर शयनकक्ष में रखने से शीघ्र विवाह हो जाता है.
Vivah Panchami Katha
Vivah Panchami Katha

विवाह पंचमी का महत्व

Vivah Panchami Mahatva

भगवान राम और सीता जी के विवाह उत्सव के रूप में विवाह पंचमी मनाई जाती है। इस दिन भगवान राम और माता सीता की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विवाह पंचमी के दिन प्रभु श्री राम, माता सीता का विधि-विधान के साथ पूजन करने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। इस दिन पूजन अनुष्ठान करने से विवाहित लोगों का दांपत्य जीवन सुखमय बनता है। विवाह पंचमी पर खासतौर पर अयोध्या और नेपाल में विशेष आयोजन किए जाते हैं और भव्य रूप से विवाह पंचमी का उत्सव मनाया जाता है।

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ठंड के मौसम में ऐसे बनाएं लाजवाब मेथी के पराठे, ये है विधि

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Methi Paratha Recipe
Methi Paratha Recipe

हेल्लो दोस्तों ठंड में गर्मागर्म पराठे खाने का मजा ही कुछ और होता है। इस मौसम में मिलने वाली ताजी मेथी से बने मेथी के पराठों का स्वाद बहुत ही लाजवाब लगता है। ठंड के मौसम में मेथी की भरमार होती है, इसलिए इस मौसम में मेथी पराठे प्रमुखता से बनाए जाते हैं। मध्यप्रदेश के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान में भी सर्दी के मौसम में मेथी के पराठे खूब पसंद किए जाते हैं। लेकिन हर जगह इसे बनाने का तरीका अलग-अलग होता है। जा‍निए कैसे बनाते हैं मेथी के पराठे। Methi Paratha Recipe

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आवश्यक सामग्री

  • आटा – दो कटोरी
  • मेथी (बारीक कटी हुई) – एक कप
  • हरी मिर्च (बारीक कटी हुई) – दो
  • अदरक (बारीक कटा हुआ) – एक छोटा टुकड़ा
  • अजवाइन – एक छोटी चम्मच
  • नमक – स्वादानुसार
  • पानी – जरूरत के अनुसार
  • तेल – सेंकने के लिए
Methi Paratha Recipe
Methi Paratha Recipe

बनाने की विधि

  • सबसे पहले एक बर्तन में आटे में मेथी, अदरक , हरी मिर्च, अजवाइन और नमक डालकर अच्छे से मिक्स कर लें.
  • अब आटे में धीरे-धीरे पानी डालकर इसे गूंदें और 20 मिनट के लिए सेट होने के लिए रख दें.
  • तय समय के बाद आटे की लोइयां तोड़कर इन्हें गोलाकार में बेल लें.
  • मीडियम आंच में एक तवा गरम करें.
  • तवे के गरम होते ही थोड़ा सा तेल डालकर तवा चिकना करें.
  • अब इस पर पराठा सेकें. पराठे को पलटकर भी तेल लगाएं और दूसरी तरफ से भी सेंक लें.
  • इसी तरह सारे पराठे सेंक लें.
  • तैयार है गर्मागर्म मेथी के पराठे. दही के साथ परोसें.

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डॉ॰ हरिसिंह गौर जयंती : अकेले बनाई थी यूनिवर्सिटी, जापान में लोग मानते है छोटा बुद्ध

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Harisingh Gaur Jayanti : डॉ. हरि सिंह गौर एक ऐसी शख्सियत हैं, जो किसी परिचय की मोहताज नहीं है। सागर विश्वविद्यालय की स्थापना डॉ सर हरीसिंह गौर ने सन् 1946 में अपनी निजी पूंजी से की थी। यह भारत का सबसे प्राचीन तथा बड़ा विश्वविद्यालय रहा है। अपनी स्थापना के समय यह भारत का 18वां तथा किसी एक व्यक्ति के दान से स्थापित होने वाला यह देश का एकमात्र विश्वविद्यालय है।

सागर वालों के लिए ‘गौर जयंती’ (Dr. Harisingh Gaur Jayanti) दीवाली/ईद से कुछ कम नहीं है। 26 नवम्बर 2022 डॉ. हरि सिंह गौर की 152वीं जयंती है। 18 जुलाई 1946 में लगभग दो करोड़ रूपये अपनी निजी संपत्ति (व्यक्तिगत कमाई और पैत्रक मिलाकर) में से दान कर डॉक्टर सर हरिसिंह गौर ने सागर विश्वविद्यालय बनवाया!

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डॉ॰ हरिसिंह गौर, (26 नवम्बर 1870 – 25 दिसम्बर 1949) सागर विश्वविद्यालय के संस्थापक, शिक्षाशास्त्री, ख्यति प्राप्त विधिवेत्ता, न्यायविद्, समाज सुधारक, साहित्यकार (कवि, उपन्यासकार) तथा महान दानी एवं देशभक्त थे। वह बीसवीं शताब्दी के सर्वश्रेष्ठ शिक्षा मनीषियों में से थे। वे दिल्ली विश्वविद्यालय तथा नागपुर विश्वविद्यालय के उपकुलपति रहे। वे भारतीय संविधान सभा के उपसभापति, साइमन कमीशन के सदस्य तथा रायल सोसायटी फार लिटरेचर के फेल्लो भी रहे थे।उन्होने कानून शिक्षा, साहित्य, समाज सुधार, संस्कृति, राष्ट्रीय आंदोलन, संविधान निर्माण आदि में भी योगदान दिया।

उन्होने अपनी गाढ़ी कमाई से 20 लाख रुपये की धनराशि से 18 जुलाई 1946 को अपनी जन्मभूमि सागर में सागर विश्वविद्यालय की स्थापना की तथा वसीयत द्वारा अपनी निजी सपत्ति से 2 करोड़ रुपये दान भी दिया था। इस विश्वविद्यालय के संस्थापक, उपकुलपति तो थे ही। डॉ॰ सर हरीसिंह गौर एक ऐसा विश्वस्तरीय अनूठा विश्वविद्यालय है, जिसकी स्थापना एक शिक्षाविद् के द्वारा दान द्वारा की गई थी।

Harisingh Gaur Jayanti
Harisingh Gaur Jayanti

जीवनी :

डॉ॰ सर हरीसिंह गौर का जन्म महाकवि पद्माकर की नगरी ग्राम – सागर जिले के शनिचरी टोरी कस्बे सागर (म.प्र.) के पास एक निर्धन परिवार में 26 नवम्बर 1870 को हुआ था। उन्होने सागर के ही गवर्नमेंट हाईस्कूल से मिडिल शिक्षा प्रथम श्रेणी में हासिल की। उन्हे छात्रवृत्ति भी मिली, जिसके सहारे उन्होंने पढ़ाई का क्रम जारी रखा, मिडिल से आगे की पढ़ाई के लिए जबलपुर गए फिर महाविद्यालयीन शिक्षा के लिए नागपुर के हिसलप कॉलेज (Hislop College) में दाखिला ले लिया, जहां से उन्होंने इंटरमीडिएट की परीक्षा भी प्रथम श्रेणी में की थी। वे प्रांत में प्रथम रहे तथा पुरस्कारों से नवाजे गए।

शिक्षा :

डॉ. गौड़ बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे। प्राइमरी के बाद इन्होनें दो वर्ष मेँ ही आठवीं की परीक्षा पास कर ली जिसके कारण इन्हेँ सरकार से 2रुपये की छात्र वृति मिली जिसके बल पर ये जबलपुर के शासकीय हाई स्कूल गये। लेकिन मैट्रिक में ये फेल हो गये जिसका कारण था एक अनावश्यक मुकदमा। इस कारण इन्हें वापिस सागर आना पड़ा दो साल तक काम के लिये भटकते रहे फिर जबलपुर अपने भाई के पास गये जिन्होने इन्हें फिर से पढ़ने के लिये प्रेरित किया।

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सन् 1889 में उच्च शिक्षा लेने इंग्लैंड गए। सन् 1892 में दर्शनशास्त्र व अर्थशास्त्र में ऑनर्स की उपाधि प्राप्त की। फिर 1896 में M.A., सन 1902 में LL.M. और अन्ततः सन 1908 में LL.D. किया। कैम्ब्रिज में पढाई से जो समय बचता था उसमें वे ट्रिनिटी कालेज में डी लिट्, तथा एल एल डी कीपडाई करते थे। उन्होने अंतर-विश्वविद्यालयीन शिक्षा समिति में कैंब्रिज विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया, जो उस समय किसी भारतीय के लिये गौरव की बात थी। डॉ॰ सर हरीसिंह गौड ने छात्र जीवन में ही दो काव्य संग्रह दी स्टेपिंग वेस्टवर्ड एण्ड अदर पोएम्स एवं रेमंड टाइम की रचना की, जिससे सुप्रसिद्ध रायल सोसायटी ऑफ लिटरेचर द्वारा उन्हें स्वर्ण पदक प्रदान किया गया।

उपलब्धि :

सन् 1912 में वे बैरिस्टर होकर स्वदेश आ गये। उनकी नियुक्ति सेंट्रल प्रॉविंस कमीशन में एक्स्ट्रा `सहायक आयुक्त´ के रूप में भंडारा में हो गई। उन्होंने तीन माह में ही पद छोड़कर अखिल भारतीय स्तर पर वकालत प्रारंभ कर दी व मध्य प्रदेश, भंडारा, रायपुर, लाहौर, कलकत्ता, रंगून तथा चार वर्ष तक इंग्लैंड की प्रिवी काउंसिल में वकालत की, उन्हें एलएलडी एवं डी. लिट् की सर्वोच्च उपाधि से भी विभूषित किया गया। 1902 में उनकी द लॉ ऑफ ट्रांसफर इन ब्रिटिश इंडिया पुस्तक प्रकाशित हुई। वर्ष 1909 में दी पेनल ला ऑफ ब्रिटिश इंडिया (वाल्यूम २) भी प्रकाशित हुई जो देश व विदेश में मान्यता प्राप्त पुस्तक है। प्रसिद्ध विधिवेत्ता सर फेडरिक पैलाक ने भी उनके ग्रंथ की प्रशंसा की थी।

Harisingh Gaur Jayanti
Harisingh Gaur Jayanti

वे शिक्षाविद् भी थे। सन् 1921 में केंद्रीय सरकार ने जब दिल्ली विश्वविद्यालय की स्थापना की तब डॉ॰ सर हरीसिंह गौर को विश्वविद्यालय का संस्थापक कुलपति नियुक्त किया गया। 9 जनवरी 1925 को शिक्षा के क्षेत्र में `सर´ की उपाधि से विभूषित किया गया, तत्पश्चात डॉ॰ सर हरीसिंह गौर को दो बार नागपुर विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया।

राजनैतिक सफ़र :

डॉ॰ सर हरीसिंह गौर ने 20 वर्षों तक वकालत की तथा प्रिवी काउंसिल के अधिवक्ता के रूप में शोहरत अर्जित की। वे कांग्रेस पार्टी के सदस्य रहे, लेकिन 1920 में महात्मा गांधी से मतभेद के कारण कांग्रेस छोड़ दी। वे 1935 तक विधान परिषद् के सदस्य रहे। वे भारतीय संसदीय समिति के भी सदस्य रहे, भारतीय संविधान परिषद् के सदस्य रूप में संविधान निर्माण में अपने दायित्वों का निर्वहन किया। विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ॰ सर हरीसिंह गौर ने विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद नागरिकों से अपील कर कहा था कि सागर के नागरिकों को सागर विश्वविद्यालय के रूप में एक शिक्षा का महान अवसर मिला है, वे अपने नगर को आदर्श विद्यापीठ के रूप में स्मरणीय बना सकते हैं।

विश्वविद्यालय की स्थापना :

डॉ॰ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय भारत के मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित एक सार्वजनिक विश्वविद्यालय है। इसको सागर विश्वविद्यालय के नाम से भी जाना जाता है। इसकी स्थापना डॉ॰ हरिसिंह गौर ने 18 जुलाई 1946 को अपनी निजी पूंजी से की थी। अपनी स्थापना के समय यह भारत का 18वाँ विश्वविद्यालय था। किसी एक व्यक्ति के दान से स्थापित होने वाला यह देश का एकमात्र विश्वविद्यालय है। वर्ष 1983 में इसका नाम डॉ॰ हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय कर दिया गया। 27 मार्च 2008 से इसे केन्द्रीय विश्वविद्यालय की श्रेणी प्रदान की गई है।

Harisingh Gaur Jayanti
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पंडित रविशंकर शुक्ल चाहते थे जबलपुर में बने विश्वविद्यालय :

लोग बताते हैं कि तत्कालीन प्रधानमंत्री [तब मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री कहते थे और तब मध्यप्रदेश नहीं था, प्रदेश का नाम था- Central Province (CP & Barar)] पंडित रविशंकर शुक्ल चाहते थे कि विश्वविद्यालय जबलपुर में बने चूंकि बड़ा शहर है, लेकिन डॉ. गौर अतिपिछड़े बुंदेलखंड के अतिपिछड़े शहर सागर के नाम पर अड़े रहे और यह तक कह दिया की भले ही सरकारी मदद ना मिले, विश्वविद्यालय तो सागर में ही बनेगा। वही सागर जहां स्याही तक नहीं मिलती थी। हालाँकि बाद में पंडित जी के हस्तक्षेप के बाद 18 जुलाई 1956 को सागर में विश्वविद्यालय की स्थापना हुई।

1946 में विश्वविद्यालय बना, डॉ गौर उसके कुलपति बने और पदेन कुलाधिपति (Chancellor) बने पंडित रविशंकर शुक्ल। यहां दो बातें उल्लेखनीय हैं- पहली यह कि सागर पं. शुक्ला की भी जन्मभूमि है और दूसरी यह कि जब 1923 में नागपुर विश्वविद्यालय बना तब पंडित जी उसकी Executive Council में थे और पहले कुलपति (Vice Chancellor) बने डॉ. गौर।

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सागर का इतिहास :

सागर शहर का इतहास 1660 A.D.में जाता है और यह माना जाता है की उड़ान शाह जो निहाल सिह के वंशज थे उन्होंने एक छोटा सा किला बनवाया था जो परकोटा कहलाता है और आज शहर के अन्दर स्तिथ है | इसके बाद वर्तमान किला और एक इसकी दीवारों के तहत निपटान गोविंद राव पंडित , पेशवा के एक अधिकारी , द्वारा स्थापित किया गया था जब सागर पर पेशवा का शासन था |

1818 ईस्वी में , जिले के अधिक से अधिक हिस्सा पेशवा बाजीराव द्वितीय द्वारा सौंप दिया गया था ब्रिटिश सरकार को, जबकि के वर्तमान जिले के बाकी के विभिन्न भागों सागर 1818 और 1860 के बीच अलग अलग समय पर अंग्रेजों के कब्जे में आ गया। बांदा तहसील के धामोनी परगना अप्पाजी भोंसला द्वारा 1818 ईस्वी में सौंप दिया गया था । राहतगढ़, गढ़ाकोटा, देवरी, गौरझावर और नहारमोऊ एकसाथ पांच महल के रूप में जाने जाते थे | यह सब सिंदिया के राजाओ द्वारा 1820, 1825 के बीच अंग्रेजो को सोप दिए गए | बाँदा का शाहगढ़ 1857 के बाद अस्तित्व में आया |

Harisingh Gaur Jayanti
Harisingh Gaur Jayanti

सागर ऐसे बना जिला :

प्रशासकीय दृष्टी से सागर और उसके आसपास के स्थान्नो में बहुत ज्यादा बदलाव करना पडा | सागर क्षेत्र को सबसे पहले बुंदेलखंड के राजनीतिक मामलों के अधीक्षक के प्रशासन में रखना पडा | बाद में 1920 में इसे गवर्नर जनरल के प्रशासन में रखा गया | उत्तर- पश्चिमी प्रांत 1835 में गठित किया गया था, सागर और नर्बदा शासित प्रदेशों में इस प्रांत में शामिल थे। 1842 में गवर्नर जनरल को बुंदेलखंड की और ज्यादा ध्यान देने की बात की गयी | इसके बाद 1861 में सागर और नर्बदा प्रदेशों, को नागपुर राज्य के साथ साथ एक आयुक्त के प्रांत में गठन किया गया |

सागर एक छोटी अवधी के लिए कमिश्नर का मुख्यालय रहा पर 1863-64 में इसे जबलपुर संभाग में ले लिया गया | 1932 में दमोह सागर जिले में जोड़ा गया पर बाद में इसे अलग जिला बना दिया गया | उस समय सागर में सिर्फ 4 ही तहसील थी, सागर, खुरई, रहली, और बंडा |

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इस दिन है नाग दिवाली 2022, जानिये शुभ मुहूर्त, पूजन विधि एवं कथा

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Naag Diwali Shubh Muhurat Katha
Naag Diwali Shubh Muhurat Katha

Naag Diwali Shubh Muhurat Katha : नाग दिवाली मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है. इस दिन नागों की विशेष पूजा का खास महत्व है. इस साल यह तिथि देव दिवाली से बीस दिन बाद 28 नवंबर 2022 सोमवार को नाग दिवाली (Nag Diwali 2022 kab hai) पड़ रही है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नागों को पाताललोक का स्वामी माना गया है. नाग दीपावली पर उनके पूजन का विशेष महत्व है.

इस मौके पर घरों में रंगोली बनाकर नाग के प्रतीक के सामने दीपक लगाने से मनोवांछित मिलते हैं. मान्यता है कि नाग देवता के पूजन से जीवन की सभी समस्याओं का समाधान होता है. इनका कुंडली के कालसर्प दोष का पूरी तरह निवारण कर देता है. साथ ही जीवन में आ रही दुविधाओं का समाधान मिलता है

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नाग दिवाली तिथि

Naag Diwali 2022 Shubh Muhurat

28 नवंबर 2022 दिन सोमवार को नाग दिवाली की तिथि पड़ रही है।
पंचमी तिथि प्रारंभ – 27 नवंबर 2022 दिन रविवार को शाम 4:20 पर पंचमी तिथि प्रारंभ
पंचमी तिथि समाप्त – 28 नवंबर 2022 दिन सोमवार को दोपहर 1:30 पर समाप्त होगी
राहुकाल – 28 नवंबर 08:13 AM – 09:30 AM

Naag Diwali Shubh Muhurat Katha
Naag Diwali Shubh Muhurat Katha

क्या है पौराणिक मान्यता ?

Naag Diwali 2022 Katha

नाग दीपावली (Naag Diwali 2022) पर नागों के पूजन का विशेष महत्व है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नागों को पाताललोक का स्वामी कहा जाता है. मान्यता है कि इस मौके पर घरों में रंगोली बनाकर नाग के प्रतीक के सामने दीपक लगाने से मनचाहा फल मिलता है. चमोली जिले के लोगों का मानना है कि नाग देवता के पूजन से जीवन की सभी समस्याओं का समाधान होता है. इनकी पूजा करने से कुंडली के कालसर्प दोष का पूरी तरह से निवारण हो जाता है. साथ ही जीवन में आ रही दुविधाओं से मुक्ति मिलती है.

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नाग देवता का अद्भुत मंदिर

उत्तराखंड के चमोली जिले में नाग देवता का रहस्यमय मंदिर है. यहां पुजारी आंख और मुंह पर पट्टी बांधकर पूजा करते हैं. यह मंदिर चमोली के बांण गांव में हैं. यह मंदिर स्थानीय स्तर पर लाटू देवता मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है. यहां के स्‍थानीय लोगो का कहना है की मंदिर में नागमणि है और उस मणि की रक्षा नाग देवता स्‍वयं करते है जिस कारण नाग देव अपने मुह से लगातार फुफकार के सहारे अपना विष छोड़ते रहते है. ताकी जो कोई उस मणि को हाथ लगाऐ वह तुरंत मृत्‍यु को प्राप्‍त हो जाऐ. और कहा जाता है की इस मणि की रोशनी इतनी तेज है की व्‍यक्ति उसकी तेज रोशनी से अंधा हो जाता है.

यही वजह है कि लोग करीब 80 फीट की दूरी से इनकी पूजा करते हैं. यहां के पुजारी भी आंख-मुंह में पट्टी बांधकर पूजा करने मंदिर के पास जाते हैं. यह मंदिर मां पार्वती के चचेरे भाई लाटू के नाम पर बनाया गया है. मंदिर का कपाट साल में एक बार ही खोला जाता है. यह कपाट वैशाख पूर्णिमा को खोला जाता है.

इस दिन यहां विशाल मेला लगता है और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ होता है. स्थानीय लोग लाटू देवता को ही आराध्य मानते हैं, यह मंदिर समुद्र तल से कुल 8500 फीट की ऊंचाई पर है. मान्यता है कि यहां सच्चे हृदय से अगर कोई मनोकामना मांगे तो वह अवश्य पूरी होती है.

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अब कोई चाय पीने से आपको रोके तो ये खबर उसे ज़रूर पढ़ाएं

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Drinking Tea Improves Brain Health
Drinking Tea Improves Brain Health

नियमित रूप से चाय पीने वाले लोगों के दिमाग का प्रत्येक हिस्सा चाय नहीं पीने वालों की तुलना में बेहतर ढंग से संगठित होता है. एक अध्ययन में यह दावा किया गया है. दिमाग के प्रत्येक हिस्से का व्यवस्थित रहना स्वस्थ संज्ञानात्मक क्रिया से जुड़ा हुआ है. इन परिणामों तक पहुंचने के लिए अध्ययन में 36 उम्रदराज लोगों के न्यूरोइमेजिंग डेटा को खंगाला गया. Drinking Tea Improves Brain Health

यह भी पढ़ें – सुबह पानी में हल्दी मिलाकर पीने से होते है ये फायदे

नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (एनयूएस) के सहायक प्राध्यापक एवं टीम लीडर फेंग लेई ने कहा, “हमारे परिणाम मस्तिष्क के ढांचे पर चाय पीने से पड़ने वाले सरकारात्मक योगदान की पहली बार पुष्टि करते हैं और यह दर्शाते हैं कि नियमित रूप से चाय पीना दिमागी तंत्र में उम्र के कारण आने वाली गिरावट से भी बचाता है.”

शोधकर्ताओं ने कहा कि पूर्व के अध्ययनों में दर्शाया गया है कि चाय पीना मानव सेहत के लिए लाभकारी है और इसके सकारात्मक प्रभावों में मिजाज में सुधार होना और ह्रदय एवं नसों संबंधी बीमारी से बचाना शामिल है. यह अध्ययन 2015 से लेकर 2018 के बीच 60 साल और उससे अधिक उम्र वाले 36 बुजुर्गों पर किया गया जिसमें उनकी सेहत, जीवनशैली और मनोवैज्ञानिक सेहत संबंधी डेटा जुटाया गया.

Drinking Tea Improves Brain Health
Drinking Tea Improves Brain Health

प्रतिभागियों के संज्ञानात्मक प्रदर्शन और ईमेजिंग से आए परिणामों के आकलन दिखाते हैं कि जो लोग करीब 25 साल तक हफ्ते में कम से कम चार बार ग्रीन टी, उलूंग टी या ब्लैक टी पीते हैं, उनके दिमाग के हिस्से ज्यादा प्रभावी ढंग से एक-दूसरे से जुड़े हुए होते हैं. यह अध्ययन “एजिंग” पत्रिका में प्रकाशित हुआ है.

अब तक चाय को सेहत के लिए हानिकारक बताया जाता था परंतु अब नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर की एक स्टडी रिपोर्ट सामने आई है जिसमें दावा किया है कि चाय पीने से ना केवल दिमाग तेज होता है बल्कि दिमाग बूढ़ा भी नहीं होता। हृदय और नसों के बीमारियों से बचाव होता है।

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चाय पीने से दिमाग बेहतर ढंग से संगठित

नियमित रूप से चाय पीने वाले लोगों के दिमाग का प्रत्येक हिस्सा चाय नहीं पीने वालों की तुलना में बेहतर ढंग से संगठित होता है। एक अध्ययन में यह दावा किया गया है। दिमाग के प्रत्येक हिस्से का व्यवस्थित रहना स्वस्थ संज्ञानात्मक क्रिया से जुड़ा हुआ है। इन परिणामों तक पहुंचने के लिए अध्ययन में 36 उम्रदराज लोगों के न्यूरोइमेजिंग डेटा को खंगाला गया।
चाय पीने वाला व्यक्ति दिमागी तौर पर बूढ़ा नहीं होता

Drinking Tea Improves Brain Health

नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (एनयूएस) के सहायक प्राध्यापक एवं टीम लीडर फेंग लेई ने कहा, “हमारे परिणाम मस्तिष्क के ढांचे पर चाय पीने से पड़ने वाले सरकारात्मक योगदान की पहली बार पुष्टि करते हैं और यह दर्शाते हैं कि नियमित रूप से चाय पीना दिमागी तंत्र में उम्र के कारण आने वाली गिरावट से भी बचाता है।”

चाय ह्रदय एवं नसों संबंधी बीमारी से बचाती है

शोधकर्ताओं ने कहा कि पूर्व के अध्ययनों में दर्शाया गया है कि चाय पीना मानव सेहत के लिए लाभकारी है और इसके सकारात्मक प्रभावों में मिजाज में सुधार होना और ह्रदय एवं नसों संबंधी बीमारी से बचाना शामिल है। यह अध्ययन 2015 से लेकर 2018 के बीच 60 साल और उससे अधिक उम्र वाले 36 बुजुर्गों पर किया गया जिसमें उनकी सेहत, जीवनशैली और मनोवैज्ञानिक सेहत संबंधी डेटा जुटाया गया।

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ग्रीन टी, उलूंग टी या ब्लैक टी फायदेमंद हैं

प्रतिभागियों के संज्ञानात्मक प्रदर्शन और ईमेजिंग से आए परिणामों के आकलन दिखाते हैं कि जो लोग करीब 25 साल तक हफ्ते में कम से कम चार बार ग्रीन टी, उलूंग टी या ब्लैक टी पीते हैं, उनके दिमाग के हिस्से ज्यादा प्रभावी ढंग से एक-दूसरे से जुड़े हुए होते हैं। यह अध्ययन “एजिंग” पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

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सर्दी के मौसम में खूब खाएं भूना चना, इन गंभीर बीमारियों से रहेंगे दूर

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Gud Aur Chana Ke Fayde
Gud Aur Chana Ke Fayde

भूने चने खाने से सेहत को काफी फायदा होता है लेकिन जब इनके साथ गुड़ का भी सेवन करें तो यह शरीर के लिए बहुत फायदेमंद साबित होते हैं। गुड़ और चने दोनों ही खाने में बहुत स्वादिष्ट होते हैं। चने और गुड़ को देसी स्नेक्स भी कहा जाता है। चने और गुड़ में भरपूर मात्रा में आयरन प्रोटीन जैसे तत्व मौजूद होते हैं जो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। Gud Aur Chana Ke Fayde

गुड़ खाने से खून बढ़ता है और चना स्टैमिना बढ़ता है अगर आपने गुड़ और चना साथ में खाना चालू कर दिया तो रोग आपसे कोसों दूर चले जायेगे, ठंड में गुड़ और चना साथ में खाने के फायदे और बढ़ जाते है यह आपको सर्दी से भी बचायेगा.

खाली समय में गुड़ और चने जैसा स्वाद का कांबिनेशन और कहीं नहीं मिलता। कई बार कब्ज की समस्या को दूर करने के लिए भी लोग गुड़ और चने खाना पसंद करते हैं। लेकिन इन सभी के अलावा एनीमिया से बचने में भी गुड़ और चना बेहद फायदेमंद है।

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रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी से होने वाला रोग एनीमिया अधिकांशत: महिलाओं में देखने को मिलता है। खास तौर से आयरन की कमी के कारण यह समस्या सामने आती है, जिसमें थकान और कमजोरी महसूस होना आम बात है। ऐसे में महिलाओं को अपनी डाइट में आयरन से भरपूर चीजें लेने की सलाह दी जाती है, ताकि हीमोग्लोबिन का स्तर कम न हो।

शरीर में खून की कमी हो जाना एक आम समस्या है जिसे अगर नजरअंदाज कर दिया जाए तो यह जानलेवा भी साबित हो सकती है. इसे दूर करने के लिए आप इस घरेलू नुस्खे की मदद ले सकते हैं. गुड़ का सेवन करने से पेट में गैस नहीं बनती गुड़ का सेवन करने से पेट में गैस नहीं बनती।

Gud Aur Chana Ke Fayde
Gud Aur Chana Ke Fayde

घरेलू नुस्खे कम समय में शरीर को आराम पहुंचाते हैं और साथ ही यह सेहत को भी ठीक रखते हैं. गुड़ और चना दोनों ही सेहत के लिए बहुत लाभदायक हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दोनों को साथ मिलाकर खाने से कई बड़ी बीमारियों को दूर किया जा सकता है.

आइए जानें, गुड़ और चना साथ खाने के क्या हैं फायदे…

आयरन की मात्रा से हैं भरपूर

गुड़ और चना आयरन से भरपूर होता है और यही कारण है कि एनीमिया से बचने के लिए यह बेहद मददगार साबित होता है. गुड़ में उच्च मात्रा में आयरन होता है और भुने हुए चने में आयरन के साथ-साथ प्रोटीन भी सही मात्रा में पाया जाता है. इस तरह से गुड़ और चने को मिलाकर खाने से आवश्यक तत्वों की कमी पूरी होती है, जो एनीमिया रोग के लिए जिम्मेदार होते हैं.

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बॉडी को मिलती है भरपूर एनर्जी

गुड़ और चना न केवल आपको एनीमिया से बचाने का काम करते हैं, बल्कि आपके शरीर में आवश्यक उर्जा की पूर्ति भी करते हैं. शरीर में आयरन अवशोषि‍त होने पर ऊर्जा का संचार होता है, जिससे थकान और कमजोरी महसूस नहीं होती.
हालांकि अत्यधिक मात्रा में भी इसका सेवन आपके भोजन की आदत को प्रभावित कर सकता है. इसलिए इसे नियमित रूप से और नियंत्रित मात्रा में खाना अधिक फायदेमंद रहता है.

गुड़ और चना आयरन से भरपूर होता है, और यही कारण है कि एनीमिया से बचने के लिए यह बेहद मददगार साबित होता है। गुड़ में उच्च मात्रा में आयरन होता है, और इसमें सामान्य शर्करा भी पाई जाती है। इसे अलावा भुने हुए चने में आयरन के साथ-साथ प्रोटीन भी सही मात्रा में पाया जाता है।

Gud Aur Chana Ke Fayde
Gud Aur Chana Ke Fayde

इस तरह से गुड़ और चने को मिलाकर खाने से आवश्यक तत्वों की कमी पूरी होती है, जो एनीमिया रोग के लिए जिम्मेदार होते हैं। गुड़ और चना न केवल आपको एनीमिया से बचाने का काम करते हैं, बल्कि आपके शरीर में आवश्यक उर्जा की पूर्ति भी करते हैं। शरीर में आयरन अवशोषि‍त होने पर उर्जा का संचार होता है, जिससे थकान और कमजोरी महसूस नहीं होती।

हालांकि अत्यधिक मात्रा में भी इसका सेवन आपके भोजन की आदत को प्रभावित कर सकता है। इसलिए इसे नियमित रूप से और नियंत्रित मात्रा में खाना अधिक फायदेमंद होगा। गुड़ और चना आसानी से बाजार में उपलब्ध भी हो जाता है। इनका सेवन करते समय एक मुट्ठी चना और थोड़ा सा गुड़ मिलाकर एक साथ खाएं। यह स्वाद से भरा भी होता है, अत: इसे खाने में आपको किसी प्रकार की परेशानी भी नहीं होगी, बल्कि आप इसे खाना पसंद करेंगे।

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भूने चने खाने से सेहत को काफी फायदा होता है लेकिन जब इनके साथ गुड़ का भी सेवन करें तो यह शरीर के लिए बहुत फायदेमंद साबित होते हैं। मर्दों के लिए गुड़ और चना खाना काफी फायदेमंद होता है। अक्सर पुरूष बॉडी बनाने के लिए जिम में जाकर कसरत करते हैं ऐसे में उन्हें गुड़ और चने का सेवन जरूर करना चाहिए। इससे मसल्स मजबूत होते हैं और शरीर को भी कई फायदे मिलते हैं।

गुण खाने से खून बढ़ता है और चना स्टैमिना बढ़ता है अगर आपने गुड़ और चना साथ में खाना चालू कर दिया तो रोग आपसे कोसों दूर चले जायेगे, ठंड में गुड़ और चना साथ में खाने के फायदे और बढ़ जाते है यह आपको सर्दी से भी बचायेगा तो आइये जाने है गुड़ और चना साथ में खाने के फायदों को-

चेहरा निखारने के लिए

इसमें जिंक होता है जो त्वचा को निखारने में मदद करता है। मर्दों को रोजाना इसका सेवन करना चाहिए जिससे उनके चेहरे की चमक बढ़ेगी और वे पहले से ज्यादा स्मार्ट भी लगेगे।

मोटापा कम करने के लिए

गुड़ और चने को एक साथ खाने से शरीर का मैटाबॉलिज्म बढ़ता है जो मोटापा कम करने में मदद करता है। कई मर्द वजन कम करने के लिए जिम जाकर एक्सरसाइज करते हैं उन्हें गुड़ और चने का सेवन जरूर करना चाहिए।

कब्ज दूर करने के लिए

शरीर का डाइजेशन सिस्टम खराब होने की वजह से कब्ज और एसिडिटी की समस्या हो जाती है। ऐसे में गुड़ और चने खाएं, इसमें फाइबर होता है जो पाचन शक्ति को ठीक रखता है।

दिमाग तेज करने के लिए

गुड़ और चने को मिलाकर खाने से दिमाग तेज होता है। इसमें विटामिन-बी6 होता है जो याददाश्त बढ़ाता है।

दांत मजबूत करने के लिए

इसमें फॉस्फोरस होता है जो दांतो के लिए काफी फायदेमंद है। इसके सेवन से दांत मजबूत होते हैं और जल्दी नहीं टूटते।

Gud Aur Chana Ke Fayde

हार्ट के लिए

जिन लोगों को दिल से जुड़ी कोई समस्या होती है। उनके लिए गुड़ और चने का सेवन काफी फायदेमंद है। इसमें पोटाशियम होता है जो हार्ट अटैक होने से बचाता है।

मजबूत हड्डियां के लिए

गुड़ और चने में कैल्शियम होता है जो हड्डियों को मजबूत करता है। इसके रोजाना सेवन से गठिया के रोगी को काफी फायदा होता है।

पुरुष रोगों में लाभ

चने और गुड खाने वाला व्यक्ति सदैव जवानी का अहसास करता है. कमजोरी दूर होकर शरीर हिष्ट पुष्ट रहता है. शरीर में बलवीर्य तेज़ बना रहता है.

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ऐसे बनायें स्वास्थ्य व स्वाद से भरपूर सिंघाड़े की सब्ज़ी

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Singhada Sabji Recipe
Singhada Sabji Recipe

दोस्तों सर्दियों का मौसम आ गया हैं आपने अक्सर सिंघाड़े को बाजार में देखा होगा, सिंघाड़े को कच्चा या फिर उबाल कर खाते हैं लेकिन क्या आपने सिंघाड़े की सब्जी खाई हैं ? अगर नहीं तो आज मैं आपको सिंघाड़े की सब्जी की रेसिपी बताने जा रही हुँ। जो स्वादिष्ट होने के साथ साथ पौष्टिक भी होती है। सिंघाड़े तालाब के पानी में पाया जाता है इसलिए इसे पानीफल भी कहा जाता है। सिंघाड़े में अधिक मात्रा में पौषक तत्व कार्बोहाइड्रेट्स, स्टार्च, विटामिन पाये जाते है, इसलिए यह हमारे स्वास्थ के लिए भी लाभदायक होता है। तो आईये आज हम सिघांड़े की सब्जी बनायेंगें। Singhada Sabji Recipe

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आवश्यक सामग्री :

  • सिंघाड़े – 400 ग्राम
  • प्याज़ – 3 (मध्यम आकर की )
  • टमाटर – 2 (100 ग्राम)
  • अदरक – ½ इंच टुकड़ा
  • हरी मिर्च – 2
  • तेल – 2 टेबल स्पून
  • हरा धनिया – 2-3 टेबल स्पून (बारीक कटा हुआ)
  • हींग – ½ पिंच
  • जीरा – ½ छोटी चम्मच
  • हल्दी पाउडर – ½ छोटी चम्मच
  • धनिया पाउडर – 1 छोटी चम्मच
  • लाल मिर्च पाउडर – ½ छोटी चम्मच
  • गरम मसाला – ¼ छोटी चम्मच से थोड़ा कम
  • नमक – ¾ छोटी चम्मच या स्वादानुसार
Singhada Sabji Recipe
Singhada Sabji Recipe

बनाने की विधि :

  • सिंघाड़े को धोकर कुकर में डाल दीजिए और 1 कप पानी डाल कर उबाल लीजिये।
  • कुकर में 1 सीटी आने पर गैस धीमा कर दीजिए और सिंघाड़े को धीमी आंच पर 2-3 मिनिट पकने दीजिए।
  • कुकर का प्रैशर खत्म होने पर कुकर खोलें और सिंगाड़े को प्याले में निकाल लीजिए।
  • सिंघाड़े को हल्का ठंडा होने दीजिए और सिंघाड़े के ठंडा होने पर इन्हें छील लीजिए।
  • अब हम सब्जी की ग्रेवी के लिए मसाला तैयार कर लेंगें।
  • ग्रेवी के लिए मसाला बनाने के लिए कटी हुई प्याज,अदरक, हरी मिर्च और लहसुन को मिक्सी के जार में डालकर बारीक पीसकर पेस्ट बना लें।
  • अब कटे हुए टमाटर को भी मिक्सी के जार में डालकर बारीक पेस्ट बना लें।
  • एक कढ़ाही में तेल डालकर गरम करने के लिए गैस पर रखें।
  • जब तेल गरम हो जाए तब गरम तेल में हींग और जीरा को डालकर तड़का लें।
  • जीरा भुनने के बाद इसमे प्याज और अदरक पेस्ट डालकर 3-4 मिनट तक भूनें।
  • जब मसाला भुन जाए तब टमाटर का पेस्ट डालकर करीब 2 मिनट के लिए कलछी से चलाते हुए भून लें।
  • अब इस भुने हुये मसाले में हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, धनियाँ पाउडर और नमक डाल दें

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  • कलछी से चलाकर मसाले को तब तक भूनें कि जब तक मसाले के ऊपर तेल न तैरने लगें।
  • अब इस भुने हुये मसाले में कटे हुए सिंघाड़े के टुकड़ो को डालकर कलछी से चलाते हुए 2 मिनट के लिए भून लें
  • आप अपने अनुसार ग्रेवी को जितना गाढा या पतला रखना चाहते है उसी मात्रा में पानी मिला लें।
  • अब सब्जी को ढक कर मीडियम आंच पर उबाल आने तक 5-6 मिनट के लिए पकने दें।
  • एक बार सब्जी को ढक्कन खोलकर चेक कर लें , यदि सिंघाड़े के पीस गल गये है तो गैस को बंद कर दें
  • सब्जी में गरम मसाला पाउडर और कटा हुआ हरा धनियां डाल कर मिला दें।
  • स्वादिष्ट सिंघाड़े की सब्जी बनकर तैयार हो गयी है।
  • गरमा गर्म सिंघाड़े की सब्जी को सर्विंग बाउल में निकालकर रोटी, परांठे या चावल के साथ सर्व करें।
Singhada Sabji Recipe

सुझाव / टिप्स

  • सिंगाड़े की सूखी सब्जी भी इसी तरह तैयार कर सकते हैं. सूखी सब्जी बनाने पर नमक की मात्रा कम डालें।
  • यदि आप बिना प्याज़ लहसुन के ये सब्ज़ी बनाना चाहते हैं तो आप प्याज़ वाले स्टेप को छोड़ दीजिये।
  • और उसकी जगह इसमें टमाटर-अदरक-हरी मिर्च का पेस्ट डाल दीजिए।
  • ग्रेवी को गाढा़ करने के लिए बेसन को किसी अलग से पैन में 1-2 छोटी चम्मच तेल डालकर बेसन को मध्यम आंच पर हल्का सा ब्राउन होने तक भून लीजिए।
  • मसाले में से तेल अलग होने पर इसमें भूना हुआ बेसन डाल कर मिक्स करते हुए हल्का सा भून लीजिए।
  • बाकि की विधि वैसी ही हैं जो ऊपर दी हैं।
  • बेसन को मसाले के साथ ही डाल कर भी भून सकते हैं।
  • अगर बेसन नहीं हैं तो आप बेसन के बदले भूने चने का आटा भी डाल कर मिक्स कर सकते हैं।

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उत्पन्ना एकादशी 2022 पर करें ये उपाय, जानें मुहूर्त, कथा और पूजन विधि

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Utpanna Ekadashi vrat katha pooja vidhi
Utpanna Ekadashi vrat katha pooja vidhi

हिंदू धर्म के पंचांग के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी हर साल अगहन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी का व्रत लक्ष्मीपति भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है. उत्पन्ना एकादशी 20 नवंबर 2022 दिन रविवार को मनाई जाएगी. Utpanna Ekadashi Muhurt Katha

मान्यता है कि इस दिन विधि विधान के साथ भगवान विष्णु की आराधना करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है. मार्गशीर्ष मास में पड़ने वाली एकादशी को उत्पन्ना एकादशी के नाम से जानते हैं। एकादशी की तिथि माह में दो बार पड़ती है, पहली कृष्ण पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में. कुछ भक्तजन भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए इस दिन व्रत भी करते हैं. भगवान विष्णु के भक्त उत्पन्ना एकादशी व्रत को पूरी श्रद्धा के साथ करते हैं. आइए जानते हैं उत्पन्ना एकादशी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्र…

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उत्पन्ना एकादशी 2022 शुभ मुहूर्त

मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 19 नवंबर को सुबह 10 बजकर 29 मिनट से लेकर 20 नवंबर को सुबह 10 बजकर 41 मिनट तक रहेगी. जबकि एकादशी के व्रत का पारण 21 नवंबर को सुबह 06 बजकर 40 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 47 मिनट तक रहेगा.

Utpanna Ekadashi Muhurt Katha

उत्पन्ना एकादशी 2022 पूजा-विधि

उत्पन्ना एकादशी व्रत की तैयारी एक दिन पहले यानी कि दशमी के दिन से ही करनी शुरू कर दें. इसके लिए दशमी को रात में खाना खाने के बाद अच्छे से दातून से दांतों को साफ़ कर लें ताकि मुंह जूठा न रहे. इसके बाद आहार ग्रहण न करें और खुद पर संयम रखें. साथी के साथ शारीरिक संबंध से परहेज करें. उत्पन्ना एकादशी के दिन सुबह उठकर नित्यकर्म करने के बाद. नए कपड़े पहनकर पूजाघर में जाएं और भगवान के सामने व्रत करने का संकल्प मन ही मन दोहरायें. इसके बाद भगवान विष्णु की आराधना करें और पंडित जी से व्रत की कथा सुनें. ऐसा करने से आपके समस्त रोग, दोष और पापों का नाश होगा. इस दिन मन की सात्विकता का ख़ास ख्याल रखें.

मन में न लायें दूषित विचार: किसी के प्रति भी बुरा या कोई यौन संबंधी विचार मन में न लायें. शाम के समय भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर दीपदान करे. अब अगले दिन यानी कि द्वादशी को इस व्रत को खोल दें. इसके बाद किसी पंडित जी या ब्राह्मण को अपनी स्वेच्छानुसार दान-दक्षिणा दें. इस बात का ख़ास ख्याल रखें कि इस दिन केवल सुबह और शाम के समय ही आहार ग्रहण करना है.

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क्यों कहा जाता है उत्पन्ना एकादशी

इस बात को बहुत कम ही लोग जानते हैं कि एकादशी एक देवी थी, जिनका जन्म भगवान विष्णु से हुआ था। एकादशी, मार्गशीर्ष मास की कृष्ण एकादशी को प्रकट हुई थी, जिसके कारण इस एकादशी का नाम उत्पन्ना एकादशी पड़ा. इसी दिन से एकादशी व्रत शुरु हुआ था। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से मोक्ष की प्राप्ति होती है। धर्म शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को करने से अश्वमेघ यज्ञ, तीर्थ स्नान व दान आदि करने से भी ज्यादा पुण्य मिलता है। उपवास से मन निर्मल और शरीर स्वस्थ होता है। ऐसा मान्यता है कि उत्पन्ना एकादशी के दिन से ही एकादशी व्रत करने की शुरुआत की जाती है।

Utpanna Ekadashi Muhurt Katha
Utpanna Ekadashi Muhurt Katha

उत्पन्ना एकादशी 2022 व्रत कथा

सतयुग में एक महाभयंकर दैत्य मुर हुआ करता था। दैत्य मुर ने इन्द्र आदि देवताओं पर विजय प्राप्त कर उन्हें, उनके स्थान से भगा दिया। तब इन्द्र तथा अन्य देवता क्षीरसागर में भगवान श्री विष्णु के पास गए । देवताओं सहित सभी ने श्री विष्णु जी से दैत्य के अत्याचारों से मुक्त होने के लिये विनती की। इन्द्र आदि देवताओं की प्रार्थना सुनकर भगवान श्री विष्णु बोले -देवताओं मै तुम्हारे शत्रु का शीघ्र ही वध करूंगा।जब दैत्यों ने श्री विष्णु जी को युद्ध भूमि में देखा तो उन पर अस्त्रों-शस्त्रों का प्रहार करने लगे।

भगवान श्री विष्णु मुर को मारने के लिये जिन-जिन शस्त्रों का प्रयोग करते वे सभी उसके तेज से नष्ट होकर उस पर पुष्पों के समान गिरने लगे़ ।श्री विष्णु उस दैत्य के साथ सहस्त्र वर्षों तक युद्ध करते रहे़ परन्तु उस दैत्य को न जीत सके। अंत में विष्णुजी शान्त होकर विश्राम करने की इच्छा से बद्रिकाश्रम में सिंहावती नाम की गुफा,जो बारह योजन लम्बी थी, उसमें शयन करने के लिये चले गये। दैत्य भी उस गुफा में चला गया, कि आज मैं श्री विष्णु को मार कर अपने सभी शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर लूंगा।

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जब देवी एकादशी ने की श्री विष्णु की रक्षा :

उस समय गुफा में एक अत्यन्त सुन्दर कन्या उत्पन्न हुई़ और दैत्य के सामने आकर युद्ध करने लगी। दोनों में देर तक युद्ध हुआ एवं उस कन्या ने राक्षस को धक्का मारकर मूर्छित कर दिया और उठने पर उस दैत्य का सिर काट दिया इस प्रकार वह दैत्य मृत्यु को प्राप्त हुआ।उसी समय श्री हरि की निद्रा टूटी,दैत्य को मरा हुआ देखकरआश्चर्य हुआ और विचार करने लगे कि इसको किसने मारा। इस पर कन्या ने उन्हें कहा कि दैत्य आपको मारने के लिये तैयार था उसी समय मैने आपके शरीर से उत्पन्न होकर इसका वध किया है। भगवान श्री विष्णु ने उस कन्या का नाम एकादशी रखा क्यों कि वह एकादशी के दिन श्री विष्णु के शरीर से उत्पन्न हुई थी इसलिए इस दिन को उत्पन्ना एकादशी के नाम से जाना जाता है।

Dev Uthani Ekadashi 2020
Dev Uthani Ekadashi 2020

उत्पन्ना एकादशी 2022 के उपाय

  • एकादशी के दिन किसी विष्णु मंदिर में पीले पुष्प की माला अर्पित करें।
  • एकादशी के दिन विष्णु भगवान को तुलसी के पत्तों वाली केशर की खीर का भोग लगाएं।
  • सुबह पीपल के पेड़ की पूजा करें, पेड़ की जड़ में कच्चा दूध चढ़ाएं और घी का दीपक जलाकर लौट आएं।
  • एकादशी के दिन निर्जला व्रत करना चाहिए। व्रत का संकल्प लें और व्रत द्वादशी के दिन ही तोड़ें।
  • इस दिन सुहागिन स्त्रियों को घर पर दावत दें, उन्हें फलाहार करवाएं और सुहा सामग्री दान करें।
  • एकादशी के दिन तुलसी पूजा अति लाभकारी है। तुलसी के घी का दीपक जलाये और आरती गाएं।
  • एकादशी पर तुलसी पूजा के साथ ॐ नमो भगवत वासुदेवाय मंत्र का जाप करें।
  • तुलसी माता की 11 बार परिक्रमा करें।
  • एकादशी के दिन दक्षिणावर्ती शंख की पूजा करें।
  • इस दिन भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करें।
  • एकादशी पर्व पर पीले फलों, अन्न और पीले वस्त्र का दान करें।

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आखिर क्यों काल भैरव पर लगा था भगवान ब्रह्मा की हत्या का पाप?

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kaal bhairav jayanti
kaal bhairav jayanti

हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष मास (अगहन) के कृष्ण की अष्टमी तिथि को कालभैरव जयंती (Kaal Bhairav Jayanti) मनाई जाती है। इस साल कालाष्टमी 16 नवंबर 2022 को मनाई जाएगी. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान काल भैरव का अवतरण हुआ था। धार्मिक ग्रंथों में काल भैरव भगवान को शिव जी का रौद्र स्वरूप बताया गया है।

भक्तों के लिए काल भैरव दयालु, कल्याण करने वाले और शीघ्र ही प्रसन्न होने वाले देव माने जाते हैं। लेकिन अनैतिक कार्य करने वालों के लिए ये दंडनायक हैं। काल भैरव जयंती के दिन भगवान काल भैरव जी की विधि विधान के साथ पूजा की जाती है। आइए जानते हैं काल भैरव जयंती की डेट, पूजा का मुहूर्त और महत्व…

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कालभैरव दो शब्दों से मिलकर बना है। काल और भैरव। काल का अर्थ मृत्यु, डर और अंत। भैरव का मतलब है भय को हरने वाला यानी जिसने भय पर जीत हासिल किया हो। काल भैरव की पूजा करने से मृत्यु का भय दूर होता है और कष्टों से मुक्ति मिलती है।

काल भैरव की पूजा से रोगों और दुखों से निजात मिल जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान काल भैरव का जन्म मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर हुआ था। इन्हें बीमारी, भय, संकट और दुख को हरने वाले स्वामी माने जाते हैं। इनकी पूजा से हर तरह की मानसिक और शारीरिक परेशानियां दूर हो जाती हैं। 

काल भैरव जयंती शुभ मुहूर्त

Kaal Bhairav Ashtmi Muhurat

  • काल भैरव जयंती – मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि बुधवार, 16 नवंबर 2022
  • अष्टमी तिथि आरंभ – बुधवार 16 नवंबर 2022, सुबह 05 बजकर 49 मिनट पर
  • अष्टमी तिथि का समापन – गुरुवार 17 नवंबर 2022, सुबह 07 बजकर 57 मिनट तक
Kaal Bhairav Jayanti
Kaal Bhairav Jayanti

काल भैरवाष्टमी व्रत विधि

Kaal Bhairav Jayanti Vrat vidhi

नारद पुराण के अनुसार कालाष्टमी के दिन कालभैरव और मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। इस रात देवी काली की उपासना करने वालों को अर्ध रात्रि के बाद मां की उसी प्रकार से पूजा करनी चाहिए जिस प्रकार दुर्गा पूजा में सप्तमी तिथि को देवी कालरात्रिकी पूजा का विधान है।

इस दिन शक्ति अनुसार रात को माता पार्वती और भगवान शिव की कथा सुन कर जागरण का आयोजन करना चाहिए। आज के दिन व्रती को फलाहार ही करना चाहिए। कालभैरो की सवारी कुत्ता है अतः इस दिन कुत्ते को भोजन करवाना शुभ माना जाता है।

काल भैरव जयंती के दिन भगवान काल भैरव जी की विधि विधान के साथ पूजा की जाती है। काल भैरव जी को काशी का कोतवाल कहा जाता है। ऐसी मान्यता है काशी में रहने वाला हर व्यक्ति को यहां पर रहने के लिए बाबा काल भैरव की आज्ञा लेनी पड़ती है। कहते हैं इनकी नियुक्ति स्वयं भगवान शिव ने की थी। इसके पीछे एक पौराणिक कथा मिलती है। 

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कालभैरव का जन्म कथा 

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार ब्रह्मा, विष्णु और महेश इन तीनों में कौन सबसे श्रेष्ठ है इसको लेकर बहस चली। सभी देवताओं को बुलाकर यह पूछा गया कि श्रेष्ठ कौन है? देवताओं ने अपने विचार व्यक्त किया जिसका समर्थन विष्णु जी और भगवान शिव ने किया लेकिन ब्रह्मा जी इस विपरीत शिव जी से अपशब्द कह दिए ।

भगवान शिव इस बात पर क्रोधित हो गए और उस क्रोध में अपने रूप से भैरव को जन्म दिया। शिवजी के इस रूप को देखकर सभी देवता घबरा गए। भैरव ने क्रोध में ब्रह्माजी के 5 मुखों में से 1 मुख को काट दिया, तब से ब्रह्माजी के पास 4 मुख ही हैं। इस प्रकार ब्रह्माजी के सिर को काटने के कारण भैरवजी पर ब्रह्महत्या का पाप आ गया।

ब्रह्माजी ने भैरव बाबा से माफी मांगी तब जाकर शिवजी अपने असली रूप में आए। भगवान शिव के इस भैरव अवतार का वाहन काला कुत्ता है। इनके एक हाथ में छड़ी है। इस अवतार को ‘महाकालेश्वर’ के नाम से भी जाना जाता है इसलिए ही इन्हें दंडाधिपति भी कहते हैं।

Kaal Bhairav Jayanti
Kaal Bhairav Jayanti

लगा था ब्रह्महत्या का पाप

इसी समय एक दिव्यज्योति के रूप में भगवान रूद्र प्रकट हुए,ब्रह्मा जी ने कहा कि हे रूद्र! तुम मेरे ही शरीर से पैदा हुए हो अधिक रुदन करने के कारण मैंने ही तुम्हारा नाम ‘रूद्र’ रखा है अतः तुम मेरी सेवा में आ जाओ, ब्रह्मा के इस आचरण पर शिव को भयानक क्रोध आया और उन्होंने भैरव नामक पुरुष को उत्पन्न किया और कहा कि तुम ब्रह्मा पर शासन करो। उस दिव्यशक्ति संपन्न भैरव ने अपने बाएं हाथ की सबसे छोटी अंगुली के नाखून से शिव के प्रति अपमानजनक शब्द कहने वाले ब्रह्मा के पांचवे सिर को ही काट दिया जिसके परिणामस्वरूप इन्हें ब्रह्महत्या का पाप लगा।

कहलाते हैं काशी के कोतवाल

शिव के कहने पर भैरव ने काशी प्रस्थान किया जहां उन्हें ब्रह्महत्या से मुक्ति मिली। इसके बाद वो ब्रह्म हत्या के पाप से छुटकारा पाने के लिए भटकते-भटकते काशी पहुंचे. वहां जाकर उनके मन को शांति मिली. उसी समय आकाश से भगवान काल भैरव के लिए आकाशवाणी हुई कि उन्हें काशी का कोतवाल (रखवाला) नियुक्त किया गया है और उन्हें वहीं निवास कर लोगों को उनके पापों से छुटकारा दिलाना होगा. आज भी ये यहाँ काशी के कोतवाल के रूप में पूजे जाते हैं। इनके दर्शन किए बिना विश्वनाथ के दर्शन अधूरे रहते हैं । 

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काल भैरव जयंती का महत्व

Kaal Bhairav Ashtmi Mahatva

इसे काल भैरव अष्टमी के नाम से भी जानी जाती है. मान्‍यता है कि जो व्यक्ति काल भैरव जयंती के दिन काल भैरव जी की विधिवत श्रद्धा से पूजा करता है, उससे वे प्रसन्‍न होते हैं. साथ ही भैरव जी की पूजा से भूत-प्रेत और ऊपरी बाधा आदि जैसी समस्याएं भी दूर होती हैं. हिंदू धर्म में काल भैरव जी की पूजा का विशेष महत्व होता है. इन्‍हें भगवान शिव के ही स्वरूप माना जाता है.

काल भैरव जी को प्रसन्न करने के लिए और उनकी कृपा प्राप्‍त करने के लिए कालाष्टमी के दिन से भगवान भैरव की प्रतिमा के आगे सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए. इस दिन सुबह जल्‍दी उठकर स्नान करके स्‍वच्‍छ वस्त्र धारण करने चाहिए. भगवान काल भैरव को काले तिल, उड़द और सरसों का तेल अर्पित करना चाहिए. साथ ही मंत्रों के जाप के साथ ही उनकी विधिवत पूजा करने से वह प्रसन्‍न होते हैं और उनकी कृपा प्राप्‍त होती है.

Kaal Bhairav Jayanti
Kaal Bhairav Jayanti

कालभैरव के बारे में जानकारी

  • कालभैरव भगवान शिव के अवतार हैं और ये कुत्ते की सवारी करते है।
  • भगवान कालभैरव को रात्रि का देवता माना गया है। कालभैरव काशी का कोतवाल माना जाता है।
  • काल भैरव की पूजा से लंबी उम्र की मनोकामना पूरी होती है।
  • इनकी आराधना का समय मध्य रात्रि में 12 से 3 बजे का माना जाता है।
  • काल भैरव की उपासना में चमेली का फूल चढ़ाया जाता है।
  • भैरव मंत्र, चालीसा, जाप और हवन से मृत्यु का भय दूर हो जाता है।
  • शनिवार और मंगलवार के दिन भैरव पाठ करने से भूत प्रेत और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिल जाती है।
  • जो लोग शनि, राहु-केतु और मंगल ग्रह से पीड़ित हैं उनको काल भैरव की उपासना जरूर करनी चाहिए।
  • भैरव जी का रंग श्याम वर्ण तथा उनकी 4 भुजाएं हैं।
  • मान्यता के अनुसार भगवान भैरव का वाहन काला कुत्ता माना जाता है। इस दिन काले कुत्ते को रोटी जरूर खिलानी चाहिए।
  • कालाष्टमी पर किसी पास के मंदिर जाकर कालभैरव को दीपक जरूर लगाना चाहिए।

कालभैरव के प्रसिद्ध मंदिर

  • काल भैरव मंदिर, काशी – वैसे तो भारत में बाबा कालभैरव के अनेक मंदिर है जिसमें से काशी के काल भैरव मंदिर विशेष मान्यता है। यह काशी के विश्वनाथ मंदिर से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद जो भक्त इनके दर्शन नहीं करता है उसकी पूजा सफल नहीं मानी जाती है।
  • कालभैरव मंदिर, उज्जैन – काशी के बाद भारत में दूसरा प्रसिद्ध कालभैरव का मंदिर उज्जैन नगर के क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है। यहां ऐसी परांपरा है कि लोग भगवान काल भैरव को प्रसाद को रुप में केवल शराब ही चढ़ाते हैं।
  • बटुक भैरव मंदिर, नई दिल्ली – बटुक भैरव मंदिर दिल्ली के विनय मार्ग पर स्थित है। बाबा बटुक भैरव की मूर्ति यहां पर विशेष प्रकार से एक कुएं के ऊपर विराजित है। यह प्रतिमा पांडव भीमसेन ने काशी से लाए थे।
  • बटुक भैरव मंदिर, पांडव किला – दिल्ली में बाबा भैरव बटुक का मंदिर प्रसिद्ध है। इस मंदिर की स्थापना पांडव भीमसेन के द्वारा की गई थी। वास्तव में पांडव भीमसेन द्वारा लाए गए भैरव दिल्ली से बाहर ही विराज गए तो पांडव बड़े चिंतित हुए। उनकी चिंता देखकर बटुक भैरव ने उन्हें अपनी दो जटाएं दे दीं और उसे नीचे रख कर दूसरी भैरव मूर्ति उस पर स्थापित करने का निर्देश दिया।
  • घोड़ाखाड़ बटुक भैरव मंदिर, नैनीताल – नैनीताल के समीप घोड़ाखाल का बटुकभैरव मंदिर भी अत्यंत प्रसिद्ध है। यह गोलू देवता के नाम से प्रसिद्धि है। मंदिर में विराजित इस श्वेत गोल प्रतिमा की पूजा के लिए प्रतिदिन श्रद्धालु भक्त पहुंचते हैं।

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ब्लैक टी पीने के फायदे तो बहुत हैं लेकिन आज इसके नुकसान भी जान लीजिये

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Black Tea Benefits and Side Effects in Hindi
Black Tea Benefits and Side Effects in Hindi

ब्लैक टी दुनिया में पी जाने वाली सबसे लोकप्रिय पेय पदार्थों में से एक है। काली चाय के प्रभावशाली स्वास्थ्य लाभों में तनाव को कम करने, उच्च कोलेस्ट्रॉल को कम करने, मौखिक स्वास्थ्य में सुधार करने और हड्डी के स्वास्थ्य को बढ़ावा देना आदि शामिल है। आइए सुबह ब्लैक टी पीने के फायदे और नुकसान के बारे में जानते हैं। Black Tea Benefits and Side Effects

दुनिया में अधिकांश लोग ऐसे हैं जो काली चाय तो पीते हैं परन्तु उनके फायदे नहीं जानते. लगभग 80% मनुष्य काली चाय का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि यह आसानी से उपलब्ध भी हो जाती है और आप इसे बाजार से सैकड़ों फ्लेवर से खरीद सकते हैं.

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इन्ही चीजों को ध्यान में रखते हुए आज हम लेख के माध्यम से आप को यह अवगत कराएंगें कि काली चाय पीने के फायदे और नुकसान क्या क्या हैं? ज्यादातर लोगों को मॉर्निंग टी या बेड टी पीने की आदत होती है. इसलिए हम उन्हें जो बेड टी के रूप में काली चाय पीते हैं इससे क्या-क्या फायदा होता है ?

कैंसर से बचाव के लिए

कैंसर शरीर में कहीं भी असामान्य कोशिकाओं (Abnormal Cells) का अनियंत्रित विकास है। इन असामान्य कोशिकाओं को कैंसर कोशिका, घातक कोशिक या ट्यूमर कोशिका भी कहा जाता है। ये कोशिकाएं सामान्य शरीर के ऊतकों में पैठ बना सकती हैं। शोध से पता चला है कि ब्लैट टी पीने से कैंसर होने की आशंका बहुत कम हो जाती है। रोजाना एक कप ब्लैक टी कैंसर से बचाव में सहायक है।

Black Tea Benefits and Side Effects in Hindi
Black Tea Benefits and Side Effects in Hindi

इम्युनिटी बूस्ट के लिए

प्रतिरक्षा या इम्युनिटी की कमी की बीमारी तब होती है जब इम्युनिटी सिस्टम ठीक से काम नहीं करता है। ब्लैक टी एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर होती है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बूस्ट करने में मददगार है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होने से आप बीमारियों से दूर रहते हैं और स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है।

तनाव से बचने के लिए

ब्लैक टी खपत न केवल तनाव हार्मोन, कोर्टिसोल के उत्पादन को कम करता है बल्कि इसे सामान्य करता है। इसके अलावा, इस चाय में पाए जाने वाले एमिनो एसिड, एल-थीनाइन तनाव से मुक्ति दिलाते है और विश्राम को बढ़ावा देता है।

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दिल से जुड़ी बीमारियों के लिए

कार्डियोवैस्कुलर बीमारी (सीवीडी) रोगों की एक श्रेणी है जिसमें दिल या रक्त वाहिकाओं को शामिल किया जाता है। हृदय या दिल के रोग ऐसी स्थितियों का वर्णन करता है जो आपके दिल को प्रभावित करते हैं। एक अध्ययन के अनुसार, रोजाना 3 कप ब्लैक टी पीने से दिल से जुड़े रोग के होने का खतरा काफी कम हो जाता है।

पसीने की बदबू के लिए

जब बॉडी से बदबू आये तो यह न व्यक्ति के लिए बल्कि उसके आसपास के लोगों के लिए समस्या का कारण बन सकता है। यदि आप भी बहुत अधि‍क पसीना आने और पसीने की दुर्गंध से परेशान हैं तो सुबह ब्लैक टी पीना काफी लाभकारी रहेगा। ये बैक्टीरिया को पनपने नहीं देता, जिससे पसीने से बदबू नहीं आती है।

Black Tea Benefits and Side Effects in Hindi
Black Tea Benefits and Side Effects in Hindi

बढ़ती उम्र के लक्षण

एंटीऑक्सीडेंट के लाभों में स्वस्थ, एंटी-एजिंग स्किन, हृदय स्वास्थ्य और बेहतर आंखों का स्वास्थ्य शामिल हैं। ब्लैक टी में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर में मौजूद टॉक्सि्न्स को बाहर निकालने में मददगार होते हैं। इसकी वजह से बढ़ती उम्र के लक्षण जल्दी हावी नहीं हो पाते हैं।

अस्थमा के रोगियों के लिए

यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि काली चाय अस्थमा रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद है, क्योंकि यह वायु मार्ग को फैलाती है, जिससे अधिक आसानी से सांस लेने की कोई परेशानी नहीं होती।

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ब्लैक टी के नुकसान

आहार विशेषज्ञ लगातार कैफीन की अत्यधिक खपत के खिलाफ चेतावनी देते हैं क्योंकि यह अवांछित साइड इफेक्ट्स जैसे अनिद्रा, सांस लेने में परेशानी और नाड़ी की दर में वृद्धि करता है। यहां ब्लैक टी सेवन के कुछ आम साइड इफेक्ट्स हैं।

स्वास्थ्य पेशेवरों के मुताबिक, गर्भवती महिलाओं को एक दिन में दो कप से अधिक काली चाय या ब्लैक टी नहीं पीना चाहिए। अन्य प्रकार की चाय की तुलना में, काली चाय अधिकतम कैफीन सामग्री से भरा हुआ है। चूंकि काली चाय कैफीन से भरी हुई है, इसलिए यह गर्भपात के खतरे को बढ़ाती है।

इसकी उच्च कैफीन सामग्री कार्डियोवैस्कुलर विकार, ग्लूकोमा, उच्च रक्तचाप और चिंता विकार वाले लोगों पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।

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हर साल नवंबर माह के चौथे रविवार को ही क्यों मनाया जाता है एनसीसी दिवस, जानें वजह

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NCC Day 2021

Ncc day kab manaya jata hai : दोस्तों विश्व का सबसे बड़ा वर्दीधारी युवा संगठन राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) रविवार को अपना 74वां स्थापना दिवस मनाएगा. एनसीसी दिवस (NCC Day 2022) हर साल नवंबर माह के चौथे रविवार को मनाया जाता है।

NCC की फुल फॉर्म ‘राष्ट्रीय कैडेट कोर’ (National Cadet Corps) है। इसकी स्थापना 16 अप्रैल 1948 में कुंजरु समिति ने की ​थी। यह एक त्रि-सेवा संगठन है, इसका आदर्श वाक्य “एकता और अनुशासन” है। पहला एनसीसी दिवस 1948 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय पंडित जवाहर लाल नेहरू के निर्देशों के तहत मनाया गया था। उन्होने एनसीसी दिवस मनाने का प्रावधान शुरू किया था।

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एनसीसी का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। इस मुख्यालय को कमांड करने वाला अधिकारी डायरेक्टर जनरल एनसीसी कहलाता है जो लेफ्टिनेंट पद का अफसर होता है। यह सीधे भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के प्रति उत्तरदायी होता है। महानिदेशक के अधीन भारत के विभिन्न राज्यों में उप महानिदेशक एनसीसी कार्यरत हैं, जो ब्रिगेडियर के समकक्ष पद के अफसर होते हैं। इनका मुख्यालय राज्य की राजधानी या राज्य के किसी बड़े शहर में स्थित होता है।

एन सी सी क्या है

NCC (एनसीसी) भारत का एक सैन्य कैडेट कोर है जो स्कूल और कॉलेज के छात्रों को सेना, नौसेना और वायु सेना के लिए उपयुक्त सैन्य प्रशिक्षण प्रदान करता है. यह 3 साल का एक कोर्स टाइप होता है जिसे पूरा करने पर योग्यता अनुसार सर्टिफिकेट भी मिलता है. ये मानिए कि इसे ज्वाॅइन करने वाला छात्र फौजी ही बन जाता है.

इसके झंडे में तीन रंग है: लाल.. सेना के लिए, गहरा नीला.. नौसेना के लिए और हल्का नीला.. वायु सेना के लिए है। NCC के छात्र अलग-अलग तरह की वर्दी पहनते है- खाकी.. सेना के लिए, सफेद.. नौसेना के लिए और हल्की नीली.. वायु सेना के लिए। काॅलेज में NCC और NSS दोनों इकट्ठी भी ज्वाॅइन की जा सकती है।

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कैसे करें ज्‍वॉइन

एनसीसी ज्‍वॉइन करने के लिए आपका भारतीय नागरिक होना पहली और अनिवार्य शर्त है.

इसके अलावा नेपाल के नागरिकों को भी एनसीसी ज्‍वॉइन करने की छूट है.

किसी मान्यता प्राप्त स्कूल, कॉलेज या यूनिवर्सिटी का छात्र होना जरूरी.

छात्रों को मानसिक तथा शारीरिक रूप से फिट होना जरूरी है.

एनसीसी ज्‍वॉइन करने के लिए न्यूनतम आयु 12 साल और अधिकतम आयु 26 वर्ष है.

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NCC के सर्टिफिकेट

एनसीसी लड़के और लड़कियों दोनों के ही लिए है और इसलिए ही इसमें 4 तरह की डिविजन हैं जिसमें से 2 डिविजन लड़कियों के लिए और 2 डिविजन लड़कों के लिए हैं. लड़कों की डिविजन को Junior Division (JD) और Senior Division (SD) कहते हैं और लड़कियों की डिविजन को Junior Wing (JW) और Senior Wing (SW) कहा जाता है.

1. A Certificate (NCC) – ये सर्टिफिकेट जूनियर डिविजन के उन कैडेट्स को दिया जाता है जो अपनी 2 साल की ट्रेनिंग को पूरा कर चुके होते हैं.

2. B Certificate (NCC) – ये सर्टिफिकेट सीनियर डिविजन के छात्रों को मिलता है. ये भी दो साल की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद ही मिलता है.

3. C Certificate (NCC) – ये सर्टिफिकेट सीनियर डिविजन के उन छात्रों को मिलता है जिन्‍होंने 3 साल की ट्रेनिंग पूरी कर ली होती है. एनसीसी B औ C सर्टिफिकेट के लिए यह जरूरी नहीं है आपके पास एनसीसी ए सर्टिफिकेट भी होना चाहिए.

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भारत में एनसीसी के कितने निदेशालय :

भारत में एनसीसी के 17 निदेशालय है। हर साल 5 जनवरी से गणतंत्र दिवस शिविर (RDC) गैरीसन परेड ग्राउंड, दिल्ली छावनी में आयोजित किया जाता है। इसमें देश भर के लगभग 1700 कैडिटों के साथ सभी 17 निदेशालय एवं युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत कुछ मित्र राष्ट्रों के कैडिट भी भाग लेते हैं। वर्तमान में एनसीसी कैडिट्स की स्वीकृत संख्या कुल 13 लाख है। देश के सभी जिलों के 8410 स्कूलों तथा 5251 कॉलेजों में एनसीसी है। इनको प्रशिक्षित करने के लिए देश में 91 ग्रुप हैडक्वार्टस, 763 आर्मी बिग यूनिट्स (टेक्नीकल एवं गर्ल्स सहित),58 नेवल विंग यूनिट्स तथा 58 एअर स्क्वाड्रन कार्यरत हैं। राष्ट्रीय कैडिट कोर का नेटवर्क केंद्र शासित अंडमान निकोबार एवं लक्षदीप, उत्तर में लेह, पश्चिम में कच्छ तथा पूर्व में कोहिमा तक फैला हुआ है।

राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) भारतीय सैन्य कैडेट कोर है, इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। इसकी स्थापना 1948 के नेशनल कैडेट कोर अधिनियम के तहत की गयी थी। इसका आदर्श वाक्य ‘एकता और अनुशासन’ है। यह एक त्रि-सेवा थल सेना, वायु सेना तथा नौसेना का संगठन है। इसमें भारतीय स्कूलों, महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों से छात्रों को स्वैच्छिक आधार पर भर्ती किया जाता है। उन कैडेट्स को आधारभूत सैन्य प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। कोर्स पूरा करने के बाद उन पर सक्रीय सैन्य सेवा देने की बाध्यता नहीं होती।

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NCC गान के रचयिता

एनसीसी (NCC) गान के रचयिता सुदर्शन फाकिर (Sudarshan Faakir) है। राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) का राष्ट्रीय गीत ‘हम सब भारतीय हैं’ लिखने वाले अज़ीम शायर सुदर्शन फाक़िर का जन्म पूर्वी पंजाब के फिरोजपुर में 19 दिसंबर, 1934 को हुआ था। बहुत ही सीधे सरल शब्दों में बातों के कह देने में माहिर सुदर्शन फ़ाकिर को एक विशिष्ट शायर का दर्जा प्राप्त था। जालंधर के डीएवी कॉलेज से बीए करने के बाद राजनीति शास्त्र तथा अंग्रेजी में एमए किया। उनका निधन 18 फरवरी, 2008 को हुआ।

एनसीसी गीत

हम सब भारतीय हैं, हम सब भारतीय हैं।
अपनी मंज़िल एक है, हा हा हा एक है, हो हो हो एक है।
हम सब भारतीय हैं।
कश्मीर की धरती रानी है, सरताज हिमालय है,
सदियों से हमने इस को अपने खून से पाला है।
देश की रक्षा की खातिर हम शमशीर उठा लेंगे,
हम शमशीर उठा लेंगे।
बिखरे-बिखरे तारे हैं हम, लेकिन झिलमिल एक है,
हा हा हा एक है, हो हो हो एक है,
हम सब भारतीय है।
मंदिर, गुरूद्वारे भी हैं यहाँ, और मस्जिद भी है यहाँ,
गिरिजा का है घड़ियाल कहीं मुल्ला की कहीं है अजां
एक ही अपना राम हैं, एक ही अल्लाह ताला है,
एक ही अल्लाह ताला हैं।
रंग बिरंगे दीपक हैं हम, लेकिन जगमग एक है,
हा हा हा एक है, हो हो हो एक है.
हम सब भारतीय हैं, हम सब भारतीय हैं।

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NCC का मोटो

इसका मोटो एकता और अनुशासन (Unity and discipline) है। एनसीसी एक अन्तर्सेवा संगठन है। पंडित हृदयनाथ कुंजरू समिति की सिफारिश के आधार पर 1948 के 31वें एनसीसी अधिनियम के तहत 16 जुलाई 1948 को नेशनल कैडेट कोर (National Cadet Corps-NCC) की ​स्थापना की गई। एनसीसी का झंडा तीन रंग की, तीन समान खड़ी पट्टियों में बँटा हुआ होता है। इसमें सबसे पहले दाहिने लाल रंग की पट्टी, बीच में गहरी नीले रंग की पट्टी तथा बायें आसमानी रंग की पट्टी है जो कि क्रमशः थल सेना, नौ सेना और वायु सेना का प्रतीक है। झंडे के बीच में 16 पंखुड़ियों का बना एक चक्र है इसी चक्र के बीच में ‘NCC’ शब्द लिखा है। इसी के नीचे हिंदी भाषा में एनसीसी का आदर्श वाक्य ‘एकता और अनुशासन’ लिखा हुआ होता है।

वर्तमान में एनसीसी कैडिट्स की स्वीकृत संख्या कुल 13 लाख है। देश के सभी जिलों के 8410 स्कूलों तथा 5251 कॉलेजों में एनसीसी है। इनको प्रशिक्षित करने के लिए देश में 91 ग्रुप हैडक्वार्टस, 763 आर्मी बिग यूनिट्स (टेक्नीकल एवं गर्ल्स सहित),58 नेवल विंग यूनिट्स तथा 58 एअर स्क्वाड्रन कार्यरत हैं। राष्ट्रीय कैडिट कोर का नेटवर्क केंद्र शासित अंडमान निकोबार एवं लक्ष्यद्वीप, उत्तर में लेह, पश्चिम में कच्छ तथा पूर्व में कोहिमा तक फैला हुआ है।

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NCC का उद्देश्य

Aims of NCC

एनसीसी का उद्देश्य (Aims of NCC) कैडेट्स में अनुशासन की भावना, ड्रेस पहनना, चलना फिरना सीखना, मिल जुलकर कार्य करना, आदेशों को मानने की आदत डालना, कमांड कंट्रोल सीखना व आत्मबल का विकास करना है। पंडित हृदयनाथ कुंजरू समिति की सिफारिश के आधार पर 1948 के 31वें एनसीसी अधिनियम के तहत 16 जुलाई 1948 को नेशनल कैडेट कोर (National Cadet Corps-NCC) की ​स्थापना की गई। इसका मोटो एकता और अनुशासन (Unity and discipline) है। राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

राष्ट्रीय कैडिट कोर ‘एनसीसी’ के उद्देश्य (Aims of NCC) हैं–

देश के युवाओं में चरित्र, साहचर्य, अनुशासन, नेतृत्व, धर्मनिरपेक्षता, रोमांच, स्पोर्ट मैनशिप, तथा नि:स्वार्थ सेवा-भाव का संचार करना।

संगठित, प्रशिक्षित एवं प्रेरित युवकों का एक मानव संसाधन तैयार करना। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में नेतृत्व प्रदान करना एवं देश की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहना।

सशस्त्र सेना में जीविका (कैरियर) बनाने के लिए युवाओं को प्रेरित करने हेतु उचित वातावरण प्रदान करना।

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वर्तमान में एनसीसी कैडिट्स की स्वीकृत संख्या कुल 13 लाख है। देश के सभी जिलों के 8410 स्कूलों तथा 5251 कॉलेजों में एनसीसी है। इनको प्रशिक्षित करने के लिए देश में 91 ग्रुप हैडक्वार्टस, 763 आर्मी बिग यूनिट्स (टेक्नीकल एवं गर्ल्स सहित),58 नेवल विंग यूनिट्स तथा 58 एअर स्क्वाड्रन कार्यरत हैं। राष्ट्रीय कैडिट कोर का नेटवर्क केंद्र शासित अंडमान निकोबार एवं लक्ष्यद्वीप, उत्तर में लेह, पश्चिम में कच्छ तथा पूर्व में कोहिमा तक फैला हुआ है।

NCC के फायदे

Benefits of NCC

छात्रों के लिए एनसीसी के कई सारे लाभ है. NCC तीन साल की होती है, पहले साल ‘A’, दूसरे साल ‘B’ और तीसरे साल ‘C’ grade का certificate मिलता है. एनसीसी में शामिल होने से छात्रों को मेडिकल, उच्च शिक्षा से लेकर आर्मी के GD की और NDA की लिखित परीक्षा तक में छूट मिलती है. यदि आपके शरीर में छोटी-मोटी कमी है तो NDA medical में एनसीसी सर्टिफिकेट से मिलता है. लेकिन आप बड़े फाॅल्ट से नही बच सकते. जैसे:- घुटना आपस में नही सटना चाहिए, दाँतो का ज्यादा प्रॉब्लम ना हो, और आँखों और पैर में ज्यादा प्रॉब्लम नही होनी चाहिए.

एनसीसी का सर्टिफिकेट (Certificate) होने पर आपको उच्च शिक्षा में अलग से कोटा मिलता है. Ncc का ‘C’ Certificate होने से आपको आर्मी के GD की और NDA की लिखित परीक्षा नही देनी पड़ती और कई जगह छूट (‘A’ certificate को 5%, ‘B’ certificate को 8% और ‘C’ certificate को 10%) भी मिलती है।

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चंद्र ग्रहण के दौरान क्या खाएं और क्या ना खाएं ? भूलकर भी ना करें इसका सेवन

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What to Eat During Chandra Grahan
What to Eat During Chandra Grahan

8 नवंबर 2022 दिन मंगलवार को साल का आखिरी और दूसरा चंद्र ग्रहण लग रहा है. ग्रहण काल में कई चीजें ऐसी हैं, जिन्हें करने की मनाही होती है. उनमें से एक काम भोजन करना भी शामिल है. पर किन्हीं विशेष परिस्थितियों में भोजन करने की सलाह दी जाती है. चंदग्रहण के समय सूतक लग जाता है जिस दौरान कई काम करने के लिए मना किया जाता है। What to Eat During Chandra Grahan

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इस दौरान खाना पकाने और खाने के मनाही होती है लेकिन बच्चे, बूढ़े और गर्भवती महिलाओं के लिए खाना खाना बहुत जरूरी होता है। वहीं, किसी बीमारी व्यक्ति के लिए भी भोजन करना जरूरी होता है। मगर आज हम आपको कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे आप जरूरत पड़ने पर चंद्रग्रहण के समय का सकते हैं। चलिए जानते हैं कि इस दौरान आप क्या क्या चीजें खा सकते हैं?

ग्रहण में क्यों नहीं खाना चाहिए ?

चंदग्रहण के दौरान खाना खाना बिल्कुल वर्जित होता है। दरअसल, चंद्र ग्रहण के दौरान खाना इसलिए नहीं खाना चाहिए क्योंकि इस दौरान वायुमंडल से धरती पर कई तरह के बैक्टीरिया और संक्रमण आते हैं, जोकि खाने में मिल जाते हैं। ऐसे में इस दौरान खाने वाली कोई चीज खाने चीज खाने से आप जल्दी बीमार हो सकते हैं और कई बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं।

What to Eat During Chandra Grahan
What to Eat During Chandra Grahan

ग्रहण काल में कौन खा सकता है?

वैसे तो ग्रहण काल में भोजन ग्रहण करने की मनाही होती है. परंतु गर्भवती, बच्चे और बुजुर्ग जरूरत पड़ने पर कुछ चीजें खा सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि बुजुर्गों को उम्र के अनुसार दवाइयों की आवश्यकता होती है. ऐसे ही गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर भोजन और पानी पीने की सलाह दी जाती है. उनके पेट में पल रहे शिशु को पोषण की जरूरत होती है, जिसकी वजह से गर्भवती महिलाओं को लंबे समय तक भूखा ना रहने के लिए कहा जाता है. इसी तरह छोटे बच्चे भी अधिक देर तक भूखे नहीं रह सकते. उन्हें भी खाना खाने के लिए मना नहीं किया जा सकता. इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उनके भोजन में तुलसी का पत्ता अवश्य डला हो.

चंदग्रहण के दौरान खाएं ये चीजें

सात्विक भोजन

बच्चे, बुजुर्ग, प्रैग्नेंट महिलाएं या बीमार व्यक्ति के लिए समय पर भोजन करना बहुत जरूरी होता है। ऐसे में आप उन्हें सात्विक भोजन दे सकते हैं, जो हल्का और पचाने में आसान हो।

मेवों का सेवन

बीमारी के चलते जो लोग ज्यादा देर तक भूखे नहीं रह सकते वह मेवे या नट्स का सेवन कर सकते हैं। इससे शरीर को एनर्जी भी मिलेगी और चंदग्रहण के दौरान आपको कोई नुकसान भी नहीं होगा।

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कच्ची सब्जियां

चंद्रग्रहण के दौरान आप कच्ची सब्जियों का सेवन कर सकते हैं। क्योंकि इस दौरान कच्ची सब्जियों में कोई बदलाव देखने को नहीं मिलता। ग्रहण के दौरान पका हुआ भोजन नहीं खाना चाहिए क्योंकि यह पूरी तरह से सड़ने लगता है।

फलों का सेवन

अच्छा होगा कि आप चंद्रग्रहण के दौरान फलों का सेवन करें। यह आपके शरीर की एनर्जी को बूस्ट करने में मदद करेगा। इसके साथ ही फलों के सेवन से आपका शरीर डिटॉक्स भी हो जाएगा।

Chandra Grahan Date and Time

इन चीजों से करें परहेज

चंद्रग्रहण के दौरान मांसाहारी भोजन, शराब, सिगरेट और हाई प्रोटीन फ्रूड्स का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इससे आपके शरीर को नुकसान हो सकता है। इसलिए ग्रहण के समय आपको सामान्य भोजन ही करना चाहिए।

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चंद्र ग्रहण के बाद ये 9 राशि वाले अगले एक महीने तक रहें सावधान

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Chandra grahan ka rashiyo par prabhav : साल के अंतिम चंद्र ग्रहण का नाजारा भारत के कई बड़े शहरों में देखा गया. ज्योतिषविदों के अनुसार ये एक पूर्ण चंद्र ग्रहण था जिसका प्रभाव करीब एक महीने तक बना रहता है.

यह चंद्र ग्रहण ग्रह गोचर के नज़रिए से भी खास रहने वाला है. कई दशकों बाद ऐसी स्थिति बन रही है जब चंद्र ग्रहण के बाद एक ही महीने में 5 प्रमुख ग्रहों की चाल बदलेगी. इस महीने सूर्य, मंगल, बुध, गुरु और शुक्र जैसे प्रमुख ग्रहों का राशि परिवर्तन होने वाला है.

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मंगल-बुध का 13 नवंबर को गोचर

चंद्र ग्रहण के बाद ग्रहों के सेनापति मंगल और बुध राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं. इस दिन बुद्धि के प्रदाता बुध अस्त अवस्था में तुला राशि से निकलकर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे. इसके अलावा, इसी दिन मंगल वक्री अवस्था में वृषभ राशि में गोचर करेगा. ऐसे में शुक्र पर मंगल की पापक दृष्टि शुक्र प्रभावित लोगों को थोड़ा परेशान कर सकती है.

Chandra grahan ka rashiyo par prabhav
Chandra grahan ka rashiyo par prabhav

16 नवंबर को सूर्य का गोचर

16 नवंबर ग्रहों के राजा सूर्य अपनी नीच राशि तुला से निकलकर मित्र राशि वृश्चिक में प्रवेश कर जाएंगे. चंद्र ग्रहण के बाद सूर्य का यह गोचर अधिकांश जातकों को शुभ परिणाम ही देगा. ऐसे लोगों को मान-सम्मान, प्रतिष्ठा, आरोग्यता और धन लाभ के योग मिल सकते हैं. बता दें कि सूर्य अपनी राशि पूरे एक महीने के बाद बदलता है.

23 नवंबर को बृहस्पति का राशि परिवर्तन

देव गुरु बृहस्पति 23 नवंबर को मार्गी हो जाएंगे. ज्योतिष शास्त्र में किसी ग्रह के मार्गी होने का मतलब उसकी सीधी चाल से है. हालांकि शनि की दृष्टि से अभी भी गुरु देव पीड़ित रहेंगे, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने की संभावना है.

इन जातकों को रहना होगा सावधान

चंद्र ग्रहण और ग्रह गोचर के इस संयोग के चलते कुछ राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतनी होगी. ज्योतिषविदों की मानें तो चंद्र ग्रहण के बाद भी कुछ राशि वालों को लगभग पूरे महीने ही सावधानी बरतनी होगी. खासतौर मिथुन, वृश्चिक और कुंभ राशि वालों को छोड़कर अन्य सभी राशियों को अगले एक महीने तक सावधान रहना होगा.

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मेष –

चंद्र ग्रहण का सबसे ज्यादा प्रभाव मेष राशि पर पड़ने वाला है. इस दौरान स्वास्थ्य का ध्यान रखें और दुर्घटनाओं से बचें. चाहे आप नौकरीपेशा हों या व्यापारी, इस दौरान करियर में कोई रिस्क लेने से बचें.

वृष –

ग्रहण की वजह से आपके करियर में अचानक परिवर्तन हो सकता है. अगले एक महीने में आपके करियर में कोई बड़ा बदलाव आ सकता है. मानसिक समस्याएं थोड़ा आपको परेशान कर सकते हैं. ज्यादा तनाव लेने से बचें.

मिथुन –

मिथुन राशि वालों के ये चंद्र ग्रहण शुभ परिणाम दे सकता है. आपके बहुत से रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं. करियर से जुड़ी मुश्किलें दूर होंगी. रुका हुआ पैसा प्राप्त होगा. अगले एक महीने में लाभ की संभावनाएं बन रही हैं.

कर्क –

करियर में बड़े परिवर्तन होने का समय आ गया है. ये चंद्र ग्रहण आपके करियर में कई बड़े बदलाव लेकर आ सकता है. कोई नया मौका आपको मिल सकता है. स्थान परिवर्तन का कोई महत्वपूर्ण निर्णय आप ले सकते हैं.

Chandra grahan ka rashiyo par prabhav
Chandra grahan ka rashiyo par prabhav

सिंह –

स्वास्थ्य एकदम से बिगड़ सकता है. सेहत का ख्याल रखें और दुर्घटनाओं से बचे रहें. इस दौरान लड़ाई, झगड़े, वाद-विवाद या किसी तरह की मुकदमेबाजी से दूर रहे हैं.

कन्या –

स्वास्थ्य के मोर्चे पर परेशानियां बढ़ सकती है और स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है. भयंकर दुर्घटनाएं और स्वास्थ्य की गंभीर समस्या से बचकर रहना होगा. करियर में लापरवीह न करें.

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तुला –

तुला राशि वालों को दांपत्य जीवन का विशेष ख्याल रखना है. वैवाहिक जीवन में बेवजह का शक, बेवजह का वहम या बेवजह का विवाद आपको परेशान कर सकता है. अपयश और पेट की समस्या आपको घेर सकती है.

वृश्चिक –

वृश्चिक राशि वालों को ये चंद्र ग्रहण शुभ परिणाम दे सकता है. आपको करियर में अचानक सफलता मिल सकती है. आकस्मिक सफलता मिलने के योग हैं. रुके हुए कार्य बन सकते हैं.

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धनु –

अपयश और विवाद की संभावना बन सकती है. दफ्तर में सहयोगियों के साथ रिश्ते खराब हो सकते हैं. संतान को लेकर चिंताएं हो सकते हैं. संतान पक्ष की ओर से कष्ट भी मिल सकता है. संतान पक्ष पर अगले एक महीने तक ध्यान दें.

मकर –

मकर राशि वाले अपनी माता के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें. आपके घर में जो स्त्रियां हैं, उनके स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें. नौकरी या करियर के मामले में फिलहाल कोई रिस्क न लें. इस दौरान कार्यस्थल पर लापरवाही बिल्कुल न करें.

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कुंभ –

कुंभ राशि वालों के लिए करियर में बड़ी सफलता के योग बन सकते हैं. जिस कामयाबी का आप लंबे समय से इंतजार कर रहे थे, वो अब आपको मिल सकती है. धन-संपत्ति का लाभ भी आपको मिल सकता है. आय के स्रोत भी बढ़ सकते हैं.

मीन –

मीन राशि वालों को ग्रहण के बाद एक महीने तक संभलकर रहना होगा. यदि कहीं बड़ा निवेश करने की सोच रहे हैं तो फिलहाल रुक जाइए. आपका पैसा डूब सकता है. पेट और कारोबार की समस्याएं भी परेशान कर सकती हैं.

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चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिला रखे इन 7 बातों का खास ध्यान

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Tips for Pregnant Women During Grahan
Tips for Pregnant Women During Grahan

साल के अंतिम सूर्य ग्रहण के बाद कल साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। जहां साल का अंतिम सूर्यग्रहण 25 अक्तूबर को लगा था वहीं आखिरी चंद्र ग्रहण ठीक 15 दिन बाद देव दिवाली के दिन यानी 08 नवंबर को लगने जा रहा है। पहला चंद्र ग्रहण 16 मई 2022 को लगा था। 08 नवंबर को कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि भी है। यह चंद्र ग्रहण भारत में आंशिक सहित कई देशों में देखा जा सकेगा। सूतक सुबह आठ बजकर बीस मिनट से लग जाएंगे। Tips for Pregnant Women During Grahan

इस दौरान धार्मिक अथवा शुभ कार्य नहीं हो सकेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण काल के दौरान हमारे आसपास की हर चीज प्रभावित होती है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को इस दौरान कुछ खास ख्याल रखने की सलाह दी जाती है।

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वास्तु शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के वक्त घर में उपस्थित गर्भवती महिला को अपना खास ध्यान रखना बेहद जरुरी है। चंद्र ग्रहण की नकारात्मक ऊर्जा सबसे अधिक बच्चों, बुजुर्गों और प्रेगनेंट महिलाओं पर पड़ती है। तो चलिए जानते हैं आखिर गर्भवती महिला किस तरह से इस चंद्र ग्रहण के बुरे प्रभावों से बच सकती हैं…

ग्रहण से पहले जरुर करें स्नान

गर्भवती महिला को ग्रहण के शुरु होने से पहले व बाद में स्नान अवश्य करना चाहिए। ऐसे इसलिए क्योंकि ग्रहण के वक्त आप और आपके बच्चे पर पड़ी नकारात्मक ऊर्जा का असर काफी हद तक कम हो जाता है। अगर किसी वजह से स्नान न कर पाएं तो गंगा जल के छींटे तो अवश्य अपने शरीर पर छिड़क लें। इससे भी बुरी ऊर्जा का असर कम हो जाता है।

Tips for Pregnant Women During Grahan
Tips for Pregnant Women During Grahan

कुछ भी खाने से करें परहेज

ग्रहण के वक्त गर्भवती महिला को कुछ भी खाना-पीना नहीं है क्योंकि इस वक्त महिला का शरीर काफी हद तक कमजोर होता है। ऐसे में इस दौरान कुछ भी खाने से आप बीमार हो सकती हैं। असल में ग्रहण के समय चंद्रमा से निकलने वाली हानिकारक किरणें खाने को दूषित कर देती हैं। ग्रहण के बाद जो भी आप खाने वाली हैं उसमें तुलसी की पत्तियां जरुर डालें। ऐसा करने से बने खाने पर पड़ा ग्रहण का बुरा प्रभाव पूरी तरह नष्ट हो जाएगा।

नुकीली चीजों के रहें दूर

ग्रहण के दौरान चाकू-छुरी का इस्तेमाल महिला को बिल्कुल नहीं करना है। साथ ही किसी कमरे या दरवाजे का ताला खोलने या बंद करने से भी पूरा परहेज करना है। ग्रहण के दौरान चाकू का इस्तेमाल करने से सीधा असर बच्चे पर पड़ता है। जो स्त्रियां ग्रहण के दौरान चाकू-छुरी का इस्तेमाल करती हैं उनके होने वाले बच्चों के शरीर पर अक्सर घाव देखे जाते हैं इसलिए ऐसा करने से बिल्कुल परहेज करें।

Tips for Pregnant Women During Grahan
Tips for Pregnant Women During Grahan

खारिश से पड़ सकते हैं रैशिज

चंद्र ग्रहण लगभग 4 से 5 घंटे तक चलने वाला है। इस दौरान कोशिश करें पेट या झांघों पर खारिश करने से परहेज करें। ग्रहण के दौरान की गई शरीर के किसी भी हिस्से पर खारिश महिला को ताउम्र भुगतनी पड़ सकती है। जी हां, खारिश के दौरान पड़े स्ट्रेच मार्कस के दाग सदा के लिए शरीर पर रह जाते हैं। अगर ज्यादा खारिश सताए तो उस पर गरी का तेल लगा लें।

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पाठ-पूजा में लगाएं मन

ग्रहण के वक्त आपको सोना भी बिल्कुल नहीं है। कोशिश करें किसी किताब या पाठ में अपना मन लगाएं। ऐसा करने से ग्रहण की नकारात्मक शक्तियों से आप शत-प्रतिशत बच जाएंगी। जितना ज्यादा हो सके उतना पाठ-पूजा में अपना मन लगाएं।

Chandra Grahan Date and Time
Chandra Grahan Date and Time

पौधों से रहें दूर

अगर आपके घर में पौधे लगे हुए हैं तो ग्रहण के वक्त उन पौधों से गर्भवती महिला जितना दूर रहे उतना उसके लिए बेहतर रहेगा। असल में पौधों पर छोटे-छोटे कीट होते हैं, जिनके हल्का सा भी हाथ लगने से वो मर सकते हैं। ग्रहण के दौरान गलती से भी आपसे किसी जीव या कीड़े-मकौड़े की हत्या नहीं होनी चाहिए। इसका सीधा असर आपके बच्चे के ग्रहों पर पड़ेगा।

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ग्रहण में न जाएं बाहर

गर्भवती महिला को ग्रहण को नंगी आंखों से बिल्कुल नहीं देखना चाहिए। ऐसा करने से होने वाला बच्चा जन्म से ही कमजोर आंखों वाली रोशनी के साथ जन्म लेगा। नंगी आंखों से ग्रहण को देखना बहुत अशुभ माना जाता है। इसका सीधा असर बच्चे के मनोबल पर पड़ता है। गर्भवती महिला को ग्रहण के दौरान बाहर निकलने से परहेज करना चाहिए।इसी में मां और बच्चे दोनों की भलाई है।

ग्रहण के वक्त बरती जाने वाली यह सावधानियां केवल गर्भवती महिलाओं के लिए ही नहीं बल्कि सभी लोगों के लिए फायदेमंद हैं। इन सब बातों का मक्सद आपको डराना बिल्कुल नहीं है ब्लकि आपको सतर्क करना है। ग्रहों की चाल-ढाल बदलना सब परमात्मा के ही खेल हैं। इस दौरान कुछ सावधानियों को अपनाकर आप इन सब खेलों का आनंद ले सकते हैं। गर्भवती महिला को छोड़ बाकी सब लोग काले-फ्रेम वाले चश्में का इस्तेमाल कर ग्रहण को बिना किसी डर के देख सकते हैं। लेकिन 5 मिनट से ज्यादा ग्रहण को देखने से परहेज करें।

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क्यों मनाई जाती है देव दिवाली?, जानें इस दिन क्यों किया जाता है दीपदान और गंगा स्नान?

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Dev Diwali Mahatva 2022: हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा को देव दिवाली का त्योहार मनाया जाता है. इस साल यह पर्व सोमवार, 07 नवंबर को मनाया जा रहा है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन देवी-देवता काशी के गंगा घाट पर दिवाली मनाने उतरते हैं. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दीपदान करने का विशेष महत्व है. इस दिन छह कृत्तिकाओं का पूजन भी किया जाता है. आइए जानते हैं कि देव दिवाली के त्योहार पर दीपदान करने का क्या महत्व और इस दिन कृत्तिकाओं की पूजा कैसे की जाती है

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देव दीपावली तिथि 2022

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, इस साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 07 नवंबर दिन सोमवार को शाम 04 बजकर 15 मिनट से हो रहा है और यह तिथि अगले दिन 08 नवंबर को शाम 04 बजकर 31 मिनट तक मान्य रहेगी. देव दीपावली के लिए कार्तिक पूर्णिमा तिथि को प्रदोष काल में मुहूर्त 07 नवंबर को प्राप्त हो रहा है, इसलिए देव दीपावली 07 नवंबर को मनाई जाएगी.

देव दीपावली मुहूर्त 2022

07 नवंबर को देव दीपावली का शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 14 मिनट से लेकर शाम 07 बजकर 49 मिनट तक है. इस दिन देव दीपावली के लिए ढाई घंटे से अधिक का शुभ समय प्राप्त हो रहा है.

Dev Diwali Mahatva
Dev Diwali Mahatva

सिद्ध और रवि योग

देव दीपावली के अवसर पर रवि योग और सिद्ध योग बन रहा है. 07 नवंबर को प्रात:काल से लेकर रात 10 बजकर 37 मिनट तक सिद्ध योग है. वहीं इस दिन रवि योग प्रात: 06 बजकर 37 मिनट से देर रात 12 बजकर 37 मिनट तक है. ये दोनों ही योग मांगलिक कार्यों के लिए बेहद शुभ माने जाते हैं.

देव दिवाली पर दीपदान का महत्व

कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी के जल से स्नान करके दीपदान करना चाहिए. पर ये दीपदान नदी के किनारे किया जाता है. ऐसा कहा जाता है कि देव दिवाली के दिन दीपदान करने से जीवन में सुख-संपन्नता बढ़ती है और देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है. लोकाचार की परंपरा होने के कारण वाराणसी में इस दिन गंगा किनारे दीपदान किया जाता है. वाराणसी में इसे देव दीपावली कहा जाता है, पर ये शास्त्रगत नहीं है.

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क्यों मनाई जाती है देव दिवाली?

भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था. यह घटना कार्तिक मास की पूर्णिमा को हुई थी. त्रिपुरासुर के वध की खुशी में देवताओं ने काशी में अनेकों दीए जलाए. यही कारण है कि हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा पर आज भी काशी में दिवाली मनाई जाती है. चूंकि ये दीवाली देवों ने मनाई थी, इसीलिए इसे देव दिवाली कहा जाता है.

कृत्तिकाओं का पूजन

इस दिन छह कृत्तिकाओं का रात्रि में पूजन करना चाहिए. इस पूजा से संतान का शीघ्र वरदान मिलता है. ये छह कृत्तिकाएं हैं- शिवा, सम्भूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा. इनका पूजन करने के बाद गाय, भेंड़, घोड़ा और घी आदि का दान करना चाहिए. कृत्तिकाओं से संतान और सम्पन्नता प्राप्ति की प्रार्थना करनी चाहिए.

Dev Diwali Mahatva
Dev Diwali Mahatva

शिवजी की पूजा का महत्व

भगवान शिव ने इस दिन त्रिपुरासुर का वध किया था. इसलिए इस दिन को “त्रिपुरी पूर्णिमा” भी कहा जाता है. शिव जी की विशेष पूजा से इस दिन तमाम मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इस दिन उपवास रखकर शिव जी की पूजा करके बैल का दान करने से शिव पद प्राप्त होता है. शिव ही आदि गुरू हैं, इसलिए इस दिन रात्रि जागरण करके शिव जी की उपासना करने से गुरू की कृपा प्राप्त होती है. गलतियों के प्रायश्चित के लिए भी इस दिन शिव जी की पूजा की जाती है.

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राशि के अनुसार जानिए कैसा होगा आपके लिए नवंबर 2022 का महीना ?

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November 2022 rashifal zodiac sign
November 2022 rashifal zodiac sign

November 2022 rashifal zodiac sign : साल 2022 का 11 वां महीना यानी नवंबर आज से शुरू हो गया है. हर महीने ग्रह नक्षत्र और चाल बदलते हैं. जिसका सीधा असर मनुष्य के जीवन पर पड़ता है. इसलिए लोग अपनी कुंडली ज्योतिषी से विचारवाते हैं ताकि कोई दिक्कत परेशानी हो तो उसका उपाय किया जा सके. इस बात का ध्यान रखते हुए हम आपको समय समय पर आपकी राशि के बारे में बताते रहते हैं तो.

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राशियों के लिए ये मास काफी खास जाने वाला है। क्योंकि इस माह में साल का आखिरी चंद्र ग्रहण पड़ने वाला है। इसके अलावा इस मास में कई ग्रहों का राशि परिवर्तन है जिसका असर हर राशि के जातकों के जीवन पर पड़ने वाला है. ऐसे ही इस बार हम आपको नवंबर का महीना कैसा जाएगा उसके बारे में बताएंगे.

November 2022 rashifal zodiac sign
November 2022 rashifal zodiac sign

मेष राशि

इस राशि के जातकों को नवंबर के महीने में बजट बनाकर चलें अन्यथा परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. करियर संबंधी परेशानी का भी सामना करना पड़ेगा.

वृषभ राशि

इस राशि के व्यक्तियों को आर्थिक लाभ हो सकता है. आप इस माह में यात्रा पर निकल सकते हैं. परिवार में परेशानी हो सकती है.

मिथुन राशि

इस राशि के जातकों के लिए नवंबर का महीना शुभ होने वाला है. इस माह में आपकी आमदानी बढ़ सकती है. पैसे का निवेश सोच-समझकर करना चाहिए. आर्थिक परेशानी से निजात मिलेगा.

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कर्क राशि

इस राशि के लोगों को कोई भी काम सोच-समझकर करना चाहिए, इस महीने आप किसी यात्रा पर जा सकते हैं. नौकरी पेशा लोगों के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है.

सिंह राशि

इस राशि के जातकों के लिए नवंबर का महीना अच्छा होगा. इस दौरान आपको कुछ जगहों पर सफलता अच्छी मिलेगी जबकि कहीं पर दिक्कत हो सकती है.

कन्या राशि

कन्या राशि वालों के लिए यह महीना अच्छा बीतेगा. नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं. आमदानी के नए अवसर प्राप्त होंगे. सेहत का खास ख्याल रखें.

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तुला राशि

तुला राशि वालों के लिए नए क्षेत्र में अच्छे अवसर प्राप्त होंगे. इस दौरान आपको सेहत को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है. मानसिक तनाव दूर होगा.

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि वालों को नवंबर के महीने में बहुत उतार चढ़ाव देखने को मिलेगा. किसी तरह के लेन देन से बचने की जरूरत है. पैसे को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

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धनु राशि

धनु राशि के जातकों के लिए यह महीना अच्छा साबित होगा. आर्थिक स्थिति बेहतर होगी. नौकरी को लेकर खबर अच्छी आएगी.

मकर राशि

इस राशि के जातकों को धन प्राप्ति हो सकती है. सेहत को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है. विदेश से अच्छी खबर आने के योग बन रहे हैं.

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कुंभ राशि

इस राशि के लिए नवंबर का महीना मेहनत वाला होगा. सेहत का ध्यान रखें. रुका हुआ धन वापस मिलने के योग बन रहे हैं. मान-सम्मान में वृद्धि होगी.

मीन राशि

इस राशि के जातकों के लिए नवंबर का महीना आर्थिक परेशानी वाला होगा. कार्यस्थल पर आपकी स्थिति अच्छी बनी रहेगी. आर्थिक चुनौतियों का सामना डट कर करें.

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देवउठनी ग्यारस के दिन ज़रूर करें ये 5 अचूक उपाय, व्रत होगा सफल

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Dev Uthani Gyaras Ke Din Kare Ye Upaye
Dev Uthani Gyaras Ke Din Kare Ye Upaye

चार महीने बाद नींद से उठ रहे हैं भगवान विष्णु, देवउठनी एकादशी पर करें ये उपाय | Dev Uthani Gyaras Ke Din Kare Ye Upaye

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. मान्यताओं के अनुसार इस दिन तुलसी और भगवान शालिग्राम का विवाह होता है. इसी दिन से मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है. हिंदू धर्म पुराणों के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु अपनी 4 माह की योग निद्रा से जागकर धरती का कार्यभार अपने हाथों में ले लेते हैं.

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इस दिन महिलाएं और पुरुष सभी मिलकर अपने घर में तुलसी और भगवान शालिग्राम का विधि विधान के साथ पूजन-अर्चन करके उनका विवाह करवाते हैं. इस दिन 4 महीने पहले देवशयनी ग्यारस के दिन भगवान विष्णु जी एवं अन्य सभी देवता क्षीरसागर में जाकर सो जाते हैं, इसलिए इन दिनों व्रत, पूजा पाठ, दान, पुण्य अादि कार्य किए जाते हैं। चार महीनों में कोई भी बड़े शुभ कार्य जैसे- शादी-विवाह, मुंडन संस्कार, नामकरण संस्कार आदि कार्य नहीं किए जाते।

यह सभी देवउठनी ग्यारस (एकादशी) से प्रारंभ होते हैं। इस दिन तुलसी विवाह का विशेष महत्व माना जाता है। यह दीपावली के 12वें दिन मनाया जाता है। यह मनोकामना पूर्ण करने का दिन होता है। देव उठनी एकादशी पर किए जाने वाले कुछ आसान उपाय बता रहे हैं

देवउठनी ग्यारस के दिन करें ये अचूक उपाय –

Dev Uthani Gyaras Ke Din Kare Ye Upaye
Dev Uthani Gyaras Ke Din Kare Ye Upaye

1. मान्यताओं के अनुसार देवउठनी एकादशी के दिन लक्ष्मी जी की कृपा पाने के लिए अपने घर की अच्छे से साफ सफाई करनी चाहिए. इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विधिपूर्वक पूजन कर उनके सामने अखंड दीप पूरी रात के लिए जलाकर रखना चाहिए. ऐसा करने से माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

2. हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवउठनी एकादशी के दिन यदि व्रत किया जाए तो सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इस दिन भगवान विष्णु के मंत्र ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ का जाप करने से भी लाभ प्राप्त होता है.

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3. देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए. मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से व्यक्ति को शुभ गुण प्राप्त होते हैं. साथ ही सभी कष्टों का अंत होता है. इसके अलावा भगवान विष्णु को सफेद रंग की मिठाई का भोग लगाना चाहिए. ऐसा करने से धन में वृद्धि होती है.

4. मान्यताओं के अनुसार घर की सुख-समृद्धि के लिए देवउठनी एकादशी के दिन किसी मंदिर में एक नारियल और बादाम चढ़ाना चाहिए. ऐसा करने से आपके अटके हुए काम बनने लगते हैं. इसके अलावा देवउठनी एकादशी के दिन जरूरतमंद लोगों को पीली चीजों का दान करने से जीवन में आने वाली सभी समस्याएं खत्म होती हैं.

5. देवउठनी एकादशी के दिन माता तुलसी का पूजन किया जाता है. शाम के समय तुलसी के पौधे के समक्ष घी का दीपक जलाना चाहिए. इसके साथ ही विष्णु भगवान के मंत्र का जप करते हुए माता तुलसी की 11 बार परिक्रमा करें. ऐसा करने से आपके धन-धान्य के भंडार सदैव भरे रहेंगे.

Dev Uthani Gyaras Ke Din Kare Ye Upaye

6. दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर श्री विष्णु जी का जल से अभिषेक करें। इससे भगवान विष्णु जी प्रसन्न होते हैं और हजारो जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।

7. किसी ब्राह्मण को दक्षिणा दें, और भोजन करायें। ऐसा करने से आपके सभी मनोरथ पूर्ण होंगे।

8. आप आमदनी में बढ़ोतरी करना चाहते हैं तो 7 कन्याओं को भोजन कराएं। भोजन में खीर को अवश्य शामिल करें, ऐसा करने से कुछ ही दिनों में आप जिस काम के लिए कोशिश कर रहे हैं, वह पूरा होगा।

9. नारियल व बादाम चढ़ाये। इससे रूकें हुये काम बनते हैं।

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10. रूपये दक्षिणा विष्णु जी के समीप रखें। उस पैसे को तिजोरी में रख दें, ऐसा करने से धन, संपत्ति में निश्चित तौर पर वृद्धि होती है।

11. तुलसी पौधे के नीचे गाय के घी का दीपक जलाएं और ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र से पूजा करें। ऐसा करने से घर में सुख शांति बनी रहती है।

12. पूजा में बेलपत्र, शमी के पत्ते, तुलसी आदि को जरूर शामिल करें। विष्णु भगवान को तुलसी के पत्ते चढ़ाने से वह बहुत ही ज्यादा प्रसन्न होते हैं।

दोस्तों, मैंने आपको इन उपायों के बारे में बताया यह उपाय देवउठनी एकादशी के दिन अवश्य करें। ऐसा करने से आपको सौभाग्य प्राप्त होगा और आपके सभी मनोरथ सिद्ध होंगे।

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आज गोपाष्टमी पर इस तरह करें पूजन तो मिलेगा सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद

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Gopashtami muhurat pooja vidhi mahatva
Gopashtami muhurat pooja vidhi mahatva

Gopashtami muhurat pooja vidhi mahatva : हिंदू धर्म में गोपाष्टमी पूजा का विशेष महत्व है. इस दिन गौ माता और उनके बछड़ों को सजाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है. ये त्योहार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन मनाया जाता है. ये मथुरा, वृंदावन समेत ब्रज क्षेत्रों का प्रसिद्ध त्योहार है.

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गौ माता का पूजन करने से सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इसलिए इस दिन गायों की पूजा करना बेहद शुभ और फलदायी है जिससे सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

गोपाष्टमी पूजा का शुभ मुहुर्त

Gopashtami 2022 Puja Shubh Muhurat

एक नवंबर सुबह 1 बजकर 11 मिनट पर अष्टमी तिथि की शुरुआत हो गई है और ये रात 11 बजकर 4 मिनट पर समाप्त होगी. राहुकाल को छोड़कर दिन में कभी भी गोपाष्टमी का पूजन किया जा सकता है. हालांकि अभिजित मुहूर्त पूजा के लिए सबसे शुभ मुहूर्त माना गया है. अभिजित मुहूर्त आज सुबह 11 बजकर 42 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा.

Gopashtami muhurat pooja vidhi mahatva
Gopashtami muhurat pooja vidhi mahatva

गोपाष्टमी 2022 पर ऐसे करें पूजा

Gopashtami 2022 Puja Vidhi

  • गोपाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर नहाएं और मंदिर की सफाई करें.
  • इसके बाद मंदिर में गाय माता की बछड़े के साथ एक तस्वीर लगाएं और घी का दीपक जलाएं.
  • इसके बाद फूल अर्पित करें. इस दिन गाय को अपने हाथों से हरा चारा खिलाना चाहिए और उनके चरण स्पर्श करने चाहिए.
  • अगर आपको अपने घर के आसपास गाय ना मिले तो गौशाला में जाकर गाय की सेवा कर सकते हैं.
  • पूजा के लिए सबसे पहले गाय स्नान कराएं और रोली-चंदन से उनका तिलक करें.
  • उन्हें फूल चढ़ाएं और भोग लगाएं. इस दिन गाय को चारे के साथ ही गुड़ का भी भोग लगाएं. इससे सूर्य दोष से मुक्ति मिलती है.

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गोपाष्टमी पर करें ये उपाय

Gopashtami 2022 Upay

  • यदि पितृ दोष हो तो प्रतिदिन या अमावस्या को गाय को रोटी, गुड़, चारा आदि खिलाने से पितृ दोष समाप्त हो जाता है।
  • यदि बुरे स्वप्न दिखाई दें तो मनुष्य गौ माता का नाम लें, बुरे स्वप्न दिखने बंद हो जाएंगे।
  • प्रात:काल के भोजन में से एक रोटी सफेद रंग की गाय को खिलाने से शुक्र का नीचत्व एवं शुक्र संबंधी कुदोष स्वत: समाप्त हो जाता है।
  • देशी गाय की पीठ पर जो ककुद् (कूबड़) होता है, वह ‘बृहस्पति’ (गुरु) है। अत: गुड़ तथा चने की दाल रखकर गाय को रोटी भी दें।
  • यदि रास्ते में जाते समय गौ माता आती हुई दिखाई दें तो उन्हें अपने दाहिने ओर से जाने देना चाहिए, यात्रा सफल होगी।
  • जिस घर में गाय होती है, उसमें वास्तु दोष स्वत: ही समाप्त हो जाता है।
  • यदि यात्रा के प्रारंभ में गाय सामने दिख जाए अथवा अपने बछड़े को दूध पिलाती हुई सामने दिखाई दें तो यात्रा सफल होती है।
Gopashtami muhurat pooja vidhi mahatva
Gopashtami muhurat pooja vidhi mahatva

गोपाष्टमी 2022 का महत्व

Gopashtami 2022 Pooja Mahatva

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र के क्रोध से बचाने के लिए गोवर्धन पूजा के दिन अपनी कनिष्ठा (छोटी उंगली) पर गोवर्धन पहाड़ी को उठा लिया था जिसके नीचे सभी ब्रजवासियों ने बाढ़ से बचने के लिए शरण ली थी. ब्रज क्षेत्र में सात दिनों की निरंतर बाढ़ के बाद भगवान इंद्र का क्रोध शांत हुआ और उन्होंने गोपाष्टमी के दिन ही अपनी हार स्वीकार की थी.

भगवान कृष्ण ने ब्रज के लोगों को भगवान इंद्र को दी जाने वाली वार्षिक भेंट को बंद करने का सुझाव दिया था जिस पर इंद्र नाराज हो गए और क्रोध में उन्होंने ब्रज क्षेत्र में भारी बारिश शुरू कर दी जिसमें सबकुछ बहने लगा. लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज के लोगों और वहां के सभी पशुओं की गोवर्धन पहाड़ी के विशाल आवरण के नीचे सात दिन तक सुरक्षा की.

इस दिन गौ माता की विशेष पूजा का विधान है. शास्त्रों के अनुसार, गौ माता में सभी देवी-देवताओं का वास होता है, इसलिए उनकी पूजा करने से भक्त को सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

गोपाष्टमी 2022 मंत्र का जाप

Gopashtami 2022 Puja Mantra

सुरभि त्वं जगन्मातर्देवी विष्णुपदे स्थिता ।
सर्वदेवमये ग्रासं मया दत्तमिमं ग्रस ।।
तत: सर्वमये देवि सर्वदेवैरलड्कृते ।
मातर्ममाभिलाषितं सफलं कुरु नन्दिनी ।।

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