मातृ-दिवस : माँ हमारी पहली टीचर होती है और दोस्त भी

मदर्स डे एक ऐसा दिन होता है जो हर बच्चा अपनी माँ के लिये खासतौर से मनाता है। ये एक महत्वपूर्णं उत्सव के तौर पर हर वर्ष मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। स्कूलों में बच्चों के साथ मातृ-दिवस मनाने का प्रचलन है। अपने बच्चों के द्वारा माँ ग्रीटिंग्स कार्ड, विशिंग कार्ड तथा दूसरे खास उपहार प्राप्त करती है। इस दिन पारिवारिक सदस्य बाहर जाकर लज़ीज़ पकवानों का लुफ्त उठाते है तथा और खुशी मनाते है। माँ भी अपने प्यारे बच्चों को ढ़ेर सारा प्यार और उपहार तथा देख-भाल करती है। Mother’s Day Special

”भगवान हर जगह नहीं हो सकते, और इसलिए उन्होंने माता को बनाया ”

स्कूल आने के लिये बच्चों के द्वारा खासतौर से अपनी माँ को आमंत्रित किया जाता है जहाँ पर शिक्षक, बच्चे और माँ मातृ-दिवस को खूब अच्छे से मनाते है। माँ अपने बच्चों के लिये उनकी पसंद के मुताबिक मैक्रोनी, चाउमीन, मिठाई, बिस्किट आदि जैसे कुछ खास पकवान बनाती है। इस दिन को पूरी मस्ती के साथ मनाने के लिये माँ और बच्चे दोनों नृत्य, गायन, भाषण आदि जैसे क्रिया-कलापों में भी भाग लेते है।

मातृ-दिवस से संबंधित कार्यक्रमों जैसे गायन, नृत्य, भाषण, तुकबंदी व्याख्यान, निबंध लेखन तथा मौखिक बातचीत आदि में बच्चे भाग लेते है। उत्सव के समापन पर माताओं के द्वारा बनाया गया खास पकवान शिक्षकों और विद्यार्थियों को परोसा जाता है। सभी एकसाथ इसको खाते है और इसका आनन्द उठाते है।

एक माँ हर एक की सबसे अच्छी दोस्त होती है क्योंकि वह हर एक चीज का ध्यान रखती है जिसकी हमें जरुरत होती है। इसलिये, उन्हें धन्यवाद और आदर देने के लिये वर्ष का एक दिन समर्पित किया गया है जिसे हर साल हम सभी मातृ-दिवस के रुप में मनाते है। हमलोग बिना अपनी माँ के प्यार और देख-भाल के नहीं रह सकते हैं। वह हमारा बहुत ध्यान रखती है, वह बहुत खुश हो जाती है जब हमलोग हँसते है तथा वह बहुत दुखी हो जाती है जब हमलोग रोते है। इस दुनिया में माँ एकमात्र ऐसी इंसान होती है जो हमें कभी अकेला नहीं छोड़ती। माँ अपने बच्चों के लिये पूरी निष्ठावान होती है।

इस दिन को मनाने के लिये घर पर हर कोई एक साथ होता है और घर या बाहर जाकर मज़ेदार व्यंजनों का आनन्द लेता है। परिवार के सभी सदस्य माँ को उपहार देते है तथा ढ़ेर सारी बधाईयाँ देते है। हमारे लिये माँ हर वक्त हर जगह मौजूद रहती है। हमारे जन्म लेने से उनके अंतिम पल तक वो हमारा किसी छोटे बच्चे की तरह ख्याल रखती है। हम अपने जीवन में उनके योगदानों की गणना नहीं कर सकते है। यहाँ तक कि हम उनके सुबह से रात तक की क्रिया-कलापों की गिनती भी नहीं कर सकते।

ऊपर जिसका अंत नहीं उसे ‘आसमां’ कहते हैं,
इस जहाँ में जिसका अंत नहीं उसे ‘माँ’ कहते हैं..!!

माँ के पास ढ़ेर सारी जिम्मेदारियाँ होती हैं वो उसको लगातार बिना रुके और थके निभाती है। वो एकमात्र ऐसी इंसान है जिनका काम बिना किसी तय समय और कार्य के तथा असीमित होती है। हम उनके योगदान के बदले उन्हें कुछ भी वापस नहीं कर सकते हालाँकि हम उन्हें एक बड़ा सा धन्यवाद कह सकते है साथ ही उन्हें सम्मान देने के साथ ध्यान भी रख सकते है। हमें अपनी माँ को प्यार और सम्मान देना चाहिये तथा उनकी हर बात को मानना चाहिये।

पहली धड़कन भी मेरी, धड़की की तेरे भीतर जमीन को तेरी छोड़कर बता फिर में जाऊ कहा. आँखे खोली जब पहली दफ़ा तेरा चेहरा ही दिखा जिंदगी का हर लम्हा जीना तुझसे ही सिखा.

खामोश सी मेरी जुबान को सुर भी तुने ही दिया श्वेत पड़ी मेरी अभिलाषाओ को रंगों से तूने भर दिया.

अपना निवाला छोड़ कर मेरी खातिर तूने भण्डार भरे…. मैं भले नाकामियाब रही फिर भी मेरे होने का तूने अहंकार भरा.

वो रात को छिपकर जब तू अँधेरे में अकेले रोया करती थी दर्द होता था मुझे भी शिश्किया मैंने भी सुनी थी….. नासमझ थी में जब इतनी खुद का भी मुझे भान नही था तू ही बस वो एक थी जिसे मेरी भुक प्यास का पता था.

”किसी का दिल तोडना आज तक नही आया मुझे, प्यार करना जो अपनी ‪माँ‬ से सीखा है मेने…”

जब एक रोटी के चार टुकड़े हों और खाने वाले पाँच.. तब मुझे भूख नहीं है ऐसा कहने वाली इंसान है – माँ !

पहले जब मै बेतहाशा धुल मैं खेला करती थी तेरी चूडियो तेरी पायल की आवाज से डर लगता था, लगता था तू आयेगी बहुत डाटेगी और कान पकड़ कर मुझे ले जाएगी. माँ आज भी जब किसी दिन मुझे धुँध-धुंध सा लगता है. चूडियो के बीच से तेरी उड़ते गुस्से भरी आवाज को सुनने का मन करता है, मन करता है तू आजाये बहुत डांटे और कान पकड़ कर मुझे ले जाये.

जाना चाहती हूँ उस बचपन में फिरसे जहाँ तेरी गोद में सोया करती थी. जब काम ना हो कोई मेरे मन का तो हर बात पर रोया करती थी जब बिना तेरी लोरियो, कहानियों के लिए पलके जगा नही करती थी माथे पर बिना तेरे मीठे स्पर्श के ये आँखे जगा नही करती थी.

अब और नही घिसने देना चाहती तेरे इन मुलायम हाथों को, चाहती हूँ पूरा करना तेरे सपनों में दिखे हर बातों को…… खुश होगी माँ एक दिन तू भी जब लोग मुझे तेरी बेटी कहेंगे.

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Nidhi

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