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बुद्ध पूर्णिमा, जिसे बुद्ध जयंती के रूप में भी जाना जाता है, एक शुभ दिन है जो बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध की जयंती का प्रतीक है। माना जाता है कि इसी दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। बुद्ध पूर्णिमा वैशाख माह की आखिरी पूर्णिमा के दिन पड़ती है, आमतौर पर अप्रैल और मई के बीच, और यह भारत में एक राजपत्रित अवकाश है। इस वर्ष यह पर्व 16 मई सोमवार को मनाया जाएगा।

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बुद्ध पूर्णिमा शुभ मुहूर्त

बुद्ध पूर्णिमा तिथि: 16 मई 2022,सोमवार
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 15 मई 2022 को रात 12 बजकर 45 मिनट से शुरू होगी
पूर्णिमा तिथि समापन: 16 मई 2022 रात 09 बजकर 45 मिनट तक

क्यों मनाई जाती है बुद्ध पूर्णिमा

बुद्ध जयंती या बुद्ध पूर्णिमा गौतम बुद्ध के जन्म का उत्सव है, और इस वर्ष 16 मई को मनाया जाएगा। उनकी जयंती को बुद्ध पूर्णिमा, वैसाखी बुद्ध पूर्णिमा या वेसाक के रूप में भी जाना जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, बुद्ध जयंती (जो आमतौर पर अप्रैल या मई में पड़ती है) वैशाख के महीने में पूर्णिमा के दिन आती है। बुद्ध जयंती, इस वर्ष 2022 में भगवान बुद्ध की 2584वीं जयंती होगी।

हालाँकि, यह वास्तव में एशियाई चंद्र-सौर कैलेंडर पर आधारित है, यही वजह है कि हर साल तारीखें बदलती रहती हैं। भगवान बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में लुंबिनी (आधुनिक नेपाल) में पूर्णिमा तिथि (पूर्णिमा के दिन) पर राजकुमार सिद्धार्थ गौतम के रूप में हुआ था। हिंदू धर्म में, बुद्ध को भगवान विष्णु का नौवां अवतार माना जाता है।

Buddha Purnima 2022
Buddha Purnima 2022

एक कथन के अनुसार, “प्रत्येक पूर्णिमा का दिन बौद्धों के लिए एक शुभ दिन होता है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण मई में वैशाख पूर्णिमा का दिन होता है, क्योंकि गौतम बुद्ध के जीवन की तीन प्रमुख घटनाएं इसी दिन हुई थीं। दिन। सबसे पहले, गौतम बुद्ध यानी प्रिंस सिद्धार्थ का जन्म मई में पूर्णिमा के दिन लुंबिनी गाँव में हुआ था। दूसरा, छह साल की कठिनाई के बाद मई की पूर्णिमा यानी वैशाख पूर्णिमा के दिन, उन्होंने बोधि वृक्ष की छाया के नीचे ज्ञान प्राप्त किया। तीसरा, सत्य की शिक्षा देने के 45 वर्षों के बाद, जब वे अस्सी वर्ष के थे, कुशीनगर उत्तर प्रदेश में, मई की वैशाख पूर्णिमा के दिन, सभी इच्छाओं की समाप्ति के पश्चात्, उनकी मृत्यु हो गई।

बुद्ध पूर्णिमा महत्व

बुद्ध पूर्णिमा उत्सव शुद्धतम भावनाओं के साथ प्रार्थना करने और बौद्ध धर्म के लिए शांति, अहिंसा और सद्भाव को अपनाने के बारे में है। भारत में बौद्ध धर्म अपनाने वाले लोग सफेद कपड़े पहनना पसंद करते हैं और मांसाहारी भोजन का सेवन करने से बचते हैं। साथ ही इस दिन वे खीर का प्रसाद ग्रहण करते हैं क्योंकि ऐसा माना जाता है कि एक महिला ने गौतम बुद्ध को दूध से भरा कटोरा दिया था। इसलिए इस दिन वे भगवान बुद्ध को खीर अर्पित करते हैं और वही प्रसाद के रूप में सबको बांटते हैं.

आमतौर पर, इस दिन बौद्धों द्वारा आसपास के बौद्ध समुदायों से शिवालयों तक जुलूस निकाले जाते हैं। बुद्ध पूर्णिमा के दिन लोग बोधि वृक्ष के पेड़ में पानी डालते हैं, गरीबों को भिक्षा देते हैं और ध्यान करते हैं।
बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर, कई भक्त बिहार के बोधगया में स्थित यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल, महाबोधि मंदिर जाते हैं। बोधि मंदिर वह स्थान है जहां कहा जाता है कि भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था।

गौतम बुद्ध का जीवन

बुद्ध, या “प्रबुद्ध,” शाक्य वंश के शासकों के घर जन्मा हुआ सिद्धार्थ गौतम नाम का एक साधारण लड़का था। उनका प्रारंभिक बचपन एक भव्य, आरामदायक महल में बीता, जहाँ वे आम दुनिया की पीड़ा, दर्द और संघर्ष से पूरी तरह अनजान थे। एक बार अपने शहर के एक छोटे से भ्रमण पर उन्होंने कई घटनाएं देखीं जो उन्हें विभिन्न लोगों की पीड़ा से परिचित कराती थीं।

वह जीवन के दूसरे पहलू को जानने के लिए बेहद परेशान हो गया और ऐसे और अधिक प्रश्नों का पता लगाने के लिए जिन्हें उन्होंने व्यक्तिगत रूप से अनुभव नहीं किया था उसके लिए अपना घर छोड़ दिया.

कई वर्षों तक उन्होंने तपस्वी जीवन को पूरे जोश के साथ अपनाया और एक तपस्वी होने के नाते उनके पथ में आई सभी चुनौतियों का सामना किया। उन्होंने अपने सभी सवालों के जवाब खोजने के लिए बहुत समय तक ध्यान लगाया और एक दिन बोधि वृक्ष के नीचे “ज्ञानोदय” के रूप में ज्ञान प्राप्त किया। उन्हें पीपल के वृक्ष के नीचे सत्य के ज्ञान की प्राप्ति हुई थी. इसके पश्चात महात्मा बुद्ध ने अपने ज्ञान का प्रकाश पूरी दुनिया में फैलाया और एक नई रोशनी पैदा की.

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कहां-कहां मनाई जाती है बुद्ध जयंती

बुद्ध जयंती केवल भारत में ही नहीं बल्कि चीन, नेपाल, सिंगापुर, वियतनाम, थाइलैंड, जापान, कंबोडिया, मलेशिया, श्रीलंका, म्यांमार, इंडोनेशिया आदि विश्व के कई देशों में पूर्णिमा के दिन बुद्ध जयंती मनाई जाती है. बिहार में स्थित बोद्धगया बुद्ध के अनुयायियों सहित हिंदुओं के लिए भी पवित्र धार्मिक स्थल माना जाता है. बोधगया वह स्थान है जहाँ भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई.

भारत के कुशीनगर में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर लगभग एक महीने का मेला लगता है. श्रीलंका जैसे देश में इस उत्सव को वैशाख उत्सव के रूप में मनाते हैं. बौद्ध अनुयायी इस दिन अपने घरों में दीपक जलाते हैं और घरों को सजाते हैं. इस दिन बौद्ध अनुयायी द्वारा बौद्ध धर्म के ग्रंथों का पाठ किया जाता है.

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बुद्ध पूर्णिमा पूजा विधि

  • बुद्ध पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के पश्चात घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
  • इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना बहुत फलदायक होता है यदि आप पवित्र नदियों में स्थान नहीं कर पा रहे हैं तो नहाने के पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें और सभी पावन नदियों का ध्यान कर ले।
  • इस दिन व्रत रखना बहुत शुभ माना जाता है।
  • स्नान करने के बाद सभी देवताओं का गंगाजल से अभिषेक करें।
  • पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना का विशेष महत्व होता है। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सभी मनोकामना पूर्ण होती हैं।
  • भगवान विष्णु को आप भोग में तुलसी जरूर अर्पित करें। क्योंकि तुलसी के बिना भगवान विष्णु का भोग अधूरा माना जाता है।
  • वैशाख पूर्णिमा के दिन सात्विक चीजों का ही भोग लगाया जाता है।
  • पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की पूजा करना और चंद्रमा के दर्शन करने का भी विशेष महत्व होता है।
  • चंद्रोदय के बाद चंद्रमा की पूजा करें और चंद्रमा को अर्घ दें।
  • इससे सभी दोषों से मुक्ति मिलती है और सभी मनोवांछित फल की पूर्ति होती है।
  • पूर्णिमा के दिन गाय को भोजन अवश्य कराएं. गाय को भोजन कराने से सभी दोषों से मुक्ति मिल जाती है।

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