नार्मल डिलीवरी के लिए 9वें माह जरूर करें इस चीज का सेवन

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गर्भावस्था में शरीर की मजबूती के लिए महिलाओं को फैटी एसिड की आवश्यकता होती है, जिसे गुड फैट कहा जाता है। यह गुड फैट घी और ओमेगा-3 में भरपूर होती है जो बच्चे के विकास और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में बहुत फायदेमंदहै। लेकिन जरुरत से ज्यादा घी का सेवन मां और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकता है। तो आइए आज जानते है एक मां बनने वाली औरत के लिए घी खाने के क्या- क्या फायदे और नुकसान हो सकता है। Tips for Normal Delivery

हमारे बड़े बुजुर्गों की माने तो उनका कहना है कि अगर प्रेंग्नेंसी के 9वें माह महिला को घी पिलाया जाए तो प्रसव आसानी से होता है यानि नार्मल डिलीवरी हो जाती है।

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पाचन में आसान :

घी को पचाना बेहद आसान होता है, घी हमारे हार्मोन्स के लिए बहुत ही फायदेमंद होता हैं। घी में विटामिन ए, डी, कैल्शियम, फॉस्फोरस, मिनिरल्स, पोटैशियम जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो मां और बच्चे दोनों के विकास के लिए फायदेमंद है, लेकिन गर्भावस्था में शरीर ज्यादा भागदौड़ नहीें कर पाता इसलिए ध्यान रखें कि उस दौरान दिन में 15 ग्राम से ज्यादा घी न खाएं।

Tips for Normal Delivery
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दिमागी विकास :

प्रेगनैंसी के दौरान जहां मां के शरीर में ऊर्जा की कमी को घी पूरा करता है वहीं बच्चे के मानसिक विकास कि लिए भी घी बहुत फायदेमंद होता है। मानसिक रुप में बढौतरी करने के साथ-साथ घी बच्चे और मां की पाचन शक्ति को भी स्ट्रांग करता है।

पेट की समस्या :

जैसे जैसे बच्चा बढ़ता चला जाता है वैसे-वैसे मां को एसिडिटी, गैस और कई बार कब्ज की भी शिकायत रहनी शुरु हो जाती है। घी में उपलब्ध पोषक तत्व इन सब बीमारियों से राहत दिलाते हैं। पेट के साथ-साथ बच्चे और मां की हड्डियों की मज़बूती और विकास के लिए भी घी बहुत फायदेमंद होता है।

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गाय का घी :

गाय का घी दूसरे घी से अधिक फायदेमंद होता है। क्योंकि गाय का घी ही सिर्फ गुड फैट देता है। इसलिए कोशिश करें कि मां को गाय का घी ही दें। इसके साथ साथ दांतों को भी मजबूती प्रदान करता है।

हाई बीपी पेशेंट :

ध्यान रखें ब्लैड प्रैशर की बीमारी से पीड़ित को घी का सेवन बहुत कम मात्रा में करना चाहिए क्योंकि इससे मां और बच्चे दोनों को स्वास्थ नुकसान हो सकता है।

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करें ये उपाय :

गर्भावस्था के दौरान हर महिला की पहली चिंता ये होती हैं कि उसका बच्चा स्वस्थ है या नहीं. उसकी डिलीवरी नॉर्मल होगी या नहीं. ऐसी बहुत सी बातें गर्भवती मां के दिमाग में चलती रहती हैं. लगभग हर औरत चाहती है कि उसी डिलीवरी नॉर्मल हो लेकिन कई बार परिस्थ‍ितियां ऐसी हो जाती हैं कि नॉर्मल डिलीवरी की जगह ऑपरेशन ही करना पड़ता है.

नॉर्मल डिलीवरी के बाद जहां मां को रिकवर होने में ज्यादा वक्त नहीं लगात है वहीं ऑपरेशन से होने वाली डिलीवरी में मां को काफी समय तक ध्यान रखना पड़ता है. अगर आप गर्भवती हैं या आपके जान-पहचान में कोई ऐसा है तो इन उपायों को अपनाकर आप नॉर्मल डिलीवरी के चांसेज को बढ़ा सकती हैं:

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स्वस्थ रहें :

डिलीवरी से पहले आपको ये सुनिश्चित कर लेना होगा कि आप पूरी तरह से स्वस्थ रहें और किसी भी प्रकार की कोई कमजोरी आपको न हो. आपके शरीर में खून की कमी नहीं होनी चाहिए. गर्भवती महिला को खुद को मानसिक रूप से इस बात के लिए तैयार रखना चाहिए कि डिलीवरी के समय उसे बहुत तकलीफ होने वाली है. ऐसे में खुद को स्वस्थ रखना बहुत जरूरी है.

सही आहार :

आपने कई बार सुना होगा कि गर्भवती महिला को अपने खाने-पीने का पूरा ध्यान रखना चाहिए. ऐसे समय में केवल भूख को शांत करना जरूरी नहीं है. गर्भवती महिला काे ऐसा खाना खाना चाहिए जिससे उसे संपूर्ण आहार मिले. प्रेग्नेंसी में आयरन और कैल्शियम लेना बहुत जरूरी है. सामान्य डिलीवरी में काफी ब्लड लॉस होता है लेकिन सिजेरियन में और भी ज्यादा. ऐसे में शरीर में खून की कमी नहीं होनी चाहिए.

Tips for Normal Delivery
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पानी पीते रहें :

गर्भ में बच्चा एक थैली में रहता है. इस थैली को एमनियोटिक फ्लूड कहते हैं. इसी से बच्चे को ऊर्जा मिलती है. ऐसे में मां के लिए ये जरूरी है कि वो हर रोज आठ से दस गिलास पानी पिए.

टहलना :

एक वक्त था जब गर्भावस्था में महिलाओं को चलने-फिरने से भी मना कर दिया जाता था. पर प्रेग्नेंट होने का मतलब बीमार होना बिल्कुल नहीं है. भारी काम करना आपको नुकसान पहुंचा सकता है लेकिन हिलना-डुलना बंद कर देना सही नहीं है.

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व्यायाम करें :

गर्भावस्था में ये बहुत जरूरी है कि गर्भवती महिला खुश रहे. उसे किसी प्राकार का कोई तनाव न हो. मां की मानसिक स्थिति का सीधा असर बच्चे के जन्म और डिलीवरी पर पड़ता है.

अस्वीकरण : आकृति.इन साइट पर उपलब्ध सभी जानकारी और लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए हैं। यहाँ पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए। चिकित्सा परीक्षण और उपचार के लिए हमेशा एक योग्य चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।

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