क्या है ऑस्टियो सार्कोमा और इसके लक्षण? जिससे दिल बेचारा में हुई थी सुशांत की मौत

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हेल्लो दोस्तों सुशांत सिंह राजपूत की आखिरी फिल्म ‘दिल बेचारा’ OTT प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज़ हो चुकी है. फिल्म को देखने के बाद उनके फैन्स सोशल मीडिया पर इमोशनल हो रहे हैं. इस फिल्म में सुशांत ने ऑस्टियो सार्कोमा (Osteosarcoma) रोगी का किरदार निभाया है, लेकिन, जिंदगी से हार नहीं मानते हैं। Symptoms Of Osteosarcoma

वहीं फिल्म में कीजी (Kizie) यानि संजना सांघी भी कैंसर पेशेंट बताई गईं हैं। इस फिल्म के ट्रेलर को देखकर यह समझना आसान है कि फिल्म में खुद कैंसर पेशेंट बने सुशांत कैसे संजना की मदद करते हैं। लेकिन, कौन जानता था की हमेशा हंसते रहने वाला इंसान खुद की जिंदगी समाप्त कर लेगा। आज इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको ऑस्टियो सार्कोमा के कारण और लक्षण और उपाय के बारे में बताएंगे

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क्या है ऑस्टियो सार्कोमा – What is Osteosarcoma

ऑस्टियो सार्कोमा हड्डियों में होने वाला ऐसा घाव है जो कैंसर में बदल जाता है। इसे एक प्रकार का बोन कैंसर भी कहते हैं। यह आमतौर पर घुटने के पास पिंडली में होता है। इसके अलावा यह कैंसर जांघ की हड्डी और कंधे के पास की हड्डी में हो सकता है। जबड़े की हड्डियों और लंबी हड्डियों में ऑस्टियो सार्कोमा तेजी से फैलता है।

आमतौर पर ऑस्टियो सार्कोमा उन लोगों में विकसित होता है जिन्हें कोई अन्य बीमारी नहीं होती है। ये बीमारी अनुवांशिक होती है। लेकिन कभी-कभी ऐसा देखा गया है कि परिवार में किसी को भी ये बीमारी नहीं है फिर भी आपको हो सकती है। अगर परिवार में किसी एक को भी ये बीमारी होती है तो डॉक्टर बाकी सदस्यों में इस बीमारी की पहचान आसानी से कर सकता है। जिसको ऑस्टियो सार्कोमा होता है उन रोगियों में कैंसर होने की संभावना बहुत अधिक होती है।

Symptoms Of Osteosarcoma
Symptoms Of Osteosarcoma

ऑस्टियो सार्कोमा किशोरावस्था में ही हो जाता है और इलाज न कराने पर बढ़ता रहता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि किशोरावस्था में तेजी से हड्डियों का विकास होता है और ऐसे में ट्यूमर होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।

ऑस्टियो सार्कोमा बीमारी के प्रमुख कारण – Reason of Osteosarcoma

अमूमन, ऑस्टियो सार्कोमा उन लोगों में विकसित होता है जिन्हें कोई अन्य बीमारी नहीं होती है. ये बीमारी अनुवांशिक यानि जेनेटिक भी नहीं होती. इस बीमारी से पीड़ित ज्यादातर लोग बीमार महसूस नहीं करते हैं और कहते हैं कि रोगियों को प्रभावित क्षेत्र में दर्द हो सकता है, जिससे उसमें लंगड़ापन भी विकसित हो सकता है.

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ऑस्टियो सार्कोमा के लक्षण – Symptoms Of Osteosarcoma

  • हड्डियों के सिरों के आसपास सूजन या गांठ.
  • हड्डी और जोड़ों में दर्द यह दर्द महीनों तक बना रहता है।
  • किसी घटना की वजह से अगर कोई हड्डी टूट जाती है तो भी ऑस्टियो सार्कोमा हो सकता है।
  • खेलने या एक्सरसाइज करने के दौरान हड्डियों में दर्द होना
  • दर्द और सूजन
Symptoms Of Osteosarcoma

क्या ऑस्टियो सार्कोमा का इलाज मुमकिन है?

  • बच्चों और वयस्कों दोनों को ऑस्टियो सार्कोमा हो सकता है। ऐसे में हर किसी का इलाज अलग तरह से होगा। डॉक्टर देखते हैं कि ट्यूमर तेजी से बढ़ रहा है या उसकी रफ्तार धीमी है।
  • साथ ही मरीज को कीमोथेरेपी और सर्जरी द्वारा भी ठीक किया जाता है।
  • सर्जरी करने का मकसद ये होता है कि पूरी तरह से कैंसर को बाहर निकाल दिया जाए।
  • अगर ट्यूमर बड़ा है तो डॉक्टर हाथ या पैर के उस हिस्से को बाहर निकाल देता है। जिससे कैंसर पूरे शरीर में न फैले। ऐसी सर्जरी के ज्यादा साइड—इफेक्ट नहीं होते हैं।
  • हर बार रेडियो थेरेपी कारगर नहीं होती है। कुछ मामलों में डॉक्टर को कीमोथेरेपी भी करनी पड़ती है।
  • कीमोथेरेपी से कैंसर के जीवाणु को पूरी तरह से खत्म करने की कोशिश की जाती है।
  • कुछ मामलों में कीमो और सर्जरी दोनों की जरूरत पड़ती है। कीमो में उल्टी आना, भूख न लगना और डायरिया जैसे साइड इफेक्ट हो सकते हैं।

ancer.org के मुताबिक अगर बीमारी एक जगह सीमित है और ज्यादा नहीं फैली है तो survival rate 70-75% है. अगर ये बीमारी फेफड़ों या दूसरी हड्डियों तक पहुंच चूका हो, तो long-term survival rate गिरकर 30% ही रह जाता है.

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