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हेल्लो दोस्तों प्रेगनेंसी में लो बीपी यानी लो ब्लड प्रेशर या रक्तचाप कम होना (Low Blood Pressure) एक सामान्य समस्या है। आपको इससे घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि गर्भावस्था में लो बीपी (garbhavastha me low bp) से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी जोखिम होने की संभावना बहुत कम महिलाओं को होती है। आमतौर पर गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी में लो ब्लड प्रेशर (pregnancy me low blood pressure) पहली तिमाही के दौरान होता है, जो कि सामान्य मामलों में गर्भावस्था के बढ़ने के साथ ठीक हो जाता है। आज इस संस्करण में हम आपको गर्भावस्था में लो बीपी (low bp during pregnancy in hindi) होने के लक्षण, कारण और इसके नियंत्रण के घरेलू उपाय बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में BP कितना होना चाहिए

प्रेगनेंसी में लो बीपी या रक्तचाप कम होना आम बात है। सामान्यतः गर्भावस्था में महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव और खून के प्रवाह में कमी की वजह से गर्भवती महिला को लो बीपी हो सकता है। लो ब्लड प्रेशर को चिकित्सकीय भाषा में हाइपोटेंशन (hypotension) कहते हैं। प्रेगनेंसी में ब्लड प्रेशर (pregnancy me blood pressure) का सामान्य स्तर 120/80 एमएमएचजी (mmHg) यानी सिस्टोलिक 120 और डायस्टोलिक 80 होता है। प्रेगनेंसी में सिस्टोलिक 5 से 10 और डायस्टोलिक करीब 10 से 15 तक कम हो सकता है। इस दौरान अगर महिला के शरीर में रक्तचाप का स्तर 90/60 एमएमएचजी (mmHg) के नीचे आता है, तो इसे प्रेगनेंसी में लो बीपी माना जाता है।

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चिकित्सकों के अनुसार प्रेगनेंसी के विभिन्न चरणों में गर्भवती महिला के शरीर में ऊर्जा का स्तर, घबराहट, तनाव और उसके दिनचर्या की वजह से ब्लड प्रेशर का स्तर निरंतर बदलता रहता है। गर्भावस्था की शुरुआत में अगर किसी गर्भवती महिला का बीपी लो होता है, तो सामान्य घरेलू उपचार से इसे नियंत्रण में रखा जा सकता है। आमतौर पर डिलीवरी के बाद लो ब्लड प्रेशर फिर से सामान्य हो जाता है।

गर्भावस्था में लो बीपी के लक्षण

प्रेगनेंसी में लो ब्लड प्रेशर होने के कई लक्षण (garbhavastha me low bp ke lakshan) होते हैं। ये लक्षण काफी आम होते हैं, जिसकी वजह से इनकी पहचान कर पाना मुश्किल होता है। आज हम आपको प्रेगनेंसी में लो बीपी के लक्षण बताने जा रहे हैं –

  • चक्कर आना: अगर किसी गर्भवती महिला को बैठने और खड़े होने पर अचानक चक्कर आ रहे हैं तो ये गर्भावस्था में लो बीपी का लक्षण हो सकता है।
  • बेहोश होना: प्रेगनेंसी में लो ब्लड प्रेशर का लक्षण अचानक बेहोश हो जाना हो सकता है।
  • जी मिचलाना: यूं तो गर्भावस्था के दौरान जी मिचलाना आम होता है, लेकिन कई मामलों में यह प्रेगनेंसी में लो बीपी का लक्षण हो सकता है। आमतौर पर यह हार्मोनल बदलावों की वजह से होता है।
  • ज्यादा थकान होना: कभी-कभी ज्यादा थकान होना गर्भावस्था में लो बीपी का संकेत हो सकता है। थकान के अन्य कारण हो सकते हैं।
  • धुंधला दिखाई देना: कई बार गर्भवती महिला को धुंधला (अस्पष्ट) दिखाई देता है, यह प्रेगनेंसी में लो बीपी का संकेत हो सकता है। हालांकि इसके अन्य कई कारण हो सकते हैं, जैसे रतौंधी (रात में दिखाई न देना), विटामिन ए और डी की कमी आदि।
  • हमेशा प्यास लगना: प्रेग्नेंट महिलाओं को दिन में कम से कम आठ गिलास पानी पीना चाहिए। पानी की भरपूर मात्रा पीने के बाद भी अगर आपको हमेशा प्यास लग रही है तो यह प्रेगनेंसी में लो बीपी का लक्षण हो सकता है।
  • त्वचा ठंडी हो जाना: प्रेगनेंसी में लो बीपी का लक्षण अचानक आपकी त्वचा ठंडी हो जाना हो सकता है। इस दौरान आपको कंपकंपी और ठंड भी महसूस हो सकती है।
  • अचानक सांस फूलना: प्रेगनेंसी में लो बीपी का संकेत अचानक सांस फूलना हो सकता है।
  • ध्यान की कमी होना: प्रेग्नेंट महिलाओं में ध्यान की कमी होना गर्भावस्था में लो बीपी का लक्षण हो सकता है।
  • ध्यान रखें: ऊपर बताए गए लक्षणों में से कुछ, सामान्य गर्भावस्था के लक्षण भी हो सकते हैं, इसीलिए प्रेगनेंसी में लो बल्ड प्रेशर का संदेह होने पर अपने डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
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गर्भावस्था में लो बीपी क्यों होता है

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में कई बदलाव होते हैं। इनमें कुछ हार्मोनल बदलाव तो कुछ सामान्य प्रेग्नेंसी से जुड़े बदलाव शामिल हैं। प्रेगनेंसी में लो बल्ड प्रेशर या रक्तचाप कम होना एक ऐसा शारीरिक बदलाव है, जो कभी कभी गर्भावस्था में उत्सुकता और घबराहट की वजह से भी हो सकता है। तो आइए जानते हैं प्रेगनेंसी में लो ब्लड प्रेशर होने के कारण –

नसों के फैलने से: गर्भावस्था के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलावों से प्रेग्नेंट महिला के शरीर की नसें फैलने लगती है, जिससे शरीर में खून का बहाव धीमा हो जाता है। यह प्रेगनेंसी में लो ब्लड प्रेशर का कारण हो सकता है।

गर्भाशय का आकार बढ़ने से: गर्भाशय का आकार बढ़ने से नसों पर इसका दबाव पड़ता है और खून का बहाव कम हो जाता है, जिससे प्रेगनेंसी में लो ब्लड प्रेशर हो सकता है।

शरीर में पानी की कमी से: कई बार प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में पानी की मात्रा कम होने लगती है। ऐसा ज्यादा पसीना आने, ज्यादा पेशाब आने व जरूरत से कम पानी पीने की वजह से हो सकता है। पानी की कमी होने की वजह से प्रेगनेंसी में लो ब्लड प्रेशर हो सकता है।

शरीर में खून की कमी से: गर्भावस्था के दौरान शिशु के विकास के लिए खून की जरूरत ज्यादा होने की वजह से महिला के शरीर में खून की कमी हो सकती है। ऐसे में शरीर में खून की कमी से प्रेगनेंसी में लो ब्लड प्रेशर हो सकता है।

आंतरिक रक्तस्राव होने से: गर्भावस्था में प्लेसेंटा प्रिविआ और एक्टोपिक प्रेगनेंसी होने पर गर्भवती को आंतरिक रक्तस्राव हो सकता है। इससे महिला को प्रेगनेंसी में लो ब्लड प्रेशर हो सकता है।

कुछ दवाओं से: प्रेगनेंसी में लो ब्लड प्रेशर उस दौरान दी जाने वाली कुछ दवाओं के कारण हो सकता है, लेकिन किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले अपने डॉक्टर से इसकी जांच करवा लें।

दिल की बीमारी से: अगर किसी गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी से पहले या उस दौरान दिल की बीमारी (कम हृदय गति, हार्ट अटैक और हार्ट वाल्व से जुड़ी समस्याएं) होती है, तो इसकी वजह से उसे गर्भावस्था में लो बीपी हो सकता है।

संतुलित आहार की कमी से: भरपूर मात्रा में संतुलित भोजन ना खाने से गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। इससे उसे प्रेगनेंसी में लो ब्लड प्रेशर हो सकता है।

तनाव से: डॉक्टर कहते हैं कि तनाव की वजह से गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी में लो ब्लड प्रेशर हो सकता है। गर्भावस्था में तनाव हार्मोनल और शरीरिक बदलाव से हो सकता है।

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ऐसे करें लो ब्लड प्रेशर की जांच

आमतौर पर प्रेगनेंसी में लो बीपी की जांच ब्लड प्रेशर मशीन की मदद से की जाती है। अगर जांच के दौरान महिला के ब्लड प्रेशर का स्तर निरंतर घटता रहता है, तो डॉक्टर उन्हें लो ब्लड प्रेशर की नियमित जांच करवाने की सलाह दे सकते हैं।

गर्भावस्था में बीपी लो होने का इलाज सीमित है। प्रेगनेंसी में लम्बे समय तक लो ब्लड प्रेशर होने पर, डॉक्टर जांच के आधार पर प्रेगनेंट महिला को लो डोसेज की बीपी की दवाइयां देते हैं, ताकि इससे गर्भ में पल रहे शिशु को कोई खतरा न हो।

लो बीपी के नियंत्रण के घरेलू उपाय

अगर प्रेगनेंसी में बीपी लो को समय रहते नियंत्रित न किया जाए, तो गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य और उसके विकास पर इसका दुष्प्रभाव पड़ सकता है। ज्यादातर भारतीय घरों में गर्भावस्था में लो बीपी को नियंत्रित करने के लिए कुछ आम घरेलू नुस्खें (pregnancy me low bp ke gharelu nuskhe) आजमाते हैं जो निम्न हैं-

नमक का पानी: गर्भावस्था में लो बीपी से जूझ रही लगभग प्रत्येक गर्भवती महिला को नमक-पानी पीने की सलाह दी जाती है। नमक में मौजूद सोडियम की मात्रा से खून का प्रवाह अच्छे से होता है और लो ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है। इसीलिए दिन भर में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में नमक-पानी पीती रहें। नमक-पानी बनाने के लिए एक गिलास पानी में एक छोटा चम्मच नमक डालें। नमक को अच्छी तरह पानी में घोलें और पी लें।

Low BP During Pregnancy
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किशमिश: किशमिश में भरपूर मात्रा में आयरन होता है। गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में खून की कमी या एनीमिया के कारण लो बीपी होने पर डॉक्टर उसे किशमिश खाने की सलाह देते हैं। नियमित रूप से एक महीने तक किशमिश खाने पर इसका असर दिखने लगता है। इसके लिए हर रोज रात को सोने से पहले दो चम्मच किशमिश को पानी में भिगो कर रख दें। सुबह उन्हें पानी से निकाल कर खाली पेट खाएं। आप भिगोए गए किशमिश के पानी को भी पी सकती हैं।

बीटरूट का जूस: प्रेगनेंसी में लो बीपी को नियंत्रित करने के लिए आप रोजाना ताजे बीटरूट का जूस पी सकती हैं। इससे एक हफ्ते के अंदर असर दिखने लगता है। इसके लिए सबसे पहले दो मध्यम आकार के बीटरूट को अच्छी तरह धो लें और उसके ऊपर के भाग को काट कर अलग कर लें। इसके बाद बीटरूट को छोटे आकार में काटें और उसे अच्छी तरह पीस लें। इस मिश्रण को छान कर पी लें।

भोजन में अदरक का इस्तेमाल: विभिन्न प्रकार के भारतीय पकवानों में अदरक का इस्तेमाल किया जाता है। अदरक में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स के तत्व पाए जाते हैं। डॉक्टर भी प्रेगनेंसी में लो बीपी को नियंत्रित करने के लिए अदरक को काफी गुणकारी मानते हैं। लेकिन इसकी तासीर गर्म होती है, इसीलिए इसका उपयोग कम करें, या उपयोग कितना करना है इसकी सलाह डॉक्टर से ले लें। इसके अलावा अदरक को आप सभी सब्जियों और सूप में सीमित मात्रा में मिला कर ले सकती हैं।

नींबू पानी: अगर गर्भावस्था में लो बीपी का कारण पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन है, तो रोजाना थोड़ी मात्रा में नींबू पानी पीएं, इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती। नींबू पानी शरीर में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाता है और पाचन संबंधित समस्याएं दूर करने में सहायक होता है। इसके लिए एक गिलास पानी में एक पूरा नींबू निचोड़ लें और अब इसमें थोड़ा सा नमक और चीनी मिलाकर पी लें।।

ताजे गाजर का जूस: रोजाना ताजे गाजर का जूस पीने से गर्भवती महिला के शरीर में रक्त संचार सही ढंग से हो पाता है, जिससे गर्भावस्था में लो बीपी नियंत्रण में रहता है। इसके लिए तीन मध्यम आकार की गाजर को अच्छी तरह धो लें और उनके ऊपर के भाग को काट कर अलग कर लें। इसके बाद गाजर के छोटे टुकड़े कर लें और उन्हें अच्छी तरह पीस लें। इस मिश्रण को छान कर गाजर का जूस निकालें और उसे पी लें।

बादाम का दूध: प्रेगनेंसी में लो बीपी होने पर डॉक्टर प्रेग्नेंट महिला को बादाम का दूध पीने की सलाह दे सकते हैं। बादाम के दूध से एड्रीनल ग्रंथियों का काम सुचारू रूप से हो पाता है और इससे लो ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है। करीब पांच से छह बादाम को एक कप पानी में रातभर भिगो कर रख दें। सुबह बादाम के छिलके निकालें और उसे पीस लें। एक गिलास गरम दूध में इसके मिश्रण को मिलाएं। इसे तब तक हिलाए जब तक बादाम का पेस्ट अच्छी तरह दूध में घुल न जाए। पेस्ट घुल जाने के बाद इसे हल्का गरम पी लें।

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लो बीपी होने पर रखें ये सावधानियां

गर्भावस्था में लो बीपी होने पर कुछ सामान्य घरेलू देखभाल से आप इसे नियंत्रण में रख सकती हैं। तो आइए जानते हैं गर्भावस्था में बीपी लो होने पर घर पर करें ये उपाय –

भरपूर मात्रा में पानी पीएं: शरीर में पानी की कमी के कारण प्रेगनेंसी में लो ब्लड प्रेशर हो सकता है, इसीलिए भरपूर मात्रा में पानी पीएं। इससे शरीर में खून का प्रवाह अच्छी तरह से होता है। दिन में कम से कम आठ गिलास पानी जरूर पीएं। सादा पानी के अलावा आप नारियल पानी, ओआरएस का घोल, नींबू पानी पी सकती हैं।

एकाएक बिस्तर से न उठें: गर्भावस्था में लो बीपी होने से आपको चक्कर आने का और बेहोशी का अनुभव हो सकता है। इसीलिए जब आप बिस्तर पर बैठीं या लेटी हों, तो अचानक उठने कोशिश न करें। इस अवस्था में हर काम धीरे-धीरे और आराम से करने की कोशिश करें।

स्वस्थ भोजन खाएं: अगर आपको प्रेगनेंसी में लो ब्लड प्रेशर है, तो आपको अपने भोजन पर अतिरिक्त ध्यान देने की जरूरत है। भोजन में उन चीजों को शामिल करें, जिससे आपके शरीर को सभी जरूरी पोषक तत्व मिल सकें, जैसे साबुत अनाज, फल, सब्जियां, सूखे मेवे आदि। थोड़ी-थोड़ी मात्रा में ज्यादा बार भोजन करने की आदत बनाएं।

टाइट कपड़े न पहनें: गर्भावस्था के दौरान शरीर में खून का प्रवाह कम हो जाता है। ऐसे में टाइट कपड़े पहनने से न केवल आपको असहजता महसूस हो सकती है बल्कि खून का प्रवाह और धीमा हो सकता है, इसीलिए आरामदायक कपड़े पहनें।

बायीं ओर करवट लेकर लेटें: डॉक्टर कहते हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान बायीं ओर लेटने से गर्भवती के शरीर में खून का प्रवाह सुचारू रूप से होता है, इसीलिए जब भी लेटें बायीं ओर करवट लेकर लेटें।

ज्यादा देर तक खड़े न रहें: प्रेग्नेंसी के दौरान ज्यादा समय तक किसी एक ही जगह पर खड़े रहने से रक्त संचार धीमा हो जाता है और बीपी लो होने का कारण बनता है। इसीलिए एक जगह पर ज्यादा देर तक खड़े न रहें।

योग करें: गर्भावस्था में लो बीपी होने पर गर्भवती महिलाएं योग एवं प्राणायाम कर लो बीपी को नियंत्रित कर सकती हैं। गर्भवती महिलाएं योग में विपरीत करनी, बालासन, उत्तानासन कर सकती हैं। इसके अलावा गर्भवती महिलाएं सूर्यभेद प्राणायाम कर सकती है। यह काफी गुणकारी होता है। इससे शरीर में ताप उत्पन्न होता और खून का प्रवाह तेजी से होता है।

अस्वीकरण : आकृति.इन साइट पर उपलब्ध सभी जानकारी और लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए हैं। यहाँ पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए। चिकित्सा परीक्षण और उपचार के लिए हमेशा एक योग्य चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।

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Akanksha
मेरा नाम आकांक्षा है, मुझे नए नए टॉपिक पर आर्टिकल्स लिखने का शौक पहले से ही था इसलिए मैंने आकृति वेबसाइट पर लिखने का फैसला लिया !

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