रविवार 11 नवंबर को छठ महापर्व का आरंभ होगा। पवित्र नदियों में व्रती अर्घ्य देंगे। चार दिन तक चलने वाले अनुष्ठान में ग्रह-गोचरों का शुभ संयोग रहेगा। संडे को नहाय-खाए के दिन सिद्धि योग बन रहा है। मंगलवार 13 नवंबर की शाम जब अर्घ्य दिया जाएगा तब अमृत योग व सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बनेगा। बुधवार प्रातः कालीन अर्घ्य के वक्त छत्र योग बन रहा है। शास्त्र कहते हैं, जो व्यक्ति धरती के साक्षात भगवान सूर्य नारायण को अर्घ्य देता है, उसके न केवल इस जन्म के बल्कि अनेकों जन्मों के पापों का नाश हो जाता है। जो भक्त नहाए-खाए से लेकर सप्तमी के पारण तक श्रद्धापूर्वक छठ व्रत को धारण करते हैं, उन पर षष्ठी माता की कृपा बरसती है। Shubh Sanyog on Chhath Pooja

छठ महापर्व का न केवल धार्मिक बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है। खरना का प्रसाद ईख के कच्चे रस का बना होता है। जिससे स्किन से संबंधित प्रॉब्लम और नेत्र रोगों में राहत मिलती है। इस व्रत के प्रभाव से स्वास्थ्य, सौभाग्य व संतान संबंधित सभी कष्टों का अंत होता है। पुराणों में बताई गई एक कथा के अनुसार राजा प्रियव्रत ने षष्ठी का व्रत रखने के बाद कुष्ठ रोग से मुक्ति पाकर सुंदर देह हासिल की थी। इस व्रत से शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि होती है। नहाय-खाए के दिन लौकी की सब्जी और अरवा चावल जरूर खाने चाहिए।

Shubh Sanyog on Chhath Pooja

छठ महापर्व आरंभ :

महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान नहाय-खाए से रविवार 11 नवंबर को शुरू हो गया है। सोमवार 12 को लोहंडा-खरना और मंगलवार 13 नवंबर की शाम भगवान भास्कर को पहला सायंकालीन अर्घ्य और बुधवार 14 नवंबर की सुबह प्रात:कालीन अर्घ्य प्रदान किया जाएगा। गंगा घाटों व पवित्र नदियों में लाखों की तादाद में व्रती अर्घ्य देंगे। इस व्रत में 36 घंटे तक व्रती निर्जला रहते हैं। बिहार और पूर्वी उत्तरप्रदेश में छठ पर्व पूरी आस्था व भक्ति के साथ मनाई जाती है। ज्योतिषियों के अनुसार इस बार छठ महापर्व के चार दिवसीय अनुष्ठान में ग्रह-गोचरों का शुभ संयोगों बन रहा है।

नहाय-खाय पर बन रहा ये योग :

वहीं मंगलवार 13 नवंबर को सायंकालीन अर्घ्य पर अमृत योग व सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग है जबकि प्रात:कालीन अर्घ्य पर बुधवार की सुबह छत्र योग का संयोग बन रहा है। सूर्य को अर्घ्य से कई जन्मों के पाप नष्ट होते हैं। सूर्य को अर्घ्य देने से व्यक्ति के इस जन्म के साथ किसी भी जन्म में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं।

Shubh Sanyog on Chhath Pooja

  • पीतल व तांबे के पात्रों से अर्घ्य प्रदान करना चाहिए।
  • चांदी,स्टील,शीशा व प्लास्टिक के पात्रों से भी अर्घ्य नहीं देना चाहिए।
  • पीतल के पात्र से दूध का अर्घ्य देना चाहिए।
  • तांबे के पात्र में दूध से अर्घ्य नहीं देना चाहिए।

छठ महापर्व खासकर शरीर ,मन और आत्मा की शुद्धि का पर्व है। वैदिक मान्यता है कि नहाए-खाय से सप्तमी के पारण तक उन भक्तों पर षष्ठी माता की कृपा बरसती है जो श्रद्धापूर्वक व्रत करते हैं।

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