जानिए किस दिन है शरद पूर्णिमा और क्या है पूजन का शुभ मुहूर्त

हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता हैं वही धर्म शास्त्रों और पुराणों में भी पूर्णिमा तिथि के बारे में बताया गया हैं ऐसा कहा जाता हैं यह तिथि बहुत ही शुभ और पवित्र मानी जाती हैं वही आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को ही शरद पूर्णिमा कहा जाता हैं इसे रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता हैं वही ज्योतिषशास्त्रों के मुताबिक हर साल में केवल इसी दिन चंद्रमा सोलह कलाओं से निपुण होता हैं और इससे निकलने वाली किरणें इस रात्रि में अमृत बरसाती हैं। Sharad Purnima 2019

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वही शरद पूर्णिमा की रात्रि को दूध की खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखा जाता हैं, वही हिंदू धर्म की मान्यता के मुताबिक चंद्रमा की किरणें खीर मे पड़ने से यह अमृत समान गुणकारी और लाभकारी हो जाता हैं। वही शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की विशेष रूप से पूजा आराधना करना शुभ माना जाता हैं। चंद्रमा की पूजा करने से मनुष्य की कुंडली में चंद्रमा से जुड़ी सभी तरह की परेशानी और समस्याएं दूर हो जाती हैं वही कार्य में सफलता प्राप्त होती हैं, चंद्रमा की पूजा से मन शांत बना रहता हैं।

Sharad Purnima 2019
Sharad Purnima 2019

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इस व्रत का हिंदू धर्म में विशेष स्थान माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता लक्ष्मी का जन्म इसी दिन हुआ था। भगवान कृष्ण ने गोपियों के साथ वृंदावन के निधिवन में इसी दिन रास लीला रचाया था। इस दिन को रास पूर्णिमा, कोजागर पूर्णिमा, कौमुदी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता हैं इस दिन चंद्रमा की किरण अमृत के समान होता है इसलिए ये किरणें हमलोगो के स्वास्थ्य तथा समृद्धि के लिए बहुत लाभकारी होती हैं। वस्तुतः इस दिन खुले आसमान में चावल की खीर बनाने तथा उस खीर को आसमान के नीचे कुछ घंटे तक रखकर रात्रि के 12 बजे के बाद खाना चाहिए ऐसा करने से सुख-समृद्धि, मान-सम्मान तथा धन-धान्य की वृद्धि होती है।

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कब है शरद पूर्णिमा :

बता दें कि शरद पूर्णिमा का व्रत इस बार 13 अक्टूबर दिन शुक्रवार को रखा जाएगा। वही यह दिन बहुत ही खास और शुभ माना जाता हैं इस दिन चंद्रमा की पूजा करना शुभ होता हैं।

व्रत का शुभ मुहूर्त :

पूर्णिमा आरंभ 13 अक्टूबर को 00:38:58 पर
पूर्णिमा समाप्त 14 अक्टूबर 2019 को 02:39:58

Sharad Purnima 2019
Sharad Purnima 2019

शरद पूर्णिमा का महत्त्व :

हिन्‍दू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्‍व है। इस दिन व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है साथ ही व्यक्ति की सभी समस्याओ से निजात मिल जाती है। इस व्रत को कौमुदी व्रत भी कहा जाता है और ऐसा कहा जाता है कि इस दिन जो विवाहित स्त्रियां संतान प्राप्ति के उद्देश्य से यदि व्रत रखती है तो उसे निश्चित ही संतान की प्राप्ति होती है। यही नहीं यदि माताएं अपने बच्चों के दीर्घायु के लिए यह व्रत रखती है तो निश्चित ही उनके संतान दीर्घायु होती है। यदि कुंवारी कन्याएं यह शारद पूर्णिमा व्रत रखती हैं तो उन्हें सुयोग्य और उत्तम वर की प्राप्ति होती है।

शरद पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा (Moon) किसी भी दिन के मुकाबले सबसे चमकीला होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन आसमान से अमृत की वर्षा होती है। चंद्रमा की किरणों में इस दिन बहुत तेज होता है जिससे आपकी आध्यात्मिक और शारीरिक शक्तियों का विकास होता है साथ ही इन किरणों में इस दिन असाध्य रोगों को दूर करने की क्षमता भी होती है।

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चन्द्रमा और शरद पूर्णिमा :

शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा ( Moon) पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है, इस कारण चन्द्रमा की किरणें बहुत ही तीक्ष्ण और चमकीली होती हैं। जो हमलोगो के लिए अत्यंत ही लाभदायक माना गया है। ऐसा माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी सभी सोलह कलाओं में उपस्थित होता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक मनुष्य का व्यक्तित्व चन्द्रमा की कला से जुड़ी होती है। चन्द्रमा की यह 16 विभिन्न कलाओं का संयोजन व्यक्ति को एक परिपूर्ण मानव व्यक्तित्व बनाता है। कहा जाता है की भगवान कृष्ण सभी 16 कला के साथ पैदा हुए थे तो वही भगवान राम का जन्म केवल 12 कला के साथ हुआ था।

Sharad Purnima

शरद पूर्णिमा की पूजा विधि :

शरद पूर्णिमा के दिन यदि आप उपवास व्रत रखते है तो आपको माता लक्ष्मी तथा चंद्र की पूजा करना चाहिए। मां लक्ष्मी को लाल रंग के कपड़े पर आसन देना चाहिए, उसके बाद लाल पुष्प, धुप-बत्ती और कपूर से पूजा करनी चाहिए। साथ ही उसके बाद आप संकल्प लें। फिर लक्ष्मी चालीसा और मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें। फिर मां लक्ष्मी की आरती करें।

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