7 अगस्त को है भाद्रपद की संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत, जानिए कथा और पूजन की विधि

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हेल्लो दोस्तों संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत (Sankashti Ganesh Chaturthi) प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को किया जाता है । किन्तु भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को किया जाने वाला व्रत, भाद्रपद संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कहलाता है। यह व्रत 7 अगस्त को है इस चतुर्थी को बहुला चतुर्थी भी कहते हैं। यह संकट नाशक चतुर्थी कहा गया है। Bhadrapad Sankashti Ganesh Chaturthi

भादों कृष्ण चतुर्थी सब संकटों की नाशक, विविध फलदायक एवं सम्पूर्ण सिद्धियों को देनेवाली है। इस व्रत के प्रभाव से सभी प्रकार के विघ्न दूर हो जाते हैं। यह सब कष्टों का नाश कर धन की वृद्धि करने वाला व्रत है। इस दिन ‘एकदंत’ गणेश जी की पूजा करें ।

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संकष्टी चतुर्थी या संकट चौथ का व्रत संतान की लंबी उम्र व खुशहाल जीवन के लिए रखा जाता है साथ ही इस दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा की जाती है। माना जाता है कि सकट चौथ का व्रत व इस दिन लंबोदर की पूजा से सारे संकट दूर हो जाते हैं और संतान की दीर्घायु और सुखद जीवन का वरदान प्राप्त होता है।

संकट चौथ को संकष्टी चतुर्थी, वक्रतुंडी चतुर्थी, तिलकुटा चौथ के नाम से भी जाना जाता है। संकष्टी चतुर्थी का व्रत वैसे तो हर महीने में दो बार होता है लेकिन माघ महीने में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी की महिमा सबसे ज्यादा है।

Bhadrapad Sankashti Ganesh Chaturthi
Bhadrapad Sankashti Ganesh Chaturthi

संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रतकथा :

Sankashti Ganesh Chaturthi Vrat Katha

राजा नल की कथा | पार्वती जी ने गणेश जी से पूछा कि हे पुत्र! भादों कृष्ण चतुर्थी को संकट नाशक चतुर्थी कहा गया हैं। अतः उस दिन का व्रत किस प्रकार किया जाता हैं। मुझसे समझाकर कहिए। गणेश जी ने कहा-हे माता! भादों कृष्ण न चतुर्थी सब संकटों की नाशक, विविध फलदायक एवं सम्पूर्ण सिद्धियों को देने वाली हैं। पूर्ववर्णित विधि से ही पूजा करनी चाहिए। हे पार्वती! इस व्रत में आहार सम्बन्धी कुछ विशेषताएँ हैं, उन्हें बतला रहा हूँ।

श्रीकृष्ण जी कहते हैं कि हे युधिष्ठिर! पुत्र की ऐसी बात सुनकर पार्वती जी ने उनसे पूछा कि आहार एवं पूजन में क्या विशेषता है, उसे कहिए। गणेश जी ने कहा कि गुरु द्वारा वर्णिंत प्रणाली से इस दिन भक्तिभाव से पूजन करें। चतुर्थी के दिन प्रातः नित्य कर्म से निवृत हो तो व्रत का संकल्प करें, तत्पश्चात रात्रि में पूजन और कथा श्रवण करें।

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पूर्वकाल में नल नामक एक पुण्यात्मा और यशस्वी राजा हुए उनकी रूपशालिनी रानी दमयंती नाम से प्रसिद्ध थी। एक बार उन्हें शाप ग्रस्त होकर राजच्युत होना पड़ा और रानी के वियोग में कष्ट सहना पड़ा। तब उनकी रानी दमयंती ने इस सर्वोत्तम व्रत को किया। पार्वती जी ने पूछा कि हे पुत्र! दमयंती ने किस विधि से इस व्रत को किया और किस प्रकार व्रत के प्रभाव से तीन महीने के अंदर ही उन्हें अपने पति से मिलाने का सयोंग प्राप्त हुआ? इन सब बातों को आप बतलाइए।

श्रीकृष्ण जी ने कहा कि हे युधिष्ठिर! पार्वती जी के ऐसा पूछने पर बुद्धि के भण्डार गणेश जी ने जैसा उत्तर दिया, उसे मैं कह रहा हूँ, आप सुनिए। श्री गणेश जी कहते हैं कि हे माता! राजा नल को बड़ी-बड़ी आपदाओं का सामना करना पड़ा। हाथी खाने से हाथी और घुड़साल से घोड़ों का अपरहण हो गया।

Bhadrapad Sankashti Ganesh Chaturthi
Bhadrapad Sankashti Ganesh Chaturthi

डाकुओं ने राजकोष लूट लिया और अग्नि की ज्वालाओं में घिरकर उनका माल भस्मात हो गया। राज्य को नष्ट करने वाले मंत्री लोगों ने भी उनका साथ छोड़ दिया। राजा जुए में सर्वस्व गंवा बैठे। उनकी राजधानी भी उनके हाथ से निकल गई। सभी ओर से निराश और असहाय होकर राजा नल वन में चले गए।

वन में रहते समय उन्हें दमयंती के साथ अनेक कष्ट झेलने पड़े। इतना ही नहीं उनका उनकी रानी से भी वियोग हो गया। तत्पश्चात राजा किसी नगर में काम करने लगा। रानी किसी दूसरे नगर में रहने लगी तथा राजकुमार भी अन्यत्र नौकरी करने लगा। जो किसी समय, रानी और राजपुत्र कहे जाते थे, वे ही अब भिक्षा मांगने लगे। तरह-तरह के रोगों से पीड़ित होकर, एक दूसरे से विलग होकर कर्म फल को भोगते हुए दिन बिताने लगे।

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एक समय की बात है कि वन में भटकते हुए दमयंती ने महर्षि शरभंग के दर्शन किये। उसने उनके पैरों पर नतमस्तक हो हाथ जोड़कर कहा। दमयंती ने पूछा कि हे ऋषिराज! मेरा अपने पति से कब मिलन होगा? मेरा भाग्य कब लौटेगा? हे मुनिवर! आप निश्चित रूप से बतलाइए।

श्री कृष्ण जी कहते है कि दमयंती का यह उत्तम प्रश्न सुनकर शरभंग मुनि ने कहा कि हे दमयंती! मैं तुम्हारे कल्याण की बात बता रहा हूँ, सुनो। इससे घोर संकट का नाश होता है, यह सब कामनाएं पूर्ण करने वाला एवं शुभदायक है। भादों मास की कृष्ण चतुर्थी संकटनाशन कही गई हैं। इस दिन नर-नारियों को एकदन्त गजानन की पूजा करनी चाहिए।

Bhadrapad Sankashti Ganesh Chaturthi
Bhadrapad Sankashti Ganesh Chaturthi

विधिपूर्वक व्रत एवं पूजन करने से ही, हे रानी! तुहारी सम्पूर्ण इच्छाएं पूरी होगी। सात महीने के अंदर ही तुम्हारा पति से मिलन होगा। यह बात में निश्चय पूर्वक कहता हूँ। गणेश जी कहते हैं कि शरभंग मुनि का ऐसा आदेश पाकर, दमयंती ने भादों की संकटनाशिनी चतुर्थी व्रत प्राम्भ किया और तभी से बराबर प्रतिमास गणेश जी का पूजन करने लगी। सात ही महीने में, हे राजन! इस उत्तम व्रत को करने से उसे पति, राज्य पुत्र और पूर्व कालीन वैभव आदि की प्राप्ति हो गई।

श्रीकृष्ण जी कहते हैं कि हे पृथा पुत्र युधिष्ठिर! इसी प्रकार इस व्रत को करने से आपको भी राज्य की प्राप्ति होगी और आपके सभी शत्रुओं का नाश होगा, यह निश्चय हैं। हे राजन! इस प्रकार मैंने सभी व्रतों में उत्तम व्रत का वर्णन किया। यह सब कष्टों का नाश करता हुआ आपके भाग्य की वृद्धि करेगा।

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संकष्टी चतु्र्थी व्रत दूसरी कथा :

Sankashti Ganesh Chaturthi Katha

एक बार मां पार्वती स्नान के लिए गईं तो उन्होंने द्वार पर भगवान गणेश को खड़ा कर दिया और कहा कोई अंदर न आ पाए। लेकिन तभी कुछ देर बाद भगवान शिव वहां पहुंच गए तो गणेश जी ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने त्रिशूल से गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया। पुत्र गणेश का यह हाल देखकर मां पार्वती बहुत दु,खी हुईं और शिव जी से अपने पुत्र को जीवित करने का हठ करने लगीं।

जब मां पार्वती ने शिव से बहुत अनुरोध किया तो भगवान गणेश को हाथी का सिर लगाकर दूसरा जीवन दिया गया। तब से उनका नाम गजमुख, गजानन हुआ। इसी दिन से भगवान गणपति को प्रथम पूज्य होने का गौरव भी हासिल हुआ और उन्हें वरदान मिला कि जो भी भक्त या देवता आपकी पूजा व व्रत करेगा उनके सारे संकटों का हरण होगा और मनोकामना पूरी होगी।

Bhadrapad Sankashti Ganesh Chaturthi

भाद्र मास गणेश चतुर्थी व्रत पूजन विधि :

Sankashti Ganesh Chaturthi Poojan Vidhi

भगवान गणपति में आस्था रखने वाले लोग संकष्टी चतुर्थी पर व्रत रखकर उन्हें प्रसन्न करके मनचाहे फल की कामना करते हैं प्रात: काल उठकर नित्य कर्म से निवृत हो स्नान कर, शुद्ध हो कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें। श्री गणेश जी का पूजन पंचोपचार (धूप, दीप, नैवेद्य, अक्षत, फूल) विधि से करें। इसके बाद हाथ में जल तथा दूर्वा लेकर मन-ही-मन श्री गणेश का ध्यान करते हुये निम्न मंत्र के द्वारा व्रत का संकल्प करें:- “मम सर्वकर्मसिद्धये सिद्धिविनायक पूजनमहं करिष्ये”

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अब कलश में जल भरकर उसमें गंगा जल मिलायें । कलश में दूर्वा, सिक्के, साबुत हल्दी रखें। उसके बाद लाल कपड़े से कलश का मुख बाँध दें। भगवान गणेश की पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुंह करें कलश पर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें। पूरे दिन श्री गणेशजी का ध्यान करें। एक स्नानप्रदोष काल में और कर लें। स्नान के बाद श्री गणेश जी के सामने सभी पूजन सामग्री के साथ बैठ जायें।

विधि-विधान से गणेश जी का पूजन करें। वस्त्र अर्पित करें। नैवेद्य के रूप में मोदक अर्पित करें। पूजा में तिल के लड्डू गुड़ रोली, मोली, चावल, फूल तांबे के लौटे में जल, धूप, प्रसाद के तौर पर केला और मोदक रखें. चंद्रमा के उदय होने पर चंद्रमा की पूजा कर अर्घ्य अर्पण करें। उसके बाद गणेश चतुर्थी की कथा सुने अथवा सुनाये। तत्पश्चात् गणेश जी की आरती करें। भोजन के रूप में केवल मोदक हीं ग्रहण करें।

Bhadrapad Sankashti Ganesh Chaturthi
Bhadrapad Sankashti Ganesh Chaturthi

भाद्र मास गणेश चतुर्थी महत्व:

Sankashti Ganesh Chaturthi Mahatva

संकष्टी का अर्थ होता है संकटों का हरण करने वाली चतुर्थी। इस व्रत में भगवान गणेश की पूजा की जाती है। महिलाएं अपने पुत्रों की दीर्घायु और खुशहाल जीवन की कामना के लिए ये व्रत रखती हैं। इस दिन निर्जला व्रत रख भगवान गणपति की विधि विधान अराधना की जाती है तथा उन्हें तिल के लड्डू चढ़ाए जाते हैं।

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