आखिर निर्जला एकादशी को क्यों कहते हैं भीमसेन एकादशी, जानें वजह

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शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते है इस व्रत मे पानी का पीना वर्जित है जिस कारण इसे निर्जला एकादशी कहते है। इस बार निर्जला एकादशी व्रत 2 जून को रखा जाएगा। ज्येष्ठ माह के शुक्लपक्ष की एकादशी को अपर और निर्जला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। Nirjala Ekadashi 2020

शास्त्रों में निर्जला एकादशी को लेकर यह वर्णन मिलता है कि इस व्रत का महत्व महर्षि वेदव्यास जी ने भीम को बताया था। अतः इसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखने का महत्व खुद महर्षि वेदव्यास ने भीम को बताया था।

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यह व्रत काफी कठिन है जिसे निर्जला रहकर रखा जाता है। माना जाता है कि इस एक एकादशी का व्रत रखने से सभी एकादशी व्रतों के बराबर पुण्य की प्राप्ति हो जाती है।

निर्जला एकादशी का शुभ मुहूर्त:

आरम्भ : 1 जून दोपहर 02:57 बजे से होगा
समाप्ति: 2 जून दोपहर 12:04 बजे होगी। व्रत पारण का समय 3 जून को प्रात: 05:11 बजे से सुबह 08:53 बजे तक होगा।

इसलिए कहते हैं भीमसेन एकादशी भी :

कथा म‍िलती है क‍ि जब महर्षि वेदव्यास ने पांडवों को चारों पुरुषार्थ- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाले एकादशी व्रत का संकल्प कराया तो महाबली भीम ने निवेदन किया- महर्षि आपने तो प्रति पक्ष एक दिन के उपवास की बात कही है। मैं तो एक दिन क्या एक समय भी भोजन के बगैर नहीं रह सकता- मेरे पेट में ‘वृक’ नाम की जो अग्नि है, उसे शांत रखने के लिए मुझे कई लोगों के बराबर और कई बार भोजन करना पड़ता है। तो क्या अपनी उस भूख के कारण मैं एकादशी जैसे पुण्यव्रत से वंचित रह जाऊंगा?

ऐसा हुआ भीम की समस्‍या का न‍िदान :

व्रत कथा मान्यता के अनुसार महाभारत काल के समय एक बार पाण्डु पुत्र भीम ने महर्षि वेद व्यास जी से पूछा- ‘हे परम आदरणीय मुनिवर! मेरे परिवार के सभी लोग एकादशी व्रत करते हैं व मुझे भी व्रत करने के लिए कहते हैं। लेकिन मैं भूख नहीं रह सकता हूं अत: आप मुझे कृपा करके बताएं कि बिना उपवास किए एकादशी का फल कैसे प्राप्त किया जा सकता है।’

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भीम के अनुरोध पर वेद व्यास जी ने कहा- ‘पुत्र तुम निर्जला एकादशी का व्रत करो, इसे निर्जला एकादशी कहते हैं। इस दिन अन्न और जल दोनों का त्याग करना पड़ता है।

जो भी मनुष्य एकादशी तिथि के सूर्योदय से द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक बिना पानी पीये रहता है और सच्ची श्रद्धा से निर्जला व्रत का पालन करता है, उसे साल में जितनी एकादशी आती हैं उन सब एकादशी का फल इस एक एकादशी का व्रत करने से मिल जाता है।’ कहा जाता है कि महर्षि वेद व्यास के वचन सुनकर भीमसेन निर्जला एकादशी व्रत का पालन करने लगे और पाप मुक्त हो गए।

Nirjala Ekadashi 2020

यह है निर्जला एकादशी का महत्‍व :

वेदव्‍यास के इतने आश्वासन पर तो वृकोदर भीमसेन भी इस एकादशी का विधिवत व्रत करने को सहमत हो गए। इसलिए वर्ष भर की एकादशियों का पुण्य लाभ देने वाली इस श्रेष्ठ निर्जला एकादशी को लोक में पांडव एकादशी या भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।

मान्‍यता है क‍ि इस दिन जो स्वयं निर्जल रहकर ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को शुद्ध पानी से भरा घड़ा दान करता है। उसे जीवन में कभी भी क‍िसी बात की कमी नहीं होती। हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है।

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जो भी मनुष्य एकादशी तिथि के सूर्योदय से द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक बिना पानी पीये रहता है और सच्ची श्रद्धा से निर्जला व्रत का पालन करता है, उसे साल में जितनी एकादशी आती हैं उन सब एकादशी का फल इस एक एकादशी का व्रत करने से मिल जाता है।’ कहा जाता है कि महर्षि वेद व्यास के वचन सुनकर भीमसेन निर्जला एकादशी व्रत का पालन करने लगे और पाप मुक्त हो गए।

निर्जला एकादशी व्रत क्या न करे :

एकादशी या ग्यारस तिथि भगवान विष्णु जी को बेहद प्रिय है इसीलिए शास्त्रों में आज के दिन कुछ ऐसे कार्य बताये गए है जिन्हे भूलकर भी नहीं करने चाहिए इस व्रत की विधि और नियम काफी कठिन होते है इसीलिए यह एकादशी बेहद कठिन मानी जाती है आज हम आपको निर्जला एकादशी व्रत के नियम सावधानिया या इस दिन कौन से काम आपको नहीं करने है इस बारे में बताएँगे.

बाल व नाखून नहीं काटने चाहिए –

शास्त्रों में ऐसी मान्यता है की जो भी इस दिन निर्जल व्रत रखते है उन्हें विशेष ख्याल रखना चाहिए की आज के दिन घर में बाल व नाखून काटना, दाढ़ी मूंछ बनवाना जैसे कार्य नहीं करने या नहीं होने देने चाहिए. यह व्रत भगवान विष्णु जी की आराधना के लिए बेहद ख़ास होता है इसीलिए आज के दिन इस तरह के कार्य वर्जित माने गए है.

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चावल नहीं खाने चाहिए –

शास्त्रों के अनुसार किसी भी एकादशी के दिन चावल नहीं खाना चाहिए। एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है प्राचीन मान्यता के अनुसार चावल एकादशी तिथि के दिन ऋषि मेधा के अंश से उत्पन्न् हुआ था जिस कारण आज के दिन चावल नहीं खाए जाते हैं। वही चावल शरीर में पानी की मात्रा को बढ़ाता है जिससे मन की चंचलता बढ़ती है और व्यक्ति का मन आराधना में नहीं लग पाता है इसीलिए एकादशी के व्रत में चावल का प्रयोग वर्जित होता है.

दूसरे की बुराई नहीं करनी चाहिए –

शास्त्रों में परनिंदा से बड़ा कोई पाप नहीं है इसीलिए एकादशी के दिन दूसरों की बुराई या निंदा करने जैसे कार्यो से बचना चाहिए. मान्यता है की आज के दिन किसी भी व्यक्ति की चुगली, बुराई करना, या बुरे विचारों को मन में लाने से पुण्य कर्म क्षीण होने लगते है. इसीलिए कोशिश करे की आज गलती से भी इस तरह के काम न करे.

तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए –

शास्त्रों के अनुसार एकादशी तिथि के दिन तुलसी के पत्ते बिलकुल नहीं तोड़ने चाहिए आज का दिन भगवान विष्णु जी को समर्पित है और तुलसी भगवान विष्णु जी को अति प्रिय है आज के दिन विष्णु जी को तुलसी चढ़ाई जाती है पूजा में इस्तेमाल करने के लिए तुलसी के पत्ते एकादशी के पहले दिन ही तोड़कर सुरक्षित रख लेनी चाहिए।

तामसिक भोजन से परहेज करे –

निर्जला एकादशी का व्रत निर्जल रहकर पूरा किया जाता है मान्यता है की आज के दिन घर में प्याज, लहसुन या किसी भी तरह के तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए. जहाँ तक संभव हो इस दौरान घर में सात्विक भोजन ही बनाना चाहिए अर्थात सात्विकता का खास ख्याल रखना चाहिए.

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