Mahalaxmi Vrat 2020
Mahalaxmi Vrat 2020
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दोस्तों, श्राद्ध पक्ष शुरू हो चुका है और मान्यताओं के अनुसार जहाँ एक तरफ इस समय शुभ कार्य वर्जित होते हैं, वहीँ दूसरी तरफ इसी दौरान पड़ने वाली अष्टमी के दिन देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इसे गजलक्ष्मी व्रत (Gajlaxmi Vrat) कहा जाता है। इस दिन सोना खरीदने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन सोना खरीदने से सोने में आठ गुना बढ़ोतरी होती है। इस बार यह व्रत 17 सितम्बर को पड़ रहा है। इसे गजलक्ष्मी व्रत के अलावा महालक्ष्मी व्रत (Mahalaxmi Vrat), और हाथी पूजा भी कहते हैं।

महालक्ष्मी व्रत या गजलक्ष्मी व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष से शुरू होता है और इसकी समाप्ति अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को होती है। सोलह दिनों के इन व्रतों में जो भी व्यक्ति मां लक्ष्मी की सुबह और शाम पूरी श्रद्धा से पूजा अर्चना करता है। उसके जीवन में धन, संपदा, सुख और समृद्धि की कोई कमीं नही रहती तो चलिए जानते हैं महालक्ष्मी व्रत 2022 में कब है।

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महालक्ष्मी व्रत 2022 तिथि

महालक्ष्मी व्रत प्रारंभ – 3 सितम्बर 2022
महालक्ष्मी व्रत समाप्ति -17 सितंबर 2022

महालक्ष्मी व्रत का महत्व

Mahalaxmi Vrat Mahatva

महालक्ष्मी व्रत के दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। यह व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष से शुरू होता है और इसकी समाप्ति अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि होती है। सोलह दिनों तक किए जाने वाले इस व्रत में शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। सोलह दिन के इस व्रत में अन्न को ग्रहण नहीं किया जाता है और जब यह व्रत पूर्ण हो जाए तो इसका उद्यापन करना भी आवश्यक है।

Mahalaxmi Vrat poojan Vidhi
Mahalaxmi Vrat poojan Vidhi

लेकिन यदि कोई व्यक्ति सोलह दिनों के नियमों को पूर्ण नहीं कर सकता तो वह अपने सामर्थ्य के अनुसार कम दिनों के व्रत कर सकता है और मां लक्ष्मी का आर्शीवाद प्राप्त कर सकता है। शास्त्रों में इस व्रत की बहुत अधिक महत्वता बताई गई है। यदि कोई स्त्री इस व्रत को करती है तो उसे धन, धान्य, सुख, समृद्धि, संतान आदि सभी चीजों की प्राप्ति होती है और यदि कोई पुरुष इस व्रत को करता है तो उसे धन, सपंदा,नौकरी, व्यापार आदि सभी चीजों में तरक्की मिलती है।

महालक्ष्मी पूजन सामग्री

Mahalaxmi Vrat Poojan Samagri

हल्दी,कुमकुम,बैठने के लिये आसऩ,अक्षत,सोना या चाँदी या रुपया,धूप,दीपक,लाल फूल,श्री गज लक्ष्मी का चित्र,लाल कपड़ा,ताँबे का कलश,शुद्ध देसी घी,कटोरी (कलश को ढ़कने के लिये),नैवेद्य,फल,फूल,पूजन सामग्री में चन्दन, ताल, पत्र, पुष्प माला, अक्षत, दूर्वा, लाल सूत, सुपारी, नारियल आदि।

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महालक्ष्मी व्रत पूजा विधि

Mahalaxmi Vrat Poojan Vidhi

  1. महालक्ष्मी व्रत करने वाले साधक को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद लाल वस्त्र धारण करने चाहिए।
  2. इसके बाद चावल का घोल बनाकर पूजा स्थान पर मां लक्ष्मी के चरण बनाने चाहिए।
  3. माता लक्ष्मी के चरण बनाने के बाद चौकी को आम के पत्तों से सजाएं।
  4. मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करने के बाद अपनी कलाई पर 16 गांठ लगाकर एक धागा बांधे।
  5. इसके बाद माता लक्ष्मी की गज लक्ष्मी प्रतिमा चौकी पर स्थापित करें और कलश की स्थापना भी करें।
  6. कलश की स्थापना करने के बाद पहले गणेश जी की पूजा करें उन्हें दूर्वा अर्पित करें और उनकी विधिवत पूजा करें।
  7. इसके बाद माता लक्ष्मी को पुष्प माला, नैवेध, अक्षत,सोना या चाँदी आदि सभी चीजें अर्पित करें।
  8. यह सभी चीजें अर्पित करने के बाद महालक्ष्मी व्रत की कथा पढ़ें या सुने।
  9. इसके बाद माता लक्ष्मी की आरती उतारें और उन्हें खीर का भोग लगाएं। इसी प्रकार शाम के समय भी पूजा करें।
  10. पूजा के बाद एक दीपक माता लक्ष्मी के आगमन के लिए घर के बाहर भी जलाएं और शाम की पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य अवश्य दें।
Mahalaxmi Vrat 2020
Mahalaxmi Vrat 2021

महालक्ष्मी व्रत की कथा

Mahalaxmi Vrat Katha

पौराणिक कथा के अनुसार एक नगर मे एक गरीब ब्राह्मण रहा करता था। वह ब्राह्मण भगवान विष्णु का बहुत ही बड़ा भक्त था और पूरे विधि-विधान से उनकी पूजा किया करता था। भगवान विष्णु भी अपने भक्त से बहुत से प्रसन्न रहते थे। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे दर्शन दिए और उससे वरदान मांगने के लिए कहा। उस ब्राह्मण ने भगवान विष्णु से अपने घर में लक्ष्मी जी के निवास की इच्छा जाहिर की। ब्राह्मण की बात सुनकर भगवान विष्णु ने उसे लक्ष्मी प्राप्ति का मार्ग बताया।

विष्णु जी ने कहां कि मंदिर के सामने रोज एक वृद्ध स्त्री आती है जो वहां पर उपले थापती हैं, तुम जाकर उस स्त्री को अपने घर आने के लिए आमंत्रित करो। वह स्त्री कोई और नही बल्कि देवी लक्ष्मी ही है। अगर वह स्त्री तुम्हारे घर में आ गई तो तुम्हारा घर धन और धान्य से भर जाएगा। यह कहकर विष्णु जी अंर्तध्यान हो गए। इसके बाद वह ब्राह्मण दूसरे दिन सुबह 4 बजे ही मंदिर के द्वार पर जाकर बैठ गया।

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जैसे ही वह वृद्ध स्त्री उपले थापने के लिए मंदिर आई तो उस ब्राह्मण ने विष्णु जी के कहे अनुसार उस वृद्ध स्त्री को अपने घर आने का निमंत्रण दे दिया। जब ब्राह्मण ने माता लक्ष्मी को घर आने को कहा तो वह समझ गई की ऐसा करने के लिए उसे भगवान विष्णु ने ही कहा है।

इसके बाद लक्ष्मी जी ने कहा कि तुम महालक्ष्मी व्रत करो, यह व्रत 16 दिनों तक किया जाता है और इसमें 16 रातों तक चंद्रमा को अर्ध्य दिया जाता है। ऐसा करने से तुम्हारी इच्छा जल्द ही पूर्ण हो जाएगी। उस ब्राह्मण ने माता लक्ष्मी के कहे अनुसार महालक्ष्मी व्रत किया और उत्तर दिशा में मुख करके लक्ष्मी जी को पुकारा,इसके बाद लक्ष्मी जी ने भी अपना वचन पूर्ण किया।

Mahalaxmi Vrat poojan Vidhi
Mahalaxmi Vrat poojan Vidhi

एक अन्य कथा

एक बार महालक्ष्मी का त्यौहार आया। हस्तिनापुर में गांधारी ने नगर की सभी स्त्रियों को पूजा का निमंत्रण दिया परन्तु कुन्ती से नहीं कहा। गांधारी के 100 पुत्रों ने बहुत सी मिट्टी लाकर एक हाथी बनाया और उसे खूब सजाकर महल में बीचों बीच स्थापित किया।

सभी स्त्रियां पूजा के थाल ले लेकर गांधारी के महल में जाने लगी। इस पर कुन्ती बड़ी उदास हो गई. जब पांडवो ने कारण पूछा तो उन्होंने बता दिया – कि मैं किसकी पूजा करूँ ? अर्जुन ने कहा माँ ! तुम पूजा की तैयारी करो, मैं तुम्हारे लिए जीवित हाथी लाता हूँ

अर्जुन इन्द्र भगवान के पास गए। अपनी माता के पूजन हेतु वह ऐरावत को ले आया। माता ने सप्रेम पूजन किया। सभी ने सुना कि कुन्ती के यहाँ तो स्वयं इंद्र का एरावत हाथी आया है तो सभी कुन्ती के महल कि ओर दौड पड़ी और सभी ने पूजन किया।

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महालक्ष्मी जी आरती

Mahalaxmi Ji Aarti

ओउम् जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हर विष्णु विधाता।।

उमा रमा ब्रहमाणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।

दुर्गा रूप निरंजनि, सुख सम्पति दाता।
जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि पाता।

तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभ दाता।
कर्म-प्रभाव प्रकाशिनि, भव निधि की त्राता।।

जिस घर में तुम रहती, सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता।।

तुम बिन यज्ञ न होवे, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता ।।

शुभगुण मंदिर सुंदर, श्रीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन कोई नहीं पाता।।

महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता।
उर आनंद समाता, पाप उतर जाता ।

बोलो भगवती महालक्ष्मी की जय।।

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