Kamda Ekadashi Vrat
Kamda Ekadashi Vrat

कामदा एकादशी, कामदा एकादशी कब है, कामदा एकादशी का शुभ मुहूर्त, कामदा एकादशी पूजन विधि, कामदा एकादशी व्रत कथा और महत्त्व, Kamda Ekadashi Vrat, Kamda Ekadashi 2022, Kamda Ekadashi Kab Hai, Kamda Ekadashi Shubh Muhurt, Kamda Ekadashi Poojan Vidhi, Kamda Ekadashi Katha Aur Mahatv, Kamda Ekadashi Vrat Ke Upay, Kamda Ekadashi Vrat Kyu Manai Jati Hai

हेल्लो दोस्तों हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष 24 एकादशियां पड़ती हैं। हर महीने शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में एक-एक एकादशी तिथि होती है। पंचांग के अनुसार इस माह भी 12 अप्रैल मंगलवार को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष को एकादशी तिथि है. जिसे कामदा एकादशी (Kamda Ekadashi Vrat) के नाम से जाना जाता है। कामदा एकादशी (Kamada Ekadashi) चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष में मनाई जाने वाली एक पवित्र हिंदू व्रत है। यह हिंदू नव वर्ष की पहली एकादशी होती है। इस एकादशी के दिन को भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की आराधना करने के लिए उत्तम माना जाता है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है। हिंदू धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, कामदा एकादशी व्रत करने वाले व्यक्ति की सारी मनोकामनाएं पूरी होती है और इस व्रत के प्रभाव से उस व्यक्ति के पापों का भी नाश होता है।

कहा जाता है कि जो व्रतधारी कामदा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करता है उसे भगवान विष्णु वरदान देते हैं। इतना ही नहीं कामदा एकादशी व्रत रखने वाले भक्तों को पुण्य की प्राप्ति होती है तथा उनके सारी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। कामदा एकादशी हिन्दू नव संवत्सर 2079 की पहली एकादशी है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं कामदा एकादशी का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, कथा और इसका धार्मिक महत्व।

कामदा एकादशी कब मनाई जाती है? (Kamda Ekadashi Kab Manai Jaati Hai)

प्रत्येक वर्ष चैत्र के महीने में शुक्ल पक्ष के समय आने वाली एकादशी कामदा को एकादशी मनाया जाता है। साधु संत अर्थात तपस्वियों द्वारा इसे एक दिन पहले मनाया जाता है। यह दिन भगवान श्री विष्णु को समर्पित होता है, जिसमें पूजा-पाठ किए जाते हैं और व्रत रखे जाते हैं। कामदा एकादशी के दिन कोई भी इस व्रत को रख सकता है। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह आरंभ होते ही शुक्ल पक्ष में जब ग्यारहवां दिन आता है तो उसे कामदा एकादशी कहा जाता है।

ये भी पढ़िए : सारे पापो का नाश करती है पापमोचनी एकादशी, जानें कथा, महत्व और व्रत पूजा…

कामदा एकादशी व्रत का शुभ मुहूर्त (Kamda Ekadashi Shubh Muhurt )

तिथि प्रारंभ – 12 अप्रैल, दिन मंगलवार प्रातः 4 बजकर 30 मिनट से
तिथि समाप्त – 13 अप्रैल, दिन बुधवार प्रात: 05 बजकर 02 मिनट तक
सर्वार्थ सिद्धि योग –शाम 5 बजकर 59 मिनट से सुबह 08 बजकर 35 मिनट तक 
दिन शुभ मुहूर्त –दोपहर 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक
कामदा एकादशी का पारणा मुहूर्त –दोपहर 01 बजकर 40 मिनट से 04 बजकर 13 मिनट तक (13 अप्रैल, बुधवार)
Kamda Ekadashi Vrat
Kamda Ekadashi Vrat

कामदा एकादशी व्रत पूजा विधि (Kamda Ekadashi Poojan Vidhi)

  • एकादशी व्रत से एक दिन पहले यानी दशमी के दिन सूर्यास्त के बाद भोजन ना करें।
  • इस दिन सुबह-सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के पश्चात स्वच्छ वस्त्रों को धारण किया जाता है।
  • इसके बाद गंगाजल छिड़क कर पूजा स्थल को पवित्र करके एक लकड़ी की चौकी रखें।
  • अब इस चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति को स्थापित किया जाता है।
  • इसके बाद भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लिया जाता है।
  • इसके बाद दोनों हाथों को जोड़कर भगवान को प्रणाम करके उन्हें हल्दी, अक्षत, चंदन तथा फल-फूल चढ़ाए जाते हैं।
  • फिर भगवान की मूर्ति को रोली से टीका करके पंचामृत और तिल अर्पित किया जाता है।
  • भगवान विष्णु को तुलसी बहुत प्रिय है, इसलिए श्रीहरि को भोग लगाते समय तुलसी का पत्ता जरूर चढ़ाएं।
  • इसके बाद एकादशी कथा का पाठ या सत्‍य नारायण की कथा पढ़ें।
  • कथा के बाद भगवान श्री विष्‍णु को भोग लगाएं आरती करें।
  • शाम को पूजन के बाद तुलसी जी के आगे घी का दीपक अवश्य जलाना चाहिए।
  • अगले दिन द्वादश को ब्राह्मण को भोजन कराने के बाद व्रत का पारण करना चाहिए।

ये भी पढ़िए : कब है मोक्षदा एकादशी, जानिए शुभ मुहूर्त, कथा और पूजन विधि

कामदा एकादशी व्रत कथा (Kamda Ekadashi Vrat Katha)

प्राचाीन काल में एक नगर में एक श्रेष्‍ठ ब्राह्मण और एक ठाकुर रहते थे। दोनों की एक दूसरे से बिलकुल भी नहीं बनती थी। आए दिन वे किसी ना किसी बात को लेकर एक दूसरे से झगड़ा करते रहते थे। दोनों के बीच आपसी झगड़े इतने बढ़ गए कि एक दिन ठाकुर ने ब्राह्मण को मार डाला। उसके इस कृत्य से उस नगर के ब्राह्मण काफी नाराज थे।

उसे अपने किए पर बहुत ही पश्चाताप होने लगा। बाद में उसने उस ब्राह्मण की तेरहवीं करने की सोची तो ब्राह्मणों ने उसके घर भोजन करने से इनकार कर दिया। ब्राह्मण के विरोध और गुस्से के कारण ठाकुर एकदम अकेला पड़ गया। उसके मन में अपने कृत्‍य के लिए जो ग्‍लानि पैदा हुई, उससे वह स्वयं को दोषी मानने लगा।

मानसिक तौर पर वह काफी परेशान रहने लगा। अपने इस जीवन से वह बहुत दुखी हो गया। उसी दौरान उसे एक साधु मिले। उसने साधु से अपने इस महापाप के निवारण का उपाय जानना चाहा। तब उस महात्मा ने उसे कामदा एकादशी का महत्व बताया और उसे कामदा एकादशी का व्रत करने का सुझाव दिया।

Kamda Ekadashi Vrat

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि आने पर उस ठाकुर ने उस महात्मा के बताए अनुसार कामदा एकादशी का व्रत रखा। कामदा एकादशी के दिन जब वह भगवान विष्णु की मूर्ति के पास सो रहा था, तब उसने एक स्वपन देखा। उसमें भगवान विष्णु ने उससे कहा​ कि ठाकुर तुम इस व्रत के प्रभाव से ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्त हो गए हो। ब्रह्म हत्या के अपराध बोध से मुक्त होकर उस ठाकुर ने कामदा एकादशी व्रत के महत्व को लोगों को भी बताया। कामदा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। विष्णु लोक में उस व्यक्ति को स्थान प्राप्त होता है और उसकी अन्य मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं।

कामदा एकादशी के दिन जरुर करें ये उपाय (Kamda Ekadashi Ke Upay)

  • इस दिन भगवान विष्णु की पूजा में पीले पुष्प जैसे गेंदे अथवा केवड़ा के फूल अर्पित करें। ऐसा करने से जातकों को जीवन में खूब तरक्की मिलती है।
  • कामदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी को खरबूजा, आम, तिल, दूध एवं पेड़े का भोग जरुर लगाना चाहिए।
  • व्यापार और नौकरी में सफलता पाने के लिए जातकों को पूजन के समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र को 108 बार जपना चाहिए।
  • भगवान विष्णुजी को पीला रंग प्रिय है, इसलिए उनकी कृपा पाने के लिए ब्राह्मणों को पीले चावल अथवा पीला भोजन कराना चाहिए।
  • इस दिन पीले वस्त्र, पीले रंग की मिष्ठान दान करना चाहिए, ऐसा करने से जातकों का भाग्य प्रबल होता है।

कामदा एकादशी व्रत के दिन ध्यान रखें ये बातें (Kamda Ekadashi Suggession/ Tips)

  • कामदा एकादशी के दिन सूर्यास्त के बाद भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए।
  • भगवान विष्णु को सादा एवं मीठे पकवान का भोग लगाएं।
  • इस दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है, मान्यता है ऐसा करने वाला व्यक्ति अगले जन्म में रेंगने वाले जीव के रूप में जन्म लेते हैं।
  • इस दिन किसी भी प्रकार के खाने में प्याज और लहसुन का प्रयोग बिल्कुल भी ना करें और पूरे तरीके से सात्विक आहार लें।
  • इस दिन किसी को अपशब्द नहीं कहना चाहिए और न ही ऊंचे स्वर में बोलना चाहिए।
  • कामदा एकादशी के दिन गौमाता को हरा चारा अवश्य खिलाना चाहिए, इससे प्रभु की कृपा प्राप्त होती है।
  • विवाह में विलंब हो रहा हो तो इस दिन उस व्यक्ति को केसर, केला, गुड़ और चने की दाल दान करनी चाहिए।
  • वैवाहिक समस्या होने पर भगवान विष्णु जी को पूजा में हल्दी की गांठ अर्पित करना चाहिए।

कामदा एकादशी व्रत का महत्व (Kamda Ekadashi Ka Mahatv)

कामदा एकादशी का हिन्दू धर्म में बड़ा महत्व है। इस दिन भगवान वासुदेव की कृपा पाने के लिए भक्तों द्वारा व्रत रखा जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो भक्त कामदा एकादशी व्रत का पालन सच्ची श्रद्धा के साथ करता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। इस दिन दान करने का विशेष महत्व है. इस दिन व्रती सात्विक और सादा जीवन व्यतीत करता है और जगत के पालनहार विष्णु जी का स्मरण करता है। इस दिन चावल का उपभोग नहीं किया जाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here