कब है जया एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत नियम और इस दिन का महत्व

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हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है. एकादशी तिथि साल में 24 बार आती है. 12 एकादशी शुक्ल पक्ष और 12 एकादशी कृष्ण पक्ष की होती है. माघ मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को जया एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस दिन व्रत रखकर भगवान श्री हरि की पूजा की जाती है. एकादशी मन और शरीर को एकाग्र कर देती है, परन्तु अलग-अलग एकादशियां विशेष प्रभाव भी उत्पन्न करती हैं. जया एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक दिक्कतें दूर होती हैं और मन शांत रहता है. इस व्रत के नियमों का पालन करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है. Jaya Ekadashi 2021

जया एकादशी का व्रत इस साल 23 फरवरी दिन मंगलवार को रखा जाएगा. एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने पर पिशाच योनि का भय खत्म हो जाता है. एकादशी का महातम्य खुद भगवान कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को बताया है. आइए जानते हैं जया एकादशी व्रत का मुहूर्त, महत्व और व्रत कथा।

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जया एकादशी मुहूर्त :

एकादशी तिथि प्रारंभ : 22 फरवरी सायं 05:16 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त : 23 फरवरी सायं 06:05 बजे तक
जया एकादशी पारणा मुहूर्त : 24 फरवरी को सुबह 06:51 बजे से 09:09 बजे तक
अवधि : 2 घंटे 17 मिनट

Jaya Ekadashi 2021
Jaya Ekadashi 2021

जया एकादशी व्रत विधि :

  • प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें।
  • व्रत का संकल्प लें और फिर विष्णु जी की आराधना करें।
  • भगवान विष्ण़ु को पीले फूल अर्पित करें।
  • घी में हल्दी मिलाकर भगवान विष्ण़ु का दीपक करें।
  • पीपल के पत्ते पर दूध और केसर से बनी मिठाई रखकर भगवान को चढ़ाएं।
  • एकादशी की शाम तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाएं।
  • भगवान विष्णु को केले चढ़ाएं और गरीबों को भी केले बांट दें।
  • भगवान विष्णु के साथ लक्ष्मी का पूजन करें और गोमती चक्र और पीली कौड़ी भी पूजा में रखें।

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पारणा विधि :

  • जया एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि यानि एकादशी के अगले दिन शुभ मुहूर्त में करें.
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के पश्चात पूजन करें और भोजन बनाएं.
  • किसी जरूरत मंद या फिर ब्राह्मण को भोजन करवाकर दान-दक्षिणा देने के पश्चात सम्मानपूर्वक विदा करें.
  • पारण मुहूर्त में स्वयं भी भोजन ग्रहण करें.

जया एकादशी व्रत का महत्व :

पौराणिक शास्त्रों में जया एकादशी को बहुत ही पुण्यदायी एकादशी माना गया है। यह एकादशी का व्रत करने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है। शास्त्रों के अनुसार इस एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को भूत-प्रेत, पिशाच मुक्ति मिल जाती है।

Jaya Ekadashi 2021
Jaya Ekadashi 2021

जया एकादशी व्रत कथा :

जया एकादशी के बारे में एक कथा का उल्लेख किया गया है कि इन्द्र की सभा में एक गंधर्व गीत गा रहा था। परन्तु उसका मन अपनी प्रिया को याद करने लगा। इस कारण से गाते समय उसकी लय बिगड़ गई। इस पर इन्द्र ने क्रोधित होकर गंधर्व और उसकी पत्नी को पिशाच योनि में जन्म लेने का श्राप दे दिया। पिशाच योनी में जन्म लेकर पति पत्नी कष्ट भोग रहे थे। संयोगवश माघ शुक्ल एकादशी के दिन दुःखों से व्याकुल होकर इन दोनों ने कुछ भी नहीं खाया और रात में ठंड की वजह से सो भी नहीं पाये। इस तरह अनजाने में इनसे जया एकादशी का व्रत हो गया। इस व्रत के प्रभाव से दोनों श्राप मुक्त हो गये और पुनः अपने वास्तविक स्वरूप में लौटकर स्वर्ग पहुंच गये। देवराज इन्द्र ने जब गंधर्व को वापस इनके वास्तविक स्वरूप में देखा तो वे हैरान हुए। गन्धर्व और उनकी पत्नी ने बताया कि उनसे अनजाने में जया एकादशी का व्रत हो गया। इस व्रत के पुण्य से ही उन्हें पिशाच योनि से मुक्ति मिली है।

व्रत से जुड़े नियम :

इस व्रत के दिन पवित्र मन से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। मन में द्वेष, छल-कपट, काम और वासना की भावना नहीं लानी चाहिए। नारायण स्तोत्र एवं विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए। इस प्रकार से जया एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। जो लोग इस एकादशी का व्रत नहीं कर पाते हैं वह भी आज के दिन विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें और जरुरतमंदों की सहायता करें तो इससे भी पुण्य की प्राप्ति होती है।

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