हरियाली तीज 2018 : हरियाली तीज कैसे मनाई जाती है और क्या महत्व है

हरियाली तीज सुहागन स्त्रियों के लिए खास त्यौहार होता है इस दिन वो अपने पति की लम्बी उम्र के लिए निर्जला उपवास रखती है। तो आइए जानते है की हरियाली तीज का महत्व और इसे मनाने के पीछे क्या कारण है। Hariyali Teej 2018

हिन्दू धर्म में बहुत से त्यौहार मनाएं जाते हैं जिसमें से हरियाली तीज भी एक है। यह त्यौहार पूरे उत्तर भारत, मध्य प्रदेश, बिहार, आदि में धूमधाम और बड़े हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। लेकिन राजस्थान में इसकी अलग ही धूम देखने को मिलती है। हरियाली तीज श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत सुहागन स्त्रियों के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह व्रत वो अपने सौभाग्य को बनाएं रखने और अपने पति की दीर्घायु के लिए करती है।

साथ ही हरियाली तीज का व्रत कुँवारी लडकियां अच्छे पति की कामना को लेकर भी करती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार मां पार्वती ही सावन के महीने की तृतीया तिथि को देवी के रूप में यानी तीज माता के नाम से अवतरित हुई थी। और साथ ही सावन का महीना भोलेबाबा का भी सबसे प्रिय महीना है। इसीलिए भोलेबाबा और माँ पार्वती को प्रसन्न करने के लिए महिलाएं इस व्रत को करती है। हरियाली तीज की मान्यता है की यह त्यौहार शिव और पार्वती के पुनर्मिलाप के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

हरियाली तीज का व्रत क्यों किया जाता है:-

ऐसा कहा जाता है की माँ पार्वती भोलेबाबा को अपने पति के रूप में पाना चाहती थी। और इसके लिए उन्होंने 107 जन्म लिए थे, लेकिन 108 जन्म के कठोर तप के बाद ही भोलेबाबा ने माँ पार्वती को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था। तभी से इस व्रत की परम्परा शुरू हुई और सुहागन स्त्रियां इस व्रत को अपने पति की लम्बी उम्र के लिए रखने लगी। क्योंकि उनकी आस्था के अनुसार इस व्रत को पूरी श्रद्धा से रखने पर माँ पार्वती उनके पति की लम्बी आयु का आशीर्वाद देती है।

हरियाली तीज कैसे मनाई जाती है:-

सावन का मौसम ही इतना सुहाना होता है की हर किसी का मन मोह लेता है। और हरियाली तीज सावन का प्रमुख त्यौहार भी है, तो इस खास मौके पर महिलाएं अपने घर व् बाग़ में झूले डालती है। और सभी इक्कठे होकर सावन के गीत गाकर झूले और मौसम का आनंद लेती है। इस दिन महिलाओं का सोलह श्रृंगार उनकी ख़ूबसूरती और इस त्यौहार की रौनक को और भी बढ़ा देता है। नई नवेली दुल्हन इस त्यौहार को ससुराल में नहीं बल्कि मायके में जाकर मनाती है। और उसके सभी साज श्रृंगार का सामान ससुराल से भेजा जाता है जिसे सिंजारा कहा जाता है और यह हरियाली तीज से एक दिन पहले किया जाता है।

इसके आलावा बाकी महिलाएं इस दिन निर्जला उपवास करती है, साथ ही पूरे सोलह श्रृंगार करती है, हाथों में मेहँदी, पैरों में अल्ता, चूड़ियां, आदि करती है। क्योंकि यह सब सुहाग की निशानी मानी जाती है, उसके बाद नए वस्त्र पहन कर महिलाएं तीज की कथा करती है या सुनती है। पहले यह त्यौहार पूरे तीन दिन तक मनाया जाता है जिसकी अलग ही रौनक देखने को मिलती थी। लेकिन अब यह केवल हरियाली तीज के दिन ही मनाया जाता है। और महिलाएं पूरी श्रद्धा के साथ इस दिन भगवान् शंकर और पार्वती जी की अराधना करती है, ताकि उनके पति की आयु लम्बी हो सके।

हरियाली तीज का क्या महत्व है:

हरियाली तीज सुहागन महिलाओं के लिए बहुत ही विशेष होता है, इस दिन महिलाओं के मायके से उनके साज श्रृंगार का सामान व् नए कपडे आते है। जिन्हे महिलाएं हरियाली तीज के दिन सुबह समय से उठकर स्नान आदि करके पहनती है। उसके बाद महिला पूरे सोलह श्रृंगार करती है। उसके बड़ा महिलाएं किसी बाग़ में या मंदिर में एक साथ मिलकर माँ पार्वती की प्रतिमा का श्रृंगार करती है। फिर पूरी पूजा विधि के साथ उनकी अराधना करती है। ऐसा करने के बाद एक महिला कथा करती है और बाकी महिलाएं कथा को पूरी आस्था से सुनते हुए मन ही मन अपने पति की लम्बी उम्र की कामना करती है।

कथा के बाद महिलाएं अपनी सास व् घर में मौजूद अन्य लोगो का आशीर्वाद लेती है। और इस खास मौके पर अपनी सास को सुहागी देती है। और यदि कोई बड़ा न हो तो किसी अन्य बुजुर्ग महिला को भी आप यह दे सकते है। कई जगह पर हरियाली तीज के मौके पर मेले भी लगते है। और पूरा दिन झूला झूलने और इस दिन को मनाने के साथ भोलेबाबा और माँ पार्वती की अराधना का भी महत्व रहता है। कुँवारी लडकियां भी इस दिन को विशेष उत्साह से मनाती है,खासकर जो अपने लिए अच्छे वर की कामना करती है।

हरियाली तीज 2018 कब है:-

हरियाली तीज इस साल 13 अगस्त 2018 दिन सोमवार को है।

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Nidhi

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