हेलो फ्रेंड्स , धार्मिक रूप से चैत्रमास की शुरुआत हो चुकी हैं इस महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को उगादि भी कहा जाता हैं ऐसा माना जाता है कि चैत्र मास से नववर्ष आरंभ हो जाते हैं खासकर महाराष्ट्र में हिंदू नववर्ष को गुड़ी पड़वा (Gudi Padwa 2021) के रूप में मनाया जाता हैं।

गुड़ी पड़वा का अनुष्ठान सूर्योदय से पहले आरंभ हो जाता है. लोग सुबह जल्दी उठकर शरीर पर तेल लगाने के बाद स्नान करते हैं. गुड़ी पड़वा के दिन महाराष्ट्र में कई समारोह आयोजित किए जाते हैं. लोग नए कपड़े पहनते हैं और अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ इस उत्सव को बड़ी ही धूमधाम के साथ मनाते हैं.

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महाराष्ट्र के विभिन्न इलाकों में हिंदू नववर्ष को गुड़ी पड़वा के रूप में बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है. दक्षिण भारतीय राज्यों में, इस दिन को फसल दिवस के रूप में मनाते हैं. चैत्र मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है.

इस बार गुड़ी पड़वा 13 अप्रैल 2021 (सोमवार) को मनाया जाएगा. इस दिन घरों में पकवान बनाकर पूजा अर्चना की जाती है. मान्यताओं के अनुसार इस दिन को अलग-अलग नामों से जाना जाता है. आइए आपको बताते हैं गुड़ी पड़वा का महत्व ,कथा और इसकी पूजा विधि.

Gudi Padwa 2021
Gudi Padwa 2021

कैसे मनाया जाता है गुड़ी पड़वा :

इस दिन महाराष्ट्र में कई समारोह आयोजित किए जाते हैं. लोग नए कपड़े पहनते हैं और अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ इस उत्सव को बड़ी ही धूमधाम के साथ मनाते हैं. लोग अपने घरों में विशेष तौर पर पारंपरिक व्यंजन जैसे पूरन पोली और श्रीखंड तैयार करते हैं. महाराष्ट्र में मीठे चावल भी बनाए जाते हैं. इन चावलों को सक्कर भात कहा जाता है. इस दिन सूर्योदय के साथ ही विभिन्न अनुष्ठान आरंभ हो जाते हैं जो दिनभर चलते हैं.

गुड़ी पड़वा की तिथि और शुभ मुहूर्त :

  • गुड़ी पड़वा का त्योहार – 13 अप्रैल 2021
  • प्रतिपदा तिथि की शुरुआत- 12 अप्रैल 2021 को रात 8 बजे

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गुड़ी पड़वा का महत्व :

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान ब्रह्मा ने इस ब्रह्मांड का निर्माण किया था, इसलिए गुड़ी पड़वा के दिन, भगवान ब्रह्मा की पूजा-अर्चना की जाती है. मान्यता है कि इस त्योहार पर सारी बुराइयों का नाश हो जाता है और सुख समृद्धि का आगमन होता है.

गुड़ी पड़वा की पूजा विधि :

  • गुड़ी पड़वा का अनुष्ठान सूर्योदय से पहले आरंभ हो जाता है. लोग सुबह जल्दी उठकर शरीर पर तेल लगाने के बाद स्नान करते हैं.
  • घर के मुख्य द्वार को आम के पत्तों और सुंदर फूलों से सजाया जाता है. इसके साथ ही रंगोली भी बनाई जाती है.
  • इसके बाद एक स्थान को साफ करके वहां गुड़ी लगाई जाती है.
  • पीले रंग के रेशमी कपड़े, आम के पत्तों और लाल रंग के फूलों की माला से गुड़ी को सजाया जाता है.
  • लोग भगवान ब्रह्मा की पूजा करते हैं और उसके बाद गुड़ी फहराते हैं.
  • गुड़ी फहराने के बाद भगवान विष्णु का आह्वान और पूजन किया जाता है.
gudi padwa 2021
gudi padwa 2021

गुड़ी पड़वा कथा :

गुड़ी पड़वा को त्योहार दक्षिण भारत में विशेष रूप से मनाया जाता है। त्रेतायुग में दक्षिण भारत को बालि का राज्य माना जाता था। जिस समय रावण ने माता सीता का हरण किया था। उस समय रावण से माता सीता को वापस लाने के लिए भगवान श्री राम को एक विशाल सेना की आवश्यकता थी।

भगवान श्री राम माता सीता को खोजते हुए दक्षिण भारत की और गए जहां उन्हें सुग्रीव मिला। सुग्रीव ने भगवान श्री राम को बालि के सभी अत्याचारों के बारे में बताया और उनसे सहायता मांगी। तब भगवान श्री राम ने सुग्रीव के कहने पर बालि को मार दिया। जिस दिन बाली का वध हुआ था। उस दिन गुड़ी पड़वा का ही दिन था।

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गुड़ी पड़वा से जुड़ी एक और कथा प्रचलन में है इस कथा के अनुसार शालिवाहन के पास युद्ध के लिए कोई भी सेना नही थी। इसलिए उसने एक मिट्टी की सेना का निर्माण किया था और उनमें प्राण डाले थे। जिस दिन शालिवाहन ने मिट्टी के पुतलों में प्राण फूंके थे उस दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का ही दिन था। तब ही गुड़ी पड़वा के दिन विजयपताका फहराई जाती है। शक का आरंभ भी शालिवाहन से ही माना जाता है। क्योंकि शालिवाहन ने अपने दुश्मनों पर विजय प्राप्त की थी।

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