Anant Chaturdashi 2020
Anant Chaturdashi 2020
ata

हेलो फ्रेंड्स, हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का बड़ा महत्व माना गया है। अनंत चतुर्दशी को अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष अनंत चतुर्दशी का यह व्रत 19 सितंबर 2021 को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है। Anant Chaturdashi 2021

माना जाता है इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करने और अनंत सूत्र को बांधने से जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है। शास्त्रों के अनुसार अनंत चतुर्दशी का व्रत करने से मनुष्य के जीवन के सभी कष्टों दूर होते हैं लेकिन अनंत चतुर्दशी व्रत के नियमों का पालन किए बिना आप इसे पूर्ण नहीं कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें : परिवर्तिनी एकादशी, देती है हजार अश्वमेघ यज्ञ का फल

aia

अनंत चतुर्दशी पर होती है विष्णु भगवान की पूजा अनंत चतुर्दशी के दिन होता है गणेश विसर्जन इस व्रत को अनंत फल देने वाला माना गया है. भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी मनाई जाती है. अनंत चतुर्दशी को अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है.

अनंत चतुर्दशी पूजा का शुभ मुहूर्त :

अभिजीत मुहूर्त – 11:56 AM – 12:44 PM

अमृत काल – 08:14 PM – 09:50 PM

ब्रह्म मुहूर्त – 04:42 AM – 05:30 AM

Anant Chaturdashi 2020
Anant Chaturdashi 2021

गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त :

ज्योतिषियों का कहना है कि अगर गणेश विसर्जन भी शुभ मुहूर्त के अनुसार किया जाए तो शुभ होता है. इस बार गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त सुबह 09:11 से दोपहर 12:21 बजे तक है. इसके बाद दोपहर 01:56 से 03:32 तक शुभ मुहूर्त में आप गणपति जी का विसर्जन कर सकते हैं.

अनंत चतुर्दशी के दिन ही गणपति बप्पा को विदाई भी दी जाएगी. अनंत चतुर्दशी पर गणेश जी का विसर्जन शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन गणेश जी का विसर्जन करने से पुण्य फल मिलता है.

यह भी पढ़ें : ‘संतान सप्तमी’, जानिए पूजन विधि और व्रत कथा

अनंत चतुर्दशी पूजा की विधि :

अग्नि पुराण में अनंत चतुर्दशी व्रत के महत्व का वर्णन मिलता है. इस दिन प्रातःकाल स्नान के बाद पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें. इसके बाद कलश पर भगवान विष्णु की तस्वीर भी लगाएं. एक धागे को कुमकुम, केसर और हल्दी से रंगकर अनंत सूत्र बनाएं, इसमें चौदह गांठें लगी होनी चाहिए. इस सूत्रो भगवान विष्णु की तस्वीर के सामने रखें.

अब भगवान विष्णु और अनंत सूत्र की पूजा करें और ‘अनंत संसार महासुमद्रे मग्रं समभ्युद्धर वासुदेव। अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्ते।।’ मंत्र का जाप करें. इसके बाद अनंत सूत्र को बाजू में बांध लें. माना जाता है कि इस सूत्र को धारण करने से संकटों का नाश होता है.

Anant Chaturdashi 2020
Anant Chaturdashi 2021

अनंत चतुर्दशी की कथा :

इस व्रत का जिक्र पुराणों में भी मिलता है। जब पांडव जुए में अपना सारा राजपाट हारकर वन में कष्ट भोग रहे थे तब भगवान श्रीकृष्ण ने अनंत चतुर्दशी व्रत करने की सलाह दी थी। श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा कि अगर वह विधिपूर्वक अनंत भगवान का व्रत करेंगे तो इससे उनका सारा संकट दूर हो जाएगा और खोया राज्य फिर से प्राप्त हो जाएगा।

श्रीकृष्ण ने इस वर्त की महता समझाने के लिए एक कथा सुनाई, जो इस प्रकार है –

यह भी पढ़ें – राधा अष्टमी का ये है शुभ मुहूर्त, जानिए पूजा की विधि

प्राचीन काल में सुमंत नामक एक तपस्वी ब्राह्मण थे। उसकी पत्नी का नाम दीक्षा था। दोनों की एक परम सुंदरी धर्मपरायण तथा ज्योतिर्मयी कन्या थी, जिसका नाम सुशीला था। सुशीला बड़ी हुई तो उसकी माता दीक्षा की मृत्यु हो गई। पत्नी की मृत्यु के उपरांत सुमंत ने कर्कशा नामक स्त्री से दूसरा विवाह कर लिया और सुशीला का विवाह ब्राह्मण सुमंत ने कौंडिन्य ऋषि के साथ कर दिया।

विदाई के समय कर्कशा ने दामाद को कुछ ईंटें और पत्थरों के टुकड़े बांध कर दे दिए। कौंडिन्य ऋषि अपनी पत्नी को लेकर अपने आश्रम की ओर निकल पड़े। रास्त में ही शाम ढलने लग गई और ऋषि नदी के किनारे संध्या वंदन करने लगे। इसी दौरान सुशीला ने देखा कि बहुत सारी महिलाएं किसी देवता की पूजा कर रही थीं।

Anant Chaturdashi 2020
Anant Chaturdashi 2021

सुशीला ने महिलाओं से पूछा कि वे किसकी प्रार्थना कर रही हैं, इस पर उन लोगों ने उन्हें भगवान अनंत की पूजा करने और इस दिन उनका व्रत रखने के महत्व के बारे में बताया। व्रत के महत्व के बारे में सुनने के बाद सुशीला ने वहीं उस व्रत का अनुष्ठान किया और चौदह गांठों वाला डोरा हाथ में बांध कर ऋषि कौंडिन्य के पास आ गई।

कौंडिन्य ने सुशीला से डोरे के बारे में पूछा तो उन्होंने सारी बात बता दी। कौंडिन्य ने यह सब कुछ मानने से मना कर दिया और पवित्र धागे को निकालकर अग्नि में डाल दिया। इसके बाद उनकी सारी संपत्ति नष्ट हो गई और वह दुखी रहने लगे। इस दरिद्रता का उन्होंने अपनी पत्नी से कारण पूछा तो सुशीला ने अनंत भगवान का डोरा जलाने की बात कही। पश्चाताप करते हुए ऋषि कौंडिन्य अनंत डोरे की प्राप्ति के लिए वन में चले गए। वन में कई दिनों तक भटकते-भटकते निराश होकर एक दिन भूमि पर गिर पड़े।

यह भी पढ़ें – बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति लाते हैं सौभाग्य, जानिए पूजन में क्या करें और क्या ना करें

तब अनंत भगवान प्रकट होकर बोले, “हे कौंडिन्य! तुमने मेरा तिरस्कार किया था, उसी से तुम्हें इतना कष्ट भोगना पड़ा। तुम दुखी हुए। अब तुमने पश्चाताप किया है। मैं तुमसे प्रसन्न हूं। अब तुम घर जाकर विधिपूर्वक अनंत व्रत करो। 14 वर्षों तक व्रत करने से तुम्हारा दुख दूर हो जाएगा। तुम धन-धान्य से संपन्न हो जाओगे। कौंडिन्य ने वैसा ही किया और उन्हें सारे क्लेशों से मुक्ति मिल गई।”

श्रीकृष्ण की आज्ञा से युधिष्ठिर ने भी अनंत भगवान का 14 वर्षों तक विधिपूर्वक व्रत किया और इसके प्रभाव से पांडव महाभारत के युद्ध में विजयी हुए व चिरकाल तक राज्य करते रहे। इसके बाद ही अनंत चतुर्दशी का व्रत प्रचलन में आया।

अस्वीकरण : आकृति.इन साइट पर उपलब्ध सभी जानकारी और लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए हैं। यहाँ पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए। चिकित्सा परीक्षण और उपचार के लिए हमेशा एक योग्य चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।

aba

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here