हेल्लो दोस्तों 10 जून को शनि जयंती (Shani Jayanti 2021) है। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को शनिदेव का जन्म हुआ था। ज्योतिष के अनुसार सभी नौ ग्रहों में शनिदेव को न्यायाधीश का दर्जा प्राप्त है। यह उपाधि शनिदेव को भगवान शंकर ने दी है। शनिदेव अच्छे कर्म करने पर अच्छा फल देते हैं और बुरे कर्म करने पर बुरा।

शनि देव के पिता सूर्य देव हैं। हनुमान भक्तों को शनि देव कभी भी परेशान नहीं करते हैं। शनि देव जिस पर प्रसन्न होते हैं उसकी किस्मत भी उसका साथ देती है और जिससे नाराज होते हैं उसकी किस्मत भी उससे रूठ के चली जाती है।

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शनि महाराज को न्याय का देवता माना जाता है और वह व्यक्ति के काम के हिसाब से उसको दंड देते हैं। मान्यता है कि शनि महाराज की दृष्टि जिस व्यक्ति पर पड़ती है उसका कुछ न कुछ अनिष्ट जरूर होता है। इसलिए नौ ग्रहों में शनि महाराज का विशिष्ठ स्थान है। शनि देव गरीबों की सेवा करने और उनका ख्याल ऱकने वाले पर विशेष प्रसन्न होते हैं और उनके ऊपर अपनी कृपादृष्टि बनाए रखते हैं।

शनि जयंती शुभ मुहूर्त :

  • तिथि प्रारंभ – 9 जून को दोपहर 1 बजकर, 57 मिनट से
  • तिथि समाप्त – 10 जून को शाम 4 बजकर, 22 मिनट पर.
Shani Jayanti 2021
Shani Jayanti 2021

ऐसे करें शनिदेव की पूजा :

  • प्रात:काल उठकर शौचादि से निवृत होकर स्नानादि से शुद्ध हों।
  • फिर लकड़ी के एक पाट पर काला वस्त्र बिछाकर उस पर एक सुपारी रखकर उसके दोनों ओर शुद्ध घी व तेल का दीपक जलाकर धूप जलाएं।
  • शनिदेवता के इस प्रतीक स्वरूप को पंचगव्य, पंचामृत, इत्र आदि से स्नान करवायें।
  • इसके बाद अबीर, गुलाल, सिंदूर, कुमकुम व काजल लगाकर नीले फूल अर्पित करें।
  • तत्पश्चात इमरती व तेल में तली वस्तुओं का नैवेद्य अपर्ण करें।
  • इसके बाद श्री फल सहित अन्य फल भी अर्पित करें।
  • पूजन के बाद शनि मंत्र का कम से कम एक माला जप भी करना चाहिए।
  • माला जपने के पश्चात शनि चालीसा का पाठ करें व तत्पश्चात शनि महाराज की आरती भी उतारनी चाहिए।

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ज्योतिष शास्त्र में शनि देव :

शनिदेव भगवान सूर्य और माता छाया (संवर्णा) के पुत्र हैं। इन्हें क्रूर ग्रह माना जाता है जो कि इन्हें पत्नी के शाप के कारण मिला है। शनि के अधिदेवता प्रजापति ब्रह्मा और प्रत्यधिदेवता यम हैं। फलित ज्योतिष के अनुसार शनि को अशुभ माना जाता है व 9 ग्रहों में शनि का स्थान सातवां है। ये एक राशि में तीस महीने तक रहते हैं तथा मकर और कुंभ राशि के स्वामी माने जाते हैं। शनि की महादशा 19 वर्ष तक रहती है। शनि की गुरूत्वाकर्षण शक्ति पृथ्वी से 95वें गुणा ज्यादा मानी जाती है। माना जाता है इसी गुरुत्व बल के कारण हमारे अच्छे और बुरे विचार चुंबकीय शक्ति से शनि के पास पंहुचते हैं जिनका कृत्य अनुसार परिणाम भी जल्द मिलता है। असल में शनिदेव बहुत ही न्यायप्रिय राजा हैं। 

Shani Jayanti 2021

इन बातों का रखें ध्यान :

  • शनि देव की पूजा करने के दिन सूर्योदय से पहले शरीर पर तेल मालिश कर स्नान करना चाहिए।
  • शनि पूजा के साथ-साथ हनुमान जी की भी पूजा जरूर करनी चाहिए।
  • इस दिन व्यक्ति को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
  • इस दिन यात्रा को भी स्थगित कर देना चाहिए।
  • किसी जरूरतमंद गरीब व्यक्ति को तेल में बने खाद्य पदार्थों का सेवन करवाना चाहिए।
  • गाय और कुत्तों को भी तेल में बने पदार्थ खिलाने चाहिए।
  • बुजुर्गों व जरुरतमंद की सेवा और सहायता भी करनी चाहिए।

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शनि जयंती के उपाय :

Shani Jayanti Ke Upay
  • शनिदेव के आराध्य भगवान शिव हैं। इसलिए शनि जयंती के दिन शनि देव के साथ भगवान शिव की पूजा करना भी शुभ फलदायी माना जाता है। इस दिन शिवजी का काले तिल मिले हुए जल से अभिषेक करना चाहिए। इससे शनि पीड़ा से मुक्ति मिलती है।
  • शनि दोष की शांति के लिए शनि जयंती पर महामृत्युंजय मंत्र या ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप किया जाता है।
  • शनिदेव की कृपा पाने के लिए शनि जयंती पर व्रत भी रख सकते हैं।
  • इस दिन गरीब लोगों की सहायता करें ऐसा करने से कष्ट दूर होते हैं। इस दिन शनिदेव से संबंधित वस्तुएं जैसे तेल, काली उड़द, काले वस्त्र, लोहा, काला कंबल आदि चीजें दान कर सकते हैं।
  • शनि जयंती पर एक कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखकर तेल को कटोरी सहित शनि मंदिर या शनि का दान लेने वालों को दान कर दें। ऐसा करने से शनि देव की कृपा बनती है।

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