Pradosh Vrat
Pradosh Vrat

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सावन प्रदोष व्रत श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. परन्तु हर महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत होता है. इस समय सावन का कृष्ण पक्ष चल रहा है, तो सावन का पहला प्रदोष व्रत 25 जुलाई दिन सोमवार को है यह सावन का सोम प्रदोष व्रत है. मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए सोम प्रदोष व्रत को रखा जाता है. इस दिन प्रदोष मुहूर्त में भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा अर्चना किया करते हैं.

यह भी पढ़ें – सावन में सोमवार को ही क्यों रखा जाता है व्रत? जानिये व्रत की कथा और विधि

सावन का पहला प्रदोष व्रत 2022 तिथि

त्रयोदशी तिथि का शुरू – 25 जुलाई को शाम 04 बजकर 15 मिनट से
त्रयोदशी तिथि का समापन- 26 जुलाई को शाम 06 बजकर 46 मिनट पर

प्रदोष व्रत 2022 पूजा मुहूर्त

25 जुलाई को शाम 07 बजकर 17 मिनट से रात 09 बजकर 21 मिनट तक है. इस दिन शिव पूजा के लिए दो घंटे से अधिक का समय लगता है.

सर्वार्थ सिद्धि योग में सोम प्रदोष व्रत

सावन का पहला सोमवार व्रत सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग है. यह दोनों ही योग एक ही समय पर बन रहे हैं. यह 25 जुलाई को सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग प्रात: 05 बजकर 38 मिनट से शुरु हो रहे हैं और देर रात 01 बजकर 06 मिनट पर समाप्त हो रहे हैं.

Pradosh Vrat
Sawan Pradosh Vrat

सावन प्रदोष व्रत पूजा विधि

  • इस समय सावन माह चल रहा है और सावन के दूसरे सोमवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने की वजह से ये और अधिक फलदाई हो सकता है।
  • ऐसे में सावन सोमवार प्रदोष व्रत के दिन प्रातः काल जल्दी उठें और स्नान आदि करके पूजा के लिए साफ वस्त्र पहन लें।
  • उसके बाद पूजा घर में दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प लें।
  • पूरे दिन व्रत रखते हुए प्रदोष काल में शिव जी की पूजा और उपासना करें।
  • फिर शाम के समय प्रदोष काल में पूजा के दौरान दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल मिलाकर पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें।
  • शिव जी को भांग, धतूरा, बेलपत्र फूल और नैवेद्य शिवलिंग पर अर्पित करें।
  • इसके बाद भगवान शिव की प्रतिमा के पास धूप-दीप जला कर प्रदोष व्रत की कथा जरुर पढ़ें या सुनें।
  • अंत में शिवजी की आरती करके पूजा समाप्त कीजिये।

सावन प्रदोष व्रत का महत्व

प्रदोष व्रत को करने से संतान, आरोग्य, धन, धान्य, सुख, शांति आदि की प्राप्ति होती है. पुत्र प्राप्ति के लिए शनि प्रदोष व्रत को किया जाता है. सोम प्रदोष व्रत मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए रखा जाता हैं. दिन के अनुसार प्रदोष व्रत के फल भी होते हैं.

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