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नवरात्रि के आखिरी दिन होती है मां सिद्धिदात्री की पूजा, जानिए पूजन विधि, मंत्र व आरती | Maa Siddhidatri Vrat Katha

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नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री नव दुर्गा की नौवीं शक्ति हैं और इनकी अराधना करने से सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। जो भी साधक मां सिद्धिदात्री (navratri siddhidatri mata) की पूजा करता है उसमें ब्रम्हांड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने का सामर्थ आ जाता है। मार्कंडेय पुराण में आठ सिद्धियां बताई गई है जो निम्नानुसार है: अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, और वशित्व।

पुराणों के अनुसार भगवान भोलेनाथ ने भी सिद्धिदात्री की कृपा से ही समस्त सिद्धियों को प्राप्त किया था। इसी कारण वे जगत में अर्धनारीश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए। मां सिद्धिदात्री की उपासना करने से भक्तों की लौकिक पारलौकिक सभी प्रकार की इच्छाएं पूर्ण होती हैं। इनकी पूजा करने से यश धन और बल की प्राप्ति होती है। जो भी भक्त पूरे मन और श्रद्धा से सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं उनको धर्म अर्थ काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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माँ सिद्धिदात्री तिथि (Maa Sidhhidatri Tithi)

दिनाँक 4 अक्टूबर 2022
दिन मंगलवार
देवी माँ सिद्धिदात्री
मंत्र ॐ सिद्धिदात्र्यै नमः
फूल गुड़हल
रंग बैंगनी या जामुनी

मां सिद्धिदात्री का स्वरूप (Maa Sidhhidatri Swaroop)

मां सिद्धिदात्री की चार भुजाएं हैं। ये कमल पुष्प पर आसीन होती हैं और इनका वाहन सिंह है। माता के दाहिने तरफ के नीचे वाले हाथ में कमल पुष्प है। ऊपर वाले हाथ में माँ शंख लिए हुए हैं। बायीं ओर के नीचे वाले हाथ में गदा है और ऊपर वाले हाथ में सुदर्शन चक्र धारण की हुई हैं। मां सिद्धिदात्री को सरस्वती का रूप भी कहते हैं और वह देवी सरस्वती की तरह सफेद वस्त्र धारण किए हुए होती हैं।

मां सिद्धिदात्री की कथा (Maa Siddhidatri Vrat Katha)

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान भोलेनाथ ने सिद्धिदात्री की उपासना और तपस्या करके ही आठों सिद्धियां प्राप्त की थी। इसी कारण भगवान शिव का आधा शरीर नारी का हो गया था और वे अर्धनारीश्वर कहलाए। मां दुर्गा का यह रूप अत्यंत शक्तिशाली है क्योंकि यह शक्ति सभी देवी देवताओं के तेज से प्रकट हुई हैं। ऐसा कहा जाता है कि दैत्य महिषासुर का वध भी मां सिद्धिदात्री ने ही किया था। महिषासुर ने सभी देवताओं पर अत्याचार किए और जब देवतागण भगवान शिव और प्रभु विष्णु के पास अपनी याचना लेकर गए तो वहां मौजूद सभी देवतागण और त्रिदेव से एक तेज उत्पन्न हुआ, उसी तेज से एक शक्ति उत्पन्न हुई जो सिद्धिदात्री के नाम से जानी जाती हैं।

मां सिद्धिदात्री की पूजन विधि (Maa Siddhidatri Puja Vidhi)

  • यह दिन नवरात्रि का आखरी दिन होता है इस दिन मां के वाहन हथियार और अन्य देवी देवताओं के नाम से पूजन हवन किया जाता है।
  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करने के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें और फिर मां का ध्यान करके उन्हें प्रणाम करें।
  • फिर चौकी पर मां की मूर्ति स्थापित करें और उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं।
  • मां सिद्धिदात्री को बैगनी या जामुनी रंग पसंद है इसलिए इस दिन मां का आसन बैंगनी या जामुनी रंग का होना चाहिए।
  • मां सिद्धिदात्री को हलवा पूरी सब्जी खीर काले चने फल और नारियल का भोग अवश्य लगाएं।
  • इसके बाद कन्या पूजन करवाना चाहिए। कन्या पूजन के बिना नवरात्रि शुभ फल दाई नहीं होती।
  • कुछ घरों में अष्टमी के दिन कन्या पूजन होता है वहीं कुछ घरों में नवमी के दिन कन्या पूजन करवाया जाता है।
  • सभी कन्याओं को अपने सामर्थ्य अनुसार भेंट दे। कन्या पूजन में एक लंगूर का होना भी अति आवश्यक है।
  • ऐसा माना जाता है कि देवी की रक्षा और सेवा के लिए भगवान शिव ने एक भैरव को हर शक्तिपीठ पर रखा हुआ है इसीलिए कन्या पूजन में एक बालक का होना अति आवश्यक है।

माँ सिद्धिदात्री ध्यान मंत्र (Maa Siddhidatri Mantra)

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि,
सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।
ओम सिद्धिदात्र्यै नम:।
विद्या: समस्तास्तव देवि भेदा:
स्त्रिय: समस्ता: सकला जगत्सु।
त्वयैकया पूरकिम्बयैतत्
का ते स्तुति: स्तव्यपरा परोक्ति:।।
सर्वभूता यदा देवी स्वर्गमुक्ति प्रदायिनी।
त्वं स्तुता स्तुतये का वा भवन्तु परमोक्तय:।।
नन्दगोप गृहे जाता योशोदा-गर्भ-सम्भवा।
ततस्तौ नाशयिष्यामि, विन्ध्याचल निवासिनी।।
या देवी सर्वभूतेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

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माँ सिद्धिदात्री कवच (Maa Siddhidatri Kavach)

ॐकारः पातु शीर्षो माँ, ऐं बीजम् माँ हृदयो।
हीं बीजम् सदापातु नभो गृहो च पादयो॥
ललाट कर्णो श्रीं बीजम् पातु क्लीं बीजम् माँ नेत्रम्‌ घ्राणो।
कपोल चिबुको हसौ पातु जगत्प्रसूत्यै माँ सर्ववदनो॥

माँ सिद्धिदात्री आरती (Maa Siddhidatri Aarti)

तू भक्तों की रक्षक, तू दासों की माता।
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि।
कठिन काम सिद्ध करती हो तुम।
जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम।
तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है।
तू जगदम्बे दाती तू सर्व सिद्धि है।
रविवार को तेरा सुमिरन करे जो।
तू सब काज उसके करती है पूरे।
कभी काम उसके रहे ना अधूरे।
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया।
रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया।
सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली।
जो हैं तेरे दर का ही अंबे सवाली।
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा।
महा नंदा मंदिर में है वास तेरा।
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता।
भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता।

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