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नवरात्रि के छठे दिन होती है मां कात्यायनी की पूजा, जानें पूजन विधि, मंत्र, कथा और आरती | Navratri Katyayani Mata

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Maa Katyayani
Maa Katyayani

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी (Navratri Katyayani Mata) की पूजा अर्चना की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि इनकी आराधना करने से साधक को अर्थ धर्म काम और मोक्ष चारों फलों की शीघ्र प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महर्षि कात्यायन के आश्रम में देवी कात्यायनी प्रकट हुई थी। ऐसा कहा जाता है कि देवताओं का कार्य सिद्ध करने के लिए देवी कात्यायनी ने जन्म लिया था। महर्षि कात्यायन ने इन्हें अपनी पुत्री माना था और इसी वजह से इनका नाम कात्यायनी पड़ा। देवी कात्यायनी की उपासना करने से मनुष्य अपनी सभी इंद्रियों को वश में करने की शक्ति प्राप्त करता है।

ऐसा कहा जाता है कि अगर आपके विवाह में अड़चने आ रहीं हैं तो देवी कात्यायनी की आराधना करने से विवाह शीघ्र हो जाता है। माता के इस मंत्र का 108 बार जाप करें –
”कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरि, नन्दगोपसुतं देवी पति मे कुरुते नमः।”

माँ कात्यायनी तिथि (Maa Katyayani Tithi)

दिनाँक 1 अक्टूबर 2022
दिन शनिवार
देवी माँ कात्यायनी
मंत्र ॐ कात्यायन्यै नमः
फूल नीले रंग का फूल
रंग इंडिगो (गहरा नीला)

देवी कात्यायनी का स्वरूप (Maa Katyayani Swaroop)

देवी कात्यायनी की चार भुजाएं हैं और इनकी सवारी भी सिंह है। इनका रूप अत्यंत दिव्य है और चेहरा स्वर्ण के समान चमकीला है। मां कात्यायनी के दाएं तरफ के ऊपर वाला हाथ अभय मुद्रा में होता है और नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में होता है। माता के बायीं तरफ के ऊपर वाले हाथ में तलवार होती है और नीचे वाले हाथ में कमल का पुष्प होता है। ऐसा कहा जाता है कि ब्रज की गोपियों ने भी मां कात्यायनी की पूजा की थी क्योंकि वे भगवान कृष्ण को अपने पति के रूप में पाना चाहती थी। यह पूजा कालिंदी यमुना के तट पर ब्रज की गोपियों द्वारा की गई थी।

Navratri Katyayani Mata

देवी कात्यायनी की कथा (Devi Katyayani Katha)

पौराणिक कथा के अनुसार कात्य गोत्र के विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन के घर देवी ने जन्म लिया था। महर्षि कात्यायन ने कई वर्षों तक मां दुर्गा की कठिन उपासना की थी। उनकी इच्छा थी कि मां दुर्गा उनकी पुत्री बनकर उनके घर जन्म लें। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने उन्हें आशीर्वाद दिया और उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली। फिर मां भगवती ने देवी कात्यायनी के रूप में महर्षि कात्यायन के घर जन्म लिया। ऋषि कात्यायन की पुत्री होने के कारण इन्हें कात्यायनी कहा जाने लगा। देवी कात्यायनी ने कई दानवों, असुरों और पापियों का वध किया है। देवी कात्यायनी की पूजा करने से व्यक्ति का मन आज्ञा चक्र में स्थित रहता है।

मां कात्यायनी की पूजा विधि (Maa Katyayani Puja Vidhi)

  • नवरात्रि के छठे दिन भक्तों को सूर्योदय से पहले उठकर स्नानादि करने के पश्चात स्वच्छ कपड़े पहनकर मां कात्यायनी का ध्यान करना चाहिए और व्रत करने का संकल्प करना चाहिए।
  • स्नान आदि करने के पश्चात चौकी पर मां कात्यायनी की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए। फिर गंगाजल से माता को स्नान कराना चाहिए।
  • इसके बाद माता को रोली और सिन्दूर का तिलक लगाना चाहिए और सुहाग की सामग्री भेंट करनी चाहिए।
  • फिर दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हुए देवी कात्यायनी को फूल अर्पित करें और उन्हें शहद का भोग लगाएं।
  • अंत में घी के दीपक और धूप से मां की आरती करें और प्रसाद का वितरण करें।

माँ कात्यायनी ध्यान मंत्र (Maa Katyayani Mantra)

वन्दे वाञ्छित मनोरथार्थ चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहारूढा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्विनीम्॥
स्वर्णवर्णा आज्ञाचक्र स्थिताम् षष्ठम दुर्गा त्रिनेत्राम्।
वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥
पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रसन्नवदना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम्॥

मां कात्यायनी कवच (Maa Katyayani Kavach)

कात्यायनौमुख पातु कां स्वाहास्वरूपिणी।
ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी॥
कल्याणी हृदयम् पातु जया भगमालिनी॥

मां कात्यायनी की आरती (Maa Katyayani Aarti)

जय-जय अम्बे जय कात्यायनी
जय जगमाता जग की महारानी
बैजनाथ स्थान तुम्हारा
वहा वरदाती नाम पुकारा
कई नाम है कई धाम है
यह स्थान भी तो सुखधाम है
हर मंदिर में ज्योत तुम्हारी
कही योगेश्वरी महिमा न्यारी
हर जगह उत्सव होते रहते
हर मंदिर में भगत हैं कहते
कत्यानी रक्षक काया की
ग्रंथि काटे मोह माया की
झूठे मोह से छुडाने वाली
अपना नाम जपाने वाली
बृहस्‍पतिवार को पूजा करिए
ध्यान कात्यायनी का धरिए
हर संकट को दूर करेगी
भंडारे भरपूर करेगी
जो भी मां को भक्त पुकारे
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।।

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