नरक चतुर्दशी के दिन करें ये उपाय, मिलेगा सभी कष्टों से छुटकारा

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हेल्लो दोस्तों कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन “नरक चतुर्दशी” (Narak Chaturdashi 2020) का त्यौहार मनाया जाता है। इसे नरक चौदस, रूप चौदस, छोटी दिवाली और रूप चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। इस साल नरक चतुर्दशी 14 नवंबर, शनिवार के दिन मनाया जायेगा। माना जाता है कि महाबली हनुमान का जन्म इसी दिन हुआ था इसीलिए बजरंगबली की भी विशेष पूजा की जाती है. तो इस लेख में आपको नरक चतुर्दशी (Narak Chaturdashi Upay) के दिन किये जाने वाले कुछ ऐसे उपाय बताते हैं, जिन्हें करने से आपकी बहुत सी परेशानियां कम हो जाएँगी।

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क्या है नरक चतुर्दशी ? :

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नरक चतुर्दशी के मृत्यु के देवता “यमराज” की पूजा की जाती है। इस दिन शाम के समय दिया जलाते हैं और यमराज की पूजा कर अकाल मृत्यु से मुक्ति और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हैं। माना जाता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस वध किया था, तभी से इस दिन को नरक चतुर्दशी कहते हैं । इस दिन घर से दूर एक यम का दीपक जलाया जाता है।

Narak Chaturdashi Upay
Narak Chaturdashi Upay

नरक चतुर्दशी पर क्यों जलाते हैं दीए :

ऐसी मान्यता है कि सभी प्रकार के नरक से मुक्त कराने का कार्य यम करते हैं इसलिए नरक चतुर्दशी की रात को यम के नाम का दीया जलाया जाता है। साथ ही घर से निकाल कर एक दीए को कूड़े के ढेर पर भी रखा जाता है। कूड़े के ढेर पर दीया रखने से आशय घर से गंदगी को हटाना है। इस अवसर पर इस दिन दिए जलाकर घर में आने वाली बुरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है

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नरक चतुर्दशी के दिन किये जाने वाले उपाय :

  • नरक चतुर्दशी के दिन सुबह सूर्य निकलने से पहले उठ जाएं और अपने पूरे शरीर पर तिल्ली का तेल मल लें। अब अपामार्ग (चिचड़ी) जो कि एक औधषीय पौधा होता है उसकी पत्तियों को पानी में डालकर नहा लें ऐसा करने से व्यक्ति को नरक के भय से मुक्ति मिलती है।
  • इस दिन स्नान के बाद दक्षिण दिशा की तरफ मुख कर के हाथ जोड़कर खड़े हो जाये और यमराज से प्रार्थना करें। ऐसा करने से साल भर आपके द्वारा किए गए पापों का नाश हो जाता है।
  • नरक चतुर्दशी को रूप चतुर्दशी या रूप चौदस भी कहा जाता है, इसलिए इस दिन स्नान के बाद भगवान श्री कृष्ण की पूजा करने से सौंदर्य की प्राप्ति भी होती है।
  • इस दिन शाम के समय सभी देवताओं की पूजा अर्चना करने के बाद तेल का दिया जलाएं और घर की चौखट के दोनों ओर रख दें। मान्यता है कि ऐसा करने से लक्ष्मी जी हमेशा घर में निवास करती हैं।
Narak Chaturdashi Upay
Narak Chaturdashi Upay

मान्यतानुसार नरक चतुर्दशी की रात एक बड़ा सा दीपक जलाएं। इसे पूरे घर में घुमाएं और फिर उसे घर से बाहर कहीं दूर ले जाकर रख दें। इसे यम का दीया कहा जाता है। इससे घर की सभी बुरी और नकारात्मक शक्तियां घर से बाहर चली जाती है।

नरक चतुर्दशी के दिन मंदिर, रसोई घर, तुलसी, पीपल, बरगद, आंवला, आम के पेड़ के नीचे, नदियों के किनारे, बगीचे, गौशाला आदि स्थान पर दीपक अवश्य जलाएं।

नरक चतुर्दशी के दिन कुलदेवी, कुल देवता, और पितरों के नाम से भी दिया जलाएं। ऐसी मान्यता है कि इन दीपकों की रोशनी से पित्तरों को अपने लोक का रास्ता मिलता है और वे प्रसन्न होते हैं।

आपको नरक चतुर्दशी पर हनुमान जी की भी पूजा अवश्य करनी चाहिए। क्योंकि नरक चतुर्दशी को हनुमान जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।

संतान सुख प्राप्ति के लिए नरक चौदस के दिन दीपदान करना चाहिए। दीप दान से वंश की वृद्धि होती है।

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