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मासिक शिवरात्रि क्या है ?, मासिक शिवरात्रि शुभ मुहूर्त, मासिक शिवरात्रि पूजन विधि, मासिक शिवरात्रि की कथा, मासिक शिवरात्रि का महत्व, शिव चतुर्दशी व्रत, Masik Shivratri Muhurat, Masik Shivratri Poojan Vidhi, Masik Shivratri Vrat Katha, Masik Shivratri Mahatva, Ashadh Masik Shivratri, Masik Shivratri Muhurat, Shiv Chaturdashi Vrat

हेल्लो दोस्तों शिवरात्रि भगवान शिव और शक्ति के संगम का एक पर्व है. हिन्दू पंचांग के अनुसार हर महीने कृष्ण पक्ष के 14वें दिन यानी चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि (जिसे शिव चतुर्दशी भी कहा जाता है) मनाई जाती है ऐसा माना जाता है की इस दिन भगवान् शिव की उपासना करने से सुख-समृद्धि बनी रहती है.

आषाढ़ मास की मासिक शिवरात्रि (Ashadh Masik Shivratri) कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को तिथि को मनाई जाएगी. इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. ताकि जीवन से कष्टों का अंत और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त हो सके. इस दिन लोग काफी शुभ मानते हैं. इस तरह हर माह आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि या शिव चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है. आषाढ़ मास की मासिक शिवरात्रि 27 जून, सोमवार को पड़ रही है.

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मान्यता है कि इस दिन यदि भगवान शिव और माता पार्वती की विधि विधान से पूजा की जाए तो असंभव कार्य भी कुछ दिनों में संभव हो जाते हैं. साथ ही उनके सभी संकटों को दूर करते हुए मनोकामनाएं पूरी करती है. इस बार सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसका महत्व और भी अधिक बढ़ गया है।

शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि प्रत्येक माह में पड़ने वाली शिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करने के साथ व्रत रखने से दुख, दरिद्रता और दोष से छुटकारा मिल जाता है और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं मासिक शिवरात्रि के तिथि, पूजन विधि और महत्व के बारे में.

पौराणिक धर्म ग्रंथों के अनुसार इन्हें विनाशक भी कहा जाता है भगवान शिव को त्रिदेवों में इन्हें सर्वोच्च स्थान है। शास्त्रों के अनुसार देवी लक्ष्मी, इन्द्राणी, सरस्वती, गायत्री, सावित्री, सीता, पार्वती और रति ने भी शिवरात्रि का व्रत किया था। और उन्होंने अपनी सभी मनो कामना पूर्ण की थी । इसी प्रचलन के कारण मासिक शिव रात्रि का प्रचलन प्रारम्भ हुआ।

Masik Shivratri Vrat Katha
Masik Shivratri Vrat Katha

मासिक शिवरात्रि शुभ मुहूर्त

(Masik Shivratri Muhurat)

हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 27 जून 2022, दिन सोमवार को सुबह 03 बजकर 25 मिनट से आरंभ होगी। इसका समापन 28 जून दिन मंगलवार को सुबह 05 बजकर 52 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर व्रत के नियमानुसार मासिक शिवरात्रि व्रत 27 जून दिन सोमवार को रखा जाएगा. आषाढ़ माह की मासिक शिवरात्रि की रात्रि पहर के पूजन का शुभ मुहूर्त देर रात 12 बजकर 04 मिनट से 12 बजकर 44 मिनट तक है। मासिक शिवरात्रि की रात्रि प्रहर की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 40 मिनट का है.

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सर्वार्थ सिद्धि योग में मासिक शिवरात्रि

आषाढ़ मास की मासिक शिवरात्रि सर्वार्थ सिद्धि योग में है. पंचांग के मुताबिक 27 जून को पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग है. अमृत योग शाम 04 बजकर 02 मिनट से अगले दिन सुबह 05 बजकर 26 मिनट तक है. ये दोनों योग मांगलिक कार्य के लिए शुभ माने जाते हैं. इस बार मासिक शिवरात्रि सोमवार को पड़ रही है. मान्यतानुसार सोमवार भगवान शिव की पूजा के लिए बेहद खास होता है. मासिक शिवरात्रि के दिन अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक है.

मासिक शिवरात्रि पूजन विधि

(Masik Shivratri Poojan Vidhi)

  • इस दिन सुबह स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें।
  • इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी की पूजा करें।
  • इस दिन भोलेनाथ का अभिषेक करने से विशेष फल मिलता है अभिषेक के दौरान भगवान शिव की प्रिय चीज़ों का भोग लगाएं और शिव मन्त्रों का जाप करें
  • भक्त शिवरात्रि की पूरी रात जागकर भगवान शिव की पूजा करते हैं।
  • इसके बाद शिवजी पर बेलपत्र, धतूरा और श्रीफल चढ़ाएं। और अगरबत्ती, दीपक, फूल और फल के माध्यम से इसकी पूजा करें।
  • सुनिश्चित करें कि आप शिव पुराण, शिव स्तोय, शिव अष्टक, शिव चालीसा और शिव श्लोक पढ़ें।
  • इसके बाद शाम को फल खा सकते हैं लेकिन व्रत रखने वालों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
  • इस व्रत को महिला और पुरुष दोनों कर सकते हैं
  • अगर विवाह में कोई अड़चन आ रही है तो शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते वक्त नम शिवाय का जाप करें.
  • संतान संबंधी कोई भी परेशानी है तो आप शिवरात्रि के दिन आटे से 11 शिवलिंग बनाएं और 11 बार इनका जल अभिषेक करें. 
  • भगवान शिव की पूजा के बाद अगले दिन उपवास समाप्त किया जा सकता है। कहा जाता है कि मासिक शिवरात्रि पर शिव पार्वती की पूजा करने से व्यक्ति सभी प्रकार के ऋणों से मुक्त हो जाता है।
Masik Shivratri Vrat Katha
Masik Shivratri Vrat Katha

मासिक शिवरात्रि की कथा

(Masik Shivratri Vrat Katha)

जिस तरह से हर व्रत आदि के पीछे कोई न कोई कथा होती है वैसे ही मासिक शिवरात्रि करने के पीछे भी एक कथा है आइये जानते हैं कथा

पौराणिक कथाओं और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव महा शिवरात्रि के दिन मध्य रात्रि के समय लिंगम के रूप में स्वयं प्रकट हुए थे। जिसके बाद से सबसे पहले भगवान् ब्रह्मा विष्णु ने उनकी पूजा की थी उस दिन से लेकर आज तक इस दिन को भगवान शिव जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है एक बार ब्रह्मा और विष्णु के बीच विवाद हो गया कि उनमें से कौन श्रेष्ठ है।

उस दौरान उनके सामने आग का एक खंभा दिखाई दिया। खंभे की उत्पत्ति और अंत नहीं मिला है, वे दोनों परस्पर सहमत थे कि जो कोई भी खंभे के एक छोर की खोज करता है वह दोनों के बीच सबसे बेहतर होगा। ब्रह्मा ने ऊपर देखने के लिए हंस के रूप में उड़ान भरी, जबकि नीचे देखने के लिए विष्णु ने जमीन के माध्यम से खुदाई करने के लिए एक सूअर का रूप धारण किया।

कई युगों तक प्रयास करने के बावजूद उनमें से कोई भी सफल नहीं हो सका। हालांकि, जब ब्रह्मा ने झूठ बोला कि उन्होंने सबसे ऊपर देखा है, भगवान शिव ने दृश्य में दिखाई दिया और खुलासा किया कि यह वह था जो स्तंभ के रूप में प्रकट हुआ था। अपनी असत्य की सजा के रूप में, भगवान शिव ने कहा कि ब्रह्मा के पास पृथ्वी पर उनके लिए समर्पित मंदिर कभी नहीं होगा। यह शिवरात्रि का दिन था जब भगवान शिव लिंगम के रूप में प्रकट हुए।

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मासिक शिवरात्रि सूची संवत 2079

(Masik Shivratri Calender List)

  • पौष मास – 1 जनवरी 2022, शनिवार
  • माघ मास – 30 जनवरी 2022, रविवार
  • फाल्गुन मास – 1 मार्च 2022, मंगलवार
  • चैत्र मास – 30 मार्च 2022, बुधवार
  • वैशाख मास – 29 अप्रैल 2022, शुक्रवार
  • ज्येष्ठ मास – 28 मई 2022, शनिवार
  • आषाढ़ मास – 27 जून 2022, सोमवार
  • श्रावण मास – 26 जुलाई 2022, मंगलवार
  • भाद्रपद मास – 25 अगस्त 2022, बृहस्पतिवार
  • आश्विन मास – 24 सितम्बर 2022, शनिवार
  • कार्तिक मास – 23 अक्टूबर 2022, रविवार
  • मार्गशीर्ष मास – 22 नवम्बर 2022, मंगलवार
  • पौष मास – 21 दिसम्बर 2022, बुधवार
  • माघ मास – 20 जनवरी 2023, शुक्रवार
  • फाल्गुन मास – 18 फरवरी 2023, शनिवार
  • चैत्र मास – 20 मार्च 2023, सोमवार
Masik Shivratri Vrat Katha

मासिक शिवरात्रि का महत्व

(Masik Shivratri Mahatva)

धार्मिक ग्रंथों में मासिक शिवरात्रि व्रत के महत्व के बारे में बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन पूजा, व्रत करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और सारी इच्छाएं पूर्ण होती है. इतना ही नहीं, मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि के दिन पूजा-पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि आती है. शास्त्रों के अनुसार मासिक शिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक भी करने की भी मान्यता है. भगवान को मासिक शविरात्रि का दिन अत्यंत प्रिय होने के कारण भी इसका महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है. इस दिन रुद्राभिषेक से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इस दिन व्रत करने से वैवाहिक जीवन की समस्याओं से निजात पाया जा सकता है.

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