जानिए मासिक शिवरात्रि पूजन विधि, व्रत कथा और महत्त्व

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हेल्लो दोस्तों शिवरात्रि शिव और शक्ति के संगम का एक पर्व है हिन्दू पंचांग के अनुसार हर महीने कृष्ण पक्ष के 14वें दिन यानी चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है ऐसा माना जाता है की इस दिन भगवान् शिव की उपासना करने से सुख-समृद्धि बनी रहती है इस दिन लोग काफी शुभ मानते हैं Masik Shivratri Vrat Katha

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पौराणिक धर्म ग्रंथों के अनुसार इन्हें विनाशक भी कहा जाता है भगवान शिव को त्रिदेवों में इन्हें सर्वोच्च स्थान है। शास्त्रों के अनुसार देवी लक्ष्मी, इन्द्राणी, सरस्वती, गायत्री, सावित्री, सीता, पार्वती और रति ने भी शिवरात्रि का व्रत किया था। और उन्होंने अपनी सभी मनो कामना पूर्ण की थी । इसी प्रचलन के कारण मासिक शिव रात्रि का प्रचलन प्रारम्भ हुआ।

Masik Shivratri Vrat Katha
Masik Shivratri Vrat Katha

व्रत विधि :

  • इस दिन सुबह स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें।
  • इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी की पूजा करें।
  • इस दिन भोलेनाथ का अभिषेक करने से विशेष फल मिलता है अभिषेक के दौरान भगवान शिव की प्रिय चीज़ों का भोग लगाएं और शिव मन्त्रों का जाप करें
  • भक्त शिवरात्रि की पूरी रात जागकर भगवान शिव की पूजा करते हैं।
  • इसके बाद शिवजी पर बेलपत्र, धतूरा और श्रीफल चढ़ाएं। और अगरबत्ती, दीपक, फूल और फल के माध्यम से इसकी पूजा करें।
  • सुनिश्चित करें कि आप शिव पुराण, शिव स्तोय, शिव अष्टक, शिव चालीसा और शिव श्लोक पढ़ें।
  • इसके बाद शाम को फल खा सकते हैं लेकिन व्रत रखने वालों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
  • इस व्रत को महिला और पुरुष दोनों कर सकते हैं
  • अगर विवाह में कोई अड़चन आ रही है तो शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते वक्त नम शिवाय का जाप करें.
  • संतान संबंधी कोई भी परेशानी है तो आप शिवरात्रि के दिन आटे से 11 शिवलिंग बनाएं और 11 बार इनका जल अभिषेक करें. 

भगवान शिव की पूजा के बाद अगले दिन उपवास समाप्त किया जा सकता है। कहा जाता है कि मासिक शिवरात्रि पर शिव पार्वती की पूजा करने से व्यक्ति सभी प्रकार के ऋणों से मुक्त हो जाता है।

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मासिक शिवरात्रि की कथा :

जिस तरह से हर व्रत आदि के पीछे कोई न कोई कथा होती है वैसे ही मासिक शिवरात्रि करने के पीछे भी एक कथा है आइये जानते हैं कथा

पौराणिक कथाओं और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव महा शिवरात्रि के दिन मध्य राती के समय लिंगम के रूप में स्वयं प्रकट हुए थे। जिसके बाद से सबसे पहले भगवान् ब्रह्मा विष्णु ने उनकी पूजा की थी उस दिन से लेकर आज तक इस दिन को भगवान शिव जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है एक बार ब्रह्मा और विष्णु के बीच विवाद हो गया कि उनमें से कौन श्रेष्ठ है।

Masik Shivratri Vrat Katha
Masik Shivratri Vrat Katha

उस दौरान उनके सामने आग का एक खंभा दिखाई दिया। खंभे की उत्पत्ति और अंत नहीं मिला है, वे दोनों परस्पर सहमत थे कि जो कोई भी खंभे के एक छोर की खोज करता है वह दोनों के बीच सबसे बेहतर होगा। ब्रह्मा ने ऊपर देखने के लिए हंस के रूप में उड़ान भरी, जबकि नीचे देखने के लिए विष्णु ने जमीन के माध्यम से खुदाई करने के लिए एक सूअर का रूप धारण किया।

कई युगों तक प्रयास करने के बावजूद उनमें से कोई भी सफल नहीं हो सका। हालांकि, जब ब्रह्मा ने झूठ बोला कि उन्होंने सबसे ऊपर देखा है, भगवान शिव ने दृश्य में दिखाई दिया और खुलासा किया कि यह वह था जो स्तंभ के रूप में प्रकट हुआ था। अपनी असत्य की सजा के रूप में, भगवान शिव ने कहा कि ब्रह्मा के पास पृथ्वी पर उनके लिए समर्पित मंदिर कभी नहीं होगा। यह शिवरात्रि का दिन था जब भगवान शिव लिंगम के रूप में प्रकट हुए।

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मासिक शिवरात्रि का महत्व :

सावन में मासिक शिवरात्रि का महत्व महाशिवरात्रि के महत्व से कम नहीं है. इस शिवरात्रि पर विधि पूर्वक भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में शुभ फल प्राप्त होते हैं. इस दिन व्रत का संकल्प लेकर भगवान शिव की पूजा की जाती है. मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है. क्योंकि इस व्रत में व्यक्ति को अपने अवगुणों का त्याग करना होता है. शिव ही सत्य है. इसलिए जो व्यक्ति बुराई, लालच, और गलत कामों से दूर रहता है उसे भगवान शिव का आर्शीवाद प्राप्त होता है.

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