कैसे करें हनुमानजी का व्रत? मंगलवार व्रत की पूजन विधि और व्रत कथा

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हेल्लो दोस्तों हिंदू धर्म में सप्ताह के सभी दिनों का अपना ही एक विशेष महत्व है और प्रत्येक दिन को अलग-अलग देवताओं की पूजा-अर्चना के लिए निर्धारित किया गया है। जैसे -सोमवार को शिव, मंगलवार को बजरंगबली, बुध को गणेश, गुरु को विष्णु और शुक्र को लक्ष्मी मां और शनिवार को शनिदेव की पूजा का विधान है। वहीं ज्योतिष के अनुसार, जिनकी कुंडली में मंगल ग्रह भारी होता है या फिर जीवन में कोई शुभ कार्य नहीं हो पा रहा है। ऐसे में आपको बजंरंगबली का व्रत विधिपूर्वक और श्रद्धा के साथ करना चाहिए ताकि हनुमान जी आपकी सभी मनोकामना को पूर्ण कर सकें। Mangalvar Vrat Katha Poojan

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पूजन विधि :

  • बजरंग बली का व्रत 21 मंगलवार किया जाता है। मंगलवार के दिन व्रत शुरु करने के लिए सूर्योदय से पहले उठे।
  • प्रातःकाल नित्यक्रिया से निवृत होकर स्नान आदि कर साफ और स्वच्य वस्त्र धारण करे
  • इसके बाद ईशान कोण की दिशा यानि (उत्तर-पूर्व दिशा के कोने) में किसी एक एकांत स्थान पर बजरंग बली की मूर्ति या फोटो को स्थापित करें।
  • व्रत के दिन लाल वस्त्र धारण कर अपने हाथ में जल लेकर संकल्प लें और मगलवार के व्रत को सच्ची आस्था एवं भक्ति के साथ शुरू करें।
  • अब हनुमान जी की मूर्ति के सामने गाय के शुद्ध घी का एक दीपक प्रज्वलित करे।
  • हनुमान जी की मूर्ति पर चमेली के तेल के हलके छीटे देकर तथा पीले या लाल रंग के पुष्प की माला हनुमान जी की मूर्ति पर चढ़ाएं।
  • उसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ करे।
  • पूजा पूर्ण होने के उपरांत हनुमान जी का भोग लगाकर सभी को प्रसाद बांटे।
  • पूरे दिन में केवल एक बार ही भोजन ग्रहण करें, इस व्रत में गेंहूँ और गुड़ का भोजन करना चाहिए।
  • रात्रि में सोने से पहले बजरंग बली की पूजा करें या शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करके हनुमान जी के आगे हाथ जोड़ें
  • हर मंगलवार के दिन इसी तरह हनुमान जी की पूजा करे।
Mangalvar Vrat Katha Poojan
Mangalvar Vrat Katha Poojan

मंगलवार की व्रत कथा :

प्राचीन समय में एक कुंडलपुर नामक नगर था। जहां नंदा नामक एक ब्राह्मण अपनी पत्नी सुनंदा के साथ रहता था। ब्राह्मण दंपत्ति धन-धान्य से संपन्न थे, लेकिन उनके वंश को आगे चलाने के लिए उनके कोई संतान नहीं थी। इस वजह से ब्राह्मण हनुमान जी की पूजा-अर्चना के लिए वन की ओर प्रस्थान कर गया। वहीं ब्रह्माण की पत्नी ने घर पर बजरंगबली की पूजा-अर्चना करना शुरू कर दिया।

ब्राह्मण की पत्नी प्रत्येक मंगलवार व्रत रखती और शाम को भोग बनाकर हनुमान जी को अर्पित करती और फिर स्वयं ग्रहण करती। लेकिन एक दिन मंगलवार को कोई और व्रत पड़ गया जिसकी वजह से वह महावीर जी का व्रत नहीं रख पाई। जिसकी वजह से उसने भोजन नहीं बनाया और हनुमान जी को भोग भी नहीं लगाया और स्वयं भी भोजन ग्रहण नहीं किया। वह अपने मन में ये प्रण लेकर सो गई कि अगली मंगलवार को वह हनुमान जी को भोग लगाकर ही अन्न ग्रहण करेगी।

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ब्राह्मण की पत्नी 6 दिन तक भूखी-प्यासी पड़ी रही। मंगलवार के दिन वह मूर्छित हो गई तब बजरंगबली ने उसकी श्रद्धा और निष्ठा को देखते हुए उससे प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिए और कहा कि ब्राह्मणी मैं तुमसे बहुत खुश हूं। मैं तुमको एक सुंदर बालक देता हूं जो तुम्हारी बहुत सेवा करेगा और हनुमान जी अपने बाल रूप को दर्शन देकर अन्तर्धान हो गए। सुंदर बालक पाकर ब्राह्मणी बहुत खुश हुई। उसने बालक का नाम मंगल रखा।

व्रत की महिमा :

कुछ वक्त बाद ब्राह्मण जब वन से लौटकर आया तो उसने अपने घर में एक सुंदर बालक देखा तो उसने अपनी पत्नी से पूछा कि यह बालक कौन है? पत्नी ने कहा कि मंगलवार को व्रत करने से प्रसन्न होकर महावीर जी ने मुझे बालक दिया है। पत्नी की बात सुनकर ब्राह्मण संतुष्ट नहीं हुआ और उसने मन में सोचा कि वह अपनी कुलटा व्यभिचारिणी अपनी कलुषता को छुपाने के लिए यह बहाने बना रही है। एक दिन ब्राह्मण कुएं से पानी भरने चला तो उसकी पत्नी ने कहा कि मंगल को भी साथ ले जाओ। ब्राह्मण बालक को अपने साथ ले गया लेकिन जब वापस लौटा तो बालक उसके साथ नहीं था क्योंकि पानी भरने के बाद मंगल को नाजायज मानते हुए ब्राह्मण ने उसे कुंए में डाल दिया।

Mangalvar Vrat Katha Poojan
Mangalvar Vrat Katha Poojan

जब ब्राह्मण की पत्नी ने मंगल के बारे में पूछा तो ब्राह्मण जब तक कुछ बोलता तभी मंगल मुस्कुराता हुआ घर आ गया। उसको देखकर ब्राहमण आश्चर्यचकित हुआ। उसी रात्रि बजरंगबली ने ब्राह्मण को स्वप्न देते हुए कहा कि यह बालक मेरा बाल रूप है और तेरी पत्नी की भक्ति से प्रसन्न होकर मैंने उसे वरदान स्वरूप दिया है। तुम अपनी पत्नी को कुलटा क्यों कहते हो? यह सुनकर ब्राह्मण खुश हो गया और ब्राह्मण दंपत्ति सुखपूर्वक अपना जीवन व्यतीत करने लगे। इसलिए जो मनुष्य मंगलवार व्रत कथा को पढ़ता या सुनता है और नियम से व्रत रखता है। उसके हनुमान जी की कृपा से सब कष्ट दूर होकर सर्व सुख प्राप्त होता है।

मंगलवार व्रत के नियम :

  • मंगलवार का व्रत करने वाले व्यक्ति को मंगलवार के व्रत वाले दिन प्रातः काल सूर्योदय से पहले उठना चाहिए।
  • नित्यक्रिया से निवृत होकर स्नान आदि कर अपना शुद्धि कारण करना चाहिए।
  • मंगलवार दिन लाल रंग और नारंगी रंग के साफ़ व् स्वच्छ वस्त्र धारण करना। तत्पश्चात हनुमानजी को लाल फूल, सिन्दूर, वस्त्रादि चढ़ाने चाहिए।
  • श्रद्धा- भक्ति पूर्वक हनुमान जी की मूर्ति के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाकर सुंदरकांड का पाठ या हनुमान चालीसा पढ़नी चाहिए।
  • संध्या के समय हनुमान जी को बेसन के लड्डु या खीर का भोग लगाना चाहिए और स्वयं बिना नमक का भोजन ग्रहण करना चाहिए।
  • मंगलवार व्रत का खाना पूरी तरह साफ सुथरा होना चाहिए।
  • इस दिन व्रत करने वाले सभी मनुष्य को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

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मंगलवार व्रत के फायदे :

मंगलवार का व्रत करने वाले सभी मनुष्यों को मांगलिक दोष से मुक्ति मिल जाती है। जो व्यक्ति शनि की महादशा, साढ़ेसाती या शनि की ढैय्या से ग्रस्त है उन सभी के लिए यह मंगलवार का व्रत बहुत ही कारगर होता है। उनकी सभी परेशानिया दूर हो जाती है। मंगलवार के व्रत से मनुष्य को किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता है। मंगलवार का व्रत करने वाले मनुष्य के घर में कभी भी किसी प्रकार की नकारात्मकता नहीं आती है। व्रत करने से सभी व्यक्तियों का काम-काज व् रोजगार में भी वृद्धि होती है और इससे जुडी सभी समस्याएं समाप्त हो जाती है तथा उस व्यक्ति पर हनुमान जी की असीम कृपा सदा बनी रहती है।

उद्यापन विधि :

  • व्रत के उद्यापन के दिन भी सूर्योदय से पहले उठे तथा प्रातःकाल नित्यक्रिया से निवृत होकर स्नान आदि कर साफ और स्वच्छ वस्त्र धारण करे।
  • इसके बाद नियमित रूप से हनुमान जी की उसी प्रकार पूजा करे जैसे हर मंगलवार को की है
  • 21 मंगलवार के व्रत पूर्ण होने के उपरांत 22वें मंगलवार के दिन भी पूर्ण विधि-विधान के साथ बजरंग बली का पूजन करें
  • हनुमान जी को सिंदूरी रंग के वस्त्र चढ़ाएं या पहना दें।
  • पूजा पूर्ण होने के उपरांत 21 ब्राह्मणों को उत्तम भोजन कराकर उन्हें दान दक्षिणा प्रदान कर सभी ब्राह्मणों को विदा दें।

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