Maa Brahmacharini Vrat Katha : नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी देवी को पूजा जाता है। मां ब्रह्मचारिणी की उपासना करने से व्यक्ति को त्याग, सदाचार, और संयम की प्राप्ति होती है। देवी ब्रह्मचारिणी (maa brahmacharini) की उपासना करने वाले मनुष्य अपने हर कार्य में सफलता पाते हैं, ये जीवन में जिस बात का संकल्प कर लेते हैं उसे अवश्य पूरा करते हैं।

देवी ब्रह्मचारिणी मां दुर्गा की नौ शक्तियों में से दूसरी पूजनीय शक्ति है। अपर्णा और उमा देवी ब्रह्मचारिणी के विभिन्न नाम हैं। ऐसी मान्यता है कि जो भी मनुष्य नवरात्रि में देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना (maa brahmacharini puja vidhi) करता है उसके जीवन में आने वाली सारी रुकावटें दूर हो जाती हैं और उसे हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है। इसके अलावा उसके जीवन की सारी परेशानियों का नाश होता है। देवी ब्रह्मचारिणी को भोग में चीनी अर्पित करनी चाहिए।

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माँ ब्रह्मचारिणी की तिथि (Maa Brahmacharini Tithi)

तारीख27 सितम्बर 2022
दिनमंगलवार
देवी माँ ब्रह्मचारिणी
मंत्र ॐ ब्राम ब्रीम ब्रूम ब्रह्मचारिण्यै नमः
फूल कमल
रंग नारंगी

मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप (Maa Brahmacharini Swaroop)

देवी ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में जप की माला होती है और बाएं हाथ में कमंडल रहता है। माता ब्रह्मचारिणी साक्षात ब्रह्म का स्वरूप है क्योंकि इन्होने भगवान शिव को पाने के लिए कठिन तपस्या की थी इसलिए ये तपस्या का मूर्तिमान रूप है। देवी ब्रह्मचारिणी के अन्य प्रसिद्ध नाम है- शिवस्वरूपा, नारायणी, विशनुमाया, और ब्रह्मस्वरूपिणी।

देवी ब्रह्मचारिणी की कथा (Maa Brahmacharini Vrat Katha)

शास्त्रों के अनुसार देवी ने हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था और भगवान शंकर को अपने पति के रूप में प्राप्त करने के लिए उन्होंने घोर तपस्या की थी। इतनी कठिन तपस्या करने के कारण ही इनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। माता ब्रह्मचारिणी ने तपस्या के दौरान केवल 1000 वर्ष तक फल खाए और 100 वर्षों तक जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया।

Maa Brahmacharini Vrat Katha
Maa Brahmacharini Vrat Katha

माता ने कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहती रहीं। माता ने 3000 वर्षों तक सिर्फ बेलपत्र खाए और भगवान शंकर का ध्यान करती रही। 3000 वर्षों तक तपस्या करने के बाद देवी ने बेलपत्र खाना भी छोड़ दिए और कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रहकर घोर तपस्या करती रही। देवी ब्रह्मचारिणी ने पत्तों को भी खाना छोड़ दिया था इसलिए इनका नाम अपर्णा पड़ गया।

जब माता ब्रह्मचारिणी ने इतनी तपस्या करी तो उनका शरीर क्षीण गया था तब सभी देवता, ऋषि मुनि ने देवी ब्रह्मचारिणी की तपस्या को एक पुण्य कृत्य बताया और उनकी तपस्या की सराहना की। सभी देवताओं ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि देवी आपकी मनोकामना पूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलेश्वर आपको पति के रूप में मिलेंगे।

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मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि (Maa Brahmacharini Puja Vidhi)

  • देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करने के पश्चात मां ब्रह्मचारिणी का स्मरण करें।
  • इसके बाद उनका ध्यान करें और प्रार्थना करें। पूजा करते समय अपने हाथों में फूल ले और मां से अपनी मनोकामना कहें।
  • इसके बाद देवी को पंचामृत स्नान कराएं, फिर उन्हें सुहाग की सामग्री भेंट करें।
  • देवी ब्रह्मचारिणी को फूल अक्षत कुमकुम सिंदूर अर्पित करें।
  • देवी ब्रह्मचारिणी को कमल का फूल चढ़ाएं और मंत्रों का जाप करें।
  • इसके बाद माता को मिष्ठान का भोग लगाएं और घी का दीपक और कपूर से मां की आरती करें।

मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र (Maa Brahmacharini Mantra)

वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्।
जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥
गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम।
धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥
परम वंदना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन।
पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

माँ ब्रह्माचारिणी कवच (Maa Brahmacharini Kavach)

त्रिपुरा में हृदयेपातुललाटेपातुशंकरभामिनी।
अर्पणासदापातुनेत्रोअर्धरोचकपोलो॥
पंचदशीकण्ठेपातुमध्यदेशेपातुमहेश्वरी॥
षोडशीसदापातुनाभोगृहोचपादयो।
अंग प्रत्यंग सतत पातुब्रह्मचारिणी॥

माँ ब्रह्माचारिणी की आरती (Maa Brahmacharini Aarti)

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा।
जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए।
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने।
रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।

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