जानिए कैसे बना उल्लू धन-वैभव की देवी लक्ष्मी का वाहन

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हेल्लो दोस्तों हर साल कार्तिक अमावस्या को दिवाली मनायी जाता है और इस साल दिवाली 14 नवंबर शनिवार को है। दिवाली में धन-वैभव प्राप्ति के लिए मां लक्ष्मी एवं गणेश भगवान की पूजा की जाती है। मान्यता के अनुसार जिस किसी व्यक्ति के ऊपर मां लक्ष्मी की कृपा हो जाए तो उसके जीवन में धन-समृद्धि और वैभव की कभी कमी नहीं होती है। जिस प्रकार सभी देवी-देवताओं का वाहन कोई न कोई पशु-पक्षी है। उसी प्रकार मां लक्ष्मी का वाहन उल्लू है लेकिन क्या आप जानते हैं आखिर उल्लू माँ लक्ष्मी का वाहन कैसे बना। Laxmi Vaahan Ullu

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ऐसी मान्यता है कि किसी व्यक्ति को मूर्ख बनाना को उल्लू बनाना कहा जाता है जिसका मतलब की मूर्ख व्यक्ति को उल्लू समझा जाता है लेकिन यह धारणा गलत है उल्लू सबसे बुद्धिमान निशाचारी प्राणी होता है उल्लू को भूत और भविष्य दोनों का ज्ञान पहले से ही हो जाता है आइए जानते हैं मां लक्ष्मी का वाहन उल्लू कैसे बना, क्या है इसके पीछे की पौराणिक कथा।

ऐसे वाहन बना उल्लू :

धार्मिक ग्रंथों से ज्ञात होता है कि सनातन धर्म के सभी देवी-देवताओं ने वाहन के रूप में पशु-पक्षियों का चुनाव किया है। इसके पीछे कई प्रचलित कथाएं हैं। कहा जाता है कि प्राणी जगत की संरचना करने के बाद एक रोज सभी देवी-देवता धरती पर विचरण करने के लिए आए। तब पशु-पक्षियों ने कहा कि हमें वाहन के रूप में चुनें और हमें कृतार्थ करें। 

Laxmi Vaahan Ullu
Laxmi Vaahan Ullu

वहीं लक्ष्मी जी असमंजस में पड़ गई किसे अपना वाहन चुनें। लक्ष्मी जी जब वाहन चुनने में विचार-विमर्श कर रहीं थी तब अन्य पशु-पक्षियों में लड़ाई होने लगी। इस पर लक्ष्मीजी ने सभी को शांत कराया और कहा कि प्रत्येक वर्ष कार्तिक अमावस्या के दिन मैं पृथ्वी पर विचरण करने आती हूं। उस दिन मैं आप में से किसी एक को अपना वाहन बनाऊंगी।

कार्तिक अमावस्या के दिन सभी पशु-पक्षी आंखे बिछाए लक्ष्मीजी की राह निहारने लगे। रात्रि में जैसे ही लक्ष्मीजी धरती पर पधारी उल्लू ने अंधेरे में अपनी नजरों से उन्हें देख लिया और उनके समीप पहुंच गया। इसके बाद प्रार्थना कि आप मुझे अपना वाहन स्वीकार करें। लक्ष्मीजी ने चारों ओर देखा उन्हें कोई भी पशु या पक्षी वहां नजर नहीं आया. तब लक्ष्मीजी ने खुशी-खुशी उसे अपना वाहन स्वीकार कर लिया। तभी से उन्हें उलूक वाहिनी कहा जाता है

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उल्लू को लेकर की मान्यताएं :

  • उल्लू को लक्ष्मी का वाहक माना जाता है, लेकिन फिर भी इसे कहीं शुभ तो कहीं अशुभ माना जाता है. उल्लू को लेकर कई तरह की मान्यताएं हमारे समाज और धर्म में प्रचलित हैं. जानिए ऐसी ही 5 मान्यताएं, जिस पर आज भी विश्वास किया जाता है –
  • हालांकि ये इतना आम या आसान नहीं है, लेकिन कहा जाता है कि आपकी नजर उल्लू से मिल जाती है, जो समझ लीजिए कि आपको बेहिसाब दौलत मिलने वाली है.
  • रोग को लेकर भी उल्लू की यह मान्यता है कि अगर उल्लू किसी रोगी को छूते हुए निकल जाए या उसके उपर से उड़ता हुआ चला जाए तो गंभीर रोग भी ठीक हो सकता है.
Laxmi Vaahan Ullu
Laxmi Vaahan Ullu
  • उल्लू का दाहिनी तरफ देखना या बोलना हमेशा अशुभ होता है, इसलिए जब भी उल्लू की आवाज सुनाई देती है तो इसे अपशगुन माना जाता है. लेकिन उल्लू का बांई ओर देखना शुभ रहता है.
  • उल्लू किसी घर की छत पर आकर बैठता है या छत पर बैठकर आवाज करता है, तो यह घर के किसी सदस्य की मौत हो जाने की ओर इशारा करता है.
  • सुबह के वक्त पूर्व की दिशा की ओर उल्लू दिखाई दे या फिर उसकी आवाज सुनाई दे तो यह माना जाता है कि अचानक धन की प्राप्ति हो सकती है
  • उल्लू सर के ऊपर करके उड़ रहा हो या आवाज देकर पीछा कर रहा हो तो यात्रा शुभ होती है। पूर्व दिशा में बैठे उल्लू की आवाज सुनने या दर्शन को प्रचण्ड आर्थिक लाभ का सूचक माना गया है।

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