तो इस खास वजह से राखी पर भाई को लगाते हैं कुमकुम और अक्षत का तिलक

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रक्षा बंधन (Raksha Bandhan 2020) पर बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर कलाई पर राखी बांधती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर राखी पर क्यों भाई के माथे पर अक्षत और कुमकुम का तिलक लगाया जाता है। राखी पर तिलक का शुभ महत्व होता है। कहा जाता है कि तिलक लगाते वक्त माथे के बीच में दवाब देना चाहिए। यह स्थान छठी इंद्री का माना गया है। वैज्ञानिकों के तर्क के अनुसार, दवाब देने से स्मरण शक्ति के साथ निर्णय लेने की शक्ति बढ़ती है। Kumkum Akshat Tilak Ke Fayde

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शास्त्रों के मुताबिक, लाल चंदन, श्वेत चंदन, कुमकुम और भस्म का तिलक शुभ माना गया है। वहीं रक्षा बंधन पर कुमकुम का तिलक लगाया जाता है। कुमकुम के तिलक के साथ अक्षत (चावल) भी इस्तेमाल किया जाता है। तिलक को माथे के बीच में लगाया जाता है। यह तिलक विजय, मान-सम्मान और जीत का प्रतीक माना जाता है।

इसलिए कुमकुम के साथ लगाते हैं अक्षत :

शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, चावल शुद्ध अन्न है। इसे हवन में देवताओं को भी अर्पित किया जाता है। कहा जाता है कि कच्चे चावल का तिलक सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है और आसपास मौजूद नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है। भौहों के बीच जहां तिलक लगाया जाता है, उस स्थान को अग्नि चक्र कहते हैं। कहा जाता है कि यहीं से पूरे शरीर में शक्ति का संचार होता है। ऐसे में यहां तिलक लगाने से व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। माना जाता है कि इससे व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है।

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क्यों मनाते हैं रक्षाबंधन ?

रक्षाबंधन के विषय में अनेक पौराणिक कथा प्रचलित है जिनमें से कुछ काफी प्रसिद्ध है। माना जाता है कि एक बार दैत्यों ने इंद्र पर विजय प्राप्त कर लिया था तब इंद्राणी ने श्रावणी पूर्णिमा के दिन ब्राह्मणों से इंद्र के हाथ में ‘रक्षासूत्र’ बँधवाया था। फलस्वरूप इंद्र युद्ध में विजयी हुए और उसी दिन की पवित्र स्मृति में ‘रक्षाबंधन’ का त्योहार मनाया जाने लगा।

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महान ऐतिहासिक ग्रंथ महाभारत के अनुसार जब एक बार भगवान कृष्ण, पांडवों के साथ पतंग उड़ा रहे थे तब उस समय धागे की वजह से उनकी अंगुली कट गई ।तब द्रोपदी ने बहते खून को रोकने के लिए अपनी साड़ी का कपड़ा फाड़कर उनकी अंगुली पर बांध दिया था।

भगवान कृष्ण द्रोपदी के इस प्रेम से इतने भावुक हो गए थे कि उन्होंने द्रोपदी को आजीवन सुरक्षा का वचन दिया। कृष्ण ने द्रोपदी की रक्षा भी की जब कौरव राजसभा में द्रोपदी की साड़ी उतार रहे थे, उस वक़्त कृष्ण ने उस छोटे से कपड़े को इतना बड़ा बना दिया था कि कौरव उसे खोल नहीं पाए। इसी के फलस्वरूप रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाने लगा। भाई और बहन के प्रतीक रक्षा बंधन से जुड़ी एक अन्य रोचक कहानी भी है, मौत के देवता भगवान यम और यमुना नदी की।

Kumkum Akshat Tilak Ke Fayde
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पौराणिक कथाओं के अनुसार यमुना ने एक बार भगवान यम की कलाई पर धागा बांधा था। वह बहन के तौर पर भाई के प्रति अपने प्रेम का इजहार करना चाहती थी। भगवान यम इस बात से इतने प्रभावित हुए कि यमुना की सुरक्षा का वचन देने के साथ ही उन्होंने अमरता का वरदान भी दे दिया। साथ ही उन्होंने यह भी वचन दिया कि जो भाई अपनी बहन की मदद करेगा, उसे वह लंबी आयु का वरदान देंगे।

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