आठ दिन के लिए सभी शुभ कार्य वर्जित, इस दिन से शुरू होंगे होलाष्टक, आप भी रखें ध्यान

0
66

हेलो फ्रेंड्स, सूर्य मीन राशि में गोचर कर चुके हैं। सूर्य का मीन राशि में आना धार्मिक दृष्टि से तो शुभ माना जाता है लेकिन सांसारिक कर्मों की दृष्टि इसको अच्छा नहीं माना जाता यही वजह है कि इसे खरमास के नाम से जाना जाता है। वहीं होली से 8 दिन पहले होलाष्टक लग जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि जब-जब खरमास और होलाष्टक लगते हैं, तब-तब कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है। आइए जानते हैं आखिर खरमास और होलाष्टक को अशुभ काल क्यों कहा जाता है और इस दौरान कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित क्यों होता है। Holashtak 2021

इस साल होलाष्टक 21 मार्च रविवार से शुरू होकर 28 मार्च रविवार को होलिका दहन के दिन समाप्त होगा. होलाष्टक के इन 8 दिनों में शादी-विवाह, मुंडन समेत कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होते, यहां तक की 16 संस्कार जैसे- नामकरण संस्कार, जनेऊ संस्कार आदि भी नहीं किए जाते हैं. इसके पीछे पौराणिक और ज्योतिषीय दोनों कारण माने जाते हैं.

यह भी पढ़ें – राशि के अनुसार इन रंगों से खेलेंगे होली, तो होंगे कई फायदे

होलिका दहन का समय :

होलाष्टक- 21 मार्च से 28 मार्च तक
होलिका दहन का समय- 28 मार्च, रविवार को शाम 06.37 से 08.56 बजे तक
रंगवाली होली- 29 मार्च सोमवार को

क्या होता है होलाष्टक? :

होली से 8 दिन पहले होलाष्टक लग जाते हैं और होली जलने के बाद यह खत्म हो जाते हैं। इस दौरान भी कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित बताया गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि से फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि तक की अवधि को होलाष्टक कहा जाता है। इस बार होलाष्टक 21 मार्च से लग जाएंगे, जो 28 मार्च तक यानी होलिका दहन तक प्रभावी रहेगा। वहीं 29 मार्च को चैत्र प्रतिपदा के दिन रंगोत्सव मनाया जाएगा, जिसे धुलैंडी के नाम से भी जाना जाता है। होलाष्टक में होली के लिए लकड़ियां इकट्ठी की जाती हैं।

Holashtak 2021

प्रदोष काल में करें होलिका दहन :

देश और राज्‍य में कोई भी ऐसा गली मोहल्ला नहीं जहां होलिका दहन ना होता हो। हालांकि, होलिका दहन के दौरान विधि-विधान का पालन करना जरूरी है। अन्‍यथा इसके अशुभ प्रभाव पड़ते हैं। अग्नि प्रज्जवलन प्रदोष काल में ही करें। इस बार होलिका दहन 28 मार्च को है। इस दिन दोपहर 1:33 तक भद्रा नक्षत्र है। इसके बाद पूर्णिमा आरंभ होता है जो रात के 12:40 तक रहेगा वहीं प्रदोष काल संध्या 6:05 से आरंभ होता है। इसकी अवधि करीब डेढ़ घंटे की है। होलिका दहन 28 मार्च को शाम 7:31 तक कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें – अगर आप पर भी है भगवान शनि देव की साढ़ेसाती, तो करें ये उपाय

होलाष्टक का शाब्दिक अर्थ होला+अष्टक अर्थात होली से पूर्व के आठ दिन है। सामान्य रूप से देखा जाए तो होली एक नहीं, बल्कि नौ दिनों का त्योहार है। होलाष्टक में मांगलिक कार्य, गृह प्रवेश, नए रोजगार व नया व्यवसाय आरंभ नहीं करना चाहिए। होलाष्टक में अपने ईष्ट देव की पूजा-अर्चना, भजन करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार होलाष्टक के आठ दिनों तक सभी ग्रह उग्र रहते है। इन आठ दिनों में अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहू उग्र रहते हैं। इसी कारण इस अवधि में शुभ कार्य करना वर्जित है।

Holashtak 2021
Holashtak 2021

होलाष्टक में नहीं किए जाते शुभ कार्य :

होलाष्टक को लेकर कई पौराणिक मान्यताएं हैं। बताया जाता है कि राजा हिरष्णकश्यप ने इन दिनों में भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद को बंदी बना लिया था और यातनाएं दी थीं और होलिका ने भक्त प्रह्लाद को जलाने की तैयारियां भी इसी दिन से शुरू की थीं, जिसमें खुद होलिका का दहन हो गया था। इसलिए होलाष्टक में कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है। होलाष्टक को लेकर एक और कथा मिलती है, जिसमें बताया गया है कि भगवान शिव ने फाल्गुन मास की अष्टमी तिथि को कामदेव को भस्म कर दिया था, जिससे प्रकृति में शोक की लहर फैल गई थी और लोगों ने शुभ कार्य करना बंद कर दिया था, इस वजह से भी होलाष्टक में को शुभ कार्य नहीं किए जाते।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here