गुप्त नवरात्र आज से, जानें महत्व और क्यों कहते हैं इसे गुप्त

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दोस्तों, जैसा की आप जानते हैं की हिंदू धर्म में नवरात्रि का खास महत्व होता है. हर साल आने वाली दो प्रमुख नवरात्रि चैत्र नवरात्रि और शरद नवरात्रि के बारे में तो हम सभी जानते हैं लेकिन क्या आप ये जानते हैं की इसके अलावा दो और नवरात्रि मनाई जाती हैं, जो क्रमशः ये हैं आषाढ़ गुप्त नवरात्रि और माघ गुप्त नवरात्रि. माघ माह में पड़ने वाली नवरात्रि को माघ गुप्त नवरात्रि कहते हैं. इस बार माघ गुप्त नवरात्रि (Gupt Navratri 2021) की शुरूआत 12 फरवरी से हुई है. इस नवरात्रि को शिशिर नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है.

गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा की दस महाविघाओं की साधना की जाती है। मान्यताओं के अनुसार, गुप्त नवरात्र में की जाने वाली पूजा से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। इस बार कुंभ संक्रांति के साथ ही गुप्त नवरात्र की शुरुआत हो जाएगी। माघ महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से ही गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो जाएगा। गुप्त नवरात्र का यह उत्सव साधना और व्रत के लिए होता है। आइए जानते हैं गुप्त नवरात्र का महत्व क्या है और इसे क्यों गुप्त कहा जाता है…

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पंचांग के अनुसार 12 फरवरी शुक्रवार से माघ मास का शुक्ल पक्ष प्रारंभ हो रहा है. इसी शुक्ल पक्ष से माघ मास की गुप्त नवरात्रि 2021 भी प्रारंभ हो रही है. मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए गुप्त नवरात्रि 2021 का पर्व महत्वपूर्ण माना गया है.

गुप्त नवरात्रि शुभ मुहूर्त

12 फरवरी को गुप्त नवरात्रि 2021 कलश स्थापना मुहूर्त सुबह 8:34 से 9:59 बजे तक है. इस दिन पंचांग के अनुसार अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:13 से 12:58 बजे तक रहेगा. ध्यान देने वाली बात ये है कि इस बार माघ गुप्त नवरात्रि 2021 दस दिनों की होगी. ऐसा इसलिए होगा क्योंकि 17 और 18 फरवरी को दोनों दिन षष्टी की तिथि होगी.

Gupt Navratri 2021
Gupt Navratri 2021

तंत्र-मंत्र के लिए है गुप्त नवरात्रि

तंत्र मंत्र की साधना के लिए गुप्त नवरात्रि को उत्तम माना गया है. ऐसा माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि में की जाने वाली पूजा को जितना गुप्त रखा जाता है उतने ही उसके फलों में वृद्धि होती है.

कष्टों के निवारण के लिए करें पाठ

गुप्त नवरात्रि में विधि पूर्वक पूजा करने से कई प्रकार के कष्ट दूर होते हैं. गुप्त नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना शुभ फल प्रदान करने वाला माना गया है. गुप्त नवरात्रि में नियमों का कठोरता से पालन करना चाहिए.

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प्रत्यक्ष और गुप्त नवरात्र में अंतर

चार नवरात्र में से दो को प्रत्यक्ष नवरात्र कहा गया है क्योंकि इनमें गृहस्थ जीवन वाले साधना पूजन करते हैं। लेकिन जो दो गुप्त नवरात्र होते हैं, उनमें आमतौर पर साधक सन्यासी, सिद्धि प्राप्त करने वाले, तांत्रिक-मांत्रिक देवी की उपासना करते हैं। हालांकि चारों नवरात्र देवी सिद्धि प्रदान करने वाली होती हैं। लेकिन गुप्त नवरात्र के दिनों में देवी की दस महाविधाएं की पूजा की जाती है, जिनका तंत्र शक्तियों और सिद्धियों में विशेष महत्व है।

जबकि प्रत्यक्ष नवरात्र में सांसारिक जीवन से जुड़ी हुई चीजों को प्रदान करने वाली देवी के 9 रूपों की पूजा की जाती है। गुप्त नवरात्र में अगर आमजन चाहें तो किसी विशेष इच्छा की पूर्ति या सिद्धि के लिए गुप्त नवरात्र में साधना करके मनोरथ की पूर्ण कर सकते हैं।

Gupt Navratri 2021
Gupt Navratri 2021

इन बातों का रखें ध्यान

माघ गुप्त नवरात्रि पर तंत्र, मंत्र और विशेष प्रकार की साधना के लिए महत्वपूर्ण माना गया है. इस नवरात्रि पर दस महाविद्याएं की पूजा की जाती है. गुप्त नवरात्रि में अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है. इसके साथ प्रातकाल और शाम के समय में पूजा और आरती करनी चाहिए. अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन कर व्रत का पारण करना चाहिए.

इसलिए कहते हैं गुप्त नवरात्र

गुप्त नवरात्र में तंत्र साधना का विशेष महत्व रहा है। चूंकि तंत्र साधना गुप्त रूप से किया जाता है इसलिए यह गुप्त नवरात्र के नाम से जाना जाता है। यह आमतौर पर तंत्र विघा में रुचि रखने वाले साधक और तांत्रिक करते हैं। गुप्त नवरात्र में साधना के साथ सिद्धियों की भी प्राप्ति की जाती है। प्राचीनकाल में गुप्त नवरात्र ही ज्यादा प्रचलित थीं। बाद में युगों के परिवर्तन के बाद चैत्र नवरात्र मूल रूप में आया और फिर शारदीय नवरात्र। गुप्त नवरात्र आषाढ़ और माघ मास में की जाती है।

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गुप्त नवरात्र का महत्व

चारों नवरात्र हर साल तीन-तीन महीने की दूरी पर आती हैं। प्रत्यक्ष तौर पर चैत्र, गुप्त आषाढ़, प्रत्यक्ष आश्विन और गुप्त पौष माघ में मां दुर्गा की उपासना करके इच्छित फल की प्राप्ति की जाती है। प्रत्यक्ष नवरात्र में मां के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है और गुप्त नवरात्र में 10 महाविघा की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रों का महत्व, प्रभाव और पूजा विधि बातने वाले ऋषियों में श्रृंगी ऋषि का नाम सबसे पहले लिया जाता है।

धार्मिक कथाओं के अनुसार, एकबार एक महिला श्रृंगी ऋषि के पास आई और अपने कष्टों के बारे में बताया। महिला ने हाथ जोड़कर ऋषि से कहा कि मेरे पति दुर्व्यसनों से घिरे हुए हैं और इस कारण कोई धार्मिक कार्य, व्रत या अनुष्ठान नहीं कर पा रही।

ऐसे में क्या करूं कि मां शक्ति की कृपा मुझे प्राप्त हो और मुझे मेरे कष्टों से मुक्ति मिले। तब ऋषि ने महिला के कष्टों से मुक्ति पाने के लिए गुप्त नवरात्र में साधना करने के लिए कहा था। ऋषिवर ने गुप्त नवरात्र में साधना की विधि बताते हुए कहा कि इससे तुम्हारा सन्मार्ग की तरफ बढ़ेगा और तुम्हारा पारिवारिक जीवन खुशियों से भर जाएगा।

Gupt Navratri 2021
Gupt Navratri 2021

माघ गुप्त नवरात्र कार्यक्रम

  • 12 फरवरी: प्रतिपदा मां शैलपुत्री, घटस्थापना.
  • 13 फरवरी: मां ब्रह्मचारिणी देवी पूजा.
  • 14 फरवरी: मां चंद्रघंटा देवी पूजा.
  • 15 फरवरी: मां कुष्मांडा देवी पूजा.
  • 16 फरवरी: मां स्कंदमाता देवी पूजा.
  • 17 और 18 फरवरी षष्ठी तिथि: मां कात्यानी देवी पूजा.
  • 19 फरवरी सप्तमी तिथि: मां कालरात्रि देवी पूजा.
  • 20 फरवरी अष्टमी तिथि: मां महागौरी, दुर्गा अष्टमी.
  • 21 फरवरी नवमी तिथि: मां सिद्धिदात्री, व्रत पारण.

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