गोवर्धन पूजन: आखिर क्यों रोज घट रही है गोवर्धन पर्वत की ऊंचाई? ये है छिपा रहस्य

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हेल्लो दोस्तों आज गोवर्धन पूजन है यह दिवाली के अगले दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि को की जाती है. श्रीकृष्ण ने इंद्र देव के प्रकोप से गोकुल वासियों को बचाने के लिए तर्जनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया था. तभी से इस त्योहार को मनाने की परंपरा चली आ रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक जमाने में इस पर्वत की विशालकाय ऊंचाई (Govardhan Parvat Height) के पीछे सूरज तक छिप जाता था. लेकिन आज इसका कद रोजाना मुट्ठीभर कम हो रहा है. जानकारी के लिए बता दें कि गोवर्धन पर्वत द्रोनाचल पर्वत के पुत्र हैं.

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ऐसा कहा जाता है कि 5,000 साल पहले गोवर्धन पर्वत करीब 30,000 मीटर ऊंचा हुआ करता था. आज इसकी ऊंचाई सिर्फ 25-30 मीटर रह गई है. ऐसी मान्याताएं हैं कि एक ऋषि के शाप के चलते इस पर्वत की ऊंचाई आज तक घट रही है. इसकी क्या वजह है आज हम इस पोस्ट के माध्यम से आपको बताएंगे.

गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा :

परंपरा के अनुसार गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा लगाने का प्रचलन है. दूर-दूर से भक्तजन गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने आते हैं. यह परिक्रमा लगभग 21 किलोमीटर की है. परिक्रमा जहां से शुरू होती है वहीं एक प्रसिद्ध मंदिर भी है जिसे दानघाटी मंदिर कहा जाता है. इस परिक्रमा को तेज कदमों से करने में 5 से 6 घंटे का वक्त लगता है. देशभर से श्रद्धालु गोवर्धन परिक्रमा के लिए हर दिन ब्रज में पहुंचते हैं.

Govardhan Parvat Height
Govardhan Parvat Height

गोवर्धन पर्वत की कथा :

एक धार्मिक कथा के अनुसार, एक बार ऋषि पुलस्त्य गिरिराज पर्वत के नजदीक से होकर गुजर रहे थे. इस पर्वत की खूबसूरती उन्हें काफी रास आई. ऋषि पुलस्त्य ने द्रोणांचल से आग्रह किया कि मैं काशी में रहता हूं और आप अपना पुत्र गोवर्धन मुझे दे दीजिए. मैं इसे काशी में स्थापित करना चाहता हूं.

द्रोणांचल ये बात सुनकर बहुत दुखी थे. हालांकि गोवर्धन ने संत से कहा कि मैं आपके साथ चलने को तैयार हूं. लेकिन आपको एक वचन देना होगा. आप मुझे जहां रखेंगे मैं वहीं स्थापित हो जाउंगा.

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पुलस्त्य ने वचन दे दिया. गोवर्धन ने कहा कि मैं दो योजन ऊंचा हूं और पांच योजन चौड़ा हूं, आप मुझे काशी कैसे लेकर जाएंगे. पुलस्त्य ने जवाब दिया कि मैं तपोबल के जरिए तुम्हें हथेली पर लेकर जाउंगा.

रास्ते में जब बृजधाम आया तो गोवर्धन को याद आया कि भगवान श्रीकृष्ण बाल्यकान में लीला कर रहे हैं. गोवर्धन पर्वत पुलस्त्य के हाथ पर धीरे-धीरे अपना भार बढ़ाने लगा, जिससे उसकी तपस्या भंग होने लगी. ऋषि पुलस्त्य ने गोवर्धन पर्वत को वहीं रख दिया और वचन तोड़ दिया.

Govardhan Parvat Height
Govardhan Parvat Height

इस श्राप के कारण घट रही है ऊँचाई :

इसके बाद ऋषि पुलस्त्य ने पर्वत को उठाने की कई बार कोशिश की, लेकिन वो उसे हिला भी न सके. तब ऋषि पर्वत के हठ के कारण क्रोधित हो गए और गिरिराज पर्वत को श्राप दिया की वे रोज़ मुट्ठी भर घटते रहेंगे| तभी से गोवर्धन पर्वत कम होते जा रहे हैं| कहते हैं कि तभी से गोवर्धन पर्वत का कद घटता जा रहा है.

यह पर्वत दो राज्यों में बंटा हुआ है| इसका कुछ हिस्सा राजस्थान और बाकी का हिस्सा उत्तरप्रदेश के अंतर्गत आता है| पर्वत को चारों तरफ से गोवर्धन शहर और कुछ गांवों ने घेर रखा है। ध्यान से देखने पर पता चलता है कि पूरा शहर ही पर्वत पर बसा है।

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