इस शुभ मुहूर्त में करें गणेश जी की स्थापना, जानिये पूजन विधि और भोग के नियम

0
145

इस साल गणेश चतुर्थी 22 अगस्त को मनाई जाएगी. गणेश जी को सभी देवताओं में प्रथम पूजनीय माना गया है. गणेश चतुर्थी पर लोग गणेश जी को अपने घर लाते हैं, गणेश चतुर्थी के ग्यारहवें दिन धूमधाम के साथ उन्हें विसर्जित कर दिया जाता है और अगले साल जल्दी आने की प्रार्थना की जाती है. Ganesh Chaturthi 2020

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार विघ्नहर्ता श्री गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन ही हुआ था, इसलिए इस दिन गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी मनाई जाती है. गणेश जन्मोत्सव के दिन गणपति की विशेष आराधना की जाती है, ताकि वे व्यक्ति के जीवन के सभी संकटों का नाश कर उसकी हर मनोकामना को पूरा कर दे.

ये भी पढ़िए : भूलकर भी तुलसी के पौधे के पास ना रखें ये चीज़ें, होगा भरी नुक्सान

गणेश चतुर्थी मुहूर्त – Ganesh Chaturthi Muhurat

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी ति​थि 21 अगस्त शुक्रवार की रात 11 बजकर 02 मिनट से शुरू होगी और 22 अगस्त शनिवार को शाम 07 बजकर 57 मिनट तक रहेगी. धार्मिक मान्यता है कि गणेश चतुर्थी की पूजा हमेशा दोपहर के मुहूर्त में की जाती है क्योंकि गणेश जी का जन्म दोपहर में हुआ था. 22 अगस्त को दिन में 11 बजकर 06 मिनट से दोपहर 01 बजकर 42 मिनट के मध्य भगवान गणेश की पूजा की जा सकती है.

गणेश का पूजा मुहूर्त

22 अगस्त के दिन आपको गणपति की पूजा के लिए दोपहर में 02 घंटे 36 मिनट का समय मिल रहा है। आप दिन में 11 बजकर 06 मिनट से दोपहर 01 बजकर 42 मिनट के मध्य विघ्नहर्ता की पूजा कर लें।

गणपित स्थापना

22 अगस्त के दिन इस मुहूर्त में लोग अपने अपने घरों पर गणपति का आगमन कराते हैं। अपने गणपति की ​मूर्तियां स्थापित करते हैं। विधि विधान से पूजा करते हैं। हालांकि कोरोना काल में सार्वजनिक जगहों पर गणपति स्थापना की मनाही हो सकती है। आप अपने घर पर ही गणपति की स्थापना करें।

ये भी पढ़िए : सुहागिन महिलाओं को भूलकर भी ये 5 चीजें किसी और को नहीं देनी चाहिए,…

बप्पा को घर लाने के लिए करें ये काम :

गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को अपने घर लाने के लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए. स्नानादि कर गणेश जी की प्रतिमा को घर लाकर विराजमान करें. यह ध्यान रखें कि इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने वर्जित है.

गणपति की स्थापना करते हुए इस बात का ध्यान रखें कि मूर्ति का मुंह पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए। गणेश पूजा शुरू करने से पहले संकल्प लेना होता है, इसके बाद भगवान गणेश का आह्वान किया जाता है। इसके बाद गणपति की मंत्रों के उच्चारण के बाद स्थापना की जाती है। भगवान गणेश को धूप, दीप, वस्त्र, फूल, फल, मोदक अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद भगवान गणेश की आरती उतारी जाती है।

Ganesh Chaturthi 2020
Ganesh Chaturthi 2020

किसी चौकी पर आसन लगाकर गणेश जी की प्रतिमा को स्थापित करना चाहिए. एक कलश में सुपारी डालें और नए कपड़े में बांधकर रखें. पूरे परिवार के साथ गणेश जी की पूजा करें, दुर्वा और सिंदूर अर्पित करें. गणेश जी को लड्डू या मोदक का भोग लगाएं. इसके बाद बाद लड्डूओं को प्रसाद के रुप में बांटें.

गणपति को क्या-क्या चढ़ाएं?

इसके बाद प्रतिमा पर सिंदूर, केसर, हल्दी, चन्दन,मौली आदि चढाकर षोडशोपचार के साथ उनका पूजन करे. गणेश जी को दक्षिणा अर्पित कर उन्हें 21 लड्डूओं का भोग लगाएं. गणेश प्रतिमा के पास पांच लड्डू रखकर बाकी ब्राह्मणों और गरीबों में बांट देने चाहिए. ध्यान रहे गणेश जी की पूजा मध्याह्न यानि दोपहर के समय करनी चाहिए.

यह भी पढ़ें : ‘बप्पा मोरया’ के घर आगमन पर इन 10 बातों का रखें ध्यान

दूध से बने पदार्थों को नहीं करें सेवन

इस दिन शाम गाय बछडे के  पूजन और जौ व सत्तू का भोग लगाने का महत्व है. इस दिन गेहूं एवं चावल, गाय के दूध और दूध से बने पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए. इस दिन गाय के दूध पर केवल बछड़े का ही अधिकार होता है.

गजानन और एकदंत की कथा – Ganesh Chaturthi Katha

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान गणेश जब शिशु अवस्था में थे तो एक बार गणेश जी को देखने के लिए शनि देव आए. शनि ग्रह की दृष्टि पड़ने से गणेश जी का सिर जलकर भस्म हो गया. गणेश जी की ऐसी हालत देखकर माता पार्वती को बहुत पीड़ा हुई. माता पार्वती की पीड़ा जब भगवान ब्रह्मा जी से नहीं देखी गई तो व्रह्मा जी ने माता पार्वती को एक उपाय बताया.

Ganesh Chaturthi 2020
Ganesh Chaturthi 2020

उन्होने कहा कि जिसका सिर सर्वप्रथम मिले उसी को गणेश के सिर पर लगा दें. इसके बाद पार्वती जी वहां से चलीं आईं. पहला सिर हाथी के बच्चे का मिला. इसे गणेश जी को लगा दिया. हाथी का सिर होने के कारण ही भगवान गणेश जी का गजानन कहा जाता है.

वहीं एक अन्य कथा के अनुसार माता पार्वती स्नान करने चली गईं और मुख्य दरवाजे पर गणेश जी को बैठा दिया और कहा किसी को प्रवेश न दें. तभी वहां पर भगवान शिव का आगमन हुआ. उन्होंने प्रवेश करने की कोशिश की तो गणेश जी ने उन्हें रोक दिया. इस पर भगवान शंकर को क्रोध आ गया और उन्होंने क्रोध में गणेश जी का सिर धड़ से अलग कर दिया. शिवजी ने बाद में गणेश जी को हाथी का सिर लगा दिया.

यह भी पढ़ें : हरतालिका तीज व्रत शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा

भगवान परशुराम ने तोड़ दिया गणेश जी का दांत :

भगवान शंकर और माता पार्वती जब अपने शयन कक्ष में विश्राम कर रहे थे तो गणेश जी को उन्होंने द्वार पर बैठा दिया और कहा कि किसी को भी न आने दे. तभी वहां पर परशुराम जी आ गए और भगवान शंकर से मिलने के लिए कहा. लेकिन गणेश जी ने ऐसा करने से माना कर दिया. इस पर परशुराम जी को क्रोध आ गया और उन्होने अपने फरसे से उनका एक दांत तोड़ दिया

गणपति विसर्जन की तारीख – Ganpati Visarjan Date

10 दिनों तक गणपति की आराधना करने के पश्चात 01 सितंबर दिन मंगलवार को सहर्ष गणपति बप्पा को बहते जल में विसर्जित कर दें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here