दिवाली की रात क्यों बनाया जाता है काजल ? ये है वजह

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हेलो फ्रेंड्स ,आप सभी को पता होगा ही दिवाली का त्योहार 14 नवंबर 2020 को है। नरक चतुर्दशी के अगले दिन दिवाली का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन मां लक्ष्मी अपने भक्तों को अपना आशीर्वाद प्रदान करती हैं। दीयों से घरों को रौशन किया जाता है. मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घरों में रंगोली बनाईं जाती हैं. दिवाली के दिन काजल को लगाने का भी विधान है। दीपावली की रात घर के बड़े-बुजुर्ग, बच्चे, और महिलायें सभी लोग काजल क्यों लगाते हैं. चलिए जानते हैं दिवाली के दिन काजल लगाने का महत्त्व। Diwali par kajal kyun lagate hain

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दिवाली को लेकर क्या हैं मान्यताएं?

मान्यता है कि भगवान राम चौदह साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे. अपने प्रभु राम, माता सीता और प्रभु लक्ष्मण के अयोध्या वापसी की खुशी में लोगों ने चारों तरफ दीप जलाकर उनका स्वागत किया था. मान्याताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान कृष्ण ने भी नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था.

Diwali par kajal kyun lagate hain
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दीपक से बना काजल :

धार्मिक मान्यताओं की मानें तो, काले टीके व काजल का उपयोग बुरी नजर से बचने के लिए किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि, दीवाली की रात अगर दीपक से बना काजल लगाया जाए तो इससे घर-परिवार के किसी भी सदस्य को नजर नहीं लगती। साथ ही सुख-शांति बनी रहती है। कई लोग तो इस दिन धन की तिजोरी, गैस और मेन गेट पर काला टीका लगाते हैं।

अगर वैज्ञानिकों की मानें तो, दीपक से बना काजल शुद्ध होता है और आंखों के लिए लाभदायी होता है। चूंकि, दिवाली के समय पटाखें जलाए जातें है जिनसे हानिकारक धुआं निकलता है जो आंखों के लिए लाभदायी नहीं होता। इसलिए आंखों को धुएं के बुरे प्रभाव से बचाने के लिए काजल लगाया जाता है। साथ ही घर के बड़े-बुजुर्ग दीपक से बने काजल को लगाना शुभ मानते हैं।

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दिवाली पर काजल लगाने का महत्व :

दिवाली के दिन काजल बनाने को अधिक अधिक महत्व दिया जाता है। इस दिन काजल बनाने के लिए कच्चे दीए को जलाकर सारी रात ढककर रखा जाता है। इस दीपक की लौ से ही रात में मिट्टी का दीया अंदर से काला हो जाता है और उसका काजल बन जाता है। इस काजल को ही दिवाली के दिन परिवार के लोग आखों में लगाते हैं। इस काजल को दिवाली के दिन लगाना बहुत ही शुभ माना जाता है।

मान्यताओं के अनुसार इस काजल को घर की मुख्य जगहों पर भी लगाया जाता है। घर की अलमारी के साथ यह काजल तिजोरी, खाना बनाने के चूल्हे आदि पर भी लगाया जाता है। माना जाता है कि ऐसा करने से घर की सभी नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और घर में सुख और समृद्धि का वास होता है। इस काजल को घर के मुख्य द्वार पर लगाने से घर को किसी भी प्रकार की बुरी नजर नही लगती है।

Diwali par kajal kyun lagate hain
Diwali par kajal kyun lagate hain

इसके अलावा यह काजल लगाने से न केवल आखों की रोशनी बढ़ती है। बल्कि बुरी नजर से बचाव होता है। इसी कारण से दिवाली के काजल को अधिक महत्व दिया जाता है और दिवाली की रात प्रत्येक घर में काजल बनाया जाता है और यदि दिवाली पर काजल के वैज्ञानिक दृष्टिकोण की बात करें तो दिवाली की रात में पटाखे जलाने के कारण प्रदूषण बहुत अधिक बढ़ जाता है। जिसके कारण आखों की समस्याएं बहुत अधिक बढ़ जाती है।

इस दिन प्रदुषण का स्तर बढ़ने के कारण आखों में जलन, आखों का लाल होना और बार- बार आखों में खुजली होती है। जिसके कारण आखों में से पानी निकलने लगता है। अगर ऐसे में आप काजल लगाते हैं तो प्रदुषण के आखों में होने वाली सभी समस्याओं से छुटकारा मिलता है।

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दिये की लौ से काजल बनाना :

सबसे पहले एक दीया लें और उसमें घी या तेल भर लें। अब घी में भीगी एक रुई की बत्ती को जला लें। अब दिये को दोनों तरफ से किसी चीज से ढंक लें। दिये के ऊपर उल्टी प्लेट रख दें। ध्यान रखें कि प्लेट में दिये की लौ छू रही हो। इस दिये को रात भर जलने दें ताकि प्लेट पर कालिख जमा होती रहे। जब दीया बुझने के बाद प्लेट हटा लें। अब प्लेट पर लगी कार्बन कोटिंग (कालिख जैसा कुछ) को निकालें और एक साफ डिब्बी में जमा करके रख लें। इसे स्मूद बनाने के लिए कुछ बूंद घी डाल लीजिये। डिब्बी को बंद करके दो घंटे के लिए फ्रिज में रख दें। उसके बाद ये इस्तेमाल के लिए तैयार है। चार महीने में एक बार आप इस तरह घर पर ही काजल बना सकते हैं।

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