Dhanteras To Bhai Dooj Shubh Muhurat
Dhanteras To Bhai Dooj Shubh Muhurat
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हेलो फ्रेंड्स, हिंदू धर्म में दिवाली पर्व का विशेष महत्व है। दिवाली की तैयारियाँ धनतेरस से पहले ही शुरू हो जाती हैं। ऐसा माना जाता है कि दिवाली के दिन माँ लक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से देवी प्रसन्न होती हैं और समृद्धि- वैभव का आशीर्वाद देती हैं। Dhanteras To Bhai Dooj Shubh Muhurat

दिवाली महापर्व में अब बस कुछ ही दिन बचे हैं। दिवाली का महापर्व धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक पाँच दिनों तक चलता है। हिंदू धर्म में दिवाली पर्व का विशेष महत्व है। दिवाली की तैयारियाँ धनतेरस से पहले ही शुरू हो जाती हैं। ऐसा माना जाता है कि दिवाली के दिन माँ लक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से देवी प्रसन्न होती हैं और समृद्धि- वैभव का आशीर्वाद देती हैं।

तो चलिए जानते हैं महापर्वों की प्रमुख तिथियां और शुभ मुहूर्त :

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धनतेरस :

हिंदू पंचांग के अनुसार धनतेरस कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाता है. धनतेरस को धन त्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है. पांच दिनों तक चलने वाला दीपावली की शुरुआत धनतेरस से ही शुरू होता है. कहते हैं कि इस त्योहार पर आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रगट हो हुए थे और यहीं वजह ही हर साल धनतेरस पर बर्तन खरीदने की परंपरा शुरू हुई थी. कहते हैं कि धनतेरस के दिन सोने-चांदी, बर्तन, जमीन-जायजाद की खरीदना काफी शुभ माना जाता है और इस साल धनतेरस का पर्व 2 नवंबर, 2021 को मंगलवार के दिन मनाया जाएगा.

तिथि और शुभ मुहूर्तः-

2 नवंबर, 2021 मंगलवार

मुहूर्त- शाम 6 बजकर 18 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 11 मिनट तक रहेगा.

शुभ खरीदारी का समय- 1 घंटे 52 मिनट तक रहेगा.

प्रदोष काल- 17:35 मिनट से लेकर 20:11 मिनट तक रहेगा.

वृषभ काल- 18:18 मिनट से लेकर 20:14 मिनट तक रहेगा.

Dhanteras To Bhai Dooj Shubh Muhurat
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नरक चतुर्दशी :

नरक चतुर्दशी का त्योहार धनतेरस के बाद ही मनाया जाता है. इस बार नरक चतुर्दशी का त्योहार 3 नवंबर, 2021 को मनाया जा रहा है. हिंदू धर्म के अनुसार नरक चतुर्दशी कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. पुराणों के मुताबिक नरक चतुर्दशी को कई अलग-अलग नामों से बुलाया जाता है, जैसे- नरक चौदस, रूप चौदस और रूप चतुर्दशी आदि.

नरक चतुर्दशी को दिवाली से पहले मनाए जाने कि वजह से इस छोटी दीपावली के नाम से भी जाना जाता है. नरक चतुर्दशी के दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा की जाती है और घर के हर कौने में दीप जलाकर अकाल मृत्यु से मुक्ति पाने की कामना की जाती है.

तिथि और शुभ मुहूर्त :

3 नवंबर, 2021

तेल मालिश (अभ्यंग)- सुबह 06:06:05 से लेकर 06:34:57 तक रहेगा.

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दिवाली :

इस साल 4 नवंबर, 2021 को पूरे देशभर में दीपावली का महापर्व मनाया जाएगा. इसी के साथ दिवाली को प्रकाश उत्सव के नाम से भी जाना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या तिथि के दिन प्रदोष काल में दीपावली पर महालक्ष्मी पूजन करने का विधान माना गया है. वैसे तो सभी घरों में एक महीने पहले से दिवाली की तैयारियां शुरू हो जाती है.

दिवाली से पहले लोग घरों में रंग करवाने लगते हैं और दीपावली के दिन घरों को खूब सारी लाइटों और दीपकों से सजाया जाता है. दिवाली में शाम के वक्त माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, मां सरस्वती और धन के देवता कुबेर की पूरे विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है. कहते हैं कि दिवाली के दिन माता लक्ष्मी धरती पर आती हैं.

इसलिए, घर के दरवाजों को दिवाली के दिन बंद नहीं करने चाहिए और सभी घर परिवार के लोगों को पर अपनी कृपा बरसाती है. इस दिन सभी लोग एक दूसरे का मुंह मीठा करवाते हैं. दीप जलाते हैं और गले लगकर एक-दूसरे को दिवाली की बधाई देते हैं.

तिथि और शुभ मुहूर्त :

दिवाली तिथि- 4 नवंबर, 2021 दिन गुरुवार

पूजा मुहूर्त- 18:10:28 से लेकर 20:06:18 तक रहेगा.

अवधि- 1 घंटा 55 मिनट तक रहेगा.

प्रदोष काल- 17:34:09 से लेकर 20:10:27 तक रहेगा.

वृषभ काल- 18:10:28 से 20:06:18 तक रहेगा.

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दिवाली पर पूजा का शुभ मुहूर्त :

समय: शाम 06 बजकर 09 मिनट से 08 बजकर 20 मिनट तक

अवधि – 1 घंटा 55 मिनट

प्रदोष काल- 05 बजकर 34 मिनट से 08 बजकर 10 मिनट तक

गोवर्धन :

गोवर्धन का पर्व हमेशा से ही दिवाली के दूसरे दिन मनाया जाता है और साल गोवर्धन पूजा 5 नवंबर, 2021 को होगी. हिदूं पंचांग के अनुसार गोवर्धन का त्योहार कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि में मनाया जाता है. गोवर्धन को अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है. इस खास पर्व पर भगवान कृष्ण के साथ गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा की जाती है. इसी दिन भगवान कृष्ण को 56 भोजन का भोग लगाया जाता है.

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तिथि और शुभ मुहूर्त :

5 नवंबर, 2021 दिन शुक्रवार

शुभ मुहूर्त- 6:35 मिनट से लेकर 8:47 मिनट तक रहेगा.

अवधि- 2 घंटे 11 मिनट तक रहेगा.

सायंकाल मुहूर्त- 15: 21 मिनट से लेकर 17:33 मिनट तक रहेगा.

अवधि- 2 घंटे 11 मिनट तक रहेगा.

भाईदूज :

दीवाली के आखिरी दिन भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है और इसी के साथ पांच दिवसीय दीपावली का महापर्व समाप्त हो जाता है. भाई दूज कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है. इस दिन सभी बहनें अपने भाईयों के माथे पर लगाती है और उनकी लंबी आयु और सुख-समृद्धि की मनोकामनाएं करती हैं.

तिथि और शुभ मुहूर्त :

तिलक समय- दोपहर 1 बजकर से लेकर 10 मिनट और 3 बजकर 21 मिनट तक रहेगा.

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