हेल्लो दोस्तों भरणी श्राद्ध पितृ पक्ष के सबसे शुभ दिनों में से एक है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार आश्विन माह के कृष्ण पक्ष के दौरान पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध अनुष्ठान किया जाता है। भरणी श्राद्ध (Bharani Shradh 2021) पितृ पक्ष पर पड़ता है जब अपराहन काल के दौरान भरणी नक्षत्र प्रबल होता है। मूल रूप से, यह नक्षत्र महालय पक्ष के दौरान चतुर्थी तिथि या पंचमी तिथि को प्रबल होता है। इसे महाभरणी के नाम से भी जाना जाता है। इस बार भरणी श्राद्ध (kab hai bharani shradh) 24 सितंबर अश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्थी को पड़ रही है, क्योंकि उस दिन भरणी नक्षत्र होगा।

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कई लोग अपने जीवन में कोई भी तीर्थयात्रा नहीं कर पाते, ऐसे लोगों की मृत्यु होने पर उन्हें मातृ गया, पितृ गया, पुष्कर तीर्थ और बद्रीकेदार आदि तीर्थों पर किए गए श्राद्ध का फल मिले, इसके लिए भरणी श्राद्ध करना जरूरी माना गया है। किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद पितृ पक्ष में भरणी श्राद्ध करना आवश्यक होता है। मूल रूप से, यह नक्षत्र महालय पक्ष के दौरान चतुर्थी तिथि या पंचमी तिथि को प्रबल होता है। इसे महाभरणी (Mahabharani) के नाम से भी जाना जाता है। जब भरणी नक्षत्र चतुर्थी तिथि को प्रबल होता है, तो भरणी श्राद्ध को चौथ भरणी कहा जाता है। इसी तरह, जब अपराहन के दौरान पंचमी तिथि को भरणी नक्षत्र (Bharani Nakshatra) प्रबल होता है, तो इसे भरणी पंचमी कहा जाता है।

भरणी श्राद्ध तिथि – Bharani Shradh Date :

भरणी श्राद्ध 2021 तिथि शुक्रवार, 24 सितंबर
इस वर्ष यह चतुर्थी श्राद्ध – अश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्थी को पड़ रही है

जब भरणी नक्षत्र चतुर्थी तिथि को प्रबल होता है, तो भरणी श्राद्ध को चौथ भरणी कहा जाता है। इसी तरह, जब अपराहन के दौरान पंचमी तिथि को भरणी नक्षत्र प्रबल होता है, तो इसे भरणी पंचमी कहा जाता है।

क्या है भरणी श्राद्ध – Bharani Shradh :

बहुत से लोग अपने जीवन में कोई तीर्थ यात्रा नहीं कर पाते हैं। ऐसे जातकों की मृत्यु होने पर उन्हें मातृ गया, पितृ गया, पुष्कर तीर्थ, बद्रीकेदार आदि तीर्थों पर किए गए श्राद्ध का फल मिलता है, इसके लिए भरणी श्राद्ध (aakhir kyon manate hain bharani shradh) किया जाता है। यमराज को भरणी नक्षत्र का देवता माना जाता है। यमराज को भरणी का देवता मानने के कारण महाभरणी श्राद्ध की महत्ता बढ़ जाती है। आमतौर पर आश्विन मास के पितृपक्ष में चतुर्थी अथवा पंचमी को ही भरणी नक्षत्र आता है। ऐसी मान्यता है कि महाभरणी श्राद्ध में श्राद्ध कहीं भी किया जाए उसका फल सदैव गया में किए गए श्राद्ध के बराबर मिलता है। कई बार भरणी नक्षत्र चतुर्थी या पंचमी को पड़कर तृतीया तिथि को भी पड़ा जाता है, ऐसे में तृतीया को महाभरणी श्राद्ध मनाया जाता है। इसलिए भरणी श्राद्ध किसी एक तिथि से नहीं जोड़ सकते है।

भरणी श्राद्ध को महाभरणी श्राद्ध भी कहा जाता है। पितृ पक्ष श्राद्ध, पार्वण श्राद्ध है और इसे विधिपूर्वक सम्पन्न कराने का शुभ समय कुटुप मुहूर्त और रोहिणा है। मुहूर्त के शुरु होने के बाद आप दोपहर से पहले किसी भी समय श्राद्ध क्रिया संपन्‍न करा सकते हैं। यह ध्यान रखें कि श्राद्ध के अंत में तर्पण जरूर करें। मान्यता है कि कोई व्यक्ति जीवन में एक भी तीर्थयात्रा नहीं कर सका हो तो की मृत्यु के पश्चात उसे तभी मोक्ष मिलता है, जब उसके सगे संबंधियों को पितृपक्ष में भरणी श्राद्ध करता है.

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किस तिथि को किसका करें श्राद्ध :

ऐसी मान्यता है कि परिवार के विभिन्न सदस्यों का श्राद्ध अलग-अलग दिन किया जाना चाहिए। पिता का श्राद्ध सदैव अष्टमी तिथि को और माता का श्राद्ध नवमी तिथि को करना चाहिए। साथ ही जिन व्यक्तियों की अकाल मृत्यु होती है उनका श्राद्ध चतुर्दशी को होता है। जिनकी मृत्यु अविवाहित रहते हो जाती है उनका श्राद्ध पंचमी तिथि या महाभरणी को करना चाहिए। यही नहीं अगर किसी की मृत्यु की तिथि का ज्ञान न हो तो उनका श्राद्ध अमावस्या के दिन करें। इसके अलावा साधु और सन्यासियों का श्राद्ध द्वादशी के दिन होता है।

Pind daan gaya ji
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महाभरणी श्राद्ध का महत्व – Bharani Shradh Mahatv :

ऐसी मान्यता है कि लोक-लोकान्तर के जन्म-मरण चक्र में मृ्त्यु और पुन: जन्म उत्पति का कारकत्व भरणी नक्षत्र के पास होता है। इसलिए भरणी नक्षत्र के दिन श्राद्ध करने से पितरों को सदगति की प्राप्ति होती है। जो भी व्यक्ति भरणी नक्षत्र में श्राद्ध करता है श्राद्धकर्ता को उत्तम आयु प्राप्त की होती है। साथ ही भरणी नक्षत्र में ब्राह्मण को तिल और गाय दान करने से सदगति मिलती है और कष्ट नहीं भोगना पड़ता है। महालय पक्ष (Mahalaya Paksha) में भरणी नक्षत्र चतुर्थी तिथि या पंचमी तिथि को आता है।

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