Bhadli Navami Muhurat Poojan Vidhi aur Upay
Bhadli Navami Muhurat Poojan Vidhi aur Upay

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हेल्लो दोस्तों आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भड़ली नवमी कहा जाता है। भड़ली नवमी को भडल्या नवमी, कंदर्प नवमी आदि नामों से भी जाना जाता है। इस साल भड़ली नवमी 08 जुलाई 2022, शुक्रवार को पड़ रही है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भड़ली नवमी शुभ विवाह या मांगलिक कार्यों के लिए अंतिम और उत्तम तिथि होती है। सम्पूर्ण व्रत त्यौहार कथा पूजन विधि – https://amzn.to/3ypxbDf

धार्मिक शास्त्रों में विवाह जैसे मांगलिक कार्यो के लिए भड़ली नवमी का दिन विशेष माना गया है। इस दिन शादी और दूसरे मांगलिक कार्य बिना किसी शुभ मुहूर्त के किए जा सकते हैं। ऐसा कहा जाता है कि यह अबूझ मुहूर्त है, इस दिन जिसका विवाह मुहूर्त न भी बन रहा हो, उसकी विवाह भी हो जाता है।

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भड़ली नवमी तक विवाह के लिए सिर्फ 9 शुभ मुहुर्त शेष हैं। भड़ली नवमी के बाद 10 जुलाई काे देवशयनी एकादशी आती है। देवशयनी एकादशी 10 जुलाई से शुरू होकर 4 नवंबर तक रहेंगे और इस चार माह के विशेष समयकाल को चातुर्मास कहते हैं।। इस दिन भगवान विष्णु अगले चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं और चार्तुमास लग जाता है। इस दौरान शुभ व मांगलिक कार्यों पर रोक होती है।

मान्यता है कि देवशयनी एकादशी के बाद मांगलिक कार्यों में भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त नहीं हो पाता है। देवशयनी एकादशी से सभी तरह के शुभ मांगलिक कार्य पर ब्रेक लग जाएगा। इसके बाद अब मांगलिक कार्य सीधे शारदीय नवरात्रि में ही होंगे तो आइए जानते हैं भड़ली नवमी की सही तिथि, धार्मिक महत्व आदि के बारे में…

Bhadli Navami Muhurat Poojan Vidhi aur Upay
Bhadli Navami Muhurat Poojan Vidhi aur Upay

भड़ली नवमी 2022 तिथि

Bhadli Navami Shubh Muhurt

  • भड़ली नवमी तिथि – 08 जुलाई, दिन शुक्रवार
  • भड़ली नवमी तिथि की शुरुआत – 07 जुलाई, दिन गुरुवार को शाम 07 बजकर 28 मिनट से
  • भड़ली नवमी तिथि का समापन – 08 जुलाई, दिन शुक्रवार को शाम 06 बजकर 25 मिनट पर होगा।
  • अभिजीत मुहूर्त – 08 जुलाई, सुबह 11:36 से 12:30 तक।
  • विजय मुहूर्त – 08 जुलाई, दोपहर 02:19 से 03:14 तक।
  • गोधूलि मुहूर्त – 08 जुलाई, शाम 06:39 से 07:03 तक।
  • रवियोग – 08 जुलाई, दोपहर 12:14 से अगले दिन सुबह 05:14 तक।
  • उदया तिथि के अनुसार भड़ली नवमी 08 जुलाई को मनाई जाएगी। 

तीन शुभ योग में है भड़ली नवमी

Bhadli Navami Shubh Yog

हिन्दू पंचांग के अनुसार इस साल भड़ली नवमी पर शिव योग समेत तीन शुभ योग बन रहे हैं, जो इस दिन के महत्ता को और भी बढ़ा देते हैं। भड़ली नवमी को शिव, सिद्ध और रवि तीनों ही योग बन रहे हैं। ये तीनों योग मांगलिक और शुभ कार्यों के लिए उत्तम हैं। इस नवमी के दिन अबूझ मुहूर्त होता है अर्थात इस दिन अक्षय तृतीया के समान ही आप बिना मुहूर्त और पंचांग देखे कोई भी शुभ कार्य कर सकते हैं। इसके अलावा इस दिन किसी भी चीज की खरीदारी, नए कारोबार की शुरुआत और गृह प्रवेश भी कर सकते हैं। सम्पूर्ण व्रत त्यौहार कथा पूजन विधि – https://amzn.to/3ypxbDf

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क्यों महत्वपूर्ण है भड़ली नवमी

Bhadli Navami Vrat

शास्त्रों में भड़ली नवमी को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है यह देवशयनी एकादशी से पूर्व अंतिम शुभ मुहूर्त होता है जिसमें बिना पंचांग देखे या पंडित की सलाह के सभी शुभ काम किए जा सकते हैं। इसके दो दिन बाद देवशयनी एकादशी से चार माह के लिए सभी शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है।

भड़ली नवमी पूजन विधि

Bhadli Navami Poojan Vidhi

  • यह पर्व पूर्णतः भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन श्रीहरि विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा होती है।
  • इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर, स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।
  • अब एक चौकी पर नया कपड़ा बिछाकर भगवान श्री विष्णु की प्रतिमा (Lord Vishu) स्थापित करें और विधिवत पूजन करें।
  • श्रीहरी विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय है इसलिए पूजन के समय उन्हें पीले रंग के पुष्प चढ़ाएं।
  • पूजन के उपरांत पीले रंग की मिठाई अथवा पीले फलों का भोग लगाएं।
  • इसके बाद विष्णु जी की पूजा करते समय धूप-दीप जलाएं और श्री विष्‍णु की कथा का वाचन करें।
  • पूजन के बाद सबसे आखिरी में भगवान विष्णु जी और लक्ष्मी जी की सपरिवार आरती करें।
  • गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा अवश्‍य करें और जल भी चढ़ाएं क्योंकि श्री विष्णु का निवास केले के वृक्ष में भी माना गया है।
  • भगवान् श्रीहरि विष्णु के नामों का अधिक से अधिक जाप करें और श्री विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करें।
Bhadli Navami Muhurat Poojan Vidhi aur Upay
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विवाह के लिए करें ये उपाय

Bhadli Navami Upay

  • इस दिन पुरुष को हीरा और महिला को पुखराज पहनना अति शुभ होता है किन्तु इसे पहनने के पूर्व किसी ज्योतिष की सलाह लें।
  • अगर आप अविवाहित हैं तो किसी लाल गाय को रोटी में गुड़ लपेटकर खिलाते रहें या केसर भात खिलाएं।
  • विवाह के लिए किसी भी गाय को गुरुवार को आटे के दो पेड़े पर थोड़ी हल्दी लगाकर खिलाएं तथा इसके साथ ही थोड़ा सा गुड़ और चने की पीली दाल भी खिलाएं।
  • विवाह योग्य लोगों को शीघ्र विवाह के लिये प्रत्येक गुरुवार को नहाने वाले पानी में एक चुटकी हल्दी डालकर स्नान करना चाहिए।
  • घर के दक्षिण भाग में नीम का पेड़ लगाकर उसमें प्रतिदिन जल चढ़ाएं और गुरुवार को पीपल के वृक्ष के नीचे शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
  • भोजन में केसर का सेवन करने से विवाह शीघ्र होने की संभावनाएं बनती है। साथ ही माथे पर प्रतिदिन केसर या चंदन का तिलक लगाएं, तुलसी की माला पहनें।

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भड़ली नवमी का महत्व

Bhadli Navami Mahatva

शास्त्रों में भड़ली नवमी का विशेष महत्त्व बताया गया है. इसका अक्षया तृतीया की तरह ही महत्व है, क्योंकि इस दिन भी अबूझ मुहर्त रहता है यानी पूरे दिन ही शुभ मुहूर्त रहता है। विवाह के लिए यह खास दिन माना गया है क्योंकि इस दिन बिना मुहूर्त देखें ही विवाह की रस्म संपन्न करवाई जा सकती है। इस दिन ही सभी शुभ कार्यों को संपन्न कर लिया जाता है क्योंकि देवशयनी एकादशी के बाद अगले चार महीनों तक कोई भी शुभ मुहूर्त मान्य नहीं होता है।

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