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आखिर क्यों ज्येष्ठ मास के हर मंगलवार को कहा जाता है बड़ा मंगल, जानिए इसका इतिहास, कथा और महत्व | Bada Mangal Vrat 2022

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हेल्लो दोस्तों हिन्दू मान्यताओं के अनुसार मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी का दिन होता हैं। कहते हैं इन दो दिन हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने से पुण्यफल प्राप्त होता है। साथ ही इस दिन सच्ची श्रद्धा और विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा-पाठ एवं मंत्र जाप करने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं। लेकिन क्या आप ज्येष्ठ मास में हर मंगलवार को पड़ने वाले बड़ा मंगल के बारे में जानते हैं। इस महीने में आने वाले सभी मंगलवार भक्तों के लिए भी बहुत खास माने गए हैं।

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क्यों मनाया जाता है बड़ा मंगल

Bada Mangal Kyo Manaya Jata Hai

ज्येष्ठ में आने वाले सभी मंगलवार भगवान हनुमान की पूजा के लिए विशेष माने जाते हैं। कहते हैं जो व्यक्ति सच्चे मन से श्री राम भक्त हनुमान की अराधना करता है उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। माना जाता है कि बुढ़वा मंगल हनुमान जी के बूढ़े रूप को समर्पित है.

  1. महाभारत काल में एक बार हजारों हाथियों के बल को धारण किए भीम को अपने शक्तिशाली होने पर बड़ा अभिमान और घमंड हो गया था। भीम के इस घमंड को तोड़ने के लिए रूद्र अवतार भगवान हनुमान ने एक बूढ़े बंदर का भेष धारण कर उनका घमंड चूर-चूर किया। जिस दिन ये वाक्या हुआ था उस दिन मंगलवार था। तब से इस दिन को बुढ़वा मंगल और बड़ा मंगल के नाम से जाना जाने लगा।
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Bada Mangal Vrat 2022

बड़ा मंगल कब होता है?

Kab Hai Bada Mangal

ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले मंगलो को बड़ा मंगल कहते है। जेठ माह आमतौर पर अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से मई जून में पड़ता है। इस समय गर्मी अपने प्रचंड रूप में होती है। इसी समय में शरीर को पानी की भी ज्यादा जरूरत होती है। लखनऊ में सैकड़ो वर्षों से बड़ा मंगल के अवसर पर हनुमान भक्तो के द्वारा भंडारा एवं प्याऊ लगाने की परंपरा रही है। मंदिरो को खूब सजाया जाता है। भक्तगण बजरंगबली को पूजा अर्चना कर प्रसाद वितरण का कार्य करते है। विशेष बात यह है कि इस परंपरा की शुरुआत लखनऊ से हुई और यह लखनऊ की पहचान बन गई है। पुराणों में उल्लेख है हनुमान जी ऐसे देव है जो अभी भी पृथ्वी पर जीवित स्वरुप में विद्यमान हैं। वे अपने आराध्य भगवान श्रीराम की आज्ञा का पालन करते हुए आज भी पृथ्वी पर अपने भक्तों का कल्याण कर उनके सारे दुःख दूर करते हैं।

कब-कब पड़ेंगे बड़े मंगल?

Bada Mangal Date

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार इस वर्ष ज्येष्ठ माह की शुरुआत 17 मई 2022 से होकर यह 14 जून 2022 तक समाप्त होगा। इस वर्ष ज्येष्ठ महीने की खास बात यह है कि इसका प्रारंभ और समापन दोनों मंगलवार के दिन होगा। पहले मंगलवार को नारद जयंती, जबकि अंतिम मंगल को पूर्णिमा पड़ रही है। यही नहीं इस बार बजरंगबली की स्तुति करने के लिए पांच बड़े मंगल भी मिलेंगे। अब भक्तगण शनिवारीय पूजन ज्येष्ठ माह में करने लगे हैं। ऐसे में 21, 28 मई के साथ ही 4 और 11 जून को शनिवारीय ज्येष्ठ माह के पूजन किए जा सकेंगे। तो आइये जानते हैं ज्येष्ठ महीने/ मास में कब-कब पड़ रहा है बुढ़वा मंगल?

  • पहला बड़ा मंगल – 17 मई 2022, मंगलवार
  • दूसरा बड़ा मंगल – 24 मई 2022, मंगलवार
  • तीसरा बड़ा मंगल – 31 मई 2022, मंगलवार
  • चौथा बड़ा मंगल – 07 जून 2022, मंगलवार
  • पांचवा बड़ा मंगल – 14 जून 2022 मंगलवार

यह भी पढ़ें – मंगलवार को करें यह आसान उपाय, होंगे सब कष्ट दूर

ऐसे की जाती है पूजा अर्चना

Bada Mangal Poojan Vidhi

  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही हनुमानजी, मंगल देव एवं शनिदेव की आराधना करनी चाहिए।
  • बुढ़वा मंगल के दिन श्रध्दालु भगवान हनुमान के लिए दिनभर व्रत रहकर पूजा-कथा करते हैं।
  • हनुमान जी की प्रतिमा पर लाल फूल चढ़ाएं। उन्हें लाल चंदन का टीका लगाएं। फिर हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • शाम के समय फिर से भगवान हनुमान की पूजा करें और हनुमान जी को प्रसाद चढ़ाकर व्रत का पारण कर लें।
  • इस दिन बजरंगबाण, सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ भी जरूर करना चाहिए। इससे जीवन में आ रही तमाम परेशानियां दूर होती है।
  • मंदिरों घरों में भजन-कीर्तन भी किया जाता है साथ ही इस दिन खिचड़ी चढ़ाने की भी विशेष परंपरा है।
  • पंडितों के अनुसार बुढ़वा मंगल के दिन जरूरतमंदों को किया गया दान-पुण्य अक्षय फल देता है।
  • इस दिन काले तिल, चावल, उरद की दाल, अदरक एवं मूली का दान करें और बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी अवश्य चढ़ाएं।
  • गोरखनाथ मंदिर के पुजारी के अनुसार बुढ़वा मंगल के दिन खिचड़ी चढ़ाना उतना ही पुण्यकारी होता है, जितना मकर संक्रांति के दिन।
  • इस दिन दूर-दूर से श्रद्धालु गोरखनाथ बाबा को खिचड़ी चढ़ाने आते हैं। ऐसे श्रद्धालु जो मकर संक्रांति के दिन बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी नहीं चढ़ा पाते, वे बुढ़वा मंगल का इंतजार करते हैं।

बड़ा मंगल मनाने का इतिहास

History Of Bada Mangal

बड़ा मंगल मनाने के पीछे का इतिहास बहुत पुराना है। कहते हैं कि बड़े मंगल का प्रारंभ 400 वर्ष पूर्व अवध के नवाब द्वारा किया गया था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बड़े मंगलवार के पर्व को हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्म के लोग मनाते हैं। इसके पीछे की कहानी यह है कि एक बार नवाब मोहम्मद अली शाह के पुत्र बहुत बीमार पड़ गए। तब उनकी बेगम ने अपने पुत्र का इलाज कई जगह करवाया परंतु कोई लाभ नहीं हुआ। इसके पश्चात लोगों ने बेगम को अपने पुत्र की कुशलता के लिए लखनऊ के अलीगंज में स्थित एक प्राचीन हनुमान मंदिर (इसका निर्माण नवाब सआदत अली खान ने 1798 में किया था) में जाने और वहां मन्नत मांगने की सलाह दी। इसके बाद अवध के नवाब मोहम्मद अली शाह की पत्नी रुबिया अपने पुत्र को लेकर मंदिर पहुंची।

इस मंदिर के बारे में लोगों के धारणा थी कि जो भी अस्वस्थ व्यक्ति यहां पहुंचता है, वह हनुमान जी की कृपा से स्वस्थ होकर ही घर लौटता है। जब रुबिया अपने पुत्र को लेकर अलीगंज के हनुमान मंदिर पहुंची, तो मंदिर के पुजारी ने रुबिया को अपने बेटे को मंदिर में ही छोड़ देने की बात कही। मंदिर के पुजारी के वचनानुसार, रुबिया ने अपने बेटे को मंदिर में ही छोड़ दिया और दरबार लौट आई। अगले दिन जब रुबिया मंदिर गई तो अपने पुत्र को स्वस्थ देखकर फूली नहीं समाई और हनुमान जी को प्रणाम कर पुजारी को शुक्रिया अदा किया।

इसके बाद नवाब सआदत अली खान और उनकी बेगम ने मिलकर उस हनुमान मंदिर की पूरी मरम्मत करवाई। मरम्मत कार्य के पूर्ण होने के बाद ज्येष्ठ महीने की तपती गर्मी में हर मंगलवार को शहर वासियों को पानी और गुड़ का वितरण करवाया गया साथ ही हर साल ज्येष्ठ महीने में पड़ने वाले पहले मंगल को बड़ा मंगल मनाने की घोषणा की। इसके बाद से ही वहां बड़ा मंगल मनाया जाने लगा।

Bada Mangal Vrat
Bada Mangal Vrat

पूजन करते समय ना करें ये काम

Bada Mangal Upay

  1. हनुमान जी की पूजन में कभी भी चरणामृत का प्रयोग (चरणामृत पीना) नहीं किया जाता है। इसलिए बड़े मंगलवार के दिन हनुमान की पूजा करते समय ऐसा भूलकर भी ना करें।
  2. इस दिन पूजन करने वाले भक्तों को नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही दान में दी गई वस्तु, विशेष रूप से मिठाई का सेवन भूलकर भी स्वयं न करें।
  3. बड़े मंगलवार पर हनुमान जी की पूजा करते समय काले या सफेद रंग के वस्त्रों को धारण ना करें। बजरंगबली की पूजा में हमेशा लाल और पीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है।
  4. बड़ा मंगल के दिन हनुमानजी की पूजा करते समय ब्रह्राचर्य व्रत का पालन विशेष रूप से किया जाना चाहिए
  5. इस दिन पूजा के दौरान स्त्रियों को हनुमान जी को स्पर्श नहीं करना चाहिए अर्थात् बड़ा मंगल के दिन पूजन करना वर्जित माना जाता है।
  6. बड़े मंगलवार पर खंडित और टूटी हुई मूर्ति की पूजा भूलवश भी नहीं करना चाहिए। इसके अलावा अगर घर या मंदिर में हनुमान जी की कोई तस्वीर फटी हुई है तो उसे भी हटा दें।
  7. बड़े मंगलवार के शुभ अवसर पर व्रती को भूलकर भी मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।
  8. बड़े मंगलवार पर दिन के वक्त सोने से परहेज करना चाहिए.
  9. यदि संभव हो तो बड़े मंगलवार के दिन में हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें। हनुमान चालीसा की चौपाइयों का जाप करने से व्यक्ति की बड़ी बड़ी समस्याएं ख़त्म हो जाती है और लाभ होता है।

बड़े मंगल का महत्व

Bada Mangal Mahatva

संकटमोचन बजरंगबली के भक्तों के लिए यूं तो हर मंगलवार का बड़ा महत्व होता है लेकिन ज्येष्ठ के महीने में पड़ने वाला बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल हर भक्त के लिए बेहद खास होता है। ज्येष्ठ माह के मंगलवार को हनुमानजी की पूजा-अर्चना करने से आरोग्य का वरदान प्राप्त होता है, साथ ही इस दिन कई मंदिरों में भंडारे भी करवाए जाते हैं। मान्यता है कि इस माह के मंगलवारों को जो भक्त बजरंगबली की पूजा और व्रत करता है, उसके जीवन की नकारात्मक दूर होने के साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और हर मनोकामना की पूर्ती होती है। इस दिन सुंदरकांड पाठ और बजरंग वाण करना बड़ा फलदायी माना गया है।

श्री हनुमान आरती

Shri Hanuman Aarti

॥ आरती ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

जाके बल से गिरवर काँपे ।
रोग-दोष जाके निकट न झाँके ॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई ।
संतन के प्रभु सदा सहाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

दे वीरा रघुनाथ पठाए ।
लंका जारि सिया सुधि लाये ॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई ।
जात पवनसुत बार न लाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

लंका जारि असुर संहारे ।
सियाराम जी के काज सँवारे ॥
लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे ।
लाये संजिवन प्राण उबारे ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

पैठि पताल तोरि जमकारे ।
अहिरावण की भुजा उखारे ॥
बाईं भुजा असुर दल मारे ।
दाहिने भुजा संतजन तारे ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

सुर-नर-मुनि जन आरती उतरें ।
जय जय जय हनुमान उचारें ॥
कंचन थार कपूर लौ छाई ।
आरती करत अंजना माई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

जो हनुमानजी की आरती गावे ।
बसहिं बैकुंठ परम पद पावे ॥
लंक विध्वंस किये रघुराई ।
तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥

॥ श्री हनुमंत स्तुति ॥
मनोजवं मारुत तुल्यवेगं,
जितेन्द्रियं, बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥
वातात्मजं वानरयुथ मुख्यं,
श्रीरामदुतं शरणम प्रपद्धे ॥

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