बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति लाते हैं सौभाग्य, जानिए पूजन में क्या करें और क्या ना करें

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हेल्लो दोस्तों इस साल कोरोना वायरस के कारण गणेश उत्सव थोडा फीका ही चल रहा है इसकी वजह भी सही ही है जो सरकार ने अपनी गाइडलाइन के माध्यम से सब लोगों को बताई है इस वायरस के कारण देश में लाखों लोगों की जान तक जा रही है इसके बावजूद भी जगह जगह गणपति के बड़े बड़े पंडाल बनाये गए हैं। गणपति का यह महोत्सव अत्यंत ख़ास है, कई जगहों पर इसे बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। Avoid These On Ganesh Chaturthi

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इस साल गणेशोत्सव 22 अगस्त से 1 सितंबर तक मनाया जाएगा. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार गणेश चतुर्थी से अगले 10 दिनों तक भगवान गणेश अपने भक्तों के बीच ही रहते हैं. गणपति के जन्मदिवस पर के रूप में मनाई जाने वाली गणेश चतुर्थी पर कई बातों का ध्यान रखना जरूरी है. गणपति जी की सेवा में कोई भूलचूक न हो इसके लिए हम आपको बतायंगे की गणपति की पूजा में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए-

Avoid These On Ganesh Chaturthi
Avoid These On Ganesh Chaturthi

क्या करना चाहिए? :

  • गणेश जी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है, इसलिए गणपति को रोली लगाकर दूर्वा अर्पित करनी चाहिए। यह दूर्वा उनके शीश पर रखनी चाहिए न कि चरणों में।
  • गणपति पूजा में शंख जरूर बजाए, क्योंकि गणेश जी को शंख की ध्वनि अत्यंत प्रिय है। वैसे भी किसी भी पूजा में शंख ज़रूर बजायी जाती है। यह उस स्थान से नकारात्मकता को दूर करता है।
  • गणेश भगवान को भोग के लिए मोदक अवश्य चढाने चाहिए, और साथ में केले और अन्य मिष्ठान भी चढ़ानी चाहिए। पूजा के अंत में सबको यह प्रसाद के रूप में बांटना चाहिए।

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क्या नहीं करना चाहिए? :

  • गणेश चतुर्थी तिथि को चन्द्रमा के दर्शन वर्जित हैं, क्योकि इस दिन चन्द्रमा का दर्शन करने से कलंक लगने की सम्भावना होती है। यदि आप भूलवश चंद्रमा का दर्शन कर भी लें तो जमीन से एक पत्थर का टुकड़ा उठाकर पीछे की तरफ फेंक दें.
  • गणेश जी की पीठ का दर्शन कभी नहीं करना चाहिए, कहा जाता है की उनकी पीठ पर दुःख तथा दरित्रता का वास होता है। जो पीठ का दर्शन का दर्शन करता है दरिद्रता उसके पीछे आ जाती है। किन्तु फिर भी जाने अनजाने पीठ के दर्शन हो जाएँ तो गणेश जी से क्षमा प्रार्थना करनी चाहिए।
  • गणपति की पूजा करते वक्त कभी तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाने चाहिए. मान्यता है कि तुलसी ने भगवान गणेश को लम्बोदर और गजमुख कहकर शादी का प्रस्ताव दिया था. गणेश भगवान ने नाराज होकर उन्हें श्राप दिया था. इसलिए तुलसी सभी देवताओं को भले ही चढ़ती हो किन्तु गणेश जी को नहीं चढ़ाई जाती।
  • गणेश जी को मूर्ति को घर पर खुला नहीं लाया जाता बल्कि उनको ढक कर ही घर में लाया जाता है। तथा द्वार पर स्वागत करने के बाद जहाँ उनको स्थापित करना है वह पर रख कर कपडा हटाया जाता है।
Avoid These On Ganesh Chaturthi
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  • गणेश चतुर्थी की पूजा में किसी भी व्यक्ति को नीले और काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए. ऐसे में लाल और पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ होता है.
  • गणपति की पूजा में नई मूर्ति का इस्तेमाल करें. पुरानी मूर्ति को विसर्जित कर दें. घर में गणेश की दो मूर्तियां भी नहीं रखनी चाहिए.
  • भगवान गणेश की मूर्ति के पास अगर अंधेरा हो तो ऐसे में उनके दर्शन नहीं करने चाहिए. अंधेरे में भगवान की मूर्ति के दर्शन करना अशुभ माना जाता है.

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किस दिशा में हो उनकी सूंड :

सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की शक्तियां गणेश जी के शरीर में ही विद्यमान है। जैसे – गणपति की सूंड पर धर्म विद्यमान है तथा कर्ण में ऋचाएं, दाएं हस्त वर, बाएं हस्त अन्न, नैनो में लक्ष्य, चरणों में सात लोक, कपाल में समृद्धि, नाभी में ब्रह्मांड और मस्तक में ब्रह्मलोक विद्यमान है।

सुख और समृद्धि विघ्नहर्ता गणपति के दर्शन मात्र से आ जाती है। ​अक्सर श्री गणेश की प्रतिमा स्थापना से पूर्व सवाल सामने आता है कि श्री गणेश की कौन सी सूंड होनी चाहिए यानी किस तरफ सूंड वाले श्री गणेश पूजनीय हैं? आइए जानें …..

Avoid These On Ganesh Chaturthi
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दाईं सूंड :

जिस मूर्ति में सूंड के अग्रभाव का मोड़ दाईं ओर हो, उसे दक्षिण मूर्ति या दक्षिणाभिमुखी मूर्ति कहते हैं। यहां दक्षिण का अर्थ है दक्षिण दिशा या दाईं बाजू। दक्षिण दिशा यमलोक की ओर ले जाने वाली व दाईं बाजू सूर्य नाड़ी की है। जो यमलोक की दिशा का सामना कर सकता है, वह शक्तिशाली होता है व जिसकी सूर्य नाड़ी कार्यरत है, वह तेजस्वी भी होता है।

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बाईं सूंड :

जिस मूर्ति में सूंड के अग्रभाव का मोड़ बाईं ओर हो, उसे वाममुखी कहते हैं। वाम यानी बाईं ओर या उत्तर दिशा। बाई ओर चंद्र नाड़ी होती है। यह शीतलता प्रदान करती है एवं उत्तर दिशा अध्यात्म के लिए पूरक है, आनंददायक है।

इसलिए पूजा में अधिकतर वाममुखी गणपति की मूर्ति रखी जाती है। इसकी पूजा प्रायिक पद्धति से की जाती है। इन गणेश जी को गृहस्थ जीवन के लिए शुभ माना गया है। इन्हें विशेष विधि विधान की जरुरत नहीं लगती। यह शीघ्र प्रसन्न होते हैं। थोड़े में ही संतुष्ट हो जाते हैं। त्रुटियों पर क्षमा करते हैं।

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