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हेल्लो दोस्तों नवरात्रि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. हिंदू पंचांग के अनुसार साल में 4 बार नवरात्रि पर्व मनाने की परंपरा है। जो क्रमशः पौष, चैत्र, आषाढ़ और आश्विन में पड़ती है, इनमें से दो गुप्त नवरात्रि (Gupt Navratri Kab Aate Hain) कहलाती है। पहली नवरात्रि चैत्र मास में आती है जो प्रकट नवरात्रि कहलाती है, इसका आरंभ गुड़ी पड़वा से होता है और इसी दिन से हिंदू नवर्ष की शुरूआत भी होती है।

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दूसरी नवरात्रि आषाढ़ मास में आती है जो गुप्त नवरात्रि कहलाती है। तीसरी नवरात्रि आश्विन मास में आती है, जिसमें गरबा आदि के माध्यम से देवी मां की आराधना की जाती है। साल की अंतिम नवरात्रि माघ मास में आती है, ये भी गुप्त नवरात्रि कहलाती है। गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है।

आषाढ़ का महीना हिंदू कैलेंडर का चौथा महीना होता है। इसकी शुरुआत 15 जून, बुधवार से शुरू हो चुकी है, जो 13 जुलाई, बुधवार तक रहेगा। गुप्त नवरात्रि के दौरान मां काली, मां तारा, त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां भैरवी, मां छिन्नमस्ता, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला की पूजा की जाती है।

आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि 30 जून से शुरू होकर 9 जुलाई तक रहेगी। इस बार तिथि क्षय व अधिक न होने से गुप्त नवरात्रि पूरे 9 दिन की ही रहेगी। गुप्त नवरात्रियों में साधू संन्यासी, अघोरी और तांत्रिक ध्यान और साधना करके दिव्य शक्तियां प्राप्त करते हैं। इसमें माता रानी की गुप्त तरीके से पूजा करने का विधान है।

Ashadha Gupt Navratri Vrat
Ashadha Gupt Navratri Vrat

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि शुभ मुहूर्त

Ashadha Gupt Navratri Shubh Muhurt

  • गुप्त नवरात्रि तिथि (उदयातिथि होने के कारण) – 30 जून 2022, दिन गुरुवार
  • गुप्त नवरात्रि प्रतिपदा तिथि प्रारंभ – 29 जून 2022, बुधवार को सुबह 8 बजकर 21 मिनट से
  • गुप्त नवरात्रि प्रतिपदा तिथि समाप्त – 30 जून 2022, गुरुवार सुबह 10 बजकर 49 मिनट तक
  • घट स्थापना का शुभ मुहूर्त – 30 जून 2022, गुरुवार को सुबह 05 बजकर 26 मिनट से 06 बजकर 43 मिनट तक
  • अभिजित मुहूर्त – 30 जून 2022, गुरुवार को सुबह 11 बजकर 57 से 12 बजकर 53 मिनट तक।

गुप्त नवरात्रि क्या है

What Is Gupt Navratri

यह नवरात्रि चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्री से कई मायनों में अलग है। वैसे तो इस नवरात्रि साधक गुप्त साधना कर सकते हैं, लेकिन इस नवरात्रि की साधना संत और साधु समाज खास तौर पर करता है। इस दिन अघोरी और तांत्रिक समाज 9 दिन तक तंत्र शक्ति को जागृत करने के लिए देवी की 10 महाविद्याओं का आह्वान करते हैं। इस नवरात्रि में मां काली के रुपों की पूजा का विधान है। जबकि शारदीय और चैत नवरात्रि में मां दुर्गा के रुप की पूजा की जाती है। इसे गृहस्थ वर्ग भी धूमधाम से करते हैं।

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आखिर क्यों खास है गुप्त नवरात्रि

आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि में तंत्र-मंत्र से देवी की उपासना की जाती है। यह समय शाक्त (महाकाली की पूजा करने वाले) एवं शैव (भगवान शिव की पूजा करने वाले) के लिए विशेष होता है। गुप्त नवरात्रि में संहार करने वाले देवी-देवताओं के गणों एवं गणिकाओं अर्थात भूत-प्रेत, पिशाच, बैताल, डाकिनी, शाकिनी, खण्डगी, शूलनी, शववाहनी, शवरूढ़ा आदि की साधना की जाती है। इसके साथ ही पंच मकार (मद्य (शराब), मछली, मुद्रा, मैथुन, मांस) की साधना भी इसी नवरात्रि में की जाती है।

क्यों मनाते हैं गुप्त नवरात्रि

Gupt Navratri Kyo Manate Hain

तंत्र साधना के लिए गुप्त नवरात्रि अति महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। हिन्दू मान्यता के अनुसार जिस समयावधि में भगवान विष्णु का शयनकाल होता है। उस समयावधि में देवताओं की शक्तियां कमजोर होने लगती हैं और पृथ्वी पर यम, वरुण आदि का प्रकोप बढ़ने लग जाता है। तब पृथ्वी पर रहने वाले मनुष्यों की विपदाओं और विपत्तियों से रक्षा के लिए गुप्त नवरात्रि में आदि शक्ति माँ दुर्गा की पूजा अर्चना की जाती है। गुप्त नवरात्रि के दिनों में माँ दुर्गा पूजा अर्चना करने से बड़ा पुण्य प्राप्त होता है।

कुछ साधक विशेष गुप्त सिद्धियाँ और शक्ति को पाने के लिए गुप्त नवरात्रि में तंत्र साधना करते हैं। वो देवी माँ को प्रसन्न करने के लिए समस्त प्रकार से प्रयास करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती पाठ, दुर्गा सहस्त्रनाम और दुर्गा चालीसा का पाठ शुभ फलदायी होता है। गुप्त नवरात्रि का अनुष्ठान संतान प्राप्ति और शत्रु पर विजय दिलाने वाला है।

Ashadha Gupt Navratri Vrat
Ashadha Gupt Navratri Vrat

इन देवियों की पूजा होती है

Gupt Navratri Me Kiski Pooja Hoti Hai

पुराणों के अनुसार गुप्त नवरात्रि में भगवान शिव और माँ काली की पूजा करने का विधान है। गुप्त नवरात्रि में 10 देवियों की पूजा की जाती है। उनमें माँ काली, भुवनेश्वरी माता, त्रिपुर सुंदरी, छिन्न माता, बगलामुखी देवी, कमला देवी, त्रिपुर भैरवी माता, तारा देवी, धूमावती माँ, और मातंगी देवी हैं।

गुप्त नवरात्रि की तिथियां

Ashadha Gupt Navratri Dates

  • 30 जून, गुरुवार- प्रतिपदा तिथि – घटस्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा
  • 01 जुलाई, शुक्रवार- द्वितिया तिथि – मां ब्रह्मचारिणी पूजा
  • 02 जुलाई, शनिवार- तृतीया तिथि – मां चंद्रघंटा की पूजा
  • 03 जुलाई, रविवार- चतुर्थी तिथि – मां कूष्मांडा की पूजा
  • 04 जुलाई, सोमवार- पंचमी तिथि – मां स्कंदमाता की पूजा
  • 05 जुलाई, मंगलवार- षष्ठी तिथि – मां कात्यायनी की पूजा
  • 06 जुलाई, बुधवार- सप्तमी तिथि – मां कालरात्रि की पूजा
  • 07 जुलाई, गुरुवार- अष्टमी तिथि – मां महागौरी की पूजा
  • 08 जुलाई, शुक्रवार- नवमी तिथि – मां सिद्धिदात्री की पूजा
  • 09 जुलाई, शनिवार- दशमी तिथि – नवरात्रि का हवन और पारण

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गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि

Gupt Navratri Poojan Vidhi

  • गुप्त नवरात्रि के दिन सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होने के बाद विधिवत घट स्थापना करें।
  • इसके बाद नौ दिन के व्रत का संकल्प लेकर मां दुर्गा की पूजा की जाती है।
  • इसके लिए एक चौकी पर माता की मूर्ति स्थापित करें और लाल रंग का सिंदूर और लाल रंग की चुनरी के साथ शृंगार का सामान अर्पित करें।
  • दोनों समय (सुबह और शाम) की पूजा में मां दुर्गा को बताशे का भोग लगाया जाता है।
  • इसके बाद लाल रंग का पुष्प और शृंगार का सामान चढ़ाएं।
  • गलती से भी देवी माँ को तुलसी, आक, मदार और दूब अर्पित ना करें।
  • दोनों वक्त (सुबह और शाम) की पूजा में दुर्गा सप्तशती का पाठ जरुर करें।
  • सरसों के तेल का दीपक जलाकर माता के मंत्रों का जाप करें।
  • माता की उपासना के दौरान ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ मंत्र का जाप किया जाता है।
  • इस दिन किसी विशेष कामना पूर्ति के लिए आधी रात में मां दुर्गा के विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।
  • आर्थिक समृद्धि व सुख,‌ यश और वैभव की प्राप्ति के लिए गुप्त नवरात्रि में सुबह के समय मां दुर्गा को सफेद फूल और शाम के समय लाल फूल पूजा के दौरान अर्पित करें।
  • सुबह और शाम की पूजा में इस मंत्र का जाप ‘ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ज्वल हं सं लं फट् स्वाहा’ 108 बार करने से साधक की इच्छा पूर्ण होती है।
  • अंत में आरती के बाद सबको प्रसाद बाँटें और खुद भी खाएं।

गुप्त नवरात्रि के साधक मंत्र

Gupt Navratri Mantra

  • ॐ हृीं श्रीं क्रीं परमेश्वरि कालिके स्वाहा।।
  • ऊँ हृीं स्त्रीं हुम फट्‌ ।।
  • ऐं हृीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः ।।
  • हृीं भुवनेश्वरीयै हृीं नमः ।।
  • श्रीं हृीं ऐं वज्र वैरोचानियै हृीं फट स्वाहा।।
  • ऊँ धूं धूं धूमावती देव्यै स्वाहाः।।
  • ऊँ हृीं बगुलामुखी देव्यै हृीं ओम नमः।।
  • ऊँ ह्नीं ऐ भगवती मतंगेश्वरी श्रीं स्वाहा ।।
  • ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमः।।
Ashadha Gupt Navratri Vrat
Ashadha Gupt Navratri Vrat

गुप्त नवरात्रि की कथा

Gupt Navratri Ki Katha

पौराणिक कथा के अनुसार एक समय श्रृंगी ऋषि के पास उनके भक्त अपनी समस्याएं और पीडाएं लेकर आए और श्रृंगी ऋषि उनसे मिलकर उनके कष्ट सुन रहे थे। उसी समय एक औरत भीड़ से निकलकर सामने आकर रोने लगी। श्रृंगी ऋषि ने उस महिला से उसके दुःख का कारण पूछा तो उसने कहा – हे ऋषिवर ! मेरा पति दुर्वसनों में लिप्त है। वो मांसाहार करता है, जुआ खेलता है, कभी पूजा-पाठ नहीं करता और ना ही मुझे करने देता है। परंतु मैं माँ दुर्गा की भक्त हूँ और मैं उनकी भक्ति करना चाहती हूँ जिससे मेरे और मेरे परिवार के जीवन में खुशियाँ आएं।

उस औरत के भक्तियुक्त वचन सुनकर श्रृंगी ऋषि अत्यंत प्रभावित हुए और उससे बोले – हे देवी ! मैं तुम्हारे दुखों को दूर करने का उपाय बताता हूँ, तुम ध्यान से सुनो। एक वर्ष में चार नवरात्रि आती हैं उसमें दो प्रकट (सामान्य) नवरात्रि होती हैं, चैत्र और शारदीय नवरात्रि जिसके विषय में सब जानते हैं परंतु इसके अतिरिक्त वर्ष में दो और नवरात्रि आती हैं उन्हें ‘गुप्त नवरात्रि’ कहते हैं। ये नवरात्रि आषाढ़ मास और माघ मास के शुक्ल पक्ष में आती है।

प्रकट (सामान्य) नवरात्रि में देवी माँ के नौ रूपों की पूजा- साधना होती है, परंतु गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की साधना की जाती है। जो भी कोई मनुष्य भक्तियुक्त चित्त से गुप्त नवरात्रि में माँ दुर्गा की उपासना करता है। माँ दुर्गा उसके जीवन के सभी दुखों को नष्ट कर देती है और उसके जीवन को सफल कर देती है। अगर कोई लोभी, मांसाहारी और पाठ-पूजा न करने वाला मनुष्य भी गुप्त नवरात्रि में माँ दुर्गा की उपासना करें तो माँ उसके जीवन को खुशियों से भर देती है और उसे मनोवांछित फल प्रदान करती है।

श्रृंगी ऋषि बोले परंतु इस बात का अवश्य ध्यान रखना कि गुप्त नवरात्रि की पूजा का प्रचार प्रसार न करें। श्रृंगी ऋषि से ऐसी बातें सुन वो स्त्री अतिप्रसन्न हुई। उसने श्रृंगी ऋषि के कथनानुसार पूर्ण भक्ति-भाव से गुप्त नवरात्रि में माँ दुर्गा की उपासना की, जिससे उसके जीवन के सभी दुखों का नाश हो गया और वो अपने पति के साथ सुख से जीवन बिताने लगी।

गुप्त व सामान्य नवरात्र में अंतर

Navratri And Gupt Navratri Difference

  • सामान्य नवरात्रों में माता रानी की पूजा सबको बताकर पूरे हर्षोउल्लास के साथ की जाती हैं जबकि गुप्त नवरात्र में माता रानी की पूजा को गुप्त रखना होता हैं। पूजा को जितना ज्यादा गुप्त रखा जायेगा उतना ही फल अधिक मिलता है।
  • सामान्य नवरात्र में माता रानी के लिए सात्विक व तांत्रिक दोनों पूजा की जा सकती हैं जबकि गुप्त नवरात्र में मुख्यतया तांत्रिक पूजा करके माता रानी की महाविद्या प्राप्त की जाती है।
  • सामान्य नवरात्र में जहाँ कन्या जिमाने का प्रावधान हैं वहीँ गुप्त नवरात्र में ऐसा कुछ नही किया जाता है।
  • गुप्त नवरात्रों में आपको इस बात का पूर्णतया ध्यान रखना है कि इसका ज्यादा प्रचार-प्रसार ना किया जाये व गोपनीय तरीके से ही माता की पूजा अर्चना की जाये तभी आपको मनचाहा फल मिलेगा।

गुप्त नवरात्र में क्या करें

Gupt Navratri Me Kya Karein

  • आपको ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ेगा।
  • सोने का बिस्तर नीचे जमीन पर लगाएं।
  • एक टाइम भोजन करें।
  • आप किसी भी मंत्र का जाप कर सकते हैं।
  • तामसिक भोजन ना करें।
Gupt Navratri Vrat
Ashadha Gupt Navratri Vrat

नवरात्रि में आजमाएं ये टोटके

Gupt Navratri Ke Upay (Totke)

  • आषाढ़ में गुप्त नवरात्रि के दौरान रोज सुबह और शाम की पूजा के समय ‘ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ज्वल हं सं लं फट् स्वाहा’ मंत्र का 108 बार जाप करें, इससे साधक की हर मनोकामना पूर्ण होती है।
  • गुप्त नवरात्रि पर कच्चे सूत को हल्दी से रंगकर पीला करके, इसे मां लक्ष्मी को समर्पित करके गले में धारण करें। इससे बिजनेस में धन लाभ का योग बनता है।
  • सुबह मां दुर्गा की पूजा करते वक्त माता को लाल फूल चढ़ाएं और उनके सामने सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें। इससे साधक को कर्ज से मुक्ति मिलती है।
  • गुप्त नवरात्रि के दौरान लाल आसन पर बैठकर माता की उपासना करें। लाल कपड़े में 9 लौंग रखकर पूरे नौ दिन माता को चढ़ाएं। नवरात्रि समाप्त होने के बाद सारे लौंग लाल कपड़े में बांधकर अलमारी में रख लें। इससे धन की समस्या दूर हो जाती है।
  • कुंडली में ग्रहों की अशुभ दशा की वजह से आपके जीवन में बहुत सी समस्‍याएं चल रही हैं तो गुप्‍त नवरात्र में आपको ग्रह शांति यज्ञ करवाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि गुप्‍त नवरात्र में की गई पूजा कुंडली में अशुभ ग्रहों के प्रभाव को कम करती है।

गुप्त नवरात्रि का महत्व

Gupt Navratri Mahatv

गुप्त नवरात्रि कामनापूर्ति और सिद्धि प्राप्ति के लिए विशेष माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि गुप्त नवरात्रों के साधनाकाल में मां शक्ति का जप, तप, ध्यान करने से माता जीवन में आ रही सभी बाधाओं को नष्ट कर देती हैं। इस दौरान साधक तंत्र, मंत्र और विशेष पाठ गुप्त रूप से करते हैं, तभी उनकी कामना फलीभूत होती है। शास्त्रों में गुप्त नवरात्रों का बड़ा ही महत्त्व बताया गया है। मानव के समस्त रोग-दोष व कष्टों के निवारण के लिए गुप्त नवरात्र से बढ़कर कोई साधना नहीं हैं। गुप्त नवरात्रियों में साधू संन्यासी, अघोरी और तांत्रिक ध्यान और साधना करके दिव्य शक्तियां प्राप्त करते हैं।

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