99% लोग नही जानते हिन्दू धर्म में अगरबत्ती जलाना क्यों है मना, जानिए वजह

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हेल्लो दोस्तों हमारे हिन्दू धर्म में प्रत्येक घरों में पूजा के दौरान धूपबत्‍ती या अगरबत्ती जरुर जलाई जाती है इनके बिना कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है। एक शोध में पता चला है कि अगरबत्ती एवं धूपबत्ती के धुएं में पाए जाने वाले पॉलीएरोमैटिक हाइड्रोकार्बन की वजह से पुजारियों में अस्थमा, कैंसर, सरदर्द एवं खांसी की गुंजाइश कई गुना ज्यादा पाई गई है। Agarbatti Jalane Ke Nuksan

खुशबूदार अगरबत्‍ती को घर के अंदर जलाने से वायु प्रदूषण होता है विशेष रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड। अगर आप नियमित पूजा करती हैं और अगरबत्‍ती जलाती हैं तो अच्‍छा होगा कि अगरबत्‍तियों की मात्रा में कमी कर दें या फिर केवल घी का दिया ही जलाएं। बंद कमरे में अगरबत्ती दीपक जलाएं।

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क्यों मना है अगरबत्ती जलाना :

हमारे हिन्दू धर्म में शास्त्रों के अनुसार किसी भी शुभ कार्य में बांस का प्रयोग नही करते यहाँ तक की दाह संस्कार में भी बांस नहीं जलाते। फिर बांस से बनी अगरबत्ती जलाकर हम भगवान को कैसे प्रसन्न कर सकते हैं? शास्त्रों में बांस की लकड़ी जलाना मना है| अगरबत्ती रसायन पदार्थों से बनाई जाती है, भला केमिकल या बांस जलने से भगवान खुश कैसे होंगे?

पुरानी मान्यता हैं कि ‘बांस को जलाने से वंश जलता है।’ धूप सकारात्मकता से युक्त होती है, ऊर्जा का सृजन करती है, जिससे स्थान पवित्र हो जाता है और हमारे मन को शांति मिलती है। इनसे नकारात्मक ऊर्जा से युक्त वायु शुद्ध हो जाती है इसलिए प्रतिदिन धूप जलाना अति उत्तम और बहुत ही शुभ माना गया है।

Agarbatti Jalane Ke Nuksan
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ये है वैज्ञानिक तथ्य :

हमारे शास्त्रों ने या हमारे महापुरुषों ने जो भी महत्वपूर्ण बातें कही हैं, उसके पीछे अवश्य ही कोई न कोई वैज्ञानिक तथ्य छुपा होता है। अब यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुका है कि बांस जलाने पर जो धुंआ होता है, वह धुंआ फेफड़ों से होकर जब खून में मिलता है, तो वह ऐसे तत्व छोड़ता है जो हमारी प्रजनन क्षमता को कम करता है। यानी आदमी को नपुंसकता की ओर धकेलता है, अर्थात नामर्दी का कारण बनता है|

यदि हम अगरबत्ती जलाते हैं तो ‘बांस’ भी जलता है और बांस को जलाना अर्थात अपना वंश जलाना! बाँस को जलाना उचित नहीं माना जाता है,यहाँ तक कि जब हमारे हिंदू धर्म में विवाह में भी बाँस का सामान बेटी के विवाह में दिया जाता है जिसका अर्थ होता है -बांस अर्थात वंश जिससे बेटी जिस घर में जाए उस घर का वंश बढता रहे|

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लोग देवी देवताओ को प्रसन्न करने बांस की लकडियों से बनी अगरबत्ती का उपयोग करते है जो की अच्छा नही है इसके बजाय गाय के गोबर में गूगल, घी, चन्दन, कपूर आदि मिलाकर छोटी गोलियाँ बना कर सूखा कर उन्हें जलाना चाहिये इससे वातावरण शुद्ध होता है और शास्त्रों में भी बांस की लकड़ी को अनुचित बताया गया है|

अगरबत्ती के कारण होने वाले दुष्प्रभाव :

कफ़ और छीकनें की समस्या बढ़ती है-

हाल ही के एक अध्ययन के अनुसार अगरबत्तियों से स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है। परिणामों से सिद्ध हुआ है कि घर के अंदर अगरबत्ती जलाने से वायु प्रदूषण होता है विशेष रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड जिसके कारण फेफड़ों की कोशिकाओं में सूजन आ सकती है और श्वसन से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। जब श्वास के साथ आवश्यकता से अधिक मात्रा में धुंआ शरीर के अंदर चला जाता है तो अधिकाँश लोगों को अतिसंवेदनशीलता के कारण कफ़ और छीकनें की समस्या हो जाती है।

Agarbatti Jalane Ke Nuksan
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आंखों और त्वचा की एलर्जी –

यह एक सत्य बात है कि लंबे समय तक अगरबत्तियों का उपयोग करने से आँखों में विशेष रूप से बच्चों तथा वृद्ध व्यक्तियों की आँखों में जलन होती है। इसके अलावा संवेदनशील त्वचा वाले लोग भी जब नियमित तौर पर अगरबत्ती के जलने से निकलने वाले धुएं के संपर्क में आते हैं तो उन्हें भी त्वचा पर खुजली महसूस होती है

यह तंत्रिका से संबंधित लक्षण सक्रिय करती है नियमित तौर पर अगरबत्ती का उपयोग करने से जो समस्याएं आती हैं उनमें सिरदर्द, ध्यान केंद्रित करने में समस्या होना और विस्मृति आदि शामिल है। रक्त में जानलेवा गैसों की मात्रा बढ़ने से मस्तिष्क की कोशिकाओं को प्रभावित करती हैं जिसके कारण तंत्रिका से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।

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अस्थमा का ख़तरा-

इन अगरबत्तियों में सल्फ़र डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन और फॉर्मल्डेहाईड (कण तथा गैस के रूप में) होते हैं जिनके कारण नियमित रूप से इसके संपर्क में रहने पर श्वसन से संबंधित बीमारियाँ जैसे COPD और अस्थमा हो सकती हैं। इस समय श्वसन के माध्यम से जो धुंआ फेफड़ों में जाता है वह धूम्रपान के समय फेफड़ों में जाने वाले धुएं के समान होता है।

श्वसन कैंसर हो सकता है –

क्या आपने कभी सोचा है कि अगरबत्ती का उपयोग करने से श्वसन मार्ग का कैंसर हो सकता है? लंबे समय तक अगरबत्ती का उपयोग करने से ऊपरी श्वास नलिका का कैंसर होने का ख़तरा बढ़ जाता है। यह भी साबित हुआ है कि अगरबत्ती का उपयोग करने साथ साथ, धूम्रपान करने वालों में भी ऊपरी श्वास नलिका के कैंसर की संभावना सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होती है।

Agarbatti Jalane Ke Nuksan
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शरीर में विषाक्त पदार्थों को जमा करती है-

अध्ययनों से पता चला है कि जब अगरबत्ती को जलाया जाता है तो विषाक्त धुंआ निकलता है जिसमें लेड(सीसा), आयरन और मैग्नीशियम होता है जिसके कारण शरीर में विषाक्त पदार्थों की मात्रा बढ़ती है। अगरबत्ती लगाने से जो धुंआ निकलता है उसके कारण रक्त में अशुद्धियों की मात्रा बढ़ जाती है।

दिल को नुकसान पहुंचाती है-

लम्बे समय तक अगरबत्तियों का उपयोग करने से हृदय रोग से होने वाली मृत्यु की दर 10% से 12% तक बढ़ जाती है। इसका मुख्य कारण अगरबत्ती जलाने पर श्वसन के द्वारा अंदर जाने वाला धुंआ है (जिसमें वाष्पशील कार्बनिक यौगिक और कणिका तत्व होते हैं)। इससे रक्त वाहिकाओं की सूजन बढ़ जाती है तथा रक्त प्रवाह प्रभावित होता है जिसके कारण हृदय से संबंधित समस्याएं बढ़ जाती हैं।

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अतः हमारा सभी हिन्दू भक्तो से आग्रह है कि पूजा पाठ में धुप बत्ती का प्रयोग करे अगरबत्ती न जलाये || सभी हिन्दुओ को इस बात से अवगत कराएं कि सनातन धर्म जो बॉस या बॉस से बनी अगरबत्ती जलाते है, वे अपने वंश का नाश करते है ||उन्हें पूजा पाठ का फल भी नही मिलता।पितृदोष/पितरदोष में बढ़ोत्तरी होती हैं |

अस्वीकरण : आकृति.इन साइट पर उपलब्ध सभी जानकारी और लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए हैं। यहाँ पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए। चिकित्सा परीक्षण और उपचार के लिए हमेशा एक योग्य चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।

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