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भारतीय महिला बॉक्सर निकहत जरीन (Boxer Nikhat Zareen) ने गुरुवार को इतिहास रच दिया. उन्होंने वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियनशिप (World Boxing Championship) में गोल्ड मेडल जीता है. 52 किग्रा. कैटेगरी में निकहत ने थाईलैंड की जिटपॉन्ग जुटामस को 5-0 से करारी शिकस्त दी.

फाइट के दौरान निकहत जरीन ने दबदबा बनाकर रखा। उन्होंने अपने बाउट की शुरुआत विरोधी बॉक्सर जिटपोंग को राइड हैंड से जैब मारते हुए की। बता दें कि भारत की इस मुक्केबाज बेटी ने पहली बार विश्व चैंपियनशि‍प में सोना अपने नाम किया है। इस जीत के साथ निकहत जरीन ऐसी पहली भारतीय महिला मुक्केबाज भी बन गई हैं, जिन्होंने इस चैंपियनशिप के मौजूदा संस्करण में स्वर्ण पदक जीता है। बता दें कि निकहत पूर्व जूनियर विश्व चैंपियन भी हैं।

25 साल की निकहत जरीन 5वीं भारतीय महिला बॉक्सर हैं, जिन्होंने वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में गोल्ड मेडल अपने नाम किया है. बॉक्सिंग लीजेंड मैरीकॉम ने इस चैम्पियनशिप में 6 बार गोल्ड जीतकर रिकॉर्ड बनाया है. इस चैम्पियनशिप में मैरीकॉम, निखत के अलावा सरिता देवी, जेनी आरएल और लेखा सी.भी गोल्ड जीत चुकी हैं.

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व्यक्तिगत जीवन (Nikhat Zareen family)

निकहत का जन्म 14 जून 1996 को तेलंगाना के निजामाबाद में हुआ था. उनके पिता मुहम्मद जमील अहमद और माता परवीन सुल्ताना हैं. उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा निर्मला ह्रदया गर्ल्स हाई स्कूल निज़ामाबाद से की, फ़िलहाल ज़रीन हैदराबाद के एवी कॉलेज से स्नातक (BA) की पढ़ाई कर रही है. निकहत ने 13 साल की उम्र में ही बाक्सिंग ग्लव्स थाम लिए थे.

पृष्ठभूमि (Nikhat Zareen boxing journey)

2015 में जब ज़रीन स्नातक की पढ़ाई कर रही थीं तभी वे जालंधर में आयोजित ऑल इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी बॉक्सिंग चैंपियनशिप में “सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज़” बनीं।

ज़रीन अक्सर मुक्केबाज़ मैरी कॉम को अपनी प्रेरणा बताती है। 2009 में ज़रीन को द्रोणाचार्य पुरस्कार प्राप्त आईवी राव से प्रशिक्षण लेने के लिए उनके मां-बाप ने विशाखापत्तनम स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण साई में भर्ती कराया। एक साल बाद ही 2010 में उन्हें इरोड नेशनल में गोल्डन बेस्ट बॉक्सर घोषित किया गया।

जब निकहत ने टोक्यो ओलंपिक के लिए ट्रायल की मांग की थी, तब मैरीकॉम ने प्रेस के सामने पूछा था, ‘निकहत जरीन कौन है?’ अब वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीतने के बाद जरीन ने उन्हें जवाब दिया है. बताया है कि निकहत वर्ल्ड चैम्पियन है. मेडल जीतने के बाद निकहत ने प्रेस से पूछा- क्या मेरा नाम ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है?

निकहत ने करियर का पहला मेडल 2010 में नेशनल सब जूनियर मीट में जीता था. इसके अगले साल ही 15 साल की उम्र में निकहत ने देश को इंटरनेशनल गोल्ड मेडल दिलाया था. उन्होंने तुर्की में 2011 महिला जूनियर और यूथ वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप के फ्लाइवेट में स्वर्ण जीता था.

पूरा नामनिकहत जरीन
आयु25 (2022 तक)
खेल श्रेणीबॉक्सिंग (51 किग्रा)
जन्म तिथि14 जून 1996
गृहनगरनिजामाबाद जिला, तेलंगाना
वजन51 किलो
कोचइमानी चिरंजीवी
माता – पितामोहम्मद जमील अहमद और परवीन सुल्ताना
मातृ संस्थाएवी कॉलेज, हैदराबाद
प्लेयिंग स्थितिफ्लाई-वेट

उपलब्धि (Nikhat Zareen Awards)

ज़रीन ने अपना पहला स्वर्ण पदक 2010 में नेशनल सब जूनियर मीट में जीता। उसके बाद तुर्की में 2011 के महिला जूनियर और यूथ वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उन्हें फ्लाइवेट डिवीज़न में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक मिला। ज़रीन का तुर्की में मुक्केबाज़ उलकू डेमीर से मुक़ाबला था, जिसे उन्होंने 27:19 स्कोर के साथ तीन राउंड के बाद ही जीत लिया।

हालाँकि, वह 2013 में बुल्गारिया के महिला जूनियर और युवा विश्व मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप में इतिहास को दोहरा नहीं सकीं और रजत पदक ही जीतीं। फिर 2014 में ज़रीन ने 51 किलो वर्ग में रूस की पल्टसेवा एकातेरिना को हराते हुए सर्बिया के नोवी सैड में आयोजित तीसरे नेशन्स कप इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक हासिल किया।

2015 में ज़रीन ने असम में 16वीं सीनियर वूमेन नेशनल बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। इसके कुछ साल बाद बैंकॉक में आयोजित थाइलैंड ओपन इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट 2019 में रजत जीता।

2019 में बुल्गारिया की राजधानी सोफिया में आयोजित स्ट्रैंड्जा मेमोरियल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में ज़रीन ने 51 किलोग्राम वर्ग में फिलिपीन की आयरिश मैग्नो को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसी साल जूनियर नैशनल मुक़ाबलों में ज़रीन ने गोल्ड जीता और ‘बेस्ट बॉक्सर’ भी घोषित की गईं।

Boxer Nikhat Zareen

विवाद (Controversy with mary kom)

भारतीय बॉक्सिंग फेडरेशन ने मैरीकॉम को टोक्यो ओलंपिक में बगैर ट्रायल के 51 किग्रा कैटेगरी के लिए सेलेक्ट किया था. तब के चेयरमैन राजेश भंडारी ने कहा था कि निकहत को भविष्य के लिए सेव कर रहे हैं. ऐसे में निकहत ने इसके खिलाफ आवाज उठाते हुए खेल मंत्री किरण रिजिजू को पत्र लिखा था.

ज़रीन ने मैरी कॉम के साथ ट्रायल करवाने की माँग यह कहते हुए की कि उन्हें भी ओलंपिक क्वालिफायर में हिस्सा लेने का मौका मिलना चाहिए। उनकी इस माँग पर मुक्केबाज़ी महासंघ ने मैरी कॉम के लिए भी ट्रायल को ज़रूरी बना दिया और निखत और मैरी के बीच ट्रायल करवाया। दोनों के बीच ट्रायल एकतरफा रहा और मैरी ने आसानी से निखत ज़रीन को 9-1 से हराते हुए क्वालीफायर्स में जगह बना ली। इन दोनों बॉक्सर के बीच टशन इतना था कि जीत के बाद मैरीकॉम ने निकहत से हाथ भी नहीं मिलाया था.

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