समय से पहले पैदा हुए शिशु के लिए रखें इन 7 बातों का ध्यान

जो बच्चे गर्भावस्था के 37 हफ़्ते पूरे करने से पहले ही पैदा हो जाते हैं उसे समय से पहले जन्म (प्रीमैच्योर बर्थ) कहा जाता है। शायद आपको पता होगा कि जो बच्चे पूरा समय माँ के पेट में रह कर पैदा होते हैं वह बच्चे ज्यादा हैल्दी होते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि शिशु के अंग और अधिक परिपक्व होंगे, उसके फेफड़े अच्छी तरह से सांस ले सकेंगे। लेकिन, जो बच्चे समय से पहले पैदा होते हैं उनमें बहुत ही स्वास्थ्य समस्याएं देखने को मिलती हैं। Premature Baby Care Tips

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प्रीमैच्योर बर्थ के कारण :

बच्चे प्रीमैच्योर्ड क्यों पैदा होते हैं, इस बात पर अभी तक कोई स्पष्ट राय नहीं है. हालांकि डॉक्टरों का मानना है कि महिलाओं की सेहत की गर्भावस्था पर ज़्यादा असर पड़ता है. अमूमन अगर कोई अनहोनी न हो तो स्वस्थ महिलाओं में गर्भावस्था पूरे नौ महीने चलने की संभावना ज़्यादा रहती है, जबकि बीमार और शारीरिक रूप से कमज़ोर महिलाओं की डिलीवरी प्रीमैच्योर होने की संभावना ज़्यादा रहती है. हालांकि यह बात तो डॉक्टर भी पूरे विश्‍वास के साथ नहीं बता सकते कि कौन से बच्चे समय से जन्म लेंगे और कौन बच्चे समय से पहले जन्म लेंगे. कहा जाता है कि ऐसे बहुत से चिकित्सकीय एवं सामाजिक कारण हैं, जिनकी वजह से समय से पहले प्रसव और जन्म की संभावना अधिक बढ़ जाती है.

Premature Baby Care Tips

ऐसे में, यदि कोई बच्चा समय से पहले पैदा होता है तब उसमें गहन देखभाल की जरूरत होती है। इसके साथ ही कुछ ऐसी बातें हैं जिनका ध्यान अच्छे से रखा जाना चाहिए, जो निचे बताए जा रहे हैं-

संक्रमण से बचा कर रखें :

समय पूर्व जन्मे बच्चे में गंभीर जटिलताएं जल्दी विकसित हो जाती हैं जैसे कि संक्रमण के रूप में। ऐसे में, इन दिनों अपने बच्चे के आस-पास की जगहों को अच्छे से साफ-सुथरा कर के रखें। साथ ही किसी भी व्यक्ति को उसके कमरे में जाने की इजाजत न दें खासकर जिनको सर्दी, खांसी या फिर वायरल हुआ हो। क्योंकि, इनका संक्रमण बच्चे को भी आसानी से संक्रमित कर सकता है।

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स्तनपान :

मां का दूध अमृत के समान होता है, ये शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। और हर मां को एक साल तक अपने शिशु को स्तनपान कराना चाहिये। लेकिन हाल में हुए शोध बताते हैं कि समयपूर्व जन्म लेने वाले (प्री-मेच्योर) बच्चों के लिए मां का दूध और भी फायदेमंद अधिक होता है।

धूम्रपान वाली जगहों में न जाएँ :

अपने नवजात शिशु को भूलकर भी धूम्रपान वाली जगहों पर न लेकर जाएँ। क्योंकि, इससे शिशु को साँस संबंधी समस्या हो सकती है।

अचानक शिशु मृत्यु सिंड्रोम से बचाव :

ऐसा अधिकांशत: शिशु के जन्म के पहले तीन महीनों में होने की संभावना रहती है। हालाँकि, अचानक शिशु मृत्यु सिंड्रोम (सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम, एसआईडीएस) वह स्थिति है, जब किसी बिल्कुल स्वस्थ शिशु की बिना किसी कारण अप्रत्याशित रूप से मौत हो जाए। जैसे कि अत्याधिक गर्मी लगना या फिर चादर, तकिये या किसी अन्य बिस्तर से मुंह या नाक ढक जाना, तो ये अपने हृदय की गति, सांस और तापमान को नियंत्रित नहीं कर पाते, हैं और जिसके कारण उनकी मौत हो जाती है।

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नैपी का प्रयोग करें :

इन दिनों नवजात को डायपर का इस्तेमाल करने से बचें क्योंकि, इससे शिशु को रैशेस, चकत्ते, लाल दाने आदि हो सकते हैं इसलिए सूती के साफ नैपी का प्रयोग करें और गीले नैपी को तुरंत बदलते रहें।

मसाज करें :

तेल की मालिश शिशु के मांशपेशियों की मजबूती के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। ऐसे में, रोजाना शिशु को हल्के हांथों से मसाज दें, इससे त्वचा की नमी बनी रहेगी।

Premature Baby Care Tips

भरपूर नींद लेने दें :

तीन महीने की उम्र में भी आपके शिशु को 24 घंटों की अवधि में करीब 15 घंटों से ज्यादा नींद की आवश्यकता होगी। अगर आपका शिशु अच्छे ढंग से पूरी नींद लेता है तब उसे सोने दें क्योंकि इससे उसके शरीर को ताकत मिलती है।

इन सब के अलावा, अपने शिशु को प्यार से अपनी गोद में लें क्योंकि इसका अहसास शिशु को सबसे अच्छा लगता है। यह भी सच है कि शिशु इस दुनिया में सबसे पहले अपनी माँ को पहचानता है। इसलिए, अपने बेबी को प्यार से गले लगाएं।

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