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हेलो फ्रेंड्स, हिंदू धर्म में मकर संक्रांति पर्व का खास महत्व है. सूर्य देव जब धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रांति मनाई जाती है. इस साल मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा. ज्योतिषियों के मुताबिक इस बार मकर संक्रांति का पर्व विशेष रहने वाला है. दरअसल इस दिन कुछ विशेष योग पर्व को खास बना रहे है. जानते हैं कि इस बार की मकर संक्रांति किस प्रकार खास है. Makar Sankranti Khas Yog

मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त :

इस दिन का शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 09 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक है. मकर संक्रांति के दिन दोपहर 01 बजकर 36 मिनट तक शुक्ल योग है, उसके बाद से ब्रह्म योग लग जाएगा.

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मकर संक्रांति के दिन बन रहा है खास संयोग :

ज्योतिष के जानकारों के अनुसार इस साल मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2022) पर शुक्रवार और रोहिणी नक्षत्र का खास संयोग बन रहा है. 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन रोहिणी नक्षत्र शाम 8 बजकर 18 मिनट तक रहेगा. ज्योतिष शास्त्र में रोहिणी नक्षत्र को बेहद शुभ माना गया है. इस दौरान स्नान-दान और पूजा करना शुभ फलदायक होता है. इसके अलावा मकर संक्रांति के दिन आनंदादि और ब्रह्म योग बनने वाला है.

Makar Sankranti Khas Yog
Makar Sankranti Khas Yog

क्या होता है आनंदादि और ब्रह्म योग :

ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक शुभ काम शुरू करने के लिए ब्रह्म योग बहुत शुभ होता है. जबकि आनंदादि योग हर तरह की सुख-सुविधाओं की प्राप्ति के लिए शुभ है. इस शुभ योग में शुरू किए गए किसी कार्य में विघ्न-बाधाएं नहीं आती हैं. इसके अलावा आनंदादि योग कोई भी नया काम शुरू करने के लिए शुभ होता है.

मकर संक्रांति का महत्व :

मकर संक्रांति का खास महत्व है. इस दिन गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियों स्नान और दान करने से मोक्ष मिलता है. मकर संक्रांति पर्व के दिन तिल-गुड़ और खिचड़ी खाना शुभ होता है. इसके अलावा चावल, दाल और खिचड़ी का दान करने से पुण्य मिलता है. मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की उपासना भी बेहद फलदायी मानी गई है.

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ज्योतिष गणना के अनुसार साल में 12 संक्रांतियां पड़ती हैं, लेकिन इनमें से मकर संक्रांति का विशेष महत्व है. इस दिन सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ उत्तरायण होना शुरू हो जाता है. मकर संक्रांति को लेकर कहा जाता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से सभी कष्टों का निवारण हो जाता है. इसलिए इस दिन दान, जप-तप का विशेष महत्व है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन को दिया गया दान विशेष फल देने वाला होता है. इस दिन व्यक्ति को किसी गृहस्थ ब्राह्मण को भोजन या भोजन सामग्रियों से युक्त तीन पात्र देने चाहिए.

मत्स्य पुराण के 98वें अध्याय के 17 वें भाग से लिया गया यह श्लोक पढ़ना चाहिए-

‘यथा भेदं न पश्यामि शिवविष्णवर्कपद्मजान्।

तथा ममास्तु विश्वात्मा शंकरः शंकरः सदा।।‘

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Nidhi
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